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Happy Navratri Wishes Live: नवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें, भेजें शुभकामना संदेश, राशि अनुसार ऐसे करें मां दुर्गा की आराधना

Sat, 02 Apr 2022 12:11 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

खास बातें

Happy Chaitra Navratri, Hindu New Year, Gudi Padwa 2022 Wishes Live: आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना करके देवी दुर्गा की आराधना 9 दिनों तक की जाएगी। इस बार चैत्र नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है। मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन घोड़े पर हुआ है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार को बहुत ही पवित्र और शुभ फल देने वाला माना गया है। चैत्र नवरात्रि के साथ आज से नया हिंदू विक्रम संवत 2079 भी शुरू हो गया है। चैत्र नवरात्रि पर महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा भी बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
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chaitra navratri 2022: नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा तिथि पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री को समर्पित होता है - फोटो : अमर उजाला
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लाइव अपडेट

12:04 PM, 02-Apr-2022
hindu vikram samvat 2079: - फोटो : अमर उजाला

हिंदू नववर्ष के शुभकामना संदेश...

शाखों पर सजता नए पत्तों का श्रृंगार
मीठे पकवानों की होती चारो तरफ बहार
मीठी बोली से करते,सब एक दूजे का दीदार
चलो मनाएं हिंदू नव वर्ष इस बार
नौ दुर्गा के आगमन से सजता है नववर्ष
गुड़ी के त्योहार से खिलता है नववर्ष
कोयल गाती हैं नववर्ष का मल्हार
संगीतमय सजता प्रकृति का आकार
चैत्र की शुरुआत से होता नव आरंभ
यही है हिंदू नववर्ष का शुभारम्भ
नववर्ष की पवन बेला में
      है यही शुभ सन्देश
     हर दिन आए आपके जीवन में
     लेकर खुशियां विशेष
    हिंदू नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामना
 ऋतु से बदलता हिंदू साल
    नए वर्ष की छाती मौसम में बहार
    बदलाव दिखता प्रकृति में हर तरफ
   ऐसे होता हिंदू नव वर्ष का त्योहार

11:58 AM, 02-Apr-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

चैत्र नवरात्रि पर्व के शुभकामना संदेश...

इस चैत्र प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष 2079, गुड़ी पड़वा,उगादी और नवरात्रि के मौके पर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों  और पड़ोसियों को खास मैसेस से भेजें शुभकामनाएं.... 

पग-पग में फूल खिलें
ख़ुशी आप सबको इतनी मिले
कभी ना हो दुखों का सामना
यही है आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।

हमको था इंतज़ार वो घड़ी आ गई
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई
होगी अब मन की हर मुराद पूरी
हरने सारे दुख माता अपने द्वार आ गई।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

हो जाओ तैयार,माँ अम्बे आने वाली है
सजा लो दरबार माँ अम्बे आने वाली हैं
तन,मन और जीवन हो जायेगा पावन
माँ के कदमों की आहट से गूँज उठेगा आँगन..

10:53 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना - फोटो : amar ujala

दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ जरूर करें

आज से नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना की जाएगी। घर-घर में मां स्वयं विराजमान है। ऐसे में मां को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन सुबह और शाम को देवी दुर्गा की विधि पूजा-पाठ और आराधना की जाएगी। पूजा-पाठ के अलावा मां का आशीर्वाद पाने के लिए दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य ही करना चाहिए।  अगर किसी कारणवश दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ नहीं कर सकते तो कम से कम ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’ की एक माला हर रोज अवश्य करें।

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10:42 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि पर क्या करें

आज से यानी 2 अप्रैल,शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुके हैं और लगातार 9 दिनों तक माता दुर्गा की साधना-आराधना बड़े ही उत्साह और भक्ति भाव से की जाएगी। 10 अप्रैल को रामनवमी और 11 अप्रैल को पारण कर नवरात्रि का समापन किया जाएगा। आइए जानते हैं नवरात्रि पर क्या करें 

अखंड ज्योति
यदि आप मां जगदंबे को प्रसन्न करने करने के लिए उनके समक्ष 9 मिट्टी के दीपक में अखंड ज्योति जलाएं,तो विशेष फल मिलता है। लेकिन ध्यान रखें कि ये अखंड ज्योति बुझनी नहीं चाहिए।  

लाल फूल और लाल चुन्नी का प्रयोग
लाल रंग मां दुर्गा का सबसे प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए पूजा में लाल फूल, लाल चुन्नी और आसन के तौर पर लाल रंग के कपड़े का इस्तेमाल करें।

09:53 AM, 02-Apr-2022
Happy Navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

मकर राशि-
इस राशि के स्वामी शनि हैं अतः किसी भी तरह के नीले पुष्प,कमल,गेंदा,गुलाब,Bगुड़हल आदि से माँ शक्ति की पूजा-आराधना करके माँ की कृपादृष्टि एवं शनि जनित दुष्प्रभावों से बचते हुए ईष्ट कामयाबी हासिल की जा सकती है।
कुंभ राशि-
इस राशि के स्वामी भी शनिदेव ही हैं अतः नीले पुष्प,गेंदा,सभी प्रकार के कमल,गुड़हल,बेला,चमेली,रातरानी आदि से माँ भगवती की आराधना करके उनकी कृपा और शनिग्रह के दोष से मुक्त होते हुए मनोरथ भी पूर्ण किए जा सकते हैं।
मीन राशि-
मीन राशि के स्वामी बृहस्पति हैं,पीले कनेर की सभी प्रजातियां सभी प्रकार के कमल,गेंदा,गुलाब, गुड़हल की सभी प्रजातियों से पूजा करके माँ की कृपा प्राप्त करते हुए बृहस्पति जन्य दोषों से भी मुक्त हुआ जा सकता है।

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09:39 AM, 02-Apr-2022

तुला, वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए नवरात्रि पूजा विधि

तुला राशि- तुला राशि के स्वामी भी शुक्र है अतः श्वेत कमल श्वेत, कनेर, गेंदा, गुड़हल, जूही, हरसिंगार, सदाबहार, केवड़ा, बेला चमेली आदि पुष्पों से भगवती की आराधना करके उनकी अनुकूलता और शुक्र की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

वृश्चिक राशि- इस राशि के स्वामी मंगल हैं अतः किसी भी प्रजाति के लाल पुष्प,पीले पुष्प एवं गुलाबी पुष्प से पूजा करके मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है लाल कमल से पूजा कर पाएं तो घर परिवार में समृद्धि तो बढ़ेगी ही मंगल की कृपा भी प्राप्त होगी।

धनु राशि- इस राशि के स्वामी बृहस्पति हैं अतः कमल पुष्प,कनेर,गुड़हल,गुलाब,गेंदा,केवडा और कनेर की सभी प्रजातियां के पुष्पों से मां का पूजन-अर्चन करके माँ का आशीर्वाद एवं बृहस्पति की भी और अधिक शुभता प्राप्त की जा सकती है।

09:21 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना संदेश - फोटो : amar ujala

कर्क, सिंह और कन्या राशि वाले ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा

कर्क राशि- कर्क राशि के स्वामी चंद्र हैं अतः श्वेत कमल,श्वेत कनेर,गेंदा,गुडहल,सदाबहार,चमेली, रातरानी और अन्य जितने भी प्रकार के श्वेत और गुलाबी पुष्प हैं उन्हीं से माँ की आराधना करके प्रसन्न करके चन्द्र जनित दोषों से मुक्त हुआ जा सकता है।

सिंह राशि- सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं जो सभी राशियों,ग्रहों, संवत्सरों और नक्षत्रों के भी स्वामी हैं इसलिए किसी भी तरह के पुष्प से कमल,गुलाब,कनेर,गुड़हल से माँ की पूजा करके कृपा पा सकते हैं,गुड़हल का पुष्प सूर्य और माँ दुर्गा को अति प्रिय है।

कन्या राशि- कन्या राशि के स्वामी बुध ही हैं अतः गुड़हल,गुलाब,गेंदा,हरसिंगार एवं किसी भी तरह के अति सुगंधित पुष्पों से मां दुर्गा की आराधना करके अपने मनोरथ पूर्ण करके बुध के साथ-साथ अन्य ग्रहों की अनुकूलता भी पा सकते हैं।

09:15 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना - फोटो : amar ujala

नवरात्रि पर अपनी राशि स्वामी के अनुसार ऐसे करें देवी दुर्गा की पूजा-आराधना

मेष राशि- मेष राशि के स्वामी मंगल हैं अतः इन्हें लाल रंग के पुष्प मां दुर्गा पर चढ़ाने चाहिए, इनमें, गुड़हल, गुलाब, लाल कनेर, लाल कमल अथवा किसी भी तरह के लाल पुष्प हों उससे पूजा करके मां भगवती को प्रसन्न कर मंगल जनित दोषों के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।

वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के स्वामी शुक्र हैं,माँ दुर्गा पर श्वेत कमल,गुडहल,श्वेत कनेर,सदाबहार,बेला,हरसिंगार आदि जितने भी श्वेत प्रजाति के पुष्प हैं उनसे मां की आराधना कर प्रसन्न किया जा सकता है। ऐसा कर पाने से शुक्रकी शुभता में वृद्धि होगी।

मिथुन राशि- मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं बुध को माँ दुर्गा का असीमित स्नेह प्राप्त है अतः मां की पूजा पीला कनेर,गुडहल, द्रोणपुष्पी, गेंदा और केवड़ा पुष्प से माँ की आराधना करके अभीष्ट कार्य सिद्ध भी कर सकते हैं और बुध की कृपा भी प्राप्त होगी।

09:04 AM, 02-Apr-2022

दोपहर अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आज चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ आज ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का पहला दिन है। मान्याता है आज के ही दिन भगवान ब्रह्रााजी ने समूची सृष्टि की रचना की थी, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इस बार नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त आज सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट था। अगर किसी कारण वश आप इस मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना कर सकते है।
 

08:51 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना संदेश - फोटो : amar ujala

मां दुर्गा के मंत्र…

1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
      शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
      दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

08:45 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना संदेश - फोटो : amar ujala

इस शुभ नवरात्रि पर जरूर पढ़ें दुर्गा जी की आरती

Navratri 2022 Durga Aarti:  Jai Ambe Gauri Aarti In Hindi:

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

08:34 AM, 02-Apr-2022
navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला

चैत्र नवरात्रि पर नव संवत्सर 2079, हिंदू नववर्ष ,उगादी और गुड़ी पड़वा  का महत्व

आज पूरे देशभर में चैत्र नवरात्रि, प्रतिपदा उत्सव, नव संवत्सर 2079, हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा और उगादी का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि को जहां पूरे देशभर में मनाया जा रहा है तो वहीं गुड़ी पड़वा का त्योहार महाराष्ट्र में हिंदू नव वर्ष के आरंभ की खुशी में मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि नए हिंदू वर्ष का शुरूआत होता है। इसके अलावा उगादी का त्योहार भी आज मनाया जा रहा है। कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, और कोंकड़ में इस दिन को युगादि कहते हैं वहीं तमिलनाडु में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान में इस तिथि को थापना,कश्मीर में नवरेह और मणिपुर में साजिबु नोंगमा पांबा या मेइतेई चेइराओबा के नाम से मनाया जाता है।

08:24 AM, 02-Apr-2022
chaitra navratri 2022: - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि कलश स्थापना पूजा सामग्री 

1. मां दुर्गा की नई मूर्ति 
2. चौकी ,वस्त्र और एक आसन
3. एक नई लाल रंग की चुनरी
4. मिट्टी का एक कलश, आम या अशोक की हरी पत्तियां
5. लाल सिंदूर, गुलाब व गुड़हल का फूल और फूलों की माला
6. श्रृंगार की सामग्री
7.  दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और मां दुर्गा आरती की किताबें
8. अक्षत, गंगाजल, शहद, कलावा, चंदन, रोली, जटा नारियल
9. गाय का घी, धूप, अगरबत्ती, पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, कपूर, अगरबत्ती
10. दीपक, बत्ती के लिए रुई, केसर, नैवेद्य, पंचमेवा, गुग्गल, लोबान, जौ, फल, मिठाई, उप्पलें
11. एक हवन कुंड, हवन की सामग्री और आम की सूखी लकड़ियां

08:04 AM, 02-Apr-2022
GUDI PADWA 2022: - फोटो : अमर उजाला

चैत्र नवरात्रि पर गुड़ी पड़वा का महत्व

चैत्र नवरात्रि पर गुड़ी पड़वा का त्योहार भी बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्ट्र के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर वर्ष चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में हिदू नववर्ष मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें गुड़ी का मतलब विजय पताका से होता है, जबकि पड़वा का अर्थ प्रतिपदा तिथि से है। चैत्र प्रतिपदा तिथि पर हिंदू धर्म में गुड़ी की विशेषरूप से पूजा करते हैं। इसमें लोग इस दिन घर के मुख्य द्वार पर केले और आम के पत्तों से घर में वंदनवार और घर की सजावट करते हैं।

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07:53 AM, 02-Apr-2022
नवरात्रि 2022 शुभकामना - फोटो : amar ujala

नवरात्रि पर क्यों करते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ

आज से चैत्र नवरात्रि आरंभ गए हैं। इस बार पूरे 9 दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना होगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करके देवी उपासना और पाठ शुरू हो जाते हैं। नवरात्रि पर देवी नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा करने की परंपरा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सभी तरह सुख  और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 

सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें तीन चरित्र यानी हिस्सों में बांटा गया है। प्रथम चरित्र में मधु कैटभ वध की कथा है। मध्य चरित्र में सेना सहित महिषासुर के वध की कथा है और उत्तर चरित्र में शुम्भ निशुम्भ वध और सुरथ एवं वैश्य को मिले देवी के वरदान की कथा है। हर अध्याय के पाठ का अलग-अलग फल मिलता है। अलग-अलग मनोकामना के अनुसार दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए। 

प्रथम अध्याय के पाठ से चिंताओं से मुक्ति मिलती है और मन प्रसन्न रहता है। दूसरे अध्याय के पाठ से कोर्ट केस और विवादों में विजय प्राप्त होती है।  दुर्गा सप्तशती के तीसरे पाठ से शत्रुओं और विरोधियों से छुटकारा मिलता है।  मां दुर्गा की भक्ति और कृपा दृष्टि के लिए चौथे अध्याय का पाठ करना लाभदायक होता है। पांचवें अध्याय के पाठ से देवी की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। छठे अध्याय के पाठ से भय, शंका, ऊपरी बाधा से मुक्ति मिलती है।
विशेष मनोकामना पूर्ण करने के लिए सातवें अध्याय का पाठ करें। इस अध्याय में देवी द्वार चंड मुंड के वध की कथा है। मनचाहा साथी पाने के लिए आठवें अध्याय का पाठ करें। इस अध्याय में रक्तबीज के वध की कथा है। नवें अध्याय का पाठ खोए हुए व्यक्ति को वापस लाने के लिए और संतान सुख के लिए कारगर माना गया है। इस अध्याय में निशुंभ के वध की कथा है। दसवें अध्याय का पाठ करने से में शुंभ वध की कथा है। इस अध्याय के पाठ से रोग, शोक का नाश होता है।  ग्यारहवें अध्याय के पाठ से व्यापार में लाभ एवं सुख शांति की प्राप्ति होती है। बारहवें अध्याय के पाठ से मान-सम्मान एवं सुख संपत्ति का लाभ मिलता है। तेरहवें अध्याय के पाठ से देवी की भक्ति एवं कृपा दृष्टि प्राप्त होती है।

07:37 AM, 02-Apr-2022
चैत्र नवरात्रि 2022: - फोटो : अमर उजाला

नवरात्रि पर कलश स्थापना के नियम

- वास्तुशास्त्र के अनुसार,उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है। 
- शास्त्रों में नवरात्रि के पर्व पर कलश पर नारियल रखने के लिए नियम बताया गया है जिसके अनुसार कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ न हो। नारियल का मुख पूजन करने वाले व्यक्ति की ओर हो।
-  नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अर्थात घटस्थापना के साथ ही अपने कुल देवी देवता की पूजा के साथ-साथ नवरात्रि की पूजा की शुरुआत करनी चाहिए।
- नवरात्रि पर दुर्गा जी की पूजा में कभी भी भूलकर दूर्वा,तुलसी,आंवला, आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। देवी का पूजा आराधना में हमेशा लाल रंग के फूलों व रंगों का ज्यादा प्रयोग करें। 
- ज्योतिष के अनुसार चैत्र नवरात्रि में प्रतिपदा की सुबह द्वि-स्वभाव लग्न मीन होता है ऐसे में इस अवधि में भी घटस्थापना करना शुभ माना गया है।

07:32 AM, 02-Apr-2022
hindu vikram samvat 2079: - फोटो : अमर उजाला

आज से नया संवत्सर 2079 भी शुरू

हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिति से नया विक्रम संवत आरंभ हो जाता है। आज से ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का पहला दिन है। इस बार नव संवत्सर शुरू होने पर सभी 9 ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा जो सैकड़ों साल बाद दुर्लभ संयोग है।  इसके अलावा इस बार नए संवस्सर का नाम नल है और राजा शनिदेव औ मंत्री गुरु हैं।

07:23 AM, 02-Apr-2022

नवरात्रि पर शुभ योग 

इस बार तिथियों के क्षय न होने के कारण नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है। ऐसे में देवी दुर्गा के भक्तों को पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा का साधना और आराधना का मौका मिलेगा। इस बार चैत्र नवरात्रि पर बहुत ही शुभ योग में मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत रेवती नक्षत्र में होना बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा पूरे 9 दिनों तक कई तरह के शुभ योग बनेंगे। जिसमे मुख्य शुभ योग इस प्रकार है- सर्वार्थसिद्धि, पुष्य नक्षत्र, बुधादित्य, शोभन और रवि योग। नवरात्रि पर शुभ कार्य और खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है।

07:10 AM, 02-Apr-2022

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त और महत्व

आज यानी 02 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि कलश स्थापना चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि के शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और देवी दुर्गा की आराधना व पूजा-पाठ शुरू करने से मां प्रसन्न होती हैं और साधक को सुख-समृद्धि और धन-वैभव का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज क्या है घटस्थापना या फिर चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त...

इस बार नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त 2 अप्रैल 2022,शनिवार को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यदि इस मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना कर सकते हैं।

प्रतिपदा तिथि की शुरुआत : 01 अप्रैल,2022 सुबह 11 बजकर 54 मिनट से 
प्रतिपदा तिथि की समाप्ति : 02 अप्रैल, 2022 सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक

घटस्थापना मुहूर्त : 06:03 मिनट से 08:31 तक
अवधि : लगभग : 2 घंटे 27 मिनट 
अभिजित मुहूर्त : 11:48 से 12:37 तक

07:06 AM, 02-Apr-2022
chaitra navratri 2022: - फोटो : अमर उजाला

जानें नवरात्रि पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं। क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्रि में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीकें और फिर वहां माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधि विधान से माता की पूजा करें।
 

07:03 AM, 02-Apr-2022

नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों की जाती है?

नवरात्रि का त्योहार देवी दु्र्गा की पूजा,आराधना और तपस्या का त्योहार है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना करके मां शक्ति की उपासना शुरू जाती है। आखिरकार नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों करते हैं-

1- नवरात्रि पर कलश स्थापना करने से आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं खत्म हो जाती हैं।
2-कलश स्थापना से घर में सुख और शांति का वास होता है।
3- कलश स्थापना से घर पर भक्ति का माहौल बन रहा है जिससे पूजा में एकाग्रता आती है।
4- कलश स्थापना से बीमारियां दूर भागती हैं।
5- घर पर पूरे नौ दिनों तक कलश स्थापना और पूजा आराधना से तरह की बाधाएं सामाप्त हो जाती हैं।
 

06:52 AM, 02-Apr-2022

नवरात्रि कलश स्थापना के लिए आज सिर्फ दो मुहूर्त

शक्ति की आराधना और उपासना का पर्व नवरात्रि आज से आरंभ हो चुका है। तिथियों में किसी भी प्रकार का कोई क्षय न होने के कारण इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। जिसमें शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापना करके देवी दुर्गा की विधिवत पूजा आराधना शुरू हो जाती है। आज सभी को कलश स्थापना के लिए दो मुहूर्त ही मिलेंगे। 

पहला मुहूर्त - सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक

दूसरा मुहूर्त- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक

 

06:30 AM, 02-Apr-2022

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Chaitra Navratri 2022 Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Samagri And Mantra: आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए हैं। आज यानी 02 अप्रैल, शनिवार हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर घट स्थापना के साथ आने वाले नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा-आराधना के साथ विविधत रूप से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं। इस बार तिथियों के क्षय नहीं होने की वजह से चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेंगे। 10 अप्रैल को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है नवरात्रि पर देवी दुर्गा की साधना और पूजा-पाठ से सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा मन की शक्ति का विकास अच्छे तरीके से होता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। पूरे वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है जबकि दो गुप्त नवरात्रि होते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों का विशेष महत्व होता है, जिसमें पूरे नौ दिनों तक उपवास रहते हुए देव दुर्गा के नौ रूपों की शक्ति की आराधना विधि विधान के साथ की जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है,जो भक्तों को सुख-सौभाग्य, ऐश्वर्य और शौर्य प्रदान करती हैं। मान्यता है कि नौ देवियों की कृपा से अलग-अलग तरह के मनोरथ सिद्ध होते हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा तिथि पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए जौ बोने और कलश स्थापन-पूजन के साथ मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है।

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