इस चैत्र प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष 2079, गुड़ी पड़वा,उगादी और नवरात्रि के मौके पर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को खास मैसेस से भेजें शुभकामनाएं....
पग-पग में फूल खिलें
ख़ुशी आप सबको इतनी मिले
कभी ना हो दुखों का सामना
यही है आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।
हमको था इंतज़ार वो घड़ी आ गई
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई
होगी अब मन की हर मुराद पूरी
हरने सारे दुख माता अपने द्वार आ गई।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
हो जाओ तैयार,माँ अम्बे आने वाली है
सजा लो दरबार माँ अम्बे आने वाली हैं
तन,मन और जीवन हो जायेगा पावन
माँ के कदमों की आहट से गूँज उठेगा आँगन..
आज से नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना की जाएगी। घर-घर में मां स्वयं विराजमान है। ऐसे में मां को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन सुबह और शाम को देवी दुर्गा की विधि पूजा-पाठ और आराधना की जाएगी। पूजा-पाठ के अलावा मां का आशीर्वाद पाने के लिए दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। अगर किसी कारणवश दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ नहीं कर सकते तो कम से कम ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’ की एक माला हर रोज अवश्य करें।
आज से यानी 2 अप्रैल,शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुके हैं और लगातार 9 दिनों तक माता दुर्गा की साधना-आराधना बड़े ही उत्साह और भक्ति भाव से की जाएगी। 10 अप्रैल को रामनवमी और 11 अप्रैल को पारण कर नवरात्रि का समापन किया जाएगा। आइए जानते हैं नवरात्रि पर क्या करें
अखंड ज्योति
यदि आप मां जगदंबे को प्रसन्न करने करने के लिए उनके समक्ष 9 मिट्टी के दीपक में अखंड ज्योति जलाएं,तो विशेष फल मिलता है। लेकिन ध्यान रखें कि ये अखंड ज्योति बुझनी नहीं चाहिए।
लाल फूल और लाल चुन्नी का प्रयोग
लाल रंग मां दुर्गा का सबसे प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए पूजा में लाल फूल, लाल चुन्नी और आसन के तौर पर लाल रंग के कपड़े का इस्तेमाल करें।
तुला राशि- तुला राशि के स्वामी भी शुक्र है अतः श्वेत कमल श्वेत, कनेर, गेंदा, गुड़हल, जूही, हरसिंगार, सदाबहार, केवड़ा, बेला चमेली आदि पुष्पों से भगवती की आराधना करके उनकी अनुकूलता और शुक्र की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
वृश्चिक राशि- इस राशि के स्वामी मंगल हैं अतः किसी भी प्रजाति के लाल पुष्प,पीले पुष्प एवं गुलाबी पुष्प से पूजा करके मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है लाल कमल से पूजा कर पाएं तो घर परिवार में समृद्धि तो बढ़ेगी ही मंगल की कृपा भी प्राप्त होगी।
धनु राशि- इस राशि के स्वामी बृहस्पति हैं अतः कमल पुष्प,कनेर,गुड़हल,गुलाब,गेंदा,केवडा और कनेर की सभी प्रजातियां के पुष्पों से मां का पूजन-अर्चन करके माँ का आशीर्वाद एवं बृहस्पति की भी और अधिक शुभता प्राप्त की जा सकती है।
कर्क राशि- कर्क राशि के स्वामी चंद्र हैं अतः श्वेत कमल,श्वेत कनेर,गेंदा,गुडहल,सदाबहार,चमेली, रातरानी और अन्य जितने भी प्रकार के श्वेत और गुलाबी पुष्प हैं उन्हीं से माँ की आराधना करके प्रसन्न करके चन्द्र जनित दोषों से मुक्त हुआ जा सकता है।
सिंह राशि- सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं जो सभी राशियों,ग्रहों, संवत्सरों और नक्षत्रों के भी स्वामी हैं इसलिए किसी भी तरह के पुष्प से कमल,गुलाब,कनेर,गुड़हल से माँ की पूजा करके कृपा पा सकते हैं,गुड़हल का पुष्प सूर्य और माँ दुर्गा को अति प्रिय है।
कन्या राशि- कन्या राशि के स्वामी बुध ही हैं अतः गुड़हल,गुलाब,गेंदा,हरसिंगार एवं किसी भी तरह के अति सुगंधित पुष्पों से मां दुर्गा की आराधना करके अपने मनोरथ पूर्ण करके बुध के साथ-साथ अन्य ग्रहों की अनुकूलता भी पा सकते हैं।
मेष राशि- मेष राशि के स्वामी मंगल हैं अतः इन्हें लाल रंग के पुष्प मां दुर्गा पर चढ़ाने चाहिए, इनमें, गुड़हल, गुलाब, लाल कनेर, लाल कमल अथवा किसी भी तरह के लाल पुष्प हों उससे पूजा करके मां भगवती को प्रसन्न कर मंगल जनित दोषों के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।
वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के स्वामी शुक्र हैं,माँ दुर्गा पर श्वेत कमल,गुडहल,श्वेत कनेर,सदाबहार,बेला,हरसिंगार आदि जितने भी श्वेत प्रजाति के पुष्प हैं उनसे मां की आराधना कर प्रसन्न किया जा सकता है। ऐसा कर पाने से शुक्रकी शुभता में वृद्धि होगी।
मिथुन राशि- मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं बुध को माँ दुर्गा का असीमित स्नेह प्राप्त है अतः मां की पूजा पीला कनेर,गुडहल, द्रोणपुष्पी, गेंदा और केवड़ा पुष्प से माँ की आराधना करके अभीष्ट कार्य सिद्ध भी कर सकते हैं और बुध की कृपा भी प्राप्त होगी।
आज चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ आज ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का पहला दिन है। मान्याता है आज के ही दिन भगवान ब्रह्रााजी ने समूची सृष्टि की रचना की थी, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इस बार नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त आज सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट था। अगर किसी कारण वश आप इस मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना कर सकते है।
1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
Navratri 2022 Durga Aarti: Jai Ambe Gauri Aarti In Hindi:
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
1. मां दुर्गा की नई मूर्ति
2. चौकी ,वस्त्र और एक आसन
3. एक नई लाल रंग की चुनरी
4. मिट्टी का एक कलश, आम या अशोक की हरी पत्तियां
5. लाल सिंदूर, गुलाब व गुड़हल का फूल और फूलों की माला
6. श्रृंगार की सामग्री
7. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और मां दुर्गा आरती की किताबें
8. अक्षत, गंगाजल, शहद, कलावा, चंदन, रोली, जटा नारियल
9. गाय का घी, धूप, अगरबत्ती, पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, कपूर, अगरबत्ती
10. दीपक, बत्ती के लिए रुई, केसर, नैवेद्य, पंचमेवा, गुग्गल, लोबान, जौ, फल, मिठाई, उप्पलें
11. एक हवन कुंड, हवन की सामग्री और आम की सूखी लकड़ियां
चैत्र नवरात्रि पर गुड़ी पड़वा का त्योहार भी बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्ट्र के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर वर्ष चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में हिदू नववर्ष मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें गुड़ी का मतलब विजय पताका से होता है, जबकि पड़वा का अर्थ प्रतिपदा तिथि से है। चैत्र प्रतिपदा तिथि पर हिंदू धर्म में गुड़ी की विशेषरूप से पूजा करते हैं। इसमें लोग इस दिन घर के मुख्य द्वार पर केले और आम के पत्तों से घर में वंदनवार और घर की सजावट करते हैं।
- वास्तुशास्त्र के अनुसार,उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है।
- शास्त्रों में नवरात्रि के पर्व पर कलश पर नारियल रखने के लिए नियम बताया गया है जिसके अनुसार कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ न हो। नारियल का मुख पूजन करने वाले व्यक्ति की ओर हो।
- नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अर्थात घटस्थापना के साथ ही अपने कुल देवी देवता की पूजा के साथ-साथ नवरात्रि की पूजा की शुरुआत करनी चाहिए।
- नवरात्रि पर दुर्गा जी की पूजा में कभी भी भूलकर दूर्वा,तुलसी,आंवला, आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। देवी का पूजा आराधना में हमेशा लाल रंग के फूलों व रंगों का ज्यादा प्रयोग करें।
- ज्योतिष के अनुसार चैत्र नवरात्रि में प्रतिपदा की सुबह द्वि-स्वभाव लग्न मीन होता है ऐसे में इस अवधि में भी घटस्थापना करना शुभ माना गया है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिति से नया विक्रम संवत आरंभ हो जाता है। आज से ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का पहला दिन है। इस बार नव संवत्सर शुरू होने पर सभी 9 ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा जो सैकड़ों साल बाद दुर्लभ संयोग है। इसके अलावा इस बार नए संवस्सर का नाम नल है और राजा शनिदेव औ मंत्री गुरु हैं।
इस बार तिथियों के क्षय न होने के कारण नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है। ऐसे में देवी दुर्गा के भक्तों को पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा का साधना और आराधना का मौका मिलेगा। इस बार चैत्र नवरात्रि पर बहुत ही शुभ योग में मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत रेवती नक्षत्र में होना बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा पूरे 9 दिनों तक कई तरह के शुभ योग बनेंगे। जिसमे मुख्य शुभ योग इस प्रकार है- सर्वार्थसिद्धि, पुष्य नक्षत्र, बुधादित्य, शोभन और रवि योग। नवरात्रि पर शुभ कार्य और खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है।
आज यानी 02 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि कलश स्थापना चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि के शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और देवी दुर्गा की आराधना व पूजा-पाठ शुरू करने से मां प्रसन्न होती हैं और साधक को सुख-समृद्धि और धन-वैभव का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज क्या है घटस्थापना या फिर चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त...
इस बार नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त 2 अप्रैल 2022,शनिवार को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यदि इस मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना कर सकते हैं।
प्रतिपदा तिथि की शुरुआत : 01 अप्रैल,2022 सुबह 11 बजकर 54 मिनट से
प्रतिपदा तिथि की समाप्ति : 02 अप्रैल, 2022 सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक
घटस्थापना मुहूर्त : 06:03 मिनट से 08:31 तक
अवधि : लगभग : 2 घंटे 27 मिनट
अभिजित मुहूर्त : 11:48 से 12:37 तक
नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं। क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्रि में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीकें और फिर वहां माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधि विधान से माता की पूजा करें।
नवरात्रि का त्योहार देवी दु्र्गा की पूजा,आराधना और तपस्या का त्योहार है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना करके मां शक्ति की उपासना शुरू जाती है। आखिरकार नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों करते हैं-
1- नवरात्रि पर कलश स्थापना करने से आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं खत्म हो जाती हैं।
2-कलश स्थापना से घर में सुख और शांति का वास होता है।
3- कलश स्थापना से घर पर भक्ति का माहौल बन रहा है जिससे पूजा में एकाग्रता आती है।
4- कलश स्थापना से बीमारियां दूर भागती हैं।
5- घर पर पूरे नौ दिनों तक कलश स्थापना और पूजा आराधना से तरह की बाधाएं सामाप्त हो जाती हैं।
शक्ति की आराधना और उपासना का पर्व नवरात्रि आज से आरंभ हो चुका है। तिथियों में किसी भी प्रकार का कोई क्षय न होने के कारण इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। जिसमें शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापना करके देवी दुर्गा की विधिवत पूजा आराधना शुरू हो जाती है। आज सभी को कलश स्थापना के लिए दो मुहूर्त ही मिलेंगे।
पहला मुहूर्त - सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक
दूसरा मुहूर्त- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक