Hartalika Teej 2026 Pujan Muhurat: हरतालिका तीज पूजन मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त:प्रातः 4 बजकर 32 मिनट से प्रातः 5 बजकर 19 मिनट तक
पूजन का शुभ मुहूर्त: प्रातः 6 बजकर 05 मिनट से प्रातः 7 बजकर 06 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर बन रहे हैं ये शुभ संयोग
आज 14 सितंबर को हरतालिका तीज के अवसर पर चित्रा और स्वाति नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसके साथ ब्रह्म और ऐन्द्र योग भी रहेंगे। इन शुभ योगों में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से निर्जला व्रत कर रही हैं। आज पूजा के लिए मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। इस दौरान तीज की पौराणिक कथा सुनने के साथ वैदिक मंत्रों का जाप भी किया जाएगा।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज व्रत का महत्व
हरतालिका तीज का व्रत कठिन उपवासों में गिना जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत करने की परंपरा मानी जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा के दौरान महिलाएं सुहाग से जुड़ी वस्तुएं माता पार्वती को अर्पित करती हैं।
Hartalika Teej 2026 : हरतालिका तीज 2026 दिन-रात के चौघड़िया मुहूर्त
दिन का चौघड़िया
अमृत: सुबह 6:05 से 7:38 बजे तक
काल: सुबह 7:38 से 9:11 बजे तक
शुभ: सुबह 9:11 से 10:43 बजे तक
रोग: सुबह 10:43 से दोपहर 12:16 बजे तक
उद्वेग: दोपहर 12:16 से 1:49 बजे तक
चर: दोपहर 1:49 से 3:22 बजे तक
लाभ: दोपहर 3:22 से 4:55 बजे तक
अमृत: शाम 4:55 से 6:28 बजे तक
रात का चौघड़िया
चर: शाम 6:28 से 7:55 बजे तक
रोग: शाम 7:55 से रात 9:22 बजे तक
काल: रात 9:22 से 10:49 बजे तक
लाभ: रात 10:49 से 12:16 बजे तक
उद्वेग: रात 12:16 से 1:43 बजे तक
शुभ: रात 1:43 से 3:11 बजे तक
अमृत: रात 3:11 से 4:38 बजे तक
चर: सुबह 4:38 से 6:05 बजे तक
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर भद्रा का प्रभाव
इस बार हरतालिका तीज के दिन भद्रा काल भी रहेगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को शाम 7:20 बजे से भद्रा शुरू होगी। इसका प्रभाव अगले दिन यानी 15 सितंबर की सुबह 6:06 बजे तक रहेगा। ऐसे में हरतालिका तीज के दिन पूजा और शुभ कार्यों से जुड़े समय को लेकर भद्रा की अवधि का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज 2026 पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति
आज यानी 14 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के साथ चतुर्थी तिथि भी पड़ रही है। इसी वजह से आज हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक साथ मनाया जा रहा है। इस दिन रवि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। वहीं, चित्रा और स्वाति नक्षत्र के संयोग को ब्रह्म योग और इंद्र योग का साथ मिल रहा है। इन शुभ संयोगों की वजह से आज के दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और बढ़ गया है। ग्रहों की स्थिति की बात करें तो 14 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में, चंद्रमा और बुध कन्या राशि में, गुरु कर्क राशि में, शुक्र तुला राशि में, मंगल मिथुन राशि में और शनि मीन राशि में स्थित हैं। वहीं राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर बन रहे हैं कई राजयोग
हरतालिका तीज के दिन कई प्रभावशाली राजयोग भी बन रहे हैं। इनमें मालव्य योग, नवपंचम राजयोग, भद्र राजयोग, हंस राजयोग और लक्ष्मी नारायण राजयोग प्रमुख हैं। ज्योतिष में इन योगों को शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। इसके अलावा तुला राशि में शुक्र और चंद्रमा की युति भी बन रही है, जो इस दिन की ग्रह स्थिति को और खास बना रही है।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज और हरियाली तीज में अंतर
हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों ही भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रमुख व्रत हैं, लेकिन इनकी तिथि और व्रत के नियम अलग-अलग होते हैं। हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को पड़ती है। व्रत के नियमों की बात करें तो हरतालिका तीज को अधिक कठिन माना जाता है। इस दिन महिलाएं अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर निर्जला उपवास रखती हैं। वहीं, हरियाली तीज के व्रत में मान्यता के अनुसार जल ग्रहण करने और फलाहार करने की छूट होती है। इस तरह दोनों पर्वों की तिथि और उपवास की परंपराओं में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है।
Hartalika Teej 2026 Puja Samagri: हरतालिका तीज पूजा सामग्री
- गीली मिट्टी या शिव-पार्वती और गणेशजी की बनी हुई प्रतिमा
- भगवान के लिए वस्त्र
- लकड़ी की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- मिट्टी का कलश, ढक्कन और नारियल
- माता पार्वती के श्रृंगार का सामान
- जनेऊ, कलावा, रोली, सिंदूर और गुलाल
- चावल, सुपारी, लौंग और इलायची
- घी, शहद और भस्म
- धूपबत्ती, कपूर और मिट्टी का दीपक
- दीपक के लिए रूई की बत्ती
Hartalika Teej 2026 Daan: हरतालिका तीज पर किन चीजों का दान करें?
हरतालिका तीज के दिन सुहाग से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की भी परंपरा है। इस अवसर पर सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, आलता, कंघी, काजल, बिछिया, चूड़ियां, कुमकुम, अबीर और चंदन जैसी श्रृंगार सामग्री किसी सुहागिन महिला को भेंट की जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम व आपसी समझ बढ़ती है।
Hartalika Teej 2026: भोग की सामग्री
- 5 प्रकार के मौसमी फल
- मिष्ठान
- पान का पत्ता
- बेलपत्र
- दूर्वा
- धतूरे का फल
- भांग के पत्ते
- तुलसी मंजरी
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?
- पूजा के दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचने की परंपरा है। इसके बजाय शुभ रंगों के वस्त्र पहनना अच्छा माना जाता है।
- हरतालिका तीज के दौरान नमक, चीनी और अनाज का सेवन न करने की मान्यता है।
- व्रत रखने वाली महिलाओं को पति या परिवार के किसी सदस्य से विवाद करने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना शुभ माना जाता है।
- हरतालिका तीज का व्रत पारंपरिक रूप से निर्जला रखा जाता है, इसलिए व्रत के नियमों के अनुसार अन्न, फल और जल का सेवन नहीं किया जाता।
- व्रत के दौरान रात में जागकर भगवान शिव-पार्वती का स्मरण, भजन या मंत्र जाप करने की परंपरा है।
- अगले दिन व्रत का पारण करते समय सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।
- निर्जला व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से कठिन हो सकता है। किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर जरूर करें ये काम
- व्रती महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद लाल, पीले या अन्य शुभ रंग के वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
- सूर्योदय से पहले स्नान करना इस दिन विशेष शुभ माना जाता है।
- व्रत के दौरान संयम का पालन करें और घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें। परिवार के लिए भी सात्विक भोजन तैयार करने की परंपरा है।
- हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार करने और हाथों में मेहंदी लगाने की परंपरा है। इसे सुहाग और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।
- पूरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें। शाम की पूजा के बाद रात में जागरण, भजन या धार्मिक कथा सुनने की परंपरा भी है।
- अगले दिन विधि के अनुसार व्रत का पारण करें। पारण के समय पहले जल ग्रहण करके फिर हल्का और सात्विक भोजन करना उचित माना जाता है।
Hartalika Puja Mantra: हरतालिका तीज पूजा मंत्र
गणेश जी का मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरूमे देव, सर्व कार्येषु सर्वदाः।।
भगवान शिव का मंत्र
ॐ नम: शिवाय
ॐ महेश्वराय नमः
ॐ पशुपतये नमः
माता पार्वती का मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ उमाये नमः
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का मंत्र
सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर दान का महत्व
हरतालिका तीज के दिन पूजा-पाठ के साथ दान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों और सुहागिन महिलाओं को सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल, अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सुहाग से जुड़ी चीजों का दान करने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। मान्यता है कि तीज के दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्यकारी होता है। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और जरूरतमंद की आवश्यकता का ध्यान रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
हरतालिका तीज 2026: हरतालिका तीज आज, जानें शुभ मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि और मंत्र
Hartalika Teej Daan: हरतालिका तीज पर इन चीजों का कर सकते हैं दान
- सुहाग सामग्री: हरतालिका तीज पर सुहाग से जुड़ी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, काजल, कंघी, पायल और बिछिया जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं। मान्यता के अनुसार, इन वस्तुओं का दान सुखी और सौहार्दपूर्ण दांपत्य जीवन की कामना से किया जाता है।
- श्रृंगार का सामान: माता पार्वती को सुहाग और श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए तीज पर लाल या हरे रंग की चुनरी, मेहंदी, चूड़ियां और आलता जैसी श्रृंगार सामग्री किसी सुहागिन महिला को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भेंट की जा सकती है।
- पान और सुपारी: पान और सुपारी को हिंदू पूजा परंपरा में शुभ और मांगलिक वस्तुओं में शामिल किया जाता है। हरतालिका तीज पर इनका दान करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। इसे वैवाहिक जीवन में सुख और आपसी प्रेम की कामना से जोड़ा जाता है।
- वस्त्र और मौसमी फल: इस दिन जरूरतमंद लोगो को कपड़े और मौसमी फल दान करना भी शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार हरे या अन्य शुभ रंग के वस्त्र दिए जा सकते हैं। फल का दान जरूरतमंद व्यक्ति के लिए उपयोगी होने के साथ सरल भी है।
- अन्न और भोजन सामग्री: हरतालिका तीज पर जरूरतमंदों को गेहूं, चावल, दाल, आटा, गुड़, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री दान की जा सकती है। धार्मिक मान्यता में अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया है और इसे घर में सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
हरतालिका तीज पूजन विधि: Hartalika Teej 2026 Pujan Vidhi
- हरतालिका तीज पर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- जो महिलाएं सुबह पूजा करते हैं वह शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।
- हरतालिका तीज के सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा श्रेष्ठ होती है।
- पूजा से पहले सुहागिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर बालू या शुद्ध काली मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएं।
- पूजा स्थल पर केले के पत्तों से मंडप बनाएं।
- गौरी-शंकर की मूर्ति पूजा की चौकी पर स्थापित करें। गंगाजल, पंचामृत से उनका अभिषेक करें।
- इसके बाद गणेश जी को दूर्वा और जनेऊ चढ़ाएं। शिव जी को चंदन, मौली, अक्षत, धतूरा, आंक के पुष्प, भस्म, गुलाल, अबीर, 16 प्रकार की पत्तियां आदि अर्पित करें।
- मां पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। अब भगवान को खीर, फल आदि का भोग लगाएं।
- धूप, दीप लगाकर हरतालिका तीज व्रत की कथा सुनें। कथा समाप्त होने के बाद आरती करें।
- रात्रि जागरण कर हर प्रहर में इसी तरह पूजा करें।
- अगले दिन सुबह आखिरी प्रहर की पूजा के बाद माता पार्वती को चढ़ाया सिंदूर अपनी मांग में लगाएं।
- मिट्टी के शिवलिंग का विसर्जन कर दें और सुहाग की सामग्री ब्राह्मण को दान दें।
- प्रतिमा का विसर्जन करने के बाद ही व्रत का पारण करें।
Hartalika Teej 2026: हरितालिका तीज पर जरूर चढ़ाएं ये 16 विशेष पत्तियां
- बिल्वपत्र: अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
- जातीपत्र (चमेली): उत्तम संतान सुख
- सेवंतिका: दांपत्य जीवन में मधुरता
- बांस के पत्ते: वंश वृद्धि और निरोगता
- देवदार पत्र: ऐश्वर्य और कीर्ति
- चंपा पत्र: सौंदर्य व उत्तम स्वास्थ्य
- कनेर पत्र: यश तथा मानसिक शांति
- अगस्त्य पत्र: वैभव एवं समृद्धि
- भृंगराज: साहस व पराक्रम
- धतूरा पत्र: मोक्ष एवं बंधनों से मुक्ति
- आम के पत्ते: मांगलिक कार्यों में सिद्धि
- नीम के पत्ते: चरित्र निर्मलता व शुद्धि
- अशोक के पत्ते: कष्ट निवारण व शांत जीवन
- पान के पत्ते: परस्पर प्रेम व प्रगाढ़ता
- केले के पत्ते: कार्य में पूर्ण सफलता
- शमी के पत्ते: धन-धान्य और अक्षय समृद्धि
Hartalika Teej Upay: हरतालिका तीज पर विवाह संबंधी उपाय
विवाह में आ रही बाधाओं के लिए
- यदि विवाह में लगातार अड़चन आ रही हो या रिश्ते तय होकर टूट रहे हों, तो हरतालिका तीज पर मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उस पर 21 बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद 11 या 21 बार शिवलिंग की परिक्रमा की जाती है।
- पूजा के बाद मिट्टी के शिवलिंग को बेल के पेड़ के नीचे रखने की मान्यता भी बताई जाती है।
- अविवाहित कन्याएं माता पार्वती को 11 हल्दी की गांठ अर्पित कर अच्छे जीवनसाथी की कामना कर सकती हैं।
- विवाह में देरी होने पर किसी जरूरतमंद कन्या को अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र और मिठाई भेंट करना भी शुभ माना जाता है।
- इस दिन देवी कात्यायनी के मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक मान्यता है।
Hartalika Teej Upay: हरतालिका तीज उपाय
दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख-शांति के लिए
- पति-पत्नी के बीच मनमुटाव दूर करने और रिश्ते में प्रेम की कामना से हरतालिका तीज की शाम शिव-पार्वती मंदिर में 11 घी के दीपक जलाने की परंपरा है।
- दूध में हल्दी या केसर मिलाकर भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करने की मान्यता है।
- वैवाहिक सुख की कामना से खीर बनाकर भगवान को भोग लगाया जा सकता है। अगले दिन पति-पत्नी मिलकर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर है।
- सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को चुनरी, नथ, बिछिया और पायल जैसी सुहाग सामग्री अर्पित कर सकती हैं।
- हरतालिका तीज पर पति के हाथों से सिंदूर लगवाने और सुहाग की वस्तुएं धारण करने को भी शुभ माना जाता है।
- परिवार में सुख-शांति और आपसी सौहार्द की कामना से भगवान गणेश के मंदिर में सूखे मालपुए अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है।
- इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी समेत पूरे शिव परिवार की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनाए रखने की कामना की जाती है।
Hartalika Teej 2026: क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर वन में भगवान शिव की आराधना की और रात्रि जागरण करते हुए मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की। माता पार्वती की कठिन साधना और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा मानी जाती है। धार्मिक मान्यता में इस उपवास को त्याग, तपस्या और शिव-पार्वती के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि कई कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से तीज का उपवास करती हैं।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर रात में सोना चाहिए या नहीं?
धार्मिक परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन रात में जागरण करने का विशेष महत्व माना जाता है। व्रती महिलाएं रातभर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करती हैं। इस दौरान तीज की व्रत कथा पढ़ने या सुनने के साथ भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस तरह रात्रि जागरण करने से मन एकाग्र रहता है और पूजा-पाठ में ध्यान लगा रहता है।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर शिव -पार्वती की प्रतिमा कैसे बनाएं?
- मिट्टी तैयार करें: साफ और शुद्ध मिट्टी या बालू लें। इसे अच्छी तरह छानकर साफ कर लें।
- मिट्टी को नरम करें: मिट्टी में जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी या गंगाजल मिलाकर उसे गूंथ लें, ताकि प्रतिमा आसानी से बनाई जा सके।
- शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएं: अब हाथों की मदद से भगवान शिव और माता पार्वती की छोटी प्रतिमाएं तैयार करें। प्रतिमा का आकार बहुत बड़ा रखने की जरूरत नहीं है।
- प्रतिमा को सूखने दें: प्रतिमाएं बनने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थान पर रख दें, ताकि वे थोड़ी मजबूत हो जाएं।
- पूजा स्थल तैयार करें: लकड़ी की चौकी पर केले के पत्ते या साफ कपड़ा बिछाकर प्रतिमाओं को स्थापित करें।
- विधि-विधान से पूजा करें: प्रतिमा स्थापना के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें और उन्हें फूल, फल, सुहाग सामग्री समेत पूजा की अन्य सामग्री अर्पित करें।
Hartalika Teej 2026: तीज और गणेश चतुर्थी साथ, जानें पूजा का सही क्रम
इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 7:06 बजे तक रहेगी और इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में दोनों पर्वों की पूजा के समय में अंतर रहेगा। हरतालिका तीज की पूजा तृतीया तिथि में प्रातःकाल करने की परंपरा है, जबकि गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और पूजन चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में किया जाता है। इसलिए पहले हरतालिका तीज की पूजा करें और इसके बाद गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का पूजन करें।
हरितालिका तीज उपाय: कुंडली में विवाह के योग कमजोर हैं तो हरितालिका तीज पर करें ये उपाय
Hartalika Teej Vrat Vidhi: हरतालिका तीज पर कैसे रखें निर्जल व्रत?
- व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें।
- संकल्प के बाद पूरे दिन अन्न और जल का सेवन न करने की परंपरा है। इस दौरान शिव-पार्वती की आराधना और मंत्र जाप किया जाता है।
- प्रदोष काल में रेत, बालू या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाकर पूजा स्थल पर स्थापित करें।
- प्रतिमाओं को स्थापित करने के बाद फूल, फल, सुहाग सामग्री और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा करें। हरतालिका तीज की व्रत कथा भी सुनें या पढ़ें।
- हरतालिका तीज पर रात में जागरण करने की परंपरा है। इस दौरान भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और भगवान शिव-माता पार्वती का स्मरण किया जाता है।
- व्रत का पारण अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद करने की परंपरा है। इसके बाद जल ग्रहण कर सात्विक भोजन से व्रत खोल सकते हैं।
- निर्जला व्रत कठिन होता है। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या डॉक्टर ने उपवास से मना किया है, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि पूर्वजन्म में वे राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। उन्होंने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह किया था। बाद में पिता के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने से दुखी होकर सती ने अपने प्राण त्याग दिए।
इसके बाद सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही माता पार्वती की इच्छा भगवान शिव को पति रूप में पाने की थी। इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या शुरू कर दी। उनकी तपस्या को देखकर पर्वतराज हिमालय चिंतित हो गए।
इसी दौरान देवर्षि नारद पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर पर्वतराज हिमालय के पास पहुंचे। हिमालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला, तो वे बहुत दुखी हुईं। उन्होंने अपनी सखियों को मन की बात बताई। इसके बाद सखियां उन्हें एक गुप्त स्थान पर ले गईं, जहां उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या करने का निर्णय लिया।
माता पार्वती ने वहां रेत से शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। उन्होंने कठिन तप किया और रात्रि जागरण करते हुए शिव का ध्यान किया। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और वर मांगने को कहा।
तब माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने की इच्छा व्यक्त की। उनकी तपस्या से प्रसन्न महादेव ने उनकी इच्छा स्वीकार कर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती की इसी कठोर तपस्या और शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कथा से हरतालिका तीज व्रत की परंपरा जुड़ी हुई है।
Hartalika Teej Puja Muhurat: हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए सुबह 5:35 बजे से 7:06 बजे तक का समय शुभ रहेगा। वहीं, शाम के प्रदोष काल में पूजा के लिए शाम 5:09 बजे से 6:39 बजे तक का समय निर्धारित है। शास्त्रों में प्रदोष काल को सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले शुरू होने वाला और सूर्यास्त के लगभग 45 मिनट बाद तक रहने वाला माना गया है। रांची में सूर्यास्त का समय करीब शाम 5:54 बजे बताया गया है, जबकि मिथिला पंचांग के अनुसार सूर्यास्त शाम 6:07 बजे होगा।
Hartalika Teej Puja Vidhi: हरतालिका तीज पर करें शिव-पार्वती का पूजन
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा के स्थान को साफ करके तैयार करें।
- चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान शिव को जल और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- माता पार्वती को कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, फूल और सुहाग से जुड़ी सामग्री चढ़ाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती को फल और मिठाई का भोग अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर धूप और दीप जलाएं।
- पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करें या कथा सुनें।
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और सुखी दांपत्य जीवन, पति की लंबी आयु तथा परिवार की खुशहाली की कामना करें।
Hartalika Teej Puja Time: हरतालिका तीज पर किस समय करें पूजा?
- हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है।
- व्रती महिलाएं स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद सुबह शिव-पार्वती का पूजन कर सकती हैं।
- अगर किसी वजह से सुबह पूजा करना संभव न हो, तो शाम के समय भी पूजा की जा सकती है।
- प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती को पूजन सामग्री अर्पित कर व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में आरती करें।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में समय के साथ श्रद्धा और विधि-विधान का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।
Hartalika Teej Aarti:माता पार्वती की आरती
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता
सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
Hartalika Teej 2026 Mantra: हरतालिका तीज पर करें इन मंत्रों का जाप
माता पार्वती के मंत्र
- ॐ उमायै नमः।
- ॐ पार्वत्यै नमः।
- ॐ जगद्धात्र्यै नमः।
भगवान शिव के मंत्र
- ॐ नमः शिवाय।
- ॐ महेश्वराय नमः।
- ॐ शंभवे नमः।
- ॐ पशुपतये नमः।
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को क्या चढ़ाएं?
- भगवान शिव को अर्पित करें: शिवलिंग पर जल या पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- माता पार्वती को चढ़ाएं: माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
- फल और मिठाई का भोग: पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती को मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- श्रद्धा से करें पूजन: धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को श्रद्धापूर्वक सामग्री अर्पित कर सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
Hartalika Teej Paaran: तालिका तीज व्रत का पारण कब करें?
- हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जा रहा है।
- धार्मिक परंपरा के अनुसार, व्रत का पारण अगले दिन यानी 15 सितंबर की सुबह स्नान और पूजा के बाद किया जाता है।
- व्रती महिलाएं सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- स्नान के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन करें। पूजा के अंत में आरती करें और व्रत पूरा होने की प्रार्थना करें।
- पूजा और आरती संपन्न होने के बाद सबसे पहले जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है।
- जल पीने के बाद प्रसाद ग्रहण करें और इसके बाद हल्का व सात्विक भोजन करें। लंबे निर्जला व्रत के बाद भोजन धीरे-धीरे करना बेहतर माना जाता है।
Hartalika Teej 2026 : हरतालिका तीज पर मां गौरी को क्यों चढ़ाते है सिंदूर ?
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं मां पार्वती की पूजा करने के दौरान उन्हे सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं, इसमें सिंदूर का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भक्ति और श्रद्धा से मां गौरी की मांग में सिंदूर भरती है। ऐसी मान्यता हैं कि इससे जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
हरतालिका तीज की क्या है पूजा विधि
आज गणेश चतुर्थी तिथि पर हरतालिका तीज का भी त्योहार है। यह पर्व पति-पत्नी के अटूट रिश्तों का त्योहार है। इसमें सुहागिन महिलाएं बालू और मिट्टी से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति बनाते हुए उनकी विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करती हैं। इसमें रोली,चावल,पुष्प,बेलपत्र,नारियल ,दूर्वा,मिठाई आदि से भगवान का भक्ति भाव से पूजन करें। इसके बाद हरितालिका तीज व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। आरती करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्ति करती हैं।
Hartalika Teej Vrat Katha: हरतालिका तीज व्रत की कथा
आज हरतालिका तीज है, यह पर्व सुहागिन महिलाएं अपने पति की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए रखती हैं। हरतालिका तीज मां पार्वती और भगवान शिव के मिलन की कथा के रूप में हर मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती अपने कई जन्मों से भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर बाल अवस्था में अधोमुखी होकर तपस्या की थी।
माता पार्वती बिना अन्न और जल का भी सेवन किए तपस्या में लीन रहती थी, तब देवी पार्वती को इस अवस्था में देखकर उनके माता पिता बहुत दुखी रहते थे। एक दिन देवऋषि नारद भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह के लिए प्रस्ताव लेकर उनके पिता के पास गए। पार्वती जी के पिता ने तुरंत ही इस प्रस्ताव के लिए हां कर दी। जब माता पार्वती को उनके पिता ने उनके विवाह के बारे में बताया तो वह काफी दुखी हो गई।
अपने विवाह की बात को एक सखी से माता पार्वती ने बताया कि पार्वती जी शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही हैं। लेकिन उनके पिता चाहते की पार्वती का विवाह विष्णु जी से हो जाए। इस पर उनकी उस सहेली ने माता पार्वती को वन में जाने कि सलाह दी।
तब अपनी सखा की बात को मान कर माता पार्वती ने ऐसा ही किया और वो एक गुफा में जाकर भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गई थी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का बनाया और शिव जी की स्तुति करने लगी। इतनी कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।
Hartalika Teej Puja Muhurat 2026: हरतालिका तीज प्रदोष काल पूजा मुहूर्त
हरतालिका तीज पर कई जगहों पर प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार आज के दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 22 मिनट तक चलेगा। जिसमें सुगाहिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगे।
Hartalika Teej Puja Muhurat 2026: हरतालिका तीज पर किसकी होती है पूजा
आज हरतालिका तीज पर विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजा करने का विधान होता है।
Hartalika Teej 2026 Mantra: हरतालिका तीज मंत्र
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप जरूर करें।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
Hartalika Teej 2026 Aarti: हरतालिका तीज पर जरूर करें शिव आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव॥
हरतालिका तीज पर मां पार्वती को अर्पित करें ये चीजें
आज शाम हरतालिका तीज पर मां पार्वती को सिंदूर, इत्र, लाल, चुनरी, बिंदी, काजल, कंघी, तेल, मेहंदी, पायल, चूड़ियां समेत दूसरी श्रृंगार की चीजें अर्पित करना शुभ होता है।
प्रदोष काल में कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज पर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान होता है। ऐसे में इस समय सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान शिव और पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर इसके बाद भगवान गणेश की पूजा और ध्यान करें। इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव को गंगाजल, फूल, बेलपत्र, जल और मिठाई अर्पित करें, इसके अलावा माता पार्वती को श्रृंगार की सभी चीजों को अर्पित करते हुए सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें।
हरतालिका तीज पर 16 श्रृंगार क्यों करती हैं सुहागिन महिलाएं ?
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन 16 श्रृंगार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं क अनुसार 16 श्रृंगार सौभाग्य और वैवाहिक सुख-समृद्धि का प्रतीक होता है। ऐसे में इस दिन 16 श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करने का विधान होता है।
हरतालिका तीज व्रत का पारण कब करें ?
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला रखती हैं और फिर इस व्रत के अगले दिन पारण करती हैं। पारण सुबह की पूजा-अर्चना के बाद किया जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके अच्छे कपड़े पहने कर भगवान शिव और माता पार्वती के सामने धूप-दीप जलाकर आरती करें और सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। फिर कुछ खाकर और जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।