स्वागत से खुश हूंः मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मौके पर कहा कि जनजातीय गौरव दिवस पर मैं सभी देशवासियों को बधाई देता हूं। मैं यहां से पहले भगवान मुंडा के गांव जाने का सौभाग्य मिला। उनकी जयंती पर उनकी प्रतिमा का दर्शन कर मैं भाग्यशाली महसूस कर रही हूं। राष्ट्रपति के रूप में मध्यप्रदेश की पहली यात्रा में इतनी बड़ी संख्या भाई-बहनों को देखकर मैं बहुत खुश हूं। यहां ज्यादातर लोग हमारी जनजातीय समुदाय के हैं। यह मेरे प्रति उनके विशेष स्नेह और उत्साह का परिचय देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में जनजातीय आबादी की संख्या दस करोड़ है। डेढ़ करोड़ से अधिक मध्यप्रदेश है। यह किसी भी राज्य में सबसे अधिक जनजातीय आबादी रहती है। जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों को आज सम्मानित किया गया है। उन्हें देखकर उम्मीद करती हूं कि आने वाला समय और अधिक उज्जवल होगा। मध्यप्रदेश में पेसा कानून के विस्तार से जुड़ी नियम पुस्तिका का विमोचन हुआ है। जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए इन नियमों का उपयोग किया जाएगा।
शहडोल में राष्ट्रगान के साथ जनजातीय गौरव दिवस समारोह शुरू हुआ। मध्यप्रदेश की मंत्री मीना सिंह ने स्वागत भाषण से शुरुआत की। इसके बाद सहरिया जनजाति का नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद पेसा कानून की नियमावली को सार्वजनिक कर राष्ट्रपति ने उसके मध्यप्रदेश में लागू होने की घोषणा की। नियमावली को जनजातीय समुदाय को समर्पित किया गया। कार्यक्रम को केंद्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते और अर्जुन मुंडा ने भी संबोधित किया।
मध्यप्रदेश देश का सातवां राज्य है, जहां पेसा अधिनियम लागू किया गया है। इससे पहले छह राज्यों (हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र) ने पेसा कानून बनाए हैं। पेसा एक्ट का संबंध मध्यप्रदेश से ही ज्यादा रहा है। मध्यप्रदेश के झाबुआ से सांसद रहे दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में बना गई समिति की अनुशंसा पर यह कानून बनाया गया था। 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून देश में लागू हुआ था। इस कानून के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों की ओर से नियम बनाए जाने लगे थे।
पेसा कानून से ग्राम सभाओं को मिलेगी ताकत
राष्ट्रपति के आगमन से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडाजी का जन्मदिन है। मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। धरती के आबा ने भारत माता के पैरों से परतंत्रता की बेड़ियां काटने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अन्याय, शोषण के खिलाफ भगवान बिरसा मुंडा जी ने जंग लड़ी और अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाने पर उन्होंने मजबूर कर दिया था। उनके जन्मदिन पर पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन शहडोल में किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के 89 ब्लॉक में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आनंद और प्रसन्नता का विषय है कि जनजातीय गौरव दिवस के इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी पधार रहीं हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका स्वागत है और उनके कर-कमलों से पेसा के नियम लागू किए जाएंगे। मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पेसा के नियम सामाजिक समरसता के साथ लागू किए जाएंगे। 89 जनजातीय ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले जनजातीय ग्रामों में यह नियम लागू होंगे। यहां जो ग्राम सभा बनेगी उसमें स्थानीय समुदाय की सहभागिता रहेगी। जल-जंगल-जमीन संबंधित अनेकों अधिकार जो हमारे जनजातीय भाई-बहनों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक थे वह हम देने जा रहे हैं। आज एक सामाजिक क्रांति मध्यप्रदेश की धरती पर हो रही है। सौभाग्य है कि इस अवसर पर राष्ट्रपति जी पधार रही हैं। एक अन्य ट्वीट में शिवराज ने कहा कि मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश में आज से "पेसा कानून" लागू किया जाएगा। जिससे ग्राम सभाएं सशक्त होंगी, उनके अधिकार क्षेत्र में वृद्धि होगी, पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास स्थित सभागार में मां भारती के गौरव तथा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए लड़ने वाले जनजातीय नायक, भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती एवं भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे जी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।