Hanuman Jayanti 2024: हनुमान जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त
हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की विशेष रूप से पूजा की जाती है। शुभ मुहूर्त में बजरंगबली की पूजा करने से विशेष शुभफलों की प्राप्ति होती है।
पहला शुभ मुहूर्त- आज 23 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 03 मिनट से दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक।
दूसरा शुभ मुहूर्त- 23 अप्रैल को रात 08 बजकर 14 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 35 मिनट तक
ब्रह्रा मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक
आज हनुमान जन्मोत्सव पर ग्रहों का शुभ संयोग
आज रामभक्त भगवान हनुमान का जन्मोत्सव है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बजरंगबली का प्रागट्य चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि,मंगलवार और चित्रा नक्षत्र में हुआ था। आज हनुमान जयंती पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग बना हुआ है। आज मंगलवार है और पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के साथ ही शुरू हो गई है। आज सिद्धि, पारिजात, पर्वत और अधियोग का संयोग बना हुआ। इन चार शुभ योग के कारण हनुमान जी की पूजा बहुत ही शुभफलदायी हो गई है।
आज मंगलवार होने के साथ-साथ रवि योग, चित्रा नक्षत्र का संयोग भी है। इसके अलावा ग्रहों का संयोग भी दुर्लभ रूप से बना हुआ है। मीन राशि जो कि गुरु ग्रह की राशि है, इसमें कई ग्रहों की युति बनी हुई है। मीन राशि में पंचग्रही योग का संयोग है। इसके अलावा मेष राशि में बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग, मंगल के उच्च राशि मीन में होने से मालव्य योग भी बना है। इतने सारे शुभ योग में हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की पूजा करने पर विशेष फलदायी रहेगा।
हनुमान जन्मोत्सव पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए पूजा का संकल्प लें। फिर उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछा दें। फिर चौकी पर हनुमान जी और भगवान राम की प्रतिमा रखें। फिर हनुमान जी को जनेऊ, लंगोट,चोला, सिंदूर, तुलसीपत्र और पान का बीड़ा चढ़ाते हुए हनुमान जी की पूजा आरंभ करें।
कलयुग के देवता हैं भगवान हनुमान
चैत्र पूर्णिमा पर उत्तर भारत में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व आज मनाया जा रहा है। जबकि दक्षिण भारत में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। हनुमान जी सात चिरंजीवी में से एक हैं। हनुमान जी कलयुग के देवता हैं और आज भी इस पृथ्वी पर अमर हैं और निवास कर रहे हैं। हनुमान जी की आयु एक कल्प यानी 4.32 अरब साल हैं और रुद्रावतार हैं। हनुमान जी की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं जल्द पूरी होती है।
हनुमान जयंती पूजा के लिए सामग्री
भगवान हनुमान कलयुग के देवता हैं। माना जाता है कि भगवान हनुमान आज भी इस पृथ्वी पर सशरीर विचरण करते हैं। हनुमान जयंती पर हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की पूजा करने के लिए लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, सिंदूर, चमेली का तेल, जनेऊ, चोला, लंगोट, गुलाब के फूल, तुलसीपत्र और पान का बीड़ा।
हनुमान जन्मोत्सव पर आज जरूर करें ये उपाय
हनुमान जन्मोत्सव पर कुछ उपाय करने से सुख,शांति, आरोग्य और लाभ की प्राप्ति होती है।
समस्याओं से मुक्ति के लिए
हनुमानजी को राम का नाम बेहद प्रिय है।भगवान राम की पूजा करने से हनुमानजी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से राम का नाम लिखें और इसे चढ़ाएं ,ऐसा करने से आपको सभी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।इसके अलावा पीपल के 11 पत्तों पर चन्दन या रोली से राम का नाम लिखकर उसकी माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें।
कोर्ट-कचहरी या अन्य कष्टों से बचने के लिए
शास्त्रों में हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना गया है। बजरंगवली को चोला चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति मिलती है। जो भक्त हनुमानजी को विधि-विधान से चोला चढ़ाते हैं उसके जीवन में भूत-पिशाच,शनि व ग्रहबाधा,रोग-शोक,कोर्ट-कचहरी के विवाद,दुर्घटना या कर्ज,चिंता आदि परेशान नहीं करते।
Hanuman Jayanti 2024: आज हनुमान जी को जरूर अर्पित करें जनेऊ
आज कलयुग के देवता माने जाने वाले भगवान हनुमान का जन्मोत्सव है। भगवान हनुमान जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। हनुमान जन्मोत्सव पर इनकी विशेष पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हनुमान जी को जनेऊ जरूर अर्पित करना चाहिए। हनुमानजी अपने कंधे पर मूंज का जनेऊ धारण करते हैं। यदि आपको किसी कार्य में लगातार असफलता मिल रही है तो हनुमान जी को जनेऊ चढ़ाएं। जनेऊ चढ़ाने से दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है।
आज उत्तर भारत में हनुमान जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भारी भीड़ है। हनुमानजी को सिंदूर अति प्रिय है इसलिए मंगलवार और शनिवार के अलावा हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमानजी को घी के साथ सिन्दूर अर्पित करने से भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है और आपके बिगड़े काम बन जाते हैं। हनुमान जयंती पर व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमानजी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है।
Hanuman Jayanti 2024: बजरंगबली की प्रसन्न करने के लिए पढ़ें हनुमान चालीसा का पाठ
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज,निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु ,जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
Hanuman Janmotsav 2024: बाबा महाकाल को हनुमान स्वरूप में किया गया श्रृंगार
महाबली हनुमान के स्वरूप में सजे बाबा महाकाल।
- फोटो : अमर उजाला
आज देशभर में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जा रहा है। इस मौके पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती की गई। महाकाल का दूध, दही, गंगाजल, फलों आदि से अभिषेक किया गया। आज हनुमान जयंती के मौके पर महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया है जिसमें बाबा भोलेनाथ को हनुमानजी का स्वरूप दिया गया। देखें तस्वीरें
Hanuman Janmotsav Shubh Muhurat : हनुमान जी की आरती
हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
Hanuman Jayanti 2024 Wishes: हनुमान जन्मोत्सव पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें ये शुभकामना संदेश
Hanuman Jayanti 2024: हनुमान जी को अर्पित करें तुलसी और पीपल के पत्तों की माला
हनुमानजी को 'राम' का नाम बहुत प्रिय है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से हनुमानजी बहुत प्रसन्न होते हैं। पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से 'राम' नाम लिखें और इसे हनुमानजी को चढ़ाएं। यह कार्य करने से सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमानजी को तुलसी की माला चढ़ाई जाती है। इससे कष्ट और संकट मिट जाते हैं। मंगलवार के दिन बजरंगबली को तुलसी की माला चढ़ाने से व्यक्ति को आर्थिक लाभ होता है।
Hanuman Jayanti 2024: कैसे करें हनुमान जी को प्रसन्न
हनुमान जी जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। हनुमान जी की कृपा मिलने से कार्यो में आने वाली हर एक बाधा फौरन ही खत्म हो जाती है। हनुमान जी कृपा पाने के लिए और उन्हें प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। हनुमान की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, विद्या, बल और सफलता की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ जरूर करें।
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Hanuman Jayanti 2024: चमेली के तेल का दीपक जलाने पर प्रसन्न होंगे भगवान हनुमान
आज हनुमान जी को प्रसन्न करने और उनकी विशेष कृपा पाने के लिए हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली को चमेली के तेल का दीपक अर्पित करें।
Hanuman Janmotsav 2024 : जानिए कैसे पड़ा हनुमान नाम ?
Hanuman Janmotsav 2024
- फोटो : अमर उजाला
आज यानी 23 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव पर भगवान हनुमान की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है। ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी के बचपन का नाम मारुति था। उन्हें उनके पिता पवन देव और माता अंजनी के पुत्र के रूप में जाना जाता है। एक दिन पवन पुत्र अपनी निद्रा से जागे तो उन्हें तीव्र भूख लगी। उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा, जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े। दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे। उस दिन अमावस्या का दिन था और राहु सूर्य पर ग्रहण लगाने वाला था, लेकिन जब तक सूर्य को ग्रहण लग पाता, उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। सारे संसार में अन्धकार व्याप्त हो गया। मनुष्य से लेकर सभी देवता तक बड़े व्याकुल हो गए और हनुमानजी को मनाने के लिए आ गए लेकिन, मारुति हठ करके बैठ गए।
सभी देवताओं ने देवराज इंद्र से सहायता मांगी। इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो, इंद्र ने विवश होकर अपने वज्र से मारुति के हनु यानी ठोड़ी पर प्रहार किया, जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए। वहीं वज्र के प्रहार से पवन पुत्र मूर्छित होकर पृथ्वी पर आ गिरे और उनकी ठुड्डी टेढ़ी हो गई। जब पवन देवता को इस बात की जानकारी हुई तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी शक्ति से पूरे संसार में वायु के प्रवाह को रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि-त्राहि मच उठी। इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करने पहुंचे कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें। सभी देवताओं ने पवन देव की प्रसन्नता के लिए बाल हनुमान को पहले जैसा कर दिया और साथ ही बहुत सारे वरदान भी दिए। देवताओं के वरदान से बालक हनुमान और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गए, लेकिन वज्र के चोट से उनकी हनु टेढ़ी हो गई, जिसके कारण उनका एक नाम हनुमान पड़ा।
Hanuman Jayanti 2024: जब हनुमानजी ने अपना सीना चीर दिया...
हनुमानजी आज भी इस धरती पर विचरण करते हैं। हनुमान जी कलयुग के देवता हैं। कलयुग में हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है। नकारात्मक ऊर्जा एवं बुरी शक्तियां हनुमानजी की आराधना करने से भाग जाती हैं। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद दरबार में उपस्थित सभी लोगों को उपहार दिए जा रहे थे। इसी दौरान माता सीता ने रत्न जड़ित एक बेश कीमती माला अपने प्रिय हनुमान को दी। प्रसन्न चित्त से उस माला को लेकर हनुमान जी थोड़ी दूरी पर गए और उसे अपने दांतों से तोड़ते हुए बड़ी गौर से माला के मोती को देखने लगे। उसके बाद उदास होकर एक-एक कर उन्होंने सारे मोती तोड़-तोड़ कर फेंक दिए।
यह सब दरबार में उपस्थित लोगों ने देखा तो सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। जब हनुमान जी मोती तो तोड़ कर फेंक रहे थे तब लक्ष्मणजी को उनके इस कार्य पर बहुत क्रोध आया,इस बात को उन्होंने श्री राम का अपमान समझा। उन्होंने प्रभु राम से कहा कि ‘हे भगवन, हनुमान को माता सीता ने बेशकीमती रत्नों और मनकों की माला दी और इन्होंने उस माला को तोड़कर फेंक दिया।
जिसके बाद भगवान राम बोले, ‘हे अनुज तुम मुझे मेरे जीवन से भी अधिक प्रिय हो, जिस कारण से हनुमान ने उन रत्नों को तोड़ा है यह उन्हें ही मालूम है। इसलिए इस जिज्ञासा का उत्तर हनुमान से ही मिलेगा। तब राम भक्त हनुमान ने कहा ‘मेरे लिए हर वो वस्तु व्यर्थ है जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम ना हो। मैंने यह हार अमूल्य समझ कर लिया था, लेकिन जब मैंने इसे देखा तो पाया कि इसमें कहीं भी राम-नाम नहीं है। उन्होंने कहा मेरी समझ से कोई भी वस्तु श्री राम के नाम के बिना अमूल्य हो ही नहीं सकती। अतः मेरे हिसाब से उसे त्याग देना चाहिए। यह बात सुनकर भ्राता लक्ष्मण बोले कि आपके शरीर पर भी तो राम का नाम नहीं है तो इस शरीर को क्यों रखा है? हनुमान तुम इस शरीर को भी त्याग दो। लक्ष्मण की बात सुनकर हनुमान ने अपना वक्षस्थल नाखूनों से चीर दिया और उसे लक्ष्मणजी सहित सभी को दिखाया, जिसमें श्रीराम और माता सीता की सुंदर छवि दिखाई दे रही थी। यह घटना देख कर लक्ष्मण जी से आश्चर्यचकित रह गए,और अपनी गलती के लिए उन्होंने हनुमानजी से क्षमा मांगी ।
Hanuman Chalisa in Hindi: सूर्यदेव से मिला हनुमान जी को तेज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान को अमरता का वरदान मिला है। हनुमानजी कलयुग में साक्षात और जाग्रत देवता हैं। यह भक्तों की पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर हर तरह की मनोकामनाओं का पूरा करते हैं। हनुमान जी भगवान शिव के ग्याहरवें अवतार हैं और उन्हें कई तरह की शक्तियां मिली है। मान्यता है कि सूर्यदेव से हनुमान जी को तेज प्राप्त है। सूर्य देव ने उन्हें अपने तेज का सौवां अंश दिया है इसी कारण हनुमान जी के सामने कोई नहीं टिक पाता।
Hanuman Chalisa Paath: भगवान हनुमान को यमराज से मिला वरदान
भूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै...भगवान हनुमान का नाम लेते ही सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां फौरन ही भाग जाती हैं। धर्मराज यमराज से भी हनुमान जी को वरदान मिला हुआ है, उन्हें कभी भी यमराज का शिकार नहीं होने का वरदान प्राप्त है।
Hanuman Arti Lyrics: हनुमान जी क्यों रखते हैं अपने पास गदा
हनुमान जी दुष्टों को संहार और भक्तों की समस्याओं का निदान गदा से करते हैं। हनुमान जी हाथ में हमेशा गदा होती है। क्या आपको ये मालूम है हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुई है। दरअसल बजरंगबली को गदा कुबेर देव मिली थी और साथ में ये भी आशीर्वाद दिया कि हनुमान को कभी भी किसी युद्ध में परास्त नहीं किया जा सकता है।
Hanuman Jayanti : भगवान शंकर से हनुमानजी को मिला वरदान
हनुमान से शंकरजी के अवतार हैं और भोलेनाथ से हनुमान जी को वरदान मिला है कि हनुमान जी को किसी भी अस्त्र से नहीं मारा जा सकता।
Hanuman Jayanti 2024 Wishes: अपनों को दें हनुमान जयंती की शुभकामनाएं
जिनके मन में बसे हैं श्रीराम
जिनके तन में हैं श्री राम
जग में हैं वो ही सबसे बलवान
ऐसे प्यारे हैं मेरे हनुमान
जय श्रीराम, जय श्रीराम… जय हनुमान
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू को डरना
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
Hanuman Jayanti 2024 Date: मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी पूजा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार मंगलवार के दिन ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी की उपासना से सुख, शांति,आरोग्य और लाभ की प्राप्ति होती है और नकारात्मक शक्तियां भी हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करती। हनुमानजी की महिमा और भक्तहितकारी स्वभाव को देखते हुए तुलसीदासजी ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा की रचना की थी। इस चालीसा का नियमित या मंगलवार,शनिवार को पाठ करने के बहुत से चमत्कारी लाभ मिलते हैं। मंगल ,शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति कि लिए भी हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी है।
Hanuman Jayanti 2024: हनुमंत उपासना के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ
मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना गया है। बजरंगवली को चोला चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति मिलती है। जो भक्त हनुमानजी को विधि-विधान से चोला चढ़ाते हैं उसके जीवन में भूत-पिशाच,शनि व ग्रहबाधा, रोग-शोक,कोर्ट-कचहरी के विवाद,दुर्घटना या कर्ज, चिंता आदि परेशान नहीं करते।
Hanuman Jayanti 2024 Date: हनुमानजी के नाम के जाप का महत्व
आज हनुमान जयंती के दिन मंगलवार भी है। जो बजरंगबली की आराधना के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है।हनुमान जी के 108 नाम है। उनमें से प्रमुख 12 नाम हैं। ग्रंथों के अनुसार जो व्यक्ति इन 12 नामों का स्मरण करता है, तो उसके सारे दुःख, सारी तकलीफें और समस्याओं का अंत होता है। जो व्यक्ति नित्य नियम से हनुमान जी का नाम लेते हैं, उन्हें इष्ट की प्राप्ति होती है। हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, फाल्गुनसखा, पिंगाक्ष, अमितविक्रम, उदधिक्रमण, सीताशोकविनाशन, लक्ष्मण प्राणदाता, दशग्रीवदर्पहा
Hanuman Chalisa Paath: जानें हनुमान चालीसा के पाठ से फायदे
आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और आज रामभक्त हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हनुमानजी कलयुग के देवता हैं और जल्द प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। हनुमान चालीसा में वीर हनुमान को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल और शक्तिशाली स्तुति है। इसकी हर चौपाई अलग अलग रूप से शक्तिशाली है। जीवन की हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा द्वारा किया जा सकता है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
- आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय से मिलती है मुक्ति।
- अगर व्यक्ति के जीवन में आर्थिक परेशानियां चल रही हों तो नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें आर्थिक मुश्किलें दूर हो जाती हैं।
- रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करने विध्न होते हैं दूर।
- रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकारात्मकता दूर होती है।
- हनुमान चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
- हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
Hanuman Jayanti 2024: भगवान हनुमान को इंद्रदेव से मिला ये वरदान
शास्त्रों के अनुसार इंद्र और हनुमान जी के बीच हुए युद्ध में इंद्र ने हनुमान जी को यह वरदान दिया था कि भविष्य में कभी उनके वज्र का असर बजरंगबली पर नहीं होगा।
Hanuman Mantra: हनुमानजी को प्रसन्न करने के चमत्कारी मंत्र
कलयुग के देवता हनुमान जी जल्द प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ मंत्रों का जाप भी लाभकारी माना जाता है।
ॐ हं हनुमंते नम:
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट।
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा ।
ॐ ऋणमोचन हनुमते नमः ।
हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने के लाभ
हनुमान जी को सिंदूर बेहद प्रिय है। इसे चढ़ाने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना गया है। हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से जीवन में भूत-पिशाच, शनि व ग्रह बाधा,रोग-शोक,कोर्ट-कचहरी के विवाद, दुर्घटना या कर्ज,चिंता आदि परेशान नहीं करते।
हनुमानजी की आराधना करने से मिलती हैं अष्ट सिद्धि और नव निधि
हनुमान चालीसा का पाठ करने पर एक चौपाई आती है ‘अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, असवर दीन जानकी माता’। शास्त्रों में बताया गया है कि माता सीता ने हनुमानजी को आठ सिद्धियां और नौ निधियां का आशीर्वाद दिया था।
Hanuman Jayanti 2024 Date: बिगड़े काम बनाने के लिए करें उपाय
यदि आपके काम बिगड़ रहे है या फिर मेहनत करने के बाद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो आप मंगलवार के दिन किसी हनुमान जी के मंदिर में जाकर गुड़ चने का प्रसाद चढ़ाये तथा उसे मंदिर में ही भक्तों को बांटे तथा शेष प्रसाद स्वयं व अपने परिवार को ग्रहण करायें। इस प्रकार आपको लगातार गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन ऐसे करें व्रत का पारण
हनुमान जन्मोत्सव के व्रत का पारण करने के लिए शाम के समय गेहूं के आटे की पूड़ी, पराठा या हलुआ खा सकते हैं। इस दौरान नमक का सेवन भूलकर भी न करें। आप चाहें तो फलों का सेवन कर सकते हैं।
पूजा में इन मंत्रों का करें जाप
भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र
हं हनुमंते नम:।
स्वास्थ्य के लिए मंत्र
नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट दूर करने का मंत्र
ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
कर्ज मुक्ति के मंत्र
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
बजरंगबली की पूजा के दौरान महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
- महिलाएं हनुमान जी की पूजा के दौरान उनकी मूर्ति का स्पर्श न करें। आप दूर रहकर ही बजरंगबली को प्रणाम कर सकती हैं।
- महिलाएं इस दौरान भूलकर भी भगवान हनुमान को पंचामृत का स्नान न करवाएं।
- महिलाओं को हनुमान जी को चोला और सिंदूर अर्पित नहीं करना चाहिए। आप दूर से ही फूल माला पुरुष के हाथों से अर्पित करा सकती हैं।
- इस दौरान आप बजरंगबली के लिए प्रसाद बना सकती हैं। हालांकि, उसका भोग पुरुष के हाथों से ही लगवाएं।
- महिलाएं बजरंग बाण का पाठ न करें। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। आप दूर से ही हनुमान जी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना कर सकती है।
हनुमान जन्मोत्सव पर इन चीजों की करें खरीदारी
वानर की प्रतिमा
हनुमान जन्मोत्सव पर आप अपने घर के लिए वानर की प्रतिमा भी ला सकते हैं। इस बात से सभी परिचित हैं कि, वानर सेना ने भगवान राम को लंका विजय करने में मदद की थी। ऐसे में वानर की प्रतिमा लाना कल्याणकारी प्रभाव हो सकता है।
तांबे का छोटा सा फरसा
इस दौरान आप तांबे को छोटा फरसा भी घर ला सकते हैं। कहीं कहीं फरसे की पूजा भी की जाती है। इसकी आकृति त्रिशूल जैसी होती है। फरसा को घर लाने से वास्तु दोष दूर होता है।
हनुमान जी का प्रिय अस्त्र गदा
हनुमान जन्मोत्सव के शुभ दिन पर आप गदा खरीद सकते हैं। सभी जानते हैं कि, हनुमान जी को गदा प्रिय है ऐसे में आप मंदिर में इसे लाकर रख सकते हैं। इससे हनुमान जी प्रसन्न होकर आपके ऊपर कृपा कर सकते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन करें ये 3 कार्य
राम नाम चढ़ाएं
हनुमान जी की पूजा के दौरान हमेशा राम नाम चढ़ाना चाहिए। आप भी इस दिन पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से 'राम' नाम लिखें। बाद में उसे हनुमान जी को चढ़ा दें।
आटे का दीपक
हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के दौरान बजरंगबली के सामने आटे का दीपक जलाएं। ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिल सकती है।
पान का बीड़ा
हनुमान जन्मोत्सव के दिन मंदिर में पूजा-पाठ के बाद बजरंगबली को पान का बीड़ा अर्पित करें। ऐसा करने से हनुमान जी को प्रसन्न कर सकते हैं।
कोर्ट-कचहरी या अन्य कष्टों से मुक्ति के लिए
शास्त्रों में हनुमान जी को मंगलवार और शनिवार के दिन चोला चढ़ाना शुभ माना जाता है। बजरंगबली को चोला चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया से छुटकारा मिलता है। हनुमानजी को विधि-विधान से चोला चढ़ाने से जीवन में भूत-पिशाच, शनि व ग्रहबाधा, रोग-शोक, कोर्ट-कचहरी के विवाद, दुर्घटना या कर्ज, चिंता आदि परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
कुछ ही देर में हनुमान जी की पूजा का दूसरा शुभ मुहूर्त, पढ़िए शक्तिशाली स्तुति
जय बजरंगी जय हनुमाना,
रुद्र रूप जय जय बलवाना,
पवनसुत जय राम दुलारे,
संकट मोचन सिय मातु के प्यारे॥
जय वज्रकाय जय राम केरू दासा,
हृदय करतु सियाराम निवासा,
न जानहु नाथ तोहे कस गोहराई, राम भक्त तोहे राम दुहाई॥
विनती सुनहु लाज रखहु हमारी,
काज कौन जो तुम पर भारी,
अष्टसिद्धि नवनिधि केरू भूपा,
बखानहु कस विशाल अति रूपा॥
धर्म रक्षक जय भक्त हितकारी,
सुन लीजे अब अरज हमारी,
भूत प्रेत हरहु नाथ बाधा,
सन्तापहि अब लाघहु साधा॥
मान मोर अब हाथ तुम्हारे,
करहु कृपा अंजनी के प्यारे,
बन्दतु सौरभ दास सुनहु पुकारी,
मंगल करहु हे मंगलकारी॥
रोगों से मुक्ति के लिए करें ये उपाय
आज रात गंगा जल से स्नान करें। बजरंगबली को चमेली का तेल अर्पित करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। रोगों से मुक्ति के लिए हनुमान जी से प्रार्थना करें। ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
पूजा विधि
रात आठ बजे से हनुमान जी की पूजा का दूसरा शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहा है। पूजा करने से पहले स्नान करना चाहिए और इसके बाद लाल रंग के साफ सुथरे वस्त्र धारण करें। फिर हनुमान जी को लाल रंग का पुष्प अर्पित करें। देसी घी का दीपक जला लें। सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर और चोला चढ़ाएं। गुड़, चना और नारियल भी अर्पित करें। बजरंगबली को बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इसके बाद आखिरी में बजरंगबली की आरती करें।
हनुमान जी की पूजा का दूसरा शुभ मुहूर्त
हनुमान जन्मोत्सव पर श्रीराम भक्त हनुमान के पूजन का दूसरा मुहूर्त समीप आ गया है। आज हनुमान जी की विधि विधान से पूजा करने के 2 मुहूर्त निकाले गये थे। इसमें पहला मुहूर्त सुबह 9:03 बजे से दोपहर 1:58 बजे तक था। अब कुछ ही देर में रात्रि 8 बजकर 14 मिनट पर पूजन का दूसरा शुभ मुहूर्त आरम्भ हो जाएगा और रात्रि 09 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
हनुमान जयंती पर महिलाएं करें पूजा, तो रखें इन बातों का ध्यान
हनुमान जन्मोत्सव पर यदि महिलाएं बजरंगबली की पूजा अर्चना करती हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- महिलाओं को हनुमान जी के सामने सिर नहीं झुकाना चाहिए क्योंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे और उन्होंने माता सीता को अपनी मां माना था । कहते है पवनपुत्र हनुमान स्वयं महिलाओं के आगे झुक सकते हैं। '
- हनुमान जी की प्रतिमा पर महिलाओं को ना कभी जल और ना कभी भी वस्त्र चढ़ाने चाहिए।
- महिलाओं को हनुमान जी की पूजा में कभी सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए और ना ही उनके चरण छूने चाहिए। हनुमान जी को कुछ भी अर्पित करते समय उनके सामने रखना चाहिए।
हनुमान जी विवाह के बाद भी थे ब्रह्मचारी
पाराशर संहिता में हनुमान जी और सुवर्चला के विवाह की कथा मिलती है। कथा के अनुसार हनुमान जी सूर्य देव से विद्या हासिल कर रहे थे। सूर्य देव के पास 9 विद्याएं थीं जिसमें से उन्होंने 5 विद्याएं हनुमान जी को सिखा दीं । लेकिन बाकी 4 विद्याओं को सीखने के लिए विवाहित होना ज़रूरी था। बिना विवाह के ये विद्याएं हासिल नहीं हो सकती थी। हनुमान जी तो बाल-ब्रह्मचारी थे। इस समस्या का सूर्य देव ने हल निकाला। उन्होंने अपनी शक्ति से एक कन्या को जन्म दिया,जिसका नाम सुवर्चला था। इसके बाद सूर्यदेव ने हनुमान जी सुर्वचला से विवाह करने का प्रस्ताव दिया। सूर्यदेव ने कहा विवाह के बाद सुवर्चला तपस्या में लीन हो जाएगी और वह ब्रह्मचारी का जीवन ही व्यतीत करेंगे। पवन पुत्र से विवाह के बाद सुवर्चला तपस्या में चली गई। इस तरह श्री राम भक्त के ब्रह्मचर्य में कोई रुकावट नहीं आई।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता’ पंक्ति हनुमानजी के बारे में ही है। पुराणों के अनुसार, केवल वही ऐसे देव हैं, जो अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों से सम्पन्न हैं। अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व तथा वशित्व ‘अष्टसिद्धियां’ कहलाती हैं। नव रत्नों को ही नौ निधि कहा जाता है। ये हैं— पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व। सांसारिक जगत के लिए ये निधियां भले ही बहुत महत्व रखती हों, लेकिन भक्त हनुमान के लिए तो केवल राम नाम की मणि ही सबसे ज्यादा मूल्यवान है।
ऐसे करें व्रत का पारण
हनुमान जन्मोत्सव के व्रत का पारण करने के लिए शाम के समय गेंहू के आटे की पूड़ी, पराठा या हलुआ खा सकते हैं। इस दौरान नमक का सेवन भूलकर भी न करें। आप चाहें तो फलों का सेवन कर सकते हैं।