फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan Somwar 2023 Live: सावन का पहला सोमवार आज, जानिए शिवलिंग पर जल और भस्म चढ़ाने के फायदे

Mon, 10 Jul 2023 02:55 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Somwar 2023 Live Updates in Hindi: आज सावन महीने का पहला सोमवार है। सावन का महीना और इसमें पड़ने वाले हर एक सोमवार का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में सोमवार का व्रत रखना और शिवजी की विशेष पूजा और अभिषेक करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। इस बार सावन के महीने में कुल 8 सोमवार व्रत रखे जाएंगे। सावन का यह महीना 31 अगस्त तक रहेगा। 
 
विज्ञापन
sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंदू पंचांग के अनुसार इस समय सावन का महीना चल रहा है और आज सावन का पहला सोमवार है। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रोचार किया जाता है। इस वर्ष सावन का महीना एक बजाय दो महीनों होगा जिसमें 58 दिनों तक शिव उपासना की जा सकती है। इस वर्ष सावन के महीने में कुल 8 सोमवार व्रत रखे जाएंगे। सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का दिन बहुत ही खास माना जाता है क्योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि सोमवार का व्रत रखने से सभी तरह की मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है। सावन सोमवार व्रत बहुत फलदायी और भगवान शिवजी की कृपा पाने के सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।
विज्ञापन

साल 2023 का पहला सावन सोमवार आज

आज सावन महीने का पहला सोमवार है। सावन सोमवार व्रत रखने से भगवान भोलेनाथ बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आज सुबह से शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है और हर कोई भगवान शिव को एक लोटा जल और एक बेलपत्र अर्पित करना चाहता है। 

People Born in Sawan: सावन में जन्मे लोगों पर होती है शिव जी कृपा, जीवन में करते हैं खूब तरक्की 
 

आज पहले सावन सोमवार पर भोलेनाथ को क्या चढ़ाएं

फूल, पंच फल, पंच मेवा, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री जरूर अर्पित करना चाहिए।

Sawan 2023: आज सावन के पहले सोमवार पर पंचक का साया

4 जुलाई से सावन का पवित्र महीना जारी है और आज सावन का पहला सोमवार है। शिव भक्तों के लिए सावन के महीने का सोमवार विशेष महत्व रखता है क्योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे उपयुक्त दिन होता है। आज सावन के पहले सोमवार व्रत पर पंचक भी लग रहा है। पंचक की शुरुआत 6 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से हो गई थी और आज यानी 10 जुलाई को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस तरह से सावन के पहले सोमवार पर पंचक का साया रहेगा।

Raksha Bandhan 2023: इस साल 2 दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानिए भाई को राखी बांधने की सही तिथि और शुभ मुहूर्त 

सावन सोमवार पूजा विधि

Sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
- सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नानादि करके साफ कपड़े पहन लें।
- इसके बाद सूर्यदेव को अर्ध्य देते हुए शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
- शिवजी का जलाभिषेक करने के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही,शहद आदि चढ़ाएं।
- इसके बाद शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं।
- पूजा सामग्री अर्पित करने के बाद सावन सोमवार व्रत की कथा सुने।
- अंत में शिव चालीसा का पाठ, आरती और मंत्रों का जाप करें और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें। 

जानिए सावन सोमवार व्रत का महत्व

Sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में जो भी भक्त भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा-उपासना करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना जरूर पूरी होती है। सावन माह में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस कारण से सोमवार का व्रत रखा जाता है। सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव के साथ चंद्रदेव और शनिदेव दोनों की ही कृपा मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में शनिदोष या सर्पदोष होता है उनके लिए सोमवार का व्रत करना जरूरी होता है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के फायदे

सावन में शिव उपासना करना बहुत ही कल्याणकारी माना गया हैं क्योंकि सावन में भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और सभी तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कई लाभ होते हैं। जल की धारा भोलेनाथ को अतिप्रिय है। ज्वर में जो मनुष्य प्रलाप करने लगता है,उसकी शांति के लिए जलधारा शुभकारक बताई गई है। इसके आलावा जल से अभिषेक करने पर मनुष्य को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

