Sawan Somwar Date 2026: कब-कब है सावन सोमवार
सावन का पहला सोमवार- 3 अगस्त
सावन का दूसरा सोमवार- 10 अगस्त
सावन का तीसरा सोमवार- 17 अगस्त
सावन का चौथा सोमावार- 24 अगस्त
Sawan 2026: सावन में ऐसे करें भोले भंडारी को प्रसन्न
सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय होता है। श्रावण में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्यंजय मंत्र का जाप करने जीवन में आने वाली सभी तरह की बाधाएं जैसे रोग, शोक, कर्ज आदि से मुक्ति मिल जाती है। सावन में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, रुद्राष्टक का पाठ करने से भगवान शिव प्रस्नन होते हैं और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
Shiv Chalisa Path: सावन में शिव चालीसा पाठ
आज से सावन का पवित्र महीना आरंभ हो रहा है। सावन में भगवान शिव की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है। इस महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं ऐसे में शिवजी को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक और शिव चालीसा का पाठ करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है।
।।दोहा।।
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहं करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शंभु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमंत ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
Sawan 2026: उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में सावन के पहले दिन भस्म आरती का भव्य नजारा
Sawan 2026: उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में सावन के पहले दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक
Sawan 2026: प्रयागराज के पौराणिक मनकामेश्वर मंदिर में सावन के पहले दिन की पूजा में उमड़ी भीड़
Sawan 2026: काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन पूजा के लिए भक्तों की भीड़
Sawan 2026 Puja Vidhi: सावन में कैसे करें भोलेनाथ की पूजा
आज से भगवान शिव का प्रिय महीना श्रावण शुरू हो चुका है। धार्मिक मान्यातओं के अनुसार सावन में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। ऐसे में सावन में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए विधिवत पूजा करने का विधान है। सावन में हर दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके पूजा का संकल्प लेते हुए शिवमंदिर जाकर शिवजी के दर्शन करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हुए विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करें। जलाभिषेक करने के अलावा शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने का रस अर्पित करें। पूजा के दौरान लगातार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद शिवलिंग पर फूल, माला, शमी पत्र चढ़ाएं और अंत में शिव चालीसा का पाठ और आरती करें।
Sawan 2026 Wishes in Hindi: सावन माह और शुभकामना संदेश
सावन का पवित्र महीना आज से आरंभ हो गया है। सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान होता है। सावन का महीना शुरू होने पर अपनों को दें शुभकामना संदेश...
भोलेनाथ की बनी रहे आप पर छाया
पलट दे जो आपकी किस्मत की काया
मिले आपको वो सब अपनी जिंदगी में
जो कभी किसी ने नहीं पाया
सावन माह की हार्दिक शुभकामनाएं
कर्ता करे ना कर सके,
शिव करे सो होय,
तीन लोक नौ खंड में,
महाकाल से बड़ा ना कोय
सावन की हार्दिक शुभकामनाएं
सावन की फुहार है, महादेव का प्यार है,
हर दिल में ओम-ओम का जाप है।
भोलेनाथ की कृपा आप पर बनी रहे,
यही हमारी शुभकामनाओं का उपहार है।
त्रिशूल की शक्ति, डमरू की तान,
महादेव करें सबका कल्याण।
सावन के इस पावन पर्व पर,
खुशियों से भर जाए आपका जहान।
हर-हर महादेव
Sawan Ka Mahina: कब तक रहेगा सावन ?
गुरुवार, 30 जुलाई से श्रावण प्रतिपदा तिथि से सावन का महीना शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्तवी की पूजा के लिए समर्पित होता है। सावन का समापन पूर्णिमा तिथि पर होता है ऐसे में सावन 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक चलेगा।
Sawan 2026 Significance: क्या है सावन माह का महत्व
हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व होता है। यह महीना भगवान शिव को अतिप्रिय होता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि श्रावण माह में स्नान, दान और जप करने से भगवान भोलेनाथ सभी तरह के दुखों का नाश करते हैं और हर एक मनोकामना पूरी करते हैं। इस माह आने वाले सोमवार और शिवरात्रि पर व्रत रखने से सभी तरह की इच्छाएं पूरी होती है। इसके वैवाहिक सुख और संतान सुख और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
Sawan Importance 2026: सावन का महीना भगवान शिव को क्यों है प्रिय ?
आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है जो 28 अगस्त तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप पाने के लिए कठोर तप शुरू किया था और भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पत्नी के रूप में स्वीकार्य किया। सावन में देवी पार्वती की मनोकामना पूरी हुई थी। इस वजह से भगवान शिव को यह महीना प्रिय होता है।
सावन 2026 के पहले दिन बना शुभ संयोग
सावन महीना शिव भक्ति के लिए सबसे अच्छा माना गया है क्योंकि इस माह भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर एक मनोकामना पूरी करते हैं। आज सावन के पहले दिन कई तरह के शुभ संयोगों का निर्माण हुआ है। सावन के पहले दिन श्रवण नक्षत्र का संयोग, आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजजोग, हंस राजयोग और गुरु आदित्य राजयोग बन हुआ है। ऐसे में इस शुभ संयोग में महादेव और माता पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी है।
शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता बेलपत्र ?
भगवान शिव की पूजा बिना जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित किए पूरी नहीं मानी जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन नेत्र हैं। इसके अलावा बेलपत्र की तीन जुड़ी पत्तियां त्रिदेव ब्रह्राा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती है। वहीं इसके अलावा बेल पत्र की तीन पत्तियां सत, रज और तमोगुण का प्रतीक है। वहीं बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है और इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से शिवजी को शीतलता प्राप्ति होती है। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार बेल के पेड़ में माता पार्वती का वास भी भी माना जाता है। इसलिए भगवान को शिव बेलपत्र अत्याधिक प्रिय होता है।
Sawan 2026: सावन में क्या करें
-सावन के महीने में हर दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र करें अर्पित।
- सावन में भगवान शिव की पूजा के दौरान लगातार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
- सावन में अपने खान-पान पर संयम रखें और पूरी तरह से सात्विक रहें।
- सावन के महीने में जरूरतमंदों को भोजन, अन्न और वस्त्र का दान करें।
मेष और वृश्चिक राशि वाले सावन में ऐसे करें शिव पूजा
मेष और वृश्चिक- ज्योतिष में मेष और वृश्चिक राशि वालों के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं। मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग के रूप में करने का विधान है। ऐसे में इस राशि के लोगों को सावन के महीने में शिवजी का दही से अभिषेक करें। साथ ही शिवलिंग पर लाल गुलाब और मसूर की दाल अर्पित करें।
Sawan 2026: सावन में इन चीजों को करने से करें परहेज
- सावन के पवित्र महीने में मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और तले-भुनी चीजों से परहेज करें।
- सावन महीने के दौरान बाल, नाखून और दाढ़ी काटने से परहेज करें।
- सावन में दूध पीने से बचें बल्कि कच्चे दूध से जलाभिषेक करें।
- सावन में वाद-विवाद से बचें और किसी से कड़वी बातें न बोलें।
Sawan Shivrati 2026: कब है सावन शिवरात्रि ?
सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है। सावन माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। मासिक शिवरात्रि का पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। ऐसे में सावन के महीने मासिक शिवरात्रि का महत्व काफी बढ़ जाता है। मासिक शिवरात्रि में शिवजी की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत और शिवजी के मंत्रों का जाप करना कई गुना अधिक फलदायी हो जाता है। इस वर्ष सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी।
Sawan Upay 2026: शिवलिंग पर काले तिल से करें अभिषेक
सावन में शिवजी की पूजा और अभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा सावन में ग्रह दोषों से छुटकारा पाने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। जिन लोगों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रकोप है और परेशान हैं, उनको सावन के पहले दिन शिव मंदिर में जाकर जल में काला तिल डालकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शनिदोष से मुक्ति मिलेगी। साथ ही सभी तरह की मनोकामनाएं भी पूरी होंगी।
Sawan Somwar 2026 Kab Se Hai: कब है सावन का पहला सोमवार
आज से सावन का महीना शुरू हो गया। सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में शिवजी की पूजा और व्रत रखने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। सावन में पड़ने वाले सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिवभक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर शिवलिंग की विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं। इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। ऐसे में सावन सोमवार जलाभिषेक करने और बेलपत्र व धतूरा चढ़ाना बहुत ही लाभकारी रहता है।
Sawan Ki Shivratri 2026: कब है सावन की शिवरात्रि और महत्व
सावन के महीने शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। सावन शिवरात्रि का पर्व कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार इस बार चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 04 बजकर 53 मिनट से होगी और इसका समापन 12 अगस्त को देर रात 01 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन रात्रि के चारों पहर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है।
Sawan Wishes Hindi: सावन महीने की शुभकामना संदेश
आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो गया है। जो 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में सावन के महीने के विशेष महत्व होता है, जिसमें शिवजी और माता पार्वती की पूजा करने का विधान होता है। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे जो 3 , 10, 17 और 24 अगस्त को होंगे। सावन के शुरू होने पर लोग अपने दोस्तों और सगे-संबंधियों का शुभकामना संदेश भेजते हैं। आइए पढ़ते हैं सावन महीने की शुभकामना संदेश।
सावन शुभकामना संदेश
अद्भुत भोले तेरी माया,
अमरनाथ में डेरा जमाया
नीलकंठ में तेरा साया,
तू ही मेरे दिल में समाया
सावन की हार्दिक शुभकामनाएं
ना किसी अभाव में जीते हैं,
ना किसी के प्रभाव में जीते हैं
भगवान शिव के भक्त हैं हम,
सिर्फ अपने स्वभाव में जीते हैं
सावन की हार्दिक शुभकामनाएं
भगवान शिव की भक्ति में है शक्ति
जो दिल से करता है पूजा
उसकी पूरी होती है हर मनोकामना
भगवान शिव की बरसती असीम कृपा
सावन की हार्दिक शुभकामनाएं 2026
शिव की जटाओं जैसी शीतलता मिले,
मन को हर पल सुकून की राहत मिले
दूर हों जीवन के सारे गम और अंधेरे,
महादेव करें खुशियों से उजाले घनेरे
सावन की शुभकामनाएं
शिव की शक्ति, शिव की भक्ति,
सावन के महीने में मिले आपको हर खुशी और समृद्धि
सावन के पावन महीने की हार्दिक शुभकामनाएं
हर हर महादेव
Sawan Puja Vidhi 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें ?
सावन का महीना आज से शुरू हो चुका है और इसके साथ ही शिव मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है और इस माह में शिवजी की पूजा करने से सभी भोलेभंडारी सभी तरह का मनोकामनाएं पूरी होती है। सावन के महीने में शिवलिंग का विशेष रूप से अभिषेक और पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं सावन में शिवलिंग के पूजा कैसे करें।
- सावन में शिवजी की पूजा और दर्शन करने के लिए सुबह का समय अच्छा होगा लेकिन किसी कारण से अगर आपके समय का अभाव है तो शाम के समय भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं।
- शिवजी की पूजा में तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
- इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- पूजा के दौरान लगातार मन में ऊं नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- शिवजी की पूजा बेलपत्र, चंदन, भस्म, धतूरा, शमी पत्र, इत्र, आंकड़े और फूल अर्पित करें।
- पूजन सामग्री के दौरान भोग लगाएं और धूप और दीपक जलाएं।
- शिवजी का आरती करें और पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगे।
Shiv Aarti Om Jai Shiv Omkara: सावन में शिव आरती का महत्व... ऊं जय शिव ओंकारा...
भगवान शिव का प्रिय महीना सावन आज से आरंभ हो चुका है। हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व होता है और यह महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। सावन में शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व होता है। सावन माह के दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने का खास महत्व होता है। इसके अलावा शिवजी की पूजा में मंत्र, चालीसा का पाठ और अंत में आरती करने के खास महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार पूजा के अंत में आरती करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। आइए पढ़ते हैं भगवान शिव की संपूर्ण आरती.... ऊं जय शिव ओंकारा...
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
Sawan 2026: सावन महीने में शिवमंत्रों का जाप का महत्व
सावन का महीना शिव आराधना और पूजा फल की प्राप्ति के लिए बहुत ही खास होता है। सावन में शिव मंत्रों का जाप करना बहुत ही फलदायी होता है। जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति के लिए शिवजी के अघोर मंत्र का जाप सावन में हर दिन करना चाहिए।
सुख और वैभव की प्राप्ति के लिए मंत्र
ऊं अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्य:। सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्य:।।
Sawan Shiv Mantra 2026: सावन में मनचाहा जीवनसाथी के लिए मंत्र
सावन में कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की मनोकामना के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं। शास्त्रों में कहा गया है अगर सावन के महीने में रोजाना 11 बार इस मंत्र का जाप करें तो मनचाहा वर प्राप्त होता है।
मंत्र
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।
चिदाकाश माकाश वासं भजेहं।।
Sawan Somwar 2026 Kab Hai: सावन सोमवार और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व
सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है। यह महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है और इसमें शिवजी की जो भी उपासना करता है उसकी हर एक मनोकामना जल्द से जल्द पूरी होती है। सावन महीने में आने वाले हर सोमवार और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार पर शिवभक्ति शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा अर्चना करते हैं। इस दिन कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इसके कांवड यात्रा में पवित्र नदियों से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत रखने से विशेष कृपा मिलती है। इस वर्ष सावन महीने में चार सोमवार व्रत पड़ेंगे।
Sawan 2026: 30 दिनों का सावन, 4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत
सावन का पवित्र महीना आज से शुरू हो गया है, जो 28 अगस्त तक चलेगा। इस तरह से सावन का महीना इस वर्ष 30 दिनों का होगा। जिसमें 3, 10, 17 और 24 अगस्त को चार सावन सोमवार व्रत रखें जाएंगे। इसके अलावा 4 मंगला गौरी व्रत भी होंगे जो 4, 11, 18 और 25 अगस्त को होगा। वहीं सावन माह में कामिका एकादशी, सावन शिवरात्रि, हलियाली अमावस्या, हरियाली तीज, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी और रक्षाबंधन से जैसे महत्वपूर्ण व्रत आएंगे। वहीं इस सावन दो ग्रहण होंगे, जिसमें 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा।
Sawan 2026: सावन में शिव आराधना करने से मिलता है पुण्य
सावन के महीने में शिव आराधना का विशेष महत्व होता है। शिव पुराण के अनुसार श्रावण में भगवान शिव की पूजा करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और हर तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस महीने "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ तथा बिल्वपत्र, धतूरा, आक, भस्म और शुद्ध जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसे मानसिक शांति, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Sawan Katha 2026: समुद्र मंथन से जुड़ी है श्रावण मास की महिमा
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब कालकूट विष निकला तो उसके प्रभाव से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई। तब भगवान शिव ने समस्त प्राणियों की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर निरंतर जल अर्पित किया। धार्मिक मान्यता है कि तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करने की परंपरा प्रारंभ हुई। इस कारण इस मास में जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है।