Basant Panchami Puja Vidhi Subh Muhurat: वसंत पंचमी पूजा शुभ मुहूर्त
वसंत पंचमी पर बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा का विधान होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 14 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर खत्म होगी। इस तरह से सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।
Basant Panchami Puja Vidhi: वसंत पंचमी पूजा विधि
- वसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होकर पीले या सफेद रंग का वस्त्र पहनें। उसके बाद सरस्वती पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मां सरस्वती को गंगाजल से स्नान कराएं। फिर उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं।
- इसके बाद पीले फूल, अक्षत, सफेद चंदन या पीले रंग की रोली, पीला गुलाल, धूप, दीप, गंध आदि अर्पित करें।
- इस दिन सरस्वती माता को गेंदे के फूल की माला पहनाएं। साथ ही पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
- इसके बाद सरस्वती वंदना एवं मंत्र से मां सरस्वती की पूजा करें।
- आप चाहें तो पूजा के समय सरस्वती कवच का पाठ भी कर सकते हैं।
- आखिर में हवन कुंड बनाकर हवन सामग्री तैयार कर लें और ‘ओम श्री सरस्वत्यै नमः: स्वहा” मंत्र की एक माला का जाप करते हुए हवन करें।
- फिर अंत में खड़े होकर मां सरस्वती की आरती करें।
वसंत पंचमी पर करें सरस्वती वंदना
सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का महत्व
आज 14 फरवरी 2024 को पूरे देशभर में वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी के दिन बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का प्रगट हुईं थी। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है और विशेष रूप से पीले रंग के पुष्प, पीले वस्त्र और पीले भोग अर्पित किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं वसंत पंचमी पर पीले रंग का क्या महत्व होता है। दरअसल पीला रंग अहिंसा, प्रेम, आनंद और ज्ञान का प्रतीक है। श्रीविष्णु और उनके अवतारों को पीताम्बर धारण करवाने का यह प्रमुख कारण है। यह रंग सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज को तो निखरता ही है, साथ ही पीले वस्त्र धारण करने से देव गुरु वृहस्पति भी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पीला रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना गया है। इस दिन पीले रंग के प्रयोग से सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज में वृद्धि होती है।
आज वसंत पंचमी पर बना खास योग
हिंदू धर्म में वसंत पंचमी के त्योहार का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा आराधना की जाती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार 14 फरवरी को वसंत पंचमी पर बहुत ही शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा है। इस दिन मकर राशि में मंगल, शुक्र और बुध ग्रह की युति हो रही है। चंद्रमा मेष राशि में होकर गुरु के साथ गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है। मंगल के उच्च राशि में जाने से रूचक योग का निर्माण हो रहा है। वहीं रवि योग और रेवती नक्षत्र का संयोग भी बना हुआ है।
वसंत पंचमी पर क्यों होती है कामदेव और रति की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा आराधना करने का विधान होता है। इसी के साथ इस दिन कामदेव और रति की भी पूजा होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन कामदेव और रति स्वर्ग से पृथ्वी पर आते हैं। उनके आगमन से ही धरती पर बसंत ऋतु का आगमन होता है। इनके कारण ही मन में एक नई उमंग जागती है, प्रकृति भी हरियाली और फूलों का श्रृंगार करती है। बसंत पंचमी पर सृष्टि में प्राणियों के बीच प्रेम भावना बनी रहे, इसलिए बसंत पंचमी कामदेव और रति की पूजा अवश्य की जाती है।
वसंत पंचमी पर पवित्र नदियों में स्नान की परंपरा
वसंत पंचमी पर्व पर आज मध्य प्रदेश के महाकाल मंदिर में की गई भस्म आरती
वसंत पंचमी पर प्रयागराज के संगम में स्नान के लिए भक्तों की भीड़
वसंत पचंमी पर जरूर करें यह काम
आज देशभर में वसंत पचंमी का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाई जा रही है। सुबह से ही सभी पवित्र नदियों में स्नान और मंदिरों में पूजा अर्चना जारी है। शास्त्रों में वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है, यानी इस तिथि पर बिना शुभ मुहूर्त देखे कोई भी काम किया जा सकता है। इस दिन घर पर मां सरस्वती की मूर्ति और बांसुरी जरूर लानी चाहिए। साथ ही विधि-विधान के साथ देवी सरस्वती की पूजा और उन्हे पीले रंग के वस्त्र और भोग अर्पित करना चाहिए।
वसंत पचंमी का त्योहार छात्रों और कलाकारों के लिए खास
Happy Basant Panchami 2024
- फोटो : अमर उजाला
हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ज्ञान, विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है। वसंत पचंमी का त्योहार विद्यार्थियों, कला और साहित्य के क्षेत्र जुड़े लोगों के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन घरों, शिक्षण संस्थानों और कला केंद्रों में सभी कलाओं से परिवपूर्ण मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वसंत पचंमी के दिन छोटे बच्चों से अक्षर लिखवाकर शिक्षा का शुभारंभ भी किया जाता है। इसके अलावा कला और साहित्य से जुड़े लोग देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं।
वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
Happy Basant Panchami 2024
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी की तिथि कल यानी 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से आरंभ हो गई है, जिसका समापन आज दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार देशभर में वसंत पंचमी का त्योहार आज मनाया जा रहा है। ऐसे में वसंत पचंमी पर देवी सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस समय के दौरान पूजा संपन्न की जा सकती है।
वसंत पंचमी के दिन जरूर करें यह उपाय
- वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा करने के दौरान उनको पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई या खीर जरूर अर्पित करना चाहिए।
- वसंत पंचमी के पर्व के अवसर पर देवी सरस्वती को केसर या पीले चंदन का टीका लगाएं और पीले वस्त्र भेंट करें।
- मां सरस्वती के मूल मंत्र 'ॐ ऎं सरस्वत्यै ऐं नमः' का जाप करना चाहिए।
वसंत पंचमी का त्योहार विद्यार्थियों के लिए खास
वसंत पंचमी के दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती की कृपा से ही व्यक्ति को विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्या हर व्यक्ति के लिए सबसे अधिक महत्व रखती है। इसी वजह से वसंत पंचमी का पर्व छात्रों, कला व साहित्य जगत के लिए विशेष माना जाता है।
- विद्या और ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान इस दुनिया में कोई भी वस्तु नहीं है।
- विद्या के जरिए संसार की सबसे मूल्यवान वास्तु भी खरीदी जा सकती है।
- विद्या एक ऐसी अदृश्य चीज है जो हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाती है।
- विद्या से हमारा स्वभाव विनम्र बनता है, विनम्रता से सज्जनता आती है। सज्जनता से घर-परिवार और समाज में सम्मान मिलता है।
- विद्या सबसे अनमोल होती है। इसे कोई चोरी नहीं कर सकता।
- दूसरों को विद्या देने पर ये और ज्यादा बढ़ती है। इसका कोई भार नहीं होता है और न ही इसका बंटवारा किया जा सकता है।
जानिए देवी सरस्वती के अवतरण की पौराणिक कथा
सनातन धर्म में तीन देवियों की हमेशा चर्चा और पूजा होती है। देवी लक्ष्मी, देवी पार्वती और मां सरस्वती। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर देवी सरस्वती के प्रागट्य पर्व के रूप में वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। क्या आपको पता है देवी सरस्वती कैसे प्रगट हुईं और इन्हे ज्ञान, कला और विद्या की देवी क्यों कहा जाता है?सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीवों खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया हुआ है।
भगवान विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद एक चतुर्भुजी स्त्री के रूप में अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थीं। ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया,संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया व पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणा वादिनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि की प्रदाता हैं, संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी कहलाती हैं।
विद्या की देवी मां सरस्वती का स्वरूप
- सरस्वती के सभी अंग श्वेताभ हैं,जिसका तात्पर्य यह है कि सरस्वती सत्वगुणी प्रतिभा स्वरूपा हैं। इसी गुण की उपलब्धि जीवन का अभीष्ट है।
- मां सरस्वती हमेशा सफेद वस्त्रों में होती हैं। इसके दो संकेत हैं पहला हमारा ज्ञान निर्मल हो, विकृत न हो। जो भी ज्ञान अर्जित करें वह सकारात्मक हो। दूसरा संकेत हमारे चरित्र को लेकर है। विद्यार्थी जीवन में कोई दुर्गुण हमारे चरित्र में न हो। वह एकदम साफ हो।
वसंत पंचमी एक अबूझ मुहूर्त
वसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। विद्यारंभ,नवीन विद्या प्राप्ति और गृह-प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयकर माना गया है। इस दिन किए गए कार्य और मां का पूजन करने से बुद्धि और धन की निरंतर प्राप्ति होती है।
मां सरस्वती के हाथ में कमल क्यों है सुशोभित
शास्त्रों में देवी सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना गया है। मां सरस्वती के स्वरूप में उनके हाथ में कमल है। कमल गतिशीलता का प्रतीक है। यह निरपेक्ष जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कमल से ये भी संदेश मिलता है कि हमारे चारों तरफ कैसा भी वातावरण क्यों न हो, उसका प्रभाव हमारे तन-मन पर नहीं आना चाहिए। शुद्ध मन में ही ईश्वर का निवास होता है।
बसंत पंचमी पूजा मंत्र
- ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः
- ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः
- ओम ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः
- सरस्वती ॐ सरस्वत्यै नमः
- पुस्तकधृत ॐ पुस्त कध्रते नमः।
- ज्ञानमुद्रा ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः।
- महाविद्या ॐ महाविद्यायै नमः।
वसंत पंचमी पर बना शुभ योग
आज देशभर में वसंत पंचमी का त्योहार उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-पाठ और सभी पवित्र नदियों में स्नान किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि वसंत पचंमी के दिन ही देवी सरस्वती प्रगट हुईं थीं। पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान ब्रह्राजी ने सृष्टि की रचना की तब उन्हे इसमें कुछ कमी महसूस हुई। तब देवी सरस्वती हाथों में वीणा के लेकर पूरी सृष्टि में स्वर के साथ ज्ञान लेकर प्रगट हुईं। इस बार वसंत पंचमी के दिन कई तरह के शुभ राजयोग का निर्माण हुआ है। वसंत पचंमी के दिन पारिजात, अमल और शश नाम का राजयोग बना हुआ है। इसी के साथ आज सरस्वती पूजा के लिए सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक का समय शुभ रहेगा।
वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती को जरूर अर्पित करें ये पांच चीजें
छात्रों, कलाकारों और आमजन के लिए सरस्वती पूजा का विशेष महत्व होता है। देवी सरस्वती की पूजा करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखें और पूजा में देवी सरस्वती की 5 प्रिय वस्तुएं जरूर भेंट करनी चाहिए।
1- देवी सरस्वती को पीले और सफेद रंग के फूल पसंद है। आपको इन फूलों से देवी की पूजा करनी चाहिए।
2- मां सरस्वती को बूंदी का भोग बहुत प्रिय होता है। बूंदी पीले रंग की होती है और यह गुरु से संबंधित वस्तु भी है।
3- वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है इसलिए पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें
4- सरस्वती पूजा में पेन और कॉपी जरूर शामिल करें
5- देवी सरस्वती को केसर और पीला चंदन का तिल करें और खुद भी लगाएं।
Saraswati Puja 2024: राशि के अनुसार मां सरस्वती की करें पूजा
आज वसंत पंचमी का त्योहार है। वसंत पंचमी के दिन ज्ञान, संगीत, शिक्षा और बुद्धि की प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की पूजा की जाती है। ऐसे में राशिनुसार पूजा उपाय करके लाभ अर्जित किया जा सकता है।
मेष राशि
वसंत पंचमी के दिन सरस्वती मां की पूजा के दौरान सरस्वती कवच पाठ जरूर करें। ऐसा करने से बुद्धि की प्राप्ति होगी। इसके अलावा एकाग्रता की कमी भी ठीक हो जाएगी।
वृषभ राशि
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उनको सफेद चंदन का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें। ऐसा करने से ज्ञान में बढ़ोतरी होने के साथ ही जो भी समस्याएं हैं, उनसे राहत मिलेगी।
मिथुन राशि
मां सरस्वती को हरे रंग का पेन (कलम) अर्पित करें और उससे ही अपनी सभी कार्यों को पूरा करें। ये कार्य आपकी लिखने संबंधी समस्याएं को समाप्त करने में मददगार होगा।
कर्क राशि
मां सरस्वती को खीर का भोग लगाना चाहिए। संगीत क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले छात्रों को ऐसा करने से बहुत अधिक फायदा होगा।
Basant Panchami 2024: सिंह,कन्या,तुला और वृश्चिक राशि वाले ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा
सिंह राशि- मां सरस्वती की पूजा के दौरान गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें। ऐसा करने से विदेश में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की इच्छा पूरी हो जाएगी।
कन्या राशि- गरीब बच्चों में पढ़ने की सामाग्री बांटे, जिसमें पेन, पेंसिल किताबें आदि शामिल हों। अगर आप ऐसा करते हैं तो पढ़ाई में आ रही आपकी परेशानी को दूर किया जा सकता है।
तुला राशि- किसी ब्राह्मण को सफेद कपड़ें दान में दें। यदि छात्र ऐसा करते हैं तो उन्हें वाणी से जुड़ी किसी परेशानी से निजात मिल सकती है और आपकी वाणी में मधुरता आएगी।
वृश्चिक राशि- अगर याद्दाश्त से संबंधित कोई परेशानी है तो इसे आप मां सरस्वती की आराधना करके इसे दूर कर सकते हैं। मां सरस्वती की पूजा के बाद लाल रंग का पेन उन्हें अर्पित करें।
Saraswati Puja: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले ऐसे करें सरस्वती आराधना
धनु राशि - पीले रंग की कोई मिठाई अर्पित करें। इससे आपकी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाएगी। साथ ही आपकी उच्च शिक्षा की इच्छा भी मां सरस्वती अवश्य पूरी करेंगी।
मकर राशि - निर्धन व्यक्तियों को सफेद रंग का अनाज दान करें। ऐसा करने से मां सरस्वती आपके बुद्धिबल में विकास होगा।
कुंभ राशि - गरीब बच्चों में स्कूल बैग और दूसरी जरूरी चीजें दान करें। मां सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहेगी और आपका आत्म विश्वास भी बढ़ेगा।
मीन राशि - छोटी कन्याओं में पीले रंग के कपड़े दान करें। इससे आपके करियर में आने वाली समस्याओं का निवारण होगा। आपके ऊपर मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहेगा।
Vasant Panchami 2024: वसंत पंचमी पर गजकेसरी योग से इन राशियों पर मेहरबान होंगी देवी लक्ष्मी
पूरे देश में आज वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। मंदिरों और घरों में मां सरस्वती की विशेष पूजा-आराधना की जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज रवि योग और रेवती नक्षत्र के साथ गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। गजकेसरी योग से मेष, मिथुन, सिंह, धनु और मकर राशि वालों पर मां सरस्वती के साथ देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलेगी।
Saraswati Chalisa: वसंत पंचमी पर जरूर पढ़ें मां सरस्वती की संपूर्ण आरती और चालीसा
मां सरस्वती की आरती
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता।।
जय सरस्वती माता…
चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी।
सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी।।
जय सरस्वती माता…
बायें कर में वीणा, दूजे कर माला।
शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला।।
जय सरस्वती माता…
देव शरण में आये, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया।।
जय सरस्वती माता…
वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्धि-प्रकाश करो।।
मोहज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो।।
जय सरस्वती माता…
धूप-दीप-फल-मेवा-पूजा स्वीकार करो।
ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो।।
जय सरस्वती माता…
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी, सुखकारी ज्ञान-भक्ति पावे।।
जय सरस्वती माता…
मां सरस्वती चालीसा
दोहा
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥
सरस्वती चालीसा चौपाई
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।
जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अंदर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहुता। तेहि न धरइ चित्त सुंदर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
मोहे जान अज्ञनी भवानी। कीजै कृपा दास निज जानी ॥
दोहा
माता सूरज कांति तव, अंधकार मम रूप। डूबन ते रक्षा करहु, परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि, सुनहु सरस्वति मातु। मुझ अज्ञानी अधम को, आश्रय तू ही दे दातु ॥॥
Vasant Panchami 2024: देवी सरस्वती के हाथों में क्यों होती है वीणा
देवी सरस्वती को वीणावादिनी भी कहा जाता है। वीणा का अर्थ खुश रहने और खुशी बांटने से है। जन्म के बाद माता सरस्वती ने वीणा के तार छेड़ा था, तो सारा संसार आनंद से चहक उठा था, ठीक वैसे ही, व्यक्ति को अपने मन को सदैव खुश रखना चाहिए, इतना खुश कि आपसे मिलकर दूसरे व्यक्ति का मन भी आनंद से भर जाए।
Vasant Panchami 2024: देवी सरस्वती के एक हाथ में माला
माता सरस्वती के एक हाथ में माला है, यह बताती है कि हमें हमेशा चिंतन में रहना चाहिए, जो ज्ञान अर्जित कर रहे हैं, उसका लगातार मनन करते रहें, इससे आपकी मेधा बढ़ेगी।