इस वर्ष सावन महीने में 8 सोमवार कब-कब

sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
सावन सोमवार 2023
सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार 24 जुलाई
सावन का चौथा सोमवार 31 जुलाई
सावन का पांचवा सोमवार 07 अगस्त
सावन का छठा सोमवार 14 अगस्त
सावन का सातवां सोमवार 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार 28 अगस्त

भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें

sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्त सावन के महीने में शिवलिंग पर तरह-तरह की सामग्री अर्पित करके शिवजी की अनुकम्पा पाते हैं।
 
भगवान शिव की 10 प्रिय चीजें और इसके लाभ
गंगाजल शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करने पर सुख-समृद्धि आती है।
केसर शिवलिंग पर केसर से अभिषेक करने पर शिवकृपा की प्राप्ति होती है।
गन्ने का रस आर्थिक परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए गन्ने के रस से करें अभिषेक 
इत्र मानसिक तनाव दूर करने के लिए इत्र से करें शिवजी का अभिषेक
दूध दूध चढ़ाने से संतान की प्राप्ति होती है।
दही शिवलिंग पर दही से कार्यों में बाधाएं दूर होती हैं।
घी अच्छी सेहत के लिए सावन के महीने में करें घी से भोलेनाथ का अभिषेक
चंदन सुख और शांति के लिए शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं
शहद समाज में मान-सम्मान के लिए शहद से करें शिवलिंग का अभिषेक
भांग कष्टों और बीमारियों से बचने के लिए भांग करें अर्पित

इस वर्ष सावन में 8 सोमवार और 4 प्रदोष व्रत

सावन भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का महीना महीना होता है। इस बार सावन का महीना 58 दिनों तक रहेगा। ऐसे में 8 सावन सोमवार और 4 प्रदोष व्रत के साथ सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। सावन के आखिरी सोमवार व्रत और प्रदोष का दुर्लभ संयोग भी बनेगा।

शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं बेलपत्र

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना बहुत ही शुभ फलकारक होता है। दरअसल बेलपत्र स्वयं शिवजी के त्रिनेत्र का ही स्वरूप है क्योंकि भोलेभंडारी ने स्वयं ही कहा कि मेरे बाएं नेत्र में चंद्रमा, दाएं नेत्र में सूर्य और बीच में अग्नि का वास होता है। इस तरह से देख जाए तो शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिवजी के साथ-साथ सूर्य, चंद्रमा और अग्नि तीनों की एक साथ पूजा होती है। इसके अलावा एक मत यह भी है कि बिल्वपत्र की तीन पत्तियों को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा कई लोग इसे त्रिशूल और भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक भी मानते हैं। 

सावन में क्यों होती है शिवजी की विशेष पूजा-उपासना

sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
प्रचलित मत के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है क्योंकि इसी माह में भगवान शिव ने मां पार्वती की अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा भगवान विष्णु के चार महीने की योग निद्रा में होने की वजह से समस्त सृष्टि का भार और संचालन भगवान शिव के कंधे पर होता है इसलिए सावन का विशेष महत्व होता है और शिवजी की उपासना की जाती है। वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार मरकंडू मुनि के पुत्र मारकण्डेय ने दीर्धायु की कामना के लिए श्रावण माह में शिवजी की कठिन तपस्या करके उनको प्रसन्न किया था और अमरता को प्राप्त हुए थे। इसी कारण सावन के महीने में लंबी आयु पाने के लिए, बीमारियों से मुक्ति के लिए और अकाल मृत्यु से बचने के लिए सावन में शिवजी की विशेष पूजा उपासना की जाती है। 

शिवजी को कैसे अर्पित करना चाहिए बेलपत्र

Sawan Month and Belpatra - फोटो : amar ujala
  • भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाएं।
  • बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं एवं मध्य वाली पत्ती को पकड़कर शिवजी को अर्पित करें।
  • शिव जी को कभी भी सिर्फ बिल्वपत्र अर्पण नहीं करें,बेलपत्र के साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
  • बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है। कटी-फटी पत्तियां कभी न चढ़ाएं।
  • कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लिया जाता है।
  • बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है।

Shiv Aarti: सावन में पूजा- उपासना करते समय शिवजी की आरती जरूर करें

शिवजी की आरती Shiv Aarti In Hindi


ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

शिवलिंग पर क्यों करते हैं जलाभिषेक

आज सावन का पहला सोमवार है और शिव मंदिरों में सुबह से ही भारी भीड़ है। शिवलिंग पर शिवभक्त जलाभिषेक करते हुए शिव की कृपा की कामना करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि शिवलिंग पर जलाभिषेक क्यों किया जाता है। दरअसल सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था जिसमें विष का घड़ा निकला था और इस विष के घड़े को न ही देवता लेना चाह रहे थे और न ही दानव। ऐसे में भगवान शिव ने इस विष का पान करके उसे अपने गले में धारण करके सृष्टि को बचाया था। विष के प्रभाव से भगवान शिव के शरीर का ताप बहुत ज्यादा हो गया था तब शिवजी के शरीर के ताप को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया था। इस कारण से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा है। 

शिवजी को क्यों चढ़ाया जाता है भस्म

सभी देवी-देवताओं में शिव जल्द प्रसन्न होने वाले देवता होते हैं। अगर सच्चे मन से इन्हें मात्र एक लोटा जल अर्पित कर दें तो यह भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा कर देते हैं। शिवजी का पूजा में भस्म एक बहुत ही जरूरी पूजा सामग्री मानी जाती है। शिवपुराण के अनुसार बिना भस्म चढ़ाएं शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शिवजी को भस्म चढ़ाने के पीछे पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने अपने राजमहल में एक यज्ञ का आयोजन किया था जहां पर उन्होंने देवी सती के सामने उनके पतिदेव भोलेनाथ का अपमान किया था। शिवजी के अपमान को सुनकर देवी सती ने हवन कुंड में जलकर अपने प्राण त्याग दिए थे। जब यह बात शिव जी को मालूम हुई तब क्रोधित होकर उन्होंने सती की चिता की भस्म को अपने पूरे शरीर में लपेट कर तांडव किया था। तभी से शिव जी को भस्म लगाने की परंपरा शुरू हुई। 

मेष, वृषभ और मिथुन राशि वाले आज सावन सोमवार को ऐसे करें पूजा

मेष- जल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। बेलपत्र पर सफ़ेद चंदन से राम नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

वृष- शिवलिंग पर दूध-दही से अभिषेक और हरश्रृंगार के फूलों की माला चढ़ाकर सफ़ेद चंदन से त्रिपुण्ड लगाएं।

मिथुन- इस राशि वाले गन्ने के रस से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे तो विशेष लाभ मिलेगा। इसके अलावा भगवान शिव का शहद से रुद्राभिषेक करें।

कर्क, सिंह और कन्या राशि के लोग शिवजी को ये चीजें चढ़ाएं

कर्क- इस दिन भगवान शिव को दूध,दही,घी,गंगाजल और मिश्री से अभिषेक करें।शिव मंदिर में सफ़ेद चीजों का दान करें।

सिंह- सिंह राशि वालों को जल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ रहेगा। भोलेनाथ का शुद्ध देसी घी से स्न्नान कराना भी फलदाई है।

कन्या- इस राशि वालों को शुभ फलों की प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। दूध,शहद,बेलपत्र,मदार के पुष्प,धतूरा और भांग अर्पित करना भी शुभ रहेगा।  

 

तुला, वृश्चिक और धनु राशि के लोग शिवजी को अर्पित करें ये चीजें

तुला- इस राशि के जातक दही, सुगंधित इत्र और गन्ने के रस से शिवलिंग को स्नान कराएंगे तो उनकी कामना भोलेनाथ शीघ्र पूरी करेंगे।

वृश्चिक- इस राशि वाले पंचामृत से भोलेनाथ का अभिषेक करें। 

धनु- गाय के दूध में केसर और गुड़ मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। अष्टगंध चन्दन लगाकर पीले पुष्प अर्पित करें।  
 

मकर, कुंभ और मीन राशि वाले ऐसे करें शिव आराधना

मकर-  आज सावन सोमवार पर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें।
 
कुंभ- इस राशि वालों के लिए तिल के तेल से भगवान शिव का अभिषेक शुभ फलदायी साबित होगा।

मीन- दूध में केसर मिलाकर भगवान का अभिषेक करें उसके बाद पीले चंदन का तिलक लगाकर पीले पुष्प और फल अर्पित करें।

सावन सोमवार 2023 का पूजा शुभ मुहूर्त

आज सावन के पहले सोमवार पर बहुत ही अच्छा शुभ योग बना हुआ है। आज रेवती नक्षत्र और सुकर्मा योग में शिव आराधना की जाएगी। वहीं आज के अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक है। वहीं अगर आप सावन के पहले सोमवार में प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने चाह रहे हैं तो शाम के पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। 
 

सावन सोमवार पर शिव मंत्र का जाप करना लाभकारी

- ऊं नम: शिवाय:
- ऊं शंकराय नम:
- ऊं महेश्वराय  नम:
- ऊं  रुद्राय नम:

महामृत्युंजय मंत्र
 “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें

sawan 2023 - फोटो : अमर उजाला
शिवपुराण के अनुसार कभी भी भगवान शिव को ये चीजें नहीं चढ़ाना चाहिए।
- केतकी का फूल
- तुलसी दल
- हल्दी
- शंख से जल
- कुमकुम
- टूटे हुए चावल

सावन महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार

13 जुलाई को कामिका एकादशी, 15 जुलाई को मासिक शिवरात्रि, 17 जुलाई को श्रावण माह की अमावस्या, 19 अगस्त को हरियाली तीज, 21 अगस्त नाग पंचमी, 30 अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा।
 

सावन के महीने जरूर करें ये उपाय

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का होता है। शास्त्रों में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। सावन महीने में हर रोज 11 व 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। इससे सभी तरह की मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं।

अधिकमास के कारण दो महीना चलेगा सावन

इस बार सावन का महीना 58 दिनों तक चलेगा। सावन के महीने की शुरुआत 4 जुलाई से हो गई जोकि 31 अगस्त तक रहेगा। सावन के महीने में अधिकमास पड़ने के कारण इस बार सावन का महीना दो माह तक चलेगा। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा उपासना करना बहुत ही फलदायी रहता है। 

सावन में शिव उपासना के लाभ

आज सावन का पहला सोमवार है। शिवपुराण के अनुसार सावन के महीने में सोमवार व्रत रखे और पूजा-उपासना करने पर सभी तरह की परेशानियां जल्द ही दूर होने लगती है और परिवार में सुख-शांति और वैभव की प्राप्ति होती है।  सावन में महाकाल की पूजा से व्यक्ति को दुर्घटना और अकाल मृत्यु नहीं होती है। 

सावन सोमवार 2023 की तिथियां

आज सावन का पहला सोमवार है और इस बार अधिकमास के कारण कुल 8 सावन सोमवार का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं कब-कब रहेगा सावन सोमवार। 

सावन का पहला सोमवार- 10 जुलाई
सावन का दूसरा सोमवार- 17 जुलाई
सावन का तीसरा सोमवार-24 जुलाई
सावन का चौथा सोमवार- 31 जुलाई
सावन का पांचवा सोमवार- 7 अगस्त
सावन का छठा सोमवार- 14 अगस्त
सावन का सातवां सोमवार- 21 अगस्त
सावन का आठवां सोमवार- 28 अगस्त

क्यों रखा जाता है सावन सोमवार व्रत

आज सावन का पहला सोमवार है। हिंदू धर्म में सावन सोमवार का व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में विवाह योग नहीं आता है या फिर विवाह होने में तरह की तरह की परेशानियां आती हैं उनके लिए सावन सोमवार का व्रत अवश्य रखना चाहिए। इसके अलावा लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिे सावन सोमवार का व्रत रखना बहुत ही फलदायी होता है। 
 
विज्ञापन

श्रावण सोमवार पर पूजा के दौरान जरूर करें इस मंत्र का जाप

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना और साधना के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। इसके साथ सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार के दिन पूजा के दौरान ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप अवश्य करें। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें