राज्यसभा ने बुधवार को राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी कानूनी संरक्षण मिल गया है। अब राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में बाधा डालना आपराधिक अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल का प्रावधान है। यह संशोधन 1971 के राष्ट्रीय सम्मान कानून के दायरे का विस्तार करता है, जिसमें पहले केवल राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' को कानूनी संरक्षण प्राप्त था। विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच विधेयक पारित हुआ। इसके बाद राज्यसभा कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा से लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पारित हो गया है। जितेंद्र सिंह के बयान के दौरान सदन में हंगामा के आसार बन रहे थे। इस दौरान ही स्पीकर ने ध्वनिमत से विधेयक पारित कर दिया। इसके बाद लोकसभा कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर लोकसभा में वोटिंग शुरू हो गई।
तीन बजे फिर से कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में बोल रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने घटना को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने का आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता। जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं होता। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार केवल मजिस्ट्रेट के पास होता है।
राहुल गांधी के भाषण के दौरान लोकसभा में एक बार फिर हंगामा देखने को मिला। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है।
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। सदन में राहुल गांधी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा कर रहे थे। उनके कुछ शब्दों पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई।
राहुल गांधी ने कहा कि कई लोगों को लगता है कि छात्रों को पेपर लीक की वजह से गुस्सा आया है। हमारी शिक्षा व्यवस्था पहले ही क्रूर है। लाखों रुपये गरीबों से लिए जाते हैं। हर चीज प्राइवेटाइज है। पेपर लीक, एक परीक्षा में कुछ होता है, दूसरे में कुछ। एक में रिएग्जाम होता है, दूसरे में नहीं होता है। यह एक बेहद खराब व्यवस्था है। यह सिस्टम और इसकी आत्मा को कब्जे में कर लिया गया है। इसे आरएसएस ने कब्जे में किया है। राजनाथ सिंह जी ने कहा कि हम यूपीए नहीं है, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वो सही कह रहे हैं। यहां जो हुआ, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, उससे कुछ हासिल नहीं हुआ, क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान कभी नहीं चलाते। उसे आरएसएस चलाता है। मंत्री के दफ्तर में बैठा एक ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी)। छात्रों को कुछ बोलने नहीं दिया जाता। उन्हें अपने मन की चीज फॉलो नहीं करने दी जाती। उन्हें वह इतिहास पढ़ना पडता है, जो आरएसएस लाना चाहता है। हर यूनिवर्सिटी में आज आरएसएस से जुड़ा वाइस चांसलर है। धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक व्यक्ति हैं, आपका असली दुश्मन आरएसएस है।
राहुल गांधी ने कहा कि मैंने सोचा, इडियट भी है और स्टूडेंट भी है। उससे पूछा कि ये तीसरी कैटेगरी कहां जाती है- अंध भक्त। ये तीन कैटेगरी हैं। छात्र जो हैं, वह शिक्षा के सिस्टम की बात कर रहे हैं। स्टूडेंट आठ-10 घंटे पढ़ते हैं. एजुकेशन महंगी है। वर्षों पढ़ते हैं। इस पर ट्रेजरी बेंच से सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। इस पर आपत्ति करते हुए रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी असंसदीय शब्द इस्तेमाल करते हैं। ये तरीके से एक छात्रा के नाम पर वह शब्द बोल रहे हैं, इसे एक्सपंज किया जाए। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जो शब्द असंसदीय होगा, उसे निकाल दिया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि इडियट शब्द की जगह मैं दूसरा शब्द दे देता हूं। इस पर ओम बिरला ने कहा कि इसके लिए आपको व्यवस्था देने की जरूरत नहीं है, मैं व्यवस्था दे चुका हूं। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सजग है, सच्चाई जानता है। एक परीक्षा पर शिक्षा के बजट से ज्यादा खर्च होता है। अंधभक्त मूर्ख को भगवान मानते हैं।
लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक छात्र से पूछा कि एक छात्र का लक्ष्य क्या होता है। राहुल गांधी के मुताबिक, छात्र ने जवाब दिया कि छात्र हमेशा सच्चाई के पीछे दौड़ता है। इसके बाद राहुल गांधी ने कुछ अन्य वर्गों को लेकर टिप्पणी की, जिस पर सदन में शोर शुरू हो गया। हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा, ‘ये क्या हो रहा है.’ उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पूछा कि जो छात्र नहीं हैं, उनके बारे में क्या कहा जा सकता है, तो छात्र ने जवाब दिया कि छात्र सच को अपने सीने पर लेकर चलते हैं, जबकि कुछ लोग ऐसी छवि चाहते हैं जो सच नहीं होती। राहुल गांधी ने छात्र के हवाले से कहा कि कुछ लोग खुद को भगवान समझने लगते हैं और कुछ लोग ऐसे मूर्ख व्यक्ति को ही भगवान मान लेते हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह पूरा फ्रेमवर्क मुझे एक 18 साल की लड़की ने समझाया। लगता है कि हमारे जो छात्र-छात्राएं हैं वो एग्जाम के बारे में बात कर रहे हैं। वो शिक्षा प्रणाली के बारे में बात कर रहे हैं, वह शिक्षा की कॉस्ट के बारे में बात कर रहे हैं। यह काफी महंगा है। शिक्षा में काफी पैसा सिर्फ एक परीक्षा में खर्च होता है। उतना, जितना लगभग हमारा शिक्षा बजट में खर्च होता है।
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के प्रदर्शन को गुस्सा, हिंसा या नफरत के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह देश के युवाओं की भावनाओं और उनकी चिंताओं को सामने रखने का तरीका है। उन्होंने कहा कि युवाओं के इस प्रदर्शन को देखकर उन्हें खुशी और भरोसा मिला है। सभी राजनीतिक दलों, यहां तक कि भाजपा को भी युवाओं की बात का सम्मान करना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा के नेता अगर अपने बच्चों से इस प्रदर्शन के बारे में बात करेंगे, तो हो सकता है कि उनके बच्चे भी प्रदर्शन कर रहे युवाओं का समर्थन करें। उन्होंने कहा, जो हुआ है, उसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि मैंने छात्रों से दूसरे पक्ष के बारे में पूछा, बच्चों ने कहा- वह सुनते नहीं हैं, उन्हें लगता है कि ज्ञान उनके अंदर से आता है। मैंने उनसे पूछा कि वह ऐसे लोगों को क्या कहते हैं तो छात्रों ने कहा कि बेवकूफ। उन्होंने कहा कि हर कोई एक छात्र हो सकता है, अगर वह समझना चाहता है। यहां तक कि ब्रह्मांड का सम्मान करना भी एक छात्र की परिभाषा हो सकता है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्रों, युवा लड़कियों के परिप्रेक्ष्य ने मुझे नया नजरिया दिया। मैं उनके नजरिए से सहमत हूं। आप कहते हैं कि आप छात्र हैं इसका क्या मतलब है? उन्होंने मुझसे कहा कि एक छात्र वह है जिसका खुला दिमाग और खुला दिल है। छात्र वह है जो शुरुआत से लिखता है, मानते हैं कि उन्हें सबकुछ नहीं पता। छात्र वह होते हैं जो वह जानते हैं उसके ऊपर कुछ नया ज्ञान है। वह यह मानते हैं कि ब्रह्मांड लगातार बदल रहा है। ऐसे में छात्र मानते हैं कि ज्ञान भी लगातार बदल रहा है। छात्रों ने कहा कि विनम्रता भी इसका एक अहम पहलू है क्योंकि हमें पता है कि कोई हमसे भी ज्ञानी मौजूद है, जो इस ज्ञान को बढ़ा सकता है।
एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्र आंदोलन देश के युवाओं का भाव व्यक्त करना था। मुझे लगता है कि हर राजनीतिक दल को इस भाव व्यक्तता का सम्मान करना चाहिए। खासकर हमारे भाजपा के साथियों को। अगर हमारे भाजपे के साथी अपने खुद के बच्चों से पूछें कि उनके भाई-बहन क्या कर रहे थे तो उन्हें पता चलेगा कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ और वह क्यों प्रदर्शन से सहमति रखते हैं।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सदन पहुंच गए हैं। कुछ देर में पेपर लीक विरोधी बिल पर चर्चा करेंगे। राहुल गांधी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के कारण भाजपा सरकार पर हमलावर रहे हैं।
लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर शुरू हो गई है। कुछ देर बाद राहुल गांधी लोकसभा में चर्चा कर सकते हैं। विपक्ष के हंगामे के चलते राज्सभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड पेपर लीक मामले पर कहा कि अभी केवल सीआईडी जांच हुई है, लीपापोती चल रही है। जेएमएम के महासचिव की पत्नी खुद जेपीएससी सदस्य हैं। अभी तक उनका इस्तीफा नहीं हुआ है। इस मामले की जेएमएस लीपापोती करना चाहती है। कांग्रेस में इतनी हैसियत नहीं है कि वे झारखंड जाएं और इस विषय को उठाएं।
लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पेश
लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों में संशोधन करना है। सदन में विधेयक पेश होने के साथ ही इस पर आगे चर्चा और विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू होगी।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर कहा कि इस बिल में केवल सजा की बात है और फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात है। सजा ठीक है। अगर किसी ने हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया तो सजा तो मिलनी ही चाहिए लेकिन पहले आप पेपर लीक के मामलों को रोकने का काम तो करें। हमारी सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के बारे में बोल रही है लेकिन हमारा अनुभव क्या है? 2025 में फास्ट ट्रैक कोर्ट में 1.5 लाख नए मामले आए हैं जिसमें से केवल 60 हजार में फैसला आया। अगर आप ऐसे कोई कानून पास करेंगे तो क्या न्याय भी आ जाएगा? कानून पास करने से न्याय नहीं आता है। जब न्यायिक व्यवस्था में इतनी क्षमता नहीं है तो फिर फास्ट ट्रैक कोर्ट का अर्थ भी क्या बनता है?
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी पर अपनी टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तीखा सवाल करते हुए कहा कि सच बोलने में भला असंसदीय क्या है और अगर सच कहने के लिए सरकार उन्हें सजा देना चाहती है तो वह इसके लिए तैयार हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि केवल एक घटना नहीं, बल्कि कई ऐसे वीडियो और मामले हैं जो महिलाओं के प्रति मंत्री की सोच को उजागर करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मैंगलोर पब में महिलाओं पर हुए हमले में शामिल व्यक्ति को बीजेपी में किसने शामिल कराया था, हालांकि विरोध के बाद उसे हटा दिया गया था।
सदन में विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने दिल्ली में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। सांसदों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाने के लिए यह लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक जारी रहेगी।
#WATCH | Delhi: BJP MPs staged a protest over allegations of rigging in recruitment exams, including JPSC and JSSC in Jharkhand. pic.twitter.com/Q1RLKKnatI
— ANI (@ANI) July 29, 2026
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि बात सिर्फ एक ही है, जो लोग आस्था के साथ चढ़ाए गए 'दान-पात्र' की रक्षा नहीं कर पाए, उनसे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वे पेपर लीक रोकेंगे या परीक्षाएं रद्द होने से बचाएंगे? उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो सरकार और व्यवस्था लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर सकती है, वह देश के युवाओं के भविष्य से भी खिलवाड़ कर रही है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि आज सरकार खुद देश की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुकी है।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे में हुई कथित धांधली को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सांसदों ने मकर द्वार पर तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 'चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाते हुए सपा नेताओं ने मंदिर के फंड में हुई वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। सपा सांसदों का आरोप है कि यह मुद्दा करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए सरकार को गायब हुए पैसे का पूरा हिसाब-किताब देश के सामने रखना चाहिए।
#WATCH | Delhi: Carrying placards and raising slogans of "chanda chor gaddi chhodd", Samajwadi Party MPs protest over Ram Mandir donation embezzlement case. pic.twitter.com/oSxnMlTOvR
— ANI (@ANI) July 29, 2026
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए हैं। तिवारी ने कहा कि संसद के अंदर प्रियंका गांधी और बाहर राहुल गांधी द्वारा रखी गई बातें पूरी तरह रिकॉर्ड पर हैं और उनके पास इसके पुख्ता आंकड़े व सबूत मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात सरकार के हलफनामे के बाद 14 साल की सजा काटकर जमानत पर छूटे बिल्किस बानो के दोषियों का प्रल्हाद जोशी ने खुलकर समर्थन किया था। कांग्रेस सांसद ने सीधा सवाल दागा कि जो व्यक्ति बलात्कार के दोषियों की जमानत का समर्थन करता हो, वह देश का शिक्षा मंत्री कैसे रह सकता है, जबकि सत्ता पक्ष नियम-प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर इस मुद्दे से भाग रहा है।
कांग्रेस सांसद प्रवीन चक्रवर्ती ने राज्यसभा में काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय पर 27 जुलाई 2026 को सदन में भ्रामक जवाब देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) के आदेश का मुद्दा भी उठाया है। समिति ने कर्नाटक को तुरंत 4 टीएमसी फीट पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। प्रवीन चक्रवर्ती का कहना है कि जल बंटवारे के इस आदेश का पालन होना चाहिए। उन्होंने संसद में इस संवेदनशील विषय पर तुरंत चर्चा की मांग की है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया है। वे देश में एक नए दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा चाहते हैं। उनका कहना है कि अवसरवादिता के लिए होने वाले सामूहिक दलबदल पर रोक लगनी चाहिए। अक्सर बिना किसी वैचारिक मतभेद के सत्ता के लिए दलबदल किया जाता है। इसके साथ ही नए कानून में सांसदों और विधायकों को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्हें संसद के अंदर और बाहर ईमानदारी से असहमति जताने का अधिकार होना चाहिए। तिवारी का मानना है कि पार्टी व्हिप के डर के बिना जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की आवाज उठाने की छूट मिलनी चाहिए।
सरकार ने सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पेश किया था। इस विधेयक के जरिए सरकार सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 में संशोधन करना चाहती है। जिस पर सदन में बहस चल रही है।