पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को गैरकानूनी संगठन घोषित करने और अगले पांच वर्षों के लिए इस पर प्रतिबंध लगाने के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है। केंद्र शासित प्रदेशों को संगठन और उसके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए कहा है।
पीएफआई के अलावा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासन को यूएपीए की शक्तियों का उपयोग इनके खिलाफ करने के लिए कहा गया है, जिसमें रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल शामिल हैं।
चुनाव आयोग के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडियाको 2018-19 से अब तक 11 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान मिला है। दिल्ली में पंजीकृत एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल एसडीपीआई का गठन जून 2009 में किया गया था और अप्रैल 2010 में चुनाव आयोग में पंजीकृत किया गया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 में पार्टी ने योगदान के रूप में 5.17 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2019-20 में 3.74 करोड़ रुपये एकत्र किए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में इसे 2.86 करोड़ रुपये का योगदान मिला।
केरल में भाजपा ने बुधवार को इंडियन नेशनल लीग (आईएनएल) के नेता और राज्य के मंत्री अहमद देवरकोविल पर जो कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबद्ध प्रतिबंधित संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन के साथ करीबी संबंध रखने का आरोप लगाया और उन्हें राज्य कैबिनेट से हटाने की मांग की। हालांकि, मंत्री ने भाजपा के आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए कहा कि यह भाजपा के राज्य प्रमुख के सुरेंद्रन द्वारा हास्यास्पद बयानबाजी करके मीडिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक और प्रयास है। वर्षों पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) से अलग हो चुके नेताओं द्वारा गठित आईएनएल, पिनाराई विजयन सरकार में सीपीआईएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में गठबंधन सहयोगी है।
पीएफआई ने संगठन पर पाबंदी के केंद्र के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है। पीएफआई के केरल प्रदेश महासचिव अब्दुल सत्तार ने कहा कि सभी पीएफआई सदस्यों और जनता को सूचित किया जाता है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को भंग कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है। हमारे महान देश के कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में संगठन निर्णय को स्वीकार करता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। शिंदे ने कहा कि यह पता चला है कि संगठन राज्य में कुछ गंभीर गड़बड़ी की योजना बना रहा था। शिंदे ने नासिक में संवाददाताओं से कहा कि संगठन के सदस्यों ने पुणे में शांति भंग करने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उनकी कोशिश को विफल कर दिया। उन्होंने पीएफआई और उसके कई सहयोगियों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाने के कदम के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। पुणे में पीएफआई के विरोध के दौरान पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को देश में रहने का अधिकार नहीं है। गृह मंत्रालय मामले को देखेगा।
PFI की छात्र विंग ने संगठन पर पाबंदी को बताया अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक, केंद्र के बैन को कोर्ट में चुनौती देगी छात्र विंग।
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि PFI की सोच का हम पहले से विरोध करते आए हैं लेकिन इसपर प्रतिबंध बिल्कुल गलत है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणपंथी संगठनों पर बैन कब लगेगा? उन्हें संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?