आज से चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है जो 30 मार्च तक चलेगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व के विशेष महत्व होता है जिसमें नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। एक साल में कुल चार बार नवरात्रि का पर्व आता है जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और एक शारदीय और एक चैत्र नवरात्रि होते हैं। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रि का त्योहार मनाते है जबकि गुप्त नवरात्रि तांत्रिक क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है।
नवरात्रि पर क्या करें
1-नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
2- नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
3-नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
4-देवी मां को प्रतिदिन करें जल अर्पित
5-नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
6- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
7- ब्रह्राचर्य का पालन करें
नवरात्रि पर क्या न करें
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। घर के सदस्य अगर नौ दिनों तक व्रत नहीं रखे हुए हैं तो भी नौ दिनों तक भोजन में छौंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार चैत्र नवरात्रि पर 9 दिनों तक पूजा, व्रत और उपासना करने पर मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जो लोग नवरात्रि पर सभी 9 दिनों तक व्रत नहीं रख पाते है उन्हें पहले और अष्टमी तिथि पर नवरात्रि का व्रत जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए अखंड ज्योतिष जरूर जलाएं और नवरात्रि के हर दिन पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।
शास्त्रों के अनुसार 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्या पूजन में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को घर पर बुलाकर उनका पूजन और भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं।
आज से अगले 9 दिनों तक देवी दुर्गा पृथ्वी पर वास करेंगे और अपने भक्तों की हर एक मनोकामनाओं की पूरा करेंगी। साल 2023 की चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन नाव की सवारी के साथ हुआ है। दरअसल इस वर्ष चैत्र नवरात्रि बुधवार के दिन से प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा की सवारी नौका है। नौका पर सवारी करते हुए मां का पृथ्वी लोक में आने से जीवन में सुख और समृद्धि आएगी।
आज चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि है और माता भगवती के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा आराधना के साथ नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार नवरात्रि पंचक लगने के दौरान प्रारंभ हुई है। पंचक की शुरुआत 19 मार्च से हुई है जो 23 मार्च तक रहेगी। ऐसे में नवरात्रि के पहले 2 दिन पंचक में देवी दुर्गा का आराधना की जाएगी। शास्त्रों में पंचक के दौरान शुभ कार्य करना वर्जित होता है लेकिन इस दौरान पूजा-पाठ में किसी तरह की रोकथाम नहीं होती है।
प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ आने वाले नौ दिनों तक माता की पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि पर हर दिन उपवास, पूजा-आराधना, पाठ, आरती और मां को भोग अर्पित कर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नवरात्रि पर माता को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशी का पाठ अवश्य किया जाता है। नवरात्रि पर जो भी दुर्गा सप्तशी का विधिवत पाठ करता है उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। दुर्गा सप्तशी में देवी को प्रसन्न करने के कई सिद्धि मंत्र है जिसका जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
22 से 30 मार्च तक देवी दुर्गा की पूजा उपासना और साधना का महापर्व नवरात्रि मनाया जाएगा। आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और कलश स्थापना के साथ विधि-विधान से देवी मां की उपासना का नौ दिनों का व्रत साधना चलेगी। नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशी के पाठ का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसारनवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शांति, धन, सुख- समृद्धि, यश और मान- सम्मान की प्राप्ति होती है।
सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें तीन चरित्र यानी हिस्सों में बांटा गया है। प्रथम चरित्र में मधु कैटभ वध की कथा है। मध्यम चरित्र में सेना सहित महिषासुर के वध की कथा है और उत्तर चरित्र में शुम्भ निशुम्भ वध और सुरथ एवं वैश्य को मिले देवी के वरदान की कथा है। हर अध्याय के पाठ का अलग-अलग फल मिलता है। अलग- अलग मनोकामना के अनुसार दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए।
प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ आने वाले नौ दिनों तक माता की पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि पर हर दिन उपवास, पूजा-आराधना, पाठ, आरती और मां को भोग अर्पित कर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नवरात्रि पर माता को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशी का पाठ अवश्य किया जाता है। नवरात्रि पर जो भी दुर्गा सप्तशी का विधिवत पाठ करता है उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। दुर्गा सप्तशी में देवी को प्रसन्न करने के कई सिद्धि मंत्र है जिसका जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
आज से 9 दिनों तक नवरात्रि का पर्व चलेगा, जिसमें देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि के पहले दिन क्यों घटस्थापना की जाती है? शास्त्रों के अनुसार कलश स्थापना के पीछे ऐसी मान्यता है कि कलश में भगवान विष्णु का रूप होता है। इसके अलावा कलश में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए नवरात्रि पर सभी देवी -देवताओं को पूजा में आमंत्रित करने के लिए घट की पूजा होती है।
आज से हिंदू कैलेंडर के नए वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो गई है। चैत्र का महीना हिंदू कैलैंडर का पहला और फाल्गुन आखिरी महीना होता है। विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने शुरू की थी। हिंदू नववर्ष के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें- Vikram Samvat 2080: आज से शुरू हुआ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080, जानिए हिंदू कैलेंडर की 10 खास बातें
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन ही घटस्थापना के साथ ही जौ बोए जाते हैं। मान्यता है कि इसके बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी रह जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की तब वनस्पतियों में जो फसल सबसे पहले विकसित हुई थी वो जौ ही थी। यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ पूरे विधि-विधान से जौ बोई जाती है।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना और साधना का महापर्व आरंभ हो जाता है। नवरात्रि में देवी पूजन के लिए कई तरह की सामग्रियों की जररूत होती है।
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है और माता को मालपुए का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और मनोबल भी बढ़ता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान होता है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के स्वरूप की पूजा से मन की एकाग्रता मिलती है। इस दिन मां को मां को दूध से बनी मिठाइयां, खीर आदि का भोग लगाएं, जिससे माता चंद्रघंटा अधिक प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से धन-वैभव व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है साथ ही इनकी पूजा-अर्चना से मानव सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाते हैं।
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नवरात्रि के दूसरे दिन मां के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को भोग में शक्कर और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यह भोग लगाने से माँ दीर्घायु होने का वरदान देती हैं।वइनके पूजन-अर्चना से आपके व्यक्तित्व में वैराग्य, सदाचार और संयम बढ़ने लगता है।
आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। नवरात्रि में देवी दूर्गा की पूजा-आराधना का विधान होता है। जिसमें लगातार नौ दिनों तक देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा उपासना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। माता के नौ स्वरूपों के बारे में पुराणों में लिखा हैं।
प्रथम शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेती कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
हिंदू धर्म में चैत्र महीने की प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है जिसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा पर लोग अपने घर के बाहर गुड़ी बांधते हैं। गुड़ी का अर्थ होता है पताका और पड़वा से मतलब प्रतिपदा तिथि से होता है।
आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही विधि-विधान के साथ मां दूर्गा की पूजा उपासना प्रारंभ हो जाती है। आइए जानते हैं आज कैसे करें कलश स्थापना...
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये
शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्रयम्बके गौरी
नारायणी नमोस्तुते
चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते...
चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं
या देवी सर्वभूतेषु..शक्तिरूपेण संस्थिता:
नमस्तस्यै.. नमस्तस्यै.. नमस्तस्यै नमो नम:
चैत्र नवरात्रिकी हार्दिक शुभकामनाएं
चैत्र नवरात्रि के साथ ही आज से नया हिंदु विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो चुका है। हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया हिंदी कैलेंडर की शुरुआत होती है। इस बार नए विक्रम संवत्सर के राजा बुध और मंत्री शुक्र देव हैं।
इस वर्ष नवरात्रि की तिथियां पूरे 9 दिनों तक रहेगी जिस कारण से देवी की आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे। 29 मार्च को महाष्टमी और 30 मार्च को रामवनवमी रहेगी। लगातार दूसरे वर्ष नवरात्रि की तिथियों में कोई कटौती नहीं होगी।
आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए हैं। मान्यताओं के अनुसार आज यानी प्रतिपदा तिथि पर देवी दुर्गा धरती पर पधारेंगी और भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगी। यह चैत्र नवरात्रि 30 मार्च को चलेगी। इस बार कलश स्थापना के 3 मुहूर्त मिलेंगे। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 30 मिनट से लेकर तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा और आखिरी मुहूर्त शाम 4 बजकर 15 मिनट से शाम 6 बजे तक रहेगा।
आज से देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए हैं। इस पर्व पर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों तक यानी 22 मार्च से 30 मार्च तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री देवी, ब्रह्मचारिणी देवी, चंद्रघंटा देवी, कुष्मांडा देवी, स्कंदमाता देवी, कात्यायनी देवी, कालरात्रि देवी, महागौरी देवी, और सिद्धिदात्री देवी की पूजा का विधान बताया गया है की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हुए विधिवत रूप से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। आइए जानते इस चैत्र नवरात्रि पर कब करें कलश स्थापना और किसी तरह के करें देवी दुर्गा की पूजा-साधना।