फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nirjala Ekadashi 2026 LIVE: निर्जला एकादशी व्रत का पारण कल, जानें पारण समय, महत्व और विधि

Thu, 25 Jun 2026 05:40 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Parana Time Katha in Hindi:  धर्मशास्त्रों और पद्मपुराण में निर्जला एकादशी के व्रत को अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पूरे साल भर में आने वाली सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार किसी भी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करना सबसे उचित माना जाता है। आइए लाइव ब्लॉग में जानते हैं निर्जला एकादशी का  व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त और इसकी संपूर्ण विधि।
विज्ञापन
निर्जला एकादशी 2026 लाइव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आज यानी 25 जून को सबसे कठिन और पुण्दायी एकादशी है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस एकादशी को बेहद पवित्र और सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि सिर्फ इस एक एकादशी का व्रत रखने से ही पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य की प्राप्ति हो जाती है। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दौरान जल ग्रहण करना भी वर्जित माना गया है। पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति इस दिन जल का त्याग करते हुए पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे मेरु पर्वत जितने बड़े पापों से भी छुटकारा मिल जाता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और जप जैसे कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता, बल्कि अक्षय बना रहता है। 

विज्ञापन

निर्जला एकादशी तिथि 

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून, बुधवार, शाम 6:13 बजे
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून, गुरुवार, शाम 8:10 बजे
उदय तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत आय यानी 25 जून, गुरुवार को है। 

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी से क्यों मिलता है साल भर की एकादशियों का फल?

पद्म पुराण में इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा मिलती है। कहा जाता है कि एक बार पांडव पुत्र भीमसेन ने महर्षि वेद व्यास के सामने अपनी एक चिंता रखी। भीम ने बताया कि उनके पेट में वृक नाम की एक अग्नि हमेशा जलती रहती है, जिसकी वजह से उन्हें हर समय तेज भूख का अनुभव होता है। इसी कारण वे जीवन में कभी कोई व्रत नहीं रख पाए। उन्होंने व्यासजी से प्रार्थना की कि उन्हें कोई ऐसा सरल उपाय बताया जाए, जिसे एक बार करने से ही उनका कल्याण हो सके और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हो सके। इस पर वेद व्यास ने भीम को ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि पर जल त्याग कर व्रत रखने की सलाह दी। चूंकि ज्येष्ठ का महीना सबसे अधिक गर्मी वाला होता है, इस दौरान बिना पानी के रहना बेहद मुश्किल काम है, और इसी कठिनाई के चलते इस व्रत को सबसे कठिन एकादशियों में गिना जाता है। व्यासजी ने यह भी कहा कि सिर्फ इस एक एकादशी का व्रत करने से ही साल भर में आने वाली समस्त एकादशियों के व्रत का फल अपने आप प्राप्त हो जाता है। इसी पौराणिक मान्यता के कारण भीम के नाम पर इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर बन रहे हैं ये 4 शुभ संयोग

रवि योग: 25 जून को प्रातः 5:25 बजे से शुरू होकर सायं 4:29 बजे तक यह योग प्रभावी रहेगा।
शिव योग: यह योग 24 जून की प्रातः 10:24 बजे से शुरू होकर 25 जून की प्रातः 10:54 बजे तक रहेगा। 
सिद्ध योग: 25 जून की प्रातः 10:55 बजे से लेकर 26 जून की प्रातः 11:39 बजे तक यह योग बना रहेगा। 
गुरुवार का विशेष योग: इस बार निर्जला एकादशी का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति दोनों को समर्पित माना जाता है। 
 

Nirjala Ekadashi Live: निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त

प्रथम पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:25  से 07:10 बजे तक
द्वितीय पूजा मुहूर्त: प्रातः10:39 से दोपहर 02:09 बजे तक.

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पूजा विधि 

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके उसे तैयार करें।
  • हाथ में जल और पुष्प लेकर निर्जला एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसे फूलों से सजाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
  • श्रीहरि को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र अर्पित करें।
  • श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • कपूर या घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें।
  • पूजा पूर्ण होने पर जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें।
  • पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें और भजन-कीर्तन तथा भगवान के स्मरण में समय बिताएं।
  • सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर पुनः विष्णु पूजा करें।
  • रात्रि में यथाशक्ति जागरण कर भगवान का भजन करें।
  • अगले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बन रहा है महासंयोग! रवि-शिव-सिद्ध सहित 4 योग

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें?

  • निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
  • भगवान को पीले रंग के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
  • चंदन का तिलक लगाकर श्रीहरि की पूजा की जाती है।
  • अक्षत (चावल) अर्पित कर मंगलकामना की जाती है।
  • पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना पुण्यदायी माना जाता है।
  • मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान का भोग लगाया जाता है।
  • पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर आराधना की जाती है।

Nirjala Ekadashi Upay: निर्जला एकादशी पर करें तुलसी से जुड़े खास उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर मंत्र जाप 

  • ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
  • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
  • ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
  • यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
  • शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
  • लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
  • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान का महत्व

निर्जला एकादशी के अवसर पर गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है तथा पापों का क्षय होता है। निर्जला एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की आराधना और गंगा स्नान का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जो श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुंच सकते, वे स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने से भी गंगा स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर क्या दान करें? 

  • जल से भरा मिट्टी का घड़ा
  • खरबूजा, तरबूज और आम जैसे मौसमी फल
  • हाथ का पंखा या छाता
  • सत्तू और चने की दाल

 Ekadashi 2026: गर्भवती महिलाओं के लिए क्या है निर्जला एकादशी व्रत के नियम? जानें पूजा विधि

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी को क्यों कहलाती है भीमसेनी एकादशी ?

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी कहे जाने के पीछे भी एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि पांडव परिवार में माता कुंती, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी, सभी साल भर आने वाली 24 एकादशियों का व्रत बड़ी नियमितता के साथ रखते थे। और वे चाहते थे कि भीमसेन भी इस परंपरा का पालन करें। लेकिन भीम की समस्या यह थी कि वे अपनी तेज भूख पर काबू नहीं रख पाते थे, जिस वजह से महीने में दो बार उपवास करना उनके लिए बेहद कठिन था। अपनी इस उलझन को सुलझाने के लिए भीम महर्षि वेद व्यास के पास पहुंचे। वेद व्यास ने उन्हें सुझाव दिया कि यदि पूरे साल की एकादशियां रख पाना संभव नहीं है, तो वे सिर्फ ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत रख लें, लेकिन इस दौरान कुल्ले के अलावा जल की एक भी बूंद ग्रहण न करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भीम सच्चे मन से इस एक दिन का निर्जला व्रत पूरा कर लें, तो उन्हें साल भर की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाएगा। व्यासजी की इस सलाह को मानकर भीम ने पूरी दृढ़ता से यह व्रत संपन्न किया और इस तरह एक ही दिन में पूरे वर्ष की एकादशियों का फल प्राप्त कर लिया। इसी कथा के चलते इस तिथि को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बन रहा है महासंयोग! रवि-शिव-सिद्ध सहित 4 योग

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पूजा सामग्री 

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • चंदन
  • अक्षत (चावल)
  • रोली
  • धूप
  • दीपक
  • घी
  • कपूर
  • पंचामृत
  • मौसमी फल
  • नारियल
  • मिष्ठान
  • पीले वस्त्र
  • जल से भरा कलश
  • शंख
  • गंगाजल

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर  भूलकर भी न करें ये 5 काम

  • तामसिक भोजन का सेवन न करें 
  • क्रोध और विवाद से बचें 
  • तुलसी के पत्ते न तोड़ें 
  • आलस्य और अधिक नींद से दूर रहें
  • किसी का अपमान न करें 

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने के नियम

सनातन परंपराओं में निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है और तुलसी माता को भी विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी कारण पूजा में चढ़ाने के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही एकत्र कर लेने की परंपरा प्रचलित है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है और इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है। यदि किसी कारणवश एकादशी के दिन तुलसी दल लेना आवश्यक हो जाए, तो पहले तुलसी माता को प्रणाम कर उनसे क्षमा प्रार्थना करने की मान्यता है। मान्यता है कि नियमों का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक की गई विष्णु और तुलसी पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Live: राशि अनुसार करें दान 

  • मेष: सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज)
  • वृषभ: पानी से भरा घड़ा
  • मिथुन: मौसमी फल
  • कर्क: दूध या मिश्री
  • सिंह: तांबे का पात्र या धार्मिक पुस्तकें
  • कन्या: जल से भरा घड़ा और हाथ का पंखा
  • तुला: पीले वस्त्र या अन्न
  • वृश्चिक: सत्तू या गुड़
  • धनु: चने की दाल और पीले फल
  • मकर: उड़द की दाल या छाता
  • कुंभ: पीने का पानी या शरबत
  • मीन: पीले अनाज या केले

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी व्रत नियम 

  • निर्जला एकादशी व्रत में अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखा जाता है।
  • एकादशी तिथि शुरू होने के बाद कुछ भी खाने-पीने से बचना चाहिए।
  • व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर विधि-विधान से करना चाहिए।
  • पारण के समय केवल सात्विक भोजन का सेवन करें।
  • द्वादशी के दिन लहसुन, प्याज, मसूर दाल, मांस और मदिरा का सेवन न करें।
  • व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
  • किसी से विवाद, क्रोध या नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्पित करें ये फूल

 

  • निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • पीले फूल भगवान विष्णु को विशेष प्रिय माने जाते हैं।
  • पूजा में पीला कमल, गेंदा, चंपा, चमेली, गुलाब और पारिजात (हरसिंगार) अर्पित किए जा सकते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष और अनिवार्य महत्व होता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा 24 एकादशी व्रत का फल!

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये अचूक उपाय

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और पीले फल अर्पित करना शुभ माना जाता है और बाद में इन्हें दान कर देना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए, साथ ही ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते न तोड़ें। मुख्य द्वार और घर के ईशान कोण में भी घी का दीपक जलाना चाहिए, जिसमें हल्दी या केसर मिलाना शुभ होता है। यदि कोई व्यक्ति निर्जला व्रत नहीं रख पाता है, तो वह विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकता है। इसके अलावा, इस दिन प्याऊ में पानी की व्यवस्था करना या मटका, शक्कर और खरबूजा दान करना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Live: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए 'निर्जला' व्रत?

धार्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से कुछ लोगों को निर्जला एकादशी का कठोर निर्जल व्रत नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को यह व्रत करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी निर्जल उपवास उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, मधुमेह, ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी यह व्रत नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें समय पर दवा और भोजन की आवश्यकता होती है।
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत में किन परिस्थितियों में पी सकते हैं पानी? जानें व्रत के नियम

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: व्रत न रख पाएं तो अपनाएं ये सरल तरीका

यदि किसी कारणवश आप निर्जला एकादशी का कठिन व्रत यानी पूरी तरह जल त्याग करके व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में आप फलाहारी व्रत का विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें दिन भर फल, जूस और दूध जैसी चीजें ली जा सकती हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान सिर्फ भक्त की सच्ची श्रद्धा और भावना देखते हैं, न कि व्रत की कठोरता को। इसलिए अपनी सेहत को जोखिम में डालकर निर्जल व्रत करना बिल्कुल आवश्यक नहीं है।

Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आयु और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा यह व्रत कई जन्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करने में भी सहायक माना जाता है। इसी वजह से इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करने की सलाह दी जाती है।

Nirjala Ekadashi 2026: पढ़ें विष्णु जी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥


Nirjala Ekadashi 2026: 5 बड़े संयोग में निर्जला एकादशी, पढ़ें विष्णु जी की आरती, चालीसा और मंत्र

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत कथा - फोटो : AI
धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी माता कुंती और उनके चारों भाई नियमित रूप से व्रत, स्नान और दान करते हैं, लेकिन वे स्वयं उपवास नहीं कर पाते। उन्हें चिंता थी कि बिना व्रत किए उन्हें मोक्ष कैसे प्राप्त होगा। भीमसेन ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि उन्हें अत्यधिक भूख लगती है, इसलिए वे उपवास रखने में असमर्थ हैं।

इस पर वेदव्यास जी ने उन्हें समझाया कि यदि वे स्वर्ग और नरक का अंतर जानते हैं, तो उन्हें प्रत्येक माह आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत करना चाहिए। उस दिन अन्न का सेवन न करना ही व्रत का नियम है। लेकिन भीमसेन ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए बिना भोजन के रहना संभव नहीं है, क्योंकि उनके पेट में ‘वृक’ नाम की अग्नि है, जो भोजन से ही शांत होती है।

तब उन्होंने विनम्रता से निवेदन किया कि उन्हें ऐसा कोई एक व्रत बताया जाए, जिसे साल में केवल एक बार करके सभी पापों से मुक्ति मिल सके और मोक्ष की प्राप्ति हो। इस पर वेदव्यास जी ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे निर्जला एकादशी कहा जाता है, ऐसा ही व्रत है। इस दिन न अन्न ग्रहण करना होता है और न ही जल। यदि गलती से भी जल पी लिया जाए, तो व्रत का फल नहीं मिलता।


इस व्रत का पालन सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान, दान-पुण्य करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। जो व्यक्ति इस व्रत को विधि-विधान से करता है, उसे वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यह सुनकर भीमसेन प्रसन्न हुए और उन्होंने निर्जला एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया। भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद द्वादशी के दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें श्रीहरि की कृपा प्राप्त हुई, उनके सभी पाप नष्ट हो गए और अंततः उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई।
 

निर्जला एकादशी पर इन 5 चीजों का करें दान

  • ज्येष्ठ माह में भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में सभी लोगों को प्यास से राहत देने के लिए जल से भरा घड़ा का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे जीवन में भगवान विष्णु की कृपा और पुण्य की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। गर्मी के मौसम में लोग गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं इस कारण से सत्तू का दान करना बहुत ही अच्छा और शुभ होता है। 
  • हिंदू धर्म में गुड़ के दान करने का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में गुड़ दान करने से सुख-समृद्धि और शुभ फलो की प्राप्ति होती है। एकादशी और गुरुवार के संयोग में गुड़ का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। 
  • निर्जला एकादशी पर भीषण गर्मी से बचने के लिए गर्मी से राहत देने के लिए इस दिन छाता और हाथ का पंखा दान करना शुभ होता है।
  • निर्जला एकादशी पर गरीबों और जरूरतमंद लोगों को कपड़े, फल और अन्न का दान करना बहुत ही पुण्य का काम होता है। इससे जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण का समय

  • धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा।
  • पारण का शुभ समय- 26 जून, सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक
  • इसी समय व्रत समाप्त कर भोजन और जल ग्रहण करना शुभ माना गया है।

Nirjala Ekadashi 2026 LIVE: निर्जला एकादशी पर करें एकादशी मां की आरती

ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ओम जय एकादशी माता।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ओम।।
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ओम।।
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ओम ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ओम ।।
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ओम ।।
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ओम ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ओम ।।
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ओम ।।
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ओम ।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ओम ।।
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ओम ।।
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ओम ।।
.परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।। ओम ।।
.
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ओम ।।

 

Ekadashi Vrat Katha: एकादशी व्रत कथा  

प्राचीन समय में मुर नाम का एक अत्यंत बलशाली और क्रूर राक्षस था। उसने अपने पराक्रम के बल पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवता उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र के नेतृत्व में भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे सहायता की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में जाने का सुझाव दिया। इसके बाद सभी देवता वैकुंठ धाम पहुंचे और भगवान विष्णु से अपनी रक्षा करने की विनती की। देवताओं की पुकार सुनकर भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर मुर के राज्य चंद्रावती पहुंचे। वहां उन्होंने राक्षसों की विशाल सेना का संहार कर दिया। सेना के नष्ट होने के बाद स्वयं मुर युद्धभूमि में आया और भगवान विष्णु को युद्ध की चुनौती दी।
पूरी कथा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें- 
Ekadashi Mata Katha: एकादशी व्रत रखते हैं तो जान लें कौन हैं एकादशी माता, यहां पड़ें पौराणिक कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Live: भगवान विष्णु भोग

  • पंचामृत का भोग: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को पंचामृत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दूध, दही, शहद, चीनी और घी को मिलाकर तैयार किया गया यह पवित्र मिश्रण भगवान के अभिषेक और भोग दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे अर्पित करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।
  • पंजीरी का भोग: इस दिन भगवान विष्णु को पंजीरी चढ़ाने की भी विशेष परंपरा है। धनिया और सूखे मेवों से तैयार की गई यह पंजीरी सात्विक होने के साथ-साथ स्वाद में भी बेहतरीन होती है। इसे भोग के रूप में चढ़ाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है, और तुलसी पत्र के साथ अर्पित करने पर भगवान विष्णु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।
  • मखाने की खीर: इस पावन दिन मखाने की खीर भी भगवान विष्णु को अर्पित की जाती है। दूध, चीनी और सूखे मेवों से तैयार यह सात्विक भोग स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे भी तुलसी पत्र के साथ अर्पित करना शुभ माना जाता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: निर्जला एकादशी पर खानपान का नियम

निर्जला एकादशी के व्रत में मूल रूप से जल ग्रहण करना भी वर्जित माना जाता है। हालांकि, यदि स्वास्थ्य अनुकूल न हो और फलाहार करने की इच्छा हो, तो शाम के समय भगवान की आरती-पूजा करने के बाद फलाहार किया जा सकता है। व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है, जिसमें सबसे पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। इसके पश्चात तुलसी पत्र को जल के साथ ग्रहण करते हुए व्रती को अन्न और जल का सेवन करना चाहिए।

Nirjala Ekadashi Live: निर्जला एकादशी पर गुरु बना रहे हैं हंस राजयोग

इस पावन दिन गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि यानी कर्क में विराजमान रहेंगे, जिससे ज्योतिष में बेहद शुभ माने जाने वाले हंस राजयोग का निर्माण हो रहा है। इस दुर्लभ संयोग का सबसे ज्यादा फायदा कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों को मिलने की संभावना है। माना जाता है कि इस योग के प्रभाव से करियर, धन और सम्मान के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Nirjala Ekadashi Live Updates: निर्जला एकादशी पर न करें ये काम

इस पावन दिन चावल समेत किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन करना वर्जित माना गया है। इसके अलावा बाल या नाखून कटवाने, मांस-मदिरा का सेवन करने, दिन में सोने और किसी को अपमानित करने या झूठ बोलने जैसी गतिविधियों से भी पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर करें घड़े का दान

निर्जला एकादशी के अवसर पर जल से भरे घड़े का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। ज्येष्ठ माह की तीव्र गर्मी में यह दान प्यासे और जरूरतमंद लोगों को राहत पहुंचाने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जलदान से न केवल दूसरों की सेवा होती है, बल्कि दान करने वाले के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। इसलिए इस दिन जल से भरा घड़ा दान करना एक श्रेष्ठ और कल्याणकारी कार्य माना जाता है।

Nirjala EKadashi Daan: निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान

निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सत्तू का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गर्मी के दिनों में सत्तू शरीर को शीतलता और ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए इसका दान जरूरतमंद लोगों के लिए काफी लाभकारी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सत्तू दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और दूसरों की सहायता करने का अवसर भी मिलता है। यह दान सेवा, परोपकार और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है।

Nirjala Ekadashi Paran Time: कब करें निर्जला एकादशी व्रत का पारण?

निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 26 जून को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के दौरान सुबह के समय व्रत खोलना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है। इसलिए भक्तों को निर्धारित समय के भीतर विधि-विधान से पारण कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

Nirjala Ekadashi Live: निर्जला एकादशी पारण का महत्व

निर्जला एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि यही व्रत का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। पारण का अर्थ है व्रत का विधिपूर्वक समापन करना। शास्त्रों के अनुसार, यदि समय पर द्वादशी तिथि के भीतर पारण नहीं किया जाए, तो व्रत अधूरा माना जाता है और उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। ऐसा विश्वास है कि उचित समय पर पारण करने से व्रती को व्रत का संपूर्ण पुण्य, आध्यात्मिक लाभ और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Parana: निर्जला एकादशी व्रत पारण का उल्लेख कहां

पद्म पुराण में वर्णित परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत बहुत श्रद्धा और नियमों के साथ रखा जाता है। पंचांग के अनुसार यह व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त प्रातःकाल भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करके पूरे दिन निर्जल उपवास रखते हैं। इसके अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि पर, व्रत का पारण करने का विधान बताया गया है। इसलिए 26 जून को शुभ समय में विधिपूर्वक व्रत खोलना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

Nirjala Ekadashi Vrat Paran: निर्जला एकादशी व्रत पारण विधि

  • द्वादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
  • पद्म पुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु की पूजा गंध, धूप, फूल और सुंदर वस्त्रों के साथ करनी चाहिए। इसके साथ ही जल से भरे घड़े का संकल्प भी लेना चाहिए।
  • दान के लिए जल का घड़ा पहले से ही तैयार करके रख लेना चाहिए। द्वादशी तिथि पर इस घड़े का संकल्प करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें -
    'देवदेव हृषीकेश संसारार्णवतारक, उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम्।'
    इसका अर्थ है - "हे देवों के देव हृषीकेश, जो संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले हैं, इस जलयुक्त घड़े के दान से मुझे परम गति प्रदान करें।"
  • द्वादशी के दिन पूजा संपन्न करने के बाद व्रती को सबसे पहले ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए, और इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत का पारण जल और तुलसी दल के साथ ही शुरू करना चाहिए।
  • पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस संपूर्ण विधि के साथ निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Nirjala Ekadashi Update: निर्जला एकादशी व्रत पारण के समय क्या खाएं

व्रत का पारण करते समय सबसे पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए 'ॐ विष्णवे नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए, और इसके साथ ही तुलसी के पत्ते को मुख में रखना शुभ माना जाता है। इसके बाद गंगाजल का सेवन करना अच्छा माना जाता है। पारण के बाद भोजन हमेशा हल्का, सात्विक और शुद्ध ही रखना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है। 

Nirjala Ekadashi Vrat:  निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आयु और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा यह व्रत कई जन्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करने में भी सहायक माना जाता है। इसी वजह से इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करने की सलाह दी जाती है।

Ekadashi Mata Ki Katha: कौन हैं एकादशी माता?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में मुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। परेशान होकर देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। भगवान विष्णु ने मुर और उसकी सेना का सामना किया और भयंकर युद्ध हुआ।

युद्ध के दौरान जब भगवान विष्णु विश्राम करने गए, तब मुर उन पर हमला करने पहुंचा। उसी समय भगवान के दिव्य तेज से एक शक्तिशाली देवी प्रकट हुईं। उन्होंने मुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई।

जब भगवान विष्णु जागे, तो उन्होंने देवी की वीरता से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। देवी ने प्रार्थना की कि उनके प्रकट होने वाले दिन व्रत रखने वाले सभी भक्तों के पाप नष्ट हों और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो। भगवान ने यह वरदान दे दिया।

तभी से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई और इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: निर्जला एकादशी में कब पीना चाहिए पानी?

निर्जला एकादशी व्रत में एकादशी तिथि के दौरान पानी पीना वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह व्रत निर्जला यानी बिना जल ग्रहण किए रखा जाता है। इसलिए इस व्रत में पानी पीने का सही समय अगले दिन द्वादशी तिथि पर, सूर्योदय के बाद पारण के दौरान माना गया है। द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद प्रभु का स्मरण करते हुए सबसे पहले जल ग्रहण करें और फिर व्रत का पारण करें। इसके बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है।
विज्ञापन

Ekadashi Vray Paran Vidhi: निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण का समय

  • धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा।
  • पारण का शुभ समय- 26 जून, सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक
  • इसी समय व्रत समाप्त कर भोजन और जल ग्रहण करना शुभ माना गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें