दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित, चुनाव सुधार पर चर्चा जारी रहेगी।
तमिलनाडु के एआईएडीएमके सांसद थंबीदुरई ने भी चर्चा में भाग लिया। उन्होंने मतदाता सूची में डुप्लीकेट वोटर पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्य में सत्ताधारी डीएमके सरकार प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है। ऐसे में चुनाव आयोग की एसआईआर की प्रक्रिया को कैसे ठीक माना जा सकता है? इसके बाद सदन की कार्यवाही 12 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके बाद आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कांग्रेस सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी ने चर्चा में भाग लिया। एसआईआर पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने सरकार के साथ-साथ आयोग को भी कटघरे में खड़ा किया। शाम करीब 3.50 बजे ओडिशा से निर्वाचित बीजद सदस्य शुभाशीष खुंटिया ने कहा कि अगर एसआईआर की प्रक्रिया को बंद नहीं किया गया तो देश का लोकतंत्र हार जाएगा। उन्होंने सरदार पटेल के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव सुधार के दौरान नियमों और सांविधानिक मूल्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
चुनाव सुधारों पर चर्चा में तमिलनाडु के डीएमके सांसद एनआर इलांगो ने भी भाग लिया। उन्होंने एसआईआर पर सवाल खड़े करते हुए चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए। उनके बाद दोपहर करीब 3.24 बजे आम आदमी पार्टी सदस्य संजय सिंह ने भी इस चर्चा में भाग लिया। अपने करीब 20 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि संविधान ने देश के तमाम लोगों को वोट का समान अधिकार दिया है। सांसद-विधायक समेत आम नागरिक को भी एक ही वोट का हक है। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयोग को देशव्यापी एसआईआर कराने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के लिए विशेष परिस्थिति का होना जरूरी है। उसके बाद भी कारण बताते हुए एसआईआर कराया जा सकता है। हालांकि, ये सीमित क्षेत्र में ही कराया जा सकता है। कई विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में कथित तौर पर कटे वोट का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि अगर चुनाव की गड़बड़ियों के बारे में वे इस सदन में बात नहीं करेंगे तो चुनाव सुधार कैसे होंगे।
सुधांशु त्रिवेदी के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद दोला सेन ने बांग्ला भाषा में अपनी बातों को रखा। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कई और बातों को सदन के पटल पर रखा। हालांकि, उपसभापति हरिवंश ने उन्हें लगातार चेतावनी दी कि चुनाव सुधार के अलावा दूसरे विषयों पर कही गई बातों को रिकॉर्ड पर नहीं रखा जाएगा। लगातार टोके जाने के बावजूद दोला सेन ने अपनी बातों को कहना जारी रखा। चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार, नागिरकता पर फैसले का हक और बांग्लादेशी, रोहिंग्या घुसपैठिए जैसे मुद्दे भी उठाए। हालांकि, उनके भाषण का कितना हिस्सा संसदीय कार्यवाही से निकाला जाएगा, सदन चलते समय तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। दोला सेन के बाद एक अन्य तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि भाजपा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने एसआईआर को लेकर जो बातें कही हैं, उन्हें भी सदन की कार्यवाही से निकाला जाना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, अगर दुनिया में कहीं लोकतंत्र है तो सबसे बड़ा स्तंभ भारत में है। उन्होंने विपक्षी दलों पर गुलामी की मानसिकता के वशीभूत होकर देश के विरोध में भी बातें करने से नहीं कतराते। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कंप्यूटर क्रांति का श्रेय दिया जाता है, लेकिन आज उन्हीं की पार्टी के लोग कहते हैं कि ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर पर चुनाव कराना चाहिए। त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा के मजबूत होने और हमारी सरकार बनने के बाद चुनाव और लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अपने संबोधन के अंत में त्रिवेदी ने पूर्व पीएम वाजपेयी की कविता को उद्धृत करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, देश के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था, 'भरी दुपहरी में अंधियारा, सूरज परछाईं से हारा, वर्तमान के मोहपाश में आने वाला कर न भुलाएं, आओ मिलकर दीया जलाएं।' उन्होंने सभी दलों से साथ आने की अपील करते हुए स्वामी विवेकानंद, श्री अरविंदो और रामकृष्ण परमहंस जैसी विभूतियों के कथन को भी उद्धृत किया। त्रिवेदी ने अपने भाषण का काव्यात्मक अंत करते हुए 'जेन-जी के युवाओं जागो, पुन: नया युग आया है। भारत मां की शक्ति जगी है, धर्मध्वजा लहराया है। भारत मां अंगड़ाई लेती, सुप्त चेतना जाग रही। ऋषि-मुनियों की देव धरा फिर अपना रूप निहार रही।
राज्यसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अजय माकन ने की। अजय माकन ने चुनावों में सभी पक्षों को बराबर अवसर मिलने का जिक्र करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी राजनीतिक दलों के लिए बराबर मौके हों। उन्होंने चुनाव आयोह को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अगर अंपायर ही किसी खेमे का समर्थन करने लगेगा तो निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे। माकन ने मार्च, 2023 में पारित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि दिसंबर में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए सरकार ने समिति से चीफ जस्टिस को बाहर करने का कानून बना दिया। उन्होंने सवाल किया कि आपराधिक या किसी भी सिविल कार्रवाई से चुनाव आयोग को कानूनी संरक्षण क्यों दिया गया। अगर गलत काम नहीं किया जा रहा है तो आयुक्तों को ऐसी इम्यूनिटी क्यों दी गई है। अलग-अलग राज्यों में 44 से अधिक बीएलओ की मौत का जिक्र करते हुए माकन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। ऐसे में चुनाव सुधार को लेकर कई सवाल उठते हैं। बिहार में आचार संहिता लागू होने के बावजूद महिलाओं के बैंक खातों में 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद का जिक्र करते हुए माकन ने कहा, अगर सत्ताधारी दल करे तो जनकल्याण कहा जाता है, विपक्षी दलों की सरकारों के ऐसे ही फैसलों को रेवड़ी बताया जाता है। माकन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो जाए, जनता की आवाज को हमेशा के लिए नहीं दबाया जा सकता।
राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज 'वंदे मातरम के 150 साल' पर हुई चर्चा का जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देने के दौरान कहा, स्वतंत्रता के बाद वंदे मातरम को उचित सम्मान नहीं मिला और इसके लिए तत्कालीन सरकार जिम्मेदार है। नड्डा ने राज्यसभा में वंदे मातरम पर हुई चर्चा का समापन करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस अवसरवादी रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी नेता, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की छवि खराब करना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को ठीक तरह से रखना है। उनके अनुसार, वंदे मातरम को सम्मान न मिलने के लिए उस समय की सरकार जिम्मेदार थी। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस अनुकूल परिस्थितियों में नेहरू युग का श्रेय लेती है, लेकिन प्रतिकूल स्थितियों में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय सम्मान कानून, 1971 में वंदे मातरम का अपमान करने पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है। नड्डा के जवाब के बाद राज्यसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा की शुरुआत हुई।
स्पीकर ओम बिरला ने प्रश्नकाल में संक्षिप्त सवाल करने की अपील करते हुए कहा, एक घंटे के प्रश्नकाल में 20 सवाल होते हैं। उनका प्रयास होता है कि जिन लोगों ने कभी सवाल नहीं किए उन्हें मौका दिया जाए। मंत्रियों से सदन की अपेक्षा को लेकर स्पीकर ने कहा, जवाब संक्षेप में दिया जाना चाहिए, ताकि अधिकांश सवालों को समाहित किया जा सके।
कर्नाटक के बेल्लारी से निर्वाचित सांसद ई तुकाराम ने भी अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़ा सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत 13 हजार करोड़ से अधिक का फंड केंद्र सरकार को देना है, जो लंबित है। इसे कब तक दिया जाएगा। इस पर मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि राज्यों में खर्च की पुष्टि का प्रमाण पत्र मिलने के बाद फैसला लिया जाएगा। अगले सप्ताह मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ इस संबंध में बैठक होनी है।
प्रश्नकाल में महाराष्ट्र के परभणी से शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद संजय जाधव ने SFURTI योजना (महाराष्ट्र के पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए निधि योजना) के तहत क्लस्टर बनाने की दिशा में उनके संसदीय क्षेत्र में चलाए जा रहे कार्यक्रमों को लेकर सवाल किया। इसका जवाब केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्य उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने दिया। उन्होंने कहा कि 2022 से इस योजना को बंद किया जा चुका है। लेकिन सरकार गुणवत्तापूर्ण, प्रतिस्पर्धी उत्पादों से जुड़ी योजनाओं के तहत हरसंभव मदद करने का प्रयास कर रही है।
तमिलनाडु की थूथुकुडी लोकसभा सीट से निर्वाचित डीएमके सांसद कनिमोझी के सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने उन्हें आश्वस्त किया कि पर्यावरण को ताक पर रखकर कोई भी नियम नहीं बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए विकास की योजनाओं को धरातल पर उतार रही है।
ओडिशा में जल जीवन मिशन के तहत हासिल किए गए लक्ष्यों को लेकर राज्य की बरगढ़ लोकसभा सीट से निर्वाचित भाजपा सांसद प्रदीप पुरोहित ने सवाल पूछे। इसका जवाब केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने दिया। इसके बाद राजस्थान के सवाईमाधोपुर से निर्वाचित कांग्रेस सांसद ने पूछा कि उनके लोकसभा क्षेत्र में कितने गांव इस योजना से प्रभावित होंगे। किसानों के मुआवजे के लिए सरकार क्या उपाय कर रही है? इस पर केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा, राजस्थान को पानी मुहैया कराने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने मुआवजे से जुड़े सवाल पर कहा कि नियमों के मुताबिक सभी काम किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ से सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद के मुद्दे पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जवाब दिए। इसके बाद हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति से जुड़े सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जवाब दिए। इस दौरान स्पीकर और मंत्री के बीच हल्की-फुल्की टिप्पणी भी देखी गई। स्पीकर ने हरदीप पुरी से कहा कि इतने गुस्से में जवाब मत दीजिए, थोड़ी मुस्कान के साथ अपनी बातों को सदन के पटल पर रखें। स्पीकर की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा, वे नाराजगी के साथ अपने स्टाइल में जवाब दे रहे हैं।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद पर गंभीर आरोप लगाए। अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की मांग की। इस पर स्पीकर ने उन्हें आश्वस्त किया कि किसी भी तरह के नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सदन के नियमों के मुताबिक समुचित जांच कराई जाएगी।
इथेनॉल को लेकर केरल की चलाकुडी लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद बेनी बेहनान के सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, भारत में इथेनॉल ब्लेडिंग 1.4 फीसदी होता था। 2006 में तत्कालीन सरकार 10 राज्यों में 5 फीसदी ब्लेडिंग चाहती थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद सरकार ने नवंबर, 2022 तक 10 फीसदी ब्लेडिंग का लक्ष्य निर्धारित किया, जिसे हासिल भी किया गया।
कांग्रेस सांसद सप्तगिरी उल्का ने कहा है कि जब भी वे चुनाव आयोग के खिलाफ सवाल उठाते हैं, तो सरकार हमेशा उनका बचाव करती है। उल्का ने कहा कि जब हम चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ कहते हैं, तो चुनाव आयोग खुद कुछ नहीं कहता, लेकिन भाजपा के प्रवक्ता उनका बचाव करते रहते हैं। हमारे सवाल स्पष्ट हैं और हमने कुछ मुद्दे उठाए हैं जिनके जवाब चाहिए।
लोकसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत के बाद सड़क-परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े सवाल पूछे गए। पश्चिम बंगाल की कूचबिहार लोकसभा सीट से निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस सांसद जगदीश चंद्र बर्मा के सवाल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई10 और ई-20 ईंधन मानकों के आधार पर चलने वाले वाहनों से जुड़े सवाल पर जवाब दिए।
संसद के शीतकालीन सत्र में आज भी विपक्षी दलों की तरफ से हंगामे के आसार हैं। दरअसल, राज्यसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। बुधवार को तय समय से एक घंटा अधिक गुजरने पर भी वंदे मातरम पर चर्चा जारी रही। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि चर्चा समाप्त न होने के कारण नेता सदन जेपी नड्डा चर्चा का जवाब देंगे। इसके तुरंत बाद चुनाव सुधारों पर चर्चा शुरू होगी। आज राज्यसभा में चुनाव के लिए उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर चर्चा होगी।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नीत सत्ताधारी खेमा राष्ट्रीय गीत पर राजनीति कर रहा है। ट्रेजरी बेंच यानी सत्ताधारी पक्ष ने विपक्षी दलों पर पलटवार कर रहा, भारत को आजादी केवल कांग्रेस ने ही नहीं दिलाई। देश को मिली आजादी में सशस्त्र क्रांतिकारियों का भी योगदान रहा है।