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Chaitra Navratri 2026 : कल चैत्र नवरात्रि की द्वितीया तिथि, मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की होती है पूजा

Thu, 19 Mar 2026 04:01 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chaitra Navratri 2026 Puja Vidhi: कल 20 मार्च है और चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती है। 
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चैत्र नवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Puja Vidhi Updates in Hindi: आज 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की पावन शुरुआत हो चुकी है। देवी दुर्गा की आराधना और साधना का यह महापर्व 27 मार्च को राम नवमी के साथ पूर्ण होगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है, जिससे नवरात्रि पूजा का विधिवत आरंभ माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं। इस बार गुरुवार से नवरात्रि शुरू होने के कारण मान्यता है कि मां दुर्गा पालकी में सवार होकर पधारी हैं, जो शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा के नियम और इसका धार्मिक महत्व…
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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि 

चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ:  19 मार्च , प्रातः 06:52 मिनट पर 
चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, प्रातः 04:52 मिनट पर 
उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च 2026 से मान्य होगा।

Chaitra Navratri 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 

चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:52 मिनट से प्रातः 07:43 मिनट तक। 
कलश स्थापना के लिए दूसरा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त:  दोपहर 12: 05 मिनट से 12: 53 मिनट तक है।

Chaitra Navratri 2026: हिन्दू नववर्ष 2083 

चैत्र नवरात्रि के साथ ही आज से नया हिंदु विक्रम संवत 2083 भी शुरू हो चुका है। हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया हिंदी कैलेंडर की शुरुआत होती है। इस बार नए विक्रम संवत्सर के राजा बृहस्पति  और मंत्री मंगल देव हैं। ज्योतिषीय गणना के आधार पर इस वर्ष को रौद्र संवत्सर कहा जा रहा है। 

Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च 2026 शुभ संयोग

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। इस दिन हिंदू नववर्ष के साथ-साथ गुड़ी पड़वा भी मनाया जाएगा। इस तिथि पर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। वहीं मीन राशि में सूर्य और शुक्र की युति होने से शुक्र आदित्य राजयोग का निर्माण भी हो रहा है, जो बेहद शुभ है।
 

चौघड़िया के अनुसार शुभ समय

शुभ (उत्तम): सुबह 06:26 से 07:57 
लाभ (उन्नति): दोपहर 12:29 से 02:00 
अमृत (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 02:00 से 03:30 

 

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

  • चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। 
  • दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दी

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन झंडेवाला देवी मंदिर में आरती।

चैत्र नवरात्रि 2026 की शुभकामनाएं

चैत्र नवरात्रि 2026 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!


ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

मां दुर्गा के 9 अवतार आपको
9 गुणों - शक्ति, खुशी, मानवता, शांति, ज्ञान, भक्ति,
नाम, प्रसिद्धि और स्वास्थ्य के साथ आशीर्वाद दें।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!


 

माता के नौ स्वरूप

माता के नौ स्वरूपों के बारे में पुराणों में लिखा है।

प्रथम शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेती कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।


 

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कैलेंडर 2026


19 मार्च 2026-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
20 मार्च 2026-  मां ब्रह्मचारिणी पूजा
21 मार्च 2026-  मां चंद्रघंटा पूजा
22 मार्च 2026- मां कुष्मांडा पूजा
23 मार्च 2026-   मां स्कंदमाता पूजा
24 मार्च 2026-   मां कात्यायनी पूजा
25 मार्च 2026-  मां कालरात्रि पूजा
26 मार्च 2026-  मां महागौरी पूजा
27  मार्च 2026-  मां सिद्धिदात्री पूजा

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में घट स्थापना विधि 

  • नवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक स्वस्तिक बना लें।
  • एक साफ माता की चौकी रखें और उसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
  • अब देवी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
  • देवी को लाल चुनरी पहनाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
  • अब आप मां दुर्गा का पूरा श्रृंगार करें और अंत में इत्र अवश्य लगाएं।
  • इसके बाद कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी का पात्र लेकर उसमें साफ मिट्टी भर दें।
  • इसमें कुछ जौ के बीज डालें और साफ पानी में गंगाजल मिलाकर इस पर थोड़ा छिड़काव करें।
  • फिर तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का, चावल और कुछ बताशे डाल दें।
  • अब लोटे पर कलावा बांधें और उस पर टिका लगाएं।
  • 7 अशोक के पत्ते लेकर उन्हें लोटे में डालें।
  • अब एक पानी वाला नारियल लेकर उसे चुनरी पहनाएं और उसे कलावे से बांध दें।
  • चुनरी वाले नारियल को लोटे के ऊपर रखें और उसे रोली से तिलक लगाएं।
  • इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित कर लें।
  • अब शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और धूप उठा लें।
  • धूप पर लौंग का जोड़ा रखें और कपूर जलाएं।
  • देवी को फल, मिठाई और सूखे मेवे भोग के रूप में अर्पित करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लें और अंत में आरती करें।

Chaitra Navratri 2026 Colors: नवरात्रि में किस दिन पहनें कौन सा रंग?

  • पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में पीला रंग शुभ माना जाता है।
  • दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के लिए हरा रंग धारण करना अच्छा रहता है।
  • तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में ग्रे (स्लेटी) रंग पहनना उचित है।
  • चौथे दिन मां कूष्मांडा के लिए नारंगी रंग शुभ माना जाता है।
  • पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में सफेद रंग धारण करना चाहिए।
  • छठे दिन मां कात्यायनी के लिए लाल रंग पहनना लाभकारी होता है।
  • सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा में नीला रंग शुभ माना जाता है।
  • आठवें दिन मां महागौरी के लिए गुलाबी रंग पहनना अच्छा रहता है।
  • नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा में बैंगनी रंग धारण करना शुभ होता है।

Maa Durga Ke 9 Roop: मां दुर्गा के 9 स्वरूप

  • पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो शक्ति, स्थिरता और आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है, जो तप, त्याग और सच्चे समर्पण का प्रतीक हैं।
  • तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो साहस, शांति और बुराई के विनाश की शक्ति देती हैं।
  • चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना होती है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
  • पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो मातृत्व, संरक्षण और समृद्धि का प्रतीक हैं।
  • छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होती है, जो शक्ति, आत्मज्ञान और साहस प्रदान करती हैं।
  • सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो नकारात्मक शक्तियों के नाश और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
  • आठवें दिन मां महागौरी की आराधना होती है, जो पवित्रता, करुणा और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ी हैं।
  • नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सिद्धि, सफलता और आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान करती हैं।

Maa Ambe Ji Ki Aarti

Chaitra Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


Maa Ambe Ji Ki Aarti: अम्बे तू है जगदम्बे काली...जय दुर्गे खप्पर वाली, यहां पढ़ें पूजा के लिए आरती

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि पर कलश स्थापना क्यों ?

आज नवरात्रि के पहले दिन यानी शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ नौ दिनों चलने वाला धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाता है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। इस कलश में जल और वायु दोनों ही तत्व होते हैं। साथ ही कलश के पास दीपक रखने का विधान है, जो अग्नि तत्व का प्रतीक होता है। इस तरह के कलश में ब्रह्माण्ड की सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करना ही घट स्थापना कहलाता है। यह सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक माना जाता है।

Chaitra Navratri Puja Vidhi Hindi: घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त क्या है?

अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना के लिए दोपहर 12.05 बजे से 12.53 बजे के बीच का समय रहेगा। 

Durga Chalisa Lyrics: श्री दुर्गा चालीसा... नमो नमो दुर्गे सुख करनी...

दुर्गा चालीसा
 
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
 
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
 
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
 
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
 
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
 
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
 
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
 
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
 
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
 
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
 
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
 
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
 
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
 
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
 
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
 
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
 
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
 
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
 
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
 
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
 
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
 
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
 
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
 
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
 
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
 
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
 
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
 
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
 
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
 
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
 
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
 
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
 
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
 
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
 
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
 
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
 
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
 
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
 
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
 
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
 
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
 
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

Chaitra Navratri 2026: शैलपुत्री भोग

आज यानी प्रतिपदा तिथि को मां शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां को खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

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Chaitra Navratri Day 1: मां शैलपुत्री का स्वरूप 

पर्वतराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। वृषभ पर विराजमान इस माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित हैं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहीं से योग साधना का आरंभ होता है, जो साधक के जीवन में स्थिरता और संतुलन स्थापित करता है।

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में रखने जा रहे हैं पूरे नौ दिन के व्रत ? जानें इससे जुड़े जरूरी नियम

Chaitra Navratri 2026 Muhurat: चैत्र नवरात्रि योग 

पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग, नाग करण और मीन राशि में चंद्रमा है। 

Chaitra Navratri Vrat Niyam: नवरात्रि व्रत नियम

  • नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना अवश्य करनी चाहिए। मान्यता है कि, इससे घर में देवी दुर्गा का वास बना रहता है।
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और मन, वचन व कर्म की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
  • नवरात्रि के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए।
  • प्रतिदिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करें और दुर्गा चालीसा का पाठ पढ़ें। इससे विशेष पुण्य फल मिलता है।
  • नवरात्रि के दौरान अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
  • पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। इसके पास जूते-चप्पल या गंदगी जैसा कोई भी सामान न रखें।
  • नवरात्रि के समय घर में मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
  • अगर अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो भूलकर भी घर को खाली न छोड़े।

Maa Shailputri Puja Vidhi: मां शैलपुत्री पूजा विधि

  • प्रथम नवरात्रि के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। 
  • इसके बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें। 
  • इसके पश्चात रोली, अक्षत, पुष्प और विशेष रूप से सुगंधित फूल अर्पित करें। 
  • माता को सफेद वस्त्र, घी का दीपक और नैवेद्य के रूप में शुद्ध घी या उससे बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। 
  • पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जप करें और श्रद्धा भाव से आरती करें। 
  • अंत में अपनी मनोकामना के साथ देवी का ध्यान करें।
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Chaitra Navratri Day 1 Color: मां शैलपुत्री का प्रिय रंग

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, जो खुशहाली, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है।

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 Maa Shailputri Mantra: मां शैलपुत्री बीज मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Chaitra Navratri 2026: आज से चैत्र नवरात्रि शुरू, जानें पूजा मुहूर्त और कलश स्थापना विधि

Maa Shailputri Puja Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा विधि 

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह शुद्ध करें।
  • शुभ समय में विधिपूर्वक कलश स्थापना से पूजा की शुरुआत करें।
  • मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें।
  • कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालकर ऊपर नारियल रखें।
  • मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें कुमकुम, अक्षत, सफेद पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।
  • श्रद्धा भाव से मंत्र जाप करें और चाहें तो दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी करें।

Maa Shailputri Aarti: मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार। 
करें देवता जय जयकार।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

Chaitra Navratri: आज से देश में नवरात्रि की धूम; पहले दिन मां शैलपुत्री की करें आराधना, जानें पूजा विधि-मंत्र

Maa Shailputri Katha: मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। जब माता सती को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो उन्होंने वहां जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण जाना उचित नहीं है, लेकिन सती के आग्रह पर उन्होंने अनुमति दे दी। जब माता सती अपने मायके पहुंचीं, तो वहां उनका सम्मान नहीं हुआ। उनकी बहनों ने उनका मजाक उड़ाया और राजा दक्ष ने भी भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं। अपने पति का अपमान सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने क्रोध व दुःख में आकर योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना से भगवान शिव अत्यंत दुखी और क्रोधित हुए। उन्होंने यज्ञ का नाश कर दिया। बाद में माता सती ने पुनर्जन्म लिया और पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मीं, जिन्हें मां शैलपुत्री कहा गया। आगे चलकर उनका विवाह फिर से भगवान शिव से हुआ। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विशेष रूप से की जाती है और उन्हें घी का भोग अर्पित किया जाता है।
Maa Shailputri Vrat Katha: नवरात्रि के पहले दिन पढ़ें मां शैलपुत्री की व्रत कथा, पूजा का मिलेगा संपूर्ण फल
 

Chaitra Navratri 2026:दुर्गा सप्तशती पाठ

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। 
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। 
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।

सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥

शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे 
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। 
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥

रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। 
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥

सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। 
एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥

Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा को करना है प्रसन्न तो नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ

Chaitra Navratri 2026 Ashtami And Navmi: चैत्र नवरात्रि पर इस दिन है अष्टमी-नवमी तिथि

चैत्र नवरात्रि आज से शुरू है जो 27 मार्च तक चलेगी। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी तिथि होगी। कुछ लोग अष्टमी तो कुछ लोग नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन आदि करते हैं। 

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Chaitra Navratri 2026: आज माता पालकी पर सवार होकर आईं जानिए इसके संकेत

पृथ्वीलोक पर माता रानी आज पालकी पर सवार होकर आईं है। देवी पुराण के अनुसार, जब माता पालकी पर सवार होकर आती हैं तो इसे देश-दुनिया के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवी दुर्गा पालकी पर सवार होकर आती हैं तो इससे बीमारियां, युद्ध, उन्मांद और आर्थिक गतिविधियों में मंदी के संकेत होते है। 

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में जौ क्यों बोया जाता है ?

नवरात्रि के पहले दिन यानी शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना का विशेष महत्व होता है और इसकी के साथ ही जौ बोने की परंपरा होती है, जौ बोने की परंपरा के पीछे पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं है जो जीवन में सुख, समृद्धि और धनधान्य की प्राप्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जौ को पहला अन्न माना जाता है।  जौ को बोने से नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुर सही रूप से विकसित होते हैं, तो वर्ष भर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी।
 

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर किन राशि वालों को मिलेगा लाभ

  • मेष राशि: आपकी मेहनत और साहस के बल पर अचानक धन लाभ और करियर में नई शुरुआत के योग बन रहे हैं।
  • वृषभ राशि: यह समय आपके लिए लाभकारी है, नवरात्रि की कृपा से सुख-सुविधाओं में वृद्धि और प्रयासों का अच्छा फल मिलेगा।
  • सिंह राशि: आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और इस समय लिए गए हर निर्णय में सफलता मिलने के संकेत हैं।
  • कन्या राशि: किसी खास व्यक्ति से मुलाकात और परिवार के साथ समय बिताने से आपको मानसिक सुकून मिलेगा।
  • तुला राशि: कानूनी मामलों में राहत मिलेगी और देवी की कृपा से आपके अटके हुए काम पूरे होते नजर आएंगे।
  • वृश्चिक राशि: यह समय आपके लिए स्थिर और लाभदायक रहेगा, जिसमें कार्यक्षेत्र और व्यापार में धीरे-धीरे प्रगति होगी।
  • धनु राशि: करियर और व्यापार में नए अवसर मिलेंगे और जीवन में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है।
  • मकर राशि: नई ऊर्जा के साथ आपको मेहनत का फल मिलेगा और नए काम में सफलता के संकेत हैं।

Navratri Akhand Jyoti: चैत्र नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने की सही विधि

  • सबसे पहले स्नान कर पूजा स्थान को साफ करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। 
  • इसके बाद उस पर चावल या गेहूं से स्वास्तिक बनाएं और उसके ऊपर दीपक स्थापित करें। 
  • दीपक में बत्ती रखकर उसमें घी डालें और मां दुर्गा का स्मरण करते हुए ज्योति प्रज्वलित करें।
  • वास्तु के अनुसार घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। 
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Akhand Jyoti Jalane Ka Niyam: अखंड ज्योत से जुड़े नियम

  • दीपक जलाते समय “शुभं करोति कल्याणम्…” मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है। 
  • दीपक को अनाज के ढेर पर रखना चाहिए। 
  • घी का दीपक दाईं ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखना चाहिए। 
  • ध्यान रखें कि ज्योत जलने के दौरान घर को खाली न छोड़ें।
  • समय-समय पर घी या तेल डालते रहें, ताकि दीपक बुझने न पाए। 
  • नौ दिनों के बाद ज्योत को स्वयं शांत होने देना चाहिए।

Navratri Fasting Rules: नवरात्रि व्रत में कितनी बार खाएं?

  • निर्जला व्रत में पूरे दिन या नौ दिनों तक बिना अन्न के केवल पानी या फल पर रहा जाता है।
  • यह व्रत कठिन होता है, इसलिए इसे आमतौर पर अनुभवी लोग ही करते हैं।
  • फलाहार व्रत में दिन में 1–2 बार फल, दूध, दही, मेवा और व्रत वाले आहार लिए जाते हैं।
  • कुट्टू और सिंहाड़े के आटे से बने खाद्य पदार्थ फलाहार में शामिल किए जाते हैं।
  • कई लोग दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पूजा के पश्चात एक बार भोजन करते हैं।
  • व्रत के दौरान ऊर्जा बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी होता है।
  • गेहूं, चावल जैसे सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता।
  • सात्विकता बनाए रखने के लिए लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से दूरी रखी जाती है।
  • निर्जला व्रत न होने पर पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेना चाहिए।
  • व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन को संयमित और सकारात्मक बनाना होता है।
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Chaitra Navratri Day 2: देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना

नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जाती है। यह रूप अत्यंत पवित्र, शांत और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मां ब्रह्मचारिणी को साधना और संयम की प्रेरणा देने वाली देवी के रूप में बताया गया है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होते हैं, जो उनके तपस्वी स्वरूप को दर्शाते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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