खीरे के बिना अधूरी है कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा
जन्माष्टमी पर लोग भगवान श्रीकृष्ण को खीरा चढ़ाते हैं। मान्यता है कि खीरे से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सारे दुख दर्द हर लेते हैं। जन्माष्टमी के दिन ऐसा खीरा लाया जाता है, जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां लगी होती हैं। जन्माष्ठमी पूजा के खीरे के इस्तेमाल के पीछे की मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है। ठीक उसी प्रकार से जन्माष्टमी के दिन खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है। ये भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है। ऐसा करने के बाद ही कान्हा की विधि विधान से पूजा शुरू की जाती है।
जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार लगाएं कान्हा को भोग
जन्माष्टमी के मौके पर हैदराबाद के इस्कॉन मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
जन्माष्टमी के उत्सव की धूम चारों ओर देखने को मिल रही है। इसी क्रम में तेलंगाना के इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालुओं ने कान्हा के दर्शन किए और जन्माष्टमी उत्सव मनाया।
श्री कृष्ण चालीसा का पाठ दिलाएगा हर काम में सफलता
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण की चालीसा पाठ करने से भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है। यहां पढ़ें सम्पूर्ण कृष्ण चालीसा
कृष्ण चालीसा पाठ
॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥
प्रियजनों को दें ये शुभकामना संदेश
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।।
कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं!
इस बार रोहिणी नक्षत्र में नहीं है जन्माष्टमी
कहते हैं श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसीलिए रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है। लेकिन इस बार जन्माष्टमी की किसी भी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं है। हिन्दू पंचांग के आधार पर रोहिणी नक्षत्र 20 अगस्त को रात्रि 01: 54 से लग रहा है। इस बार जन्माष्टमी कृतिका नक्षत्र में मनाई जा रही है।