लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित।
विपक्षी नेताओं ने जीएसटी को सरल बनाने और कम करने पर जोर दिया
विपक्षी सदस्यों ने सोमवार को सरकार से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को सरल बनाने और कम करने की मांग की, क्योंकि इससे गरीबों पर बोझ पड़ रहा है। वित्त विधेयक 2025 पर बहस में भाग लेते हुए, सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी) ने कहा कि जीएसटी में बहुत सारे सुधार की जरूरत है, और दरों को कम करने की जरूरत है।
वित्त मंत्री को जवाब देना चाहिए कि भारत कब 'एक राष्ट्र एक कर' बन जाएगा, क्योंकि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था में कई स्लैब हैं, उन्होंने लोकसभा में कहा। वहीं अमेरिका की तरफ से प्रस्तावित शून्य टैरिफ नीति पर, सुले ने कहा कि सरकार को कृषि उपज पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। अमेरिका ने 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है, इस कदम से भारत के कृषि और दवा उत्पादों के निर्यात को नुकसान पहुंचने की संभावना है। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनका अमेरिका के साथ उच्च टैरिफ अंतर है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'भारत जिस आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, उससे निपटने के लिए हमें वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण की नहीं, बल्कि मनमोहन सिंह की जरूरत है।'
धनखड़ ने डीके शिवकुमार के धार्मिक आधार पर आरक्षण के सुझाव पर उठाया सवाल
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को उन सुझावों पर सवाल उठाया कि कर्नाटक सरकार मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण पर विचार कर रही है, उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में सरकारी अनुबंधों में मुसलमानों को आरक्षण की सुविधा देने के लिए संविधान में बदलाव करने का सुझाव दिया था।
यह मुद्दा सोमवार को लोकसभा में गूंजा और सत्तारूढ़ भाजपा ने इस विचार पर सवाल उठाया और शिवकुमार को हटाने की मांग की। यहां राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए और कर्नाटक का नाम लिए बिना धनखड़ ने कहा कि "एक राज्य" ने संकेत दिया है कि वह "किसी विशेष समुदाय, धार्मिक संप्रदाय के व्यवसाय के क्षेत्र में आने वाले अनुबंधों" के लिए आरक्षण देगा।
राज्यसभा के अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति ने कहा, 'अब संवैधानिक प्रावधानों को देखें। क्या हमारा संविधान धार्मिक विचारों पर किसी आरक्षण की अनुमति देता है? पता करें कि बी आर अंबेडकर ने क्या कहा था, और आपको पता चल जाएगा कि धार्मिक विचारों पर कोई आरक्षण नहीं हो सकता है।' धनखड़ ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए एक सकारात्मक तंत्र प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन किया गया और आर्थिक मानदंड को आधार बनाया गया, जिसे बाद में अदालतों ने बरकरार रखा।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के संविधान पर दिए गए कथित बयान पर भाजपा के विरोध पर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'भाजपा धर्म के आधार पर कानून बना रही है। हमने कभी धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया...आज बिना किसी कारण के इस मुद्दे को उठाकर सरकार अपने भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाना चाहती है...हमारी कांग्रेस पार्टी और कर्नाटक की अन्य पार्टियों ने मिलकर 1994 में शुरू किए गए आरक्षण को स्वीकार किया। तब से वह आरक्षण चला आ रहा है...आज तक जारी है। लेकिन उनकी समस्या क्या है? उनकी समस्या यह है कि हमारी 5 गारंटी कर्नाटक में लोगों तक पहुंच रही है और इसलिए वे बहुत दुखी हैं कि कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ रही है'।
राज्यसभा में पक्ष के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठक के बाद, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, 'हमने न्यायपालिका के मन में उठ रहे मुद्दे पर सार्थक विचार-विमर्श किया। स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है कि किसी मुख्य न्यायाधीश ने पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से अपने पास उपलब्ध सभी सामग्री को सार्वजनिक डोमेन में रखा है और न्यायालय के साथ कुछ भी छिपाए बिना इसे साझा किया है...खरगे जी की ओर से एक बहुत ही विचारशील सुझाव आया कि संसदीय परंपरा के अनुरूप, इस मुद्दे पर सदन के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए और सुझाव को उचित पाते हुए तथा हम तीनों की पूर्ण स्वीकृति के बाद, तदनुसार एक बैठक निर्धारित की जाएगी, जिसमें मैं राज्य सभा के सदन के नेताओं को इस पर विचार करने के लिए आमंत्रित करूंगा...'।
भारी हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
स्थगन के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है।
उपराष्ट्रपति और सभापति, राज्यसभा जगदीप धनखड़ ने आज संसद भवन में अपने कक्ष में सदन के नेता (राज्यसभा) जगत प्रकाश नड्डा और विपक्ष के नेता (राज्यसभा) मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकसभा में सरकार का रवैया देखकर लगा कि सरकार सदन चलने नहीं देना चाहती है।
शिवकुमार को बर्खास्त करने की मांग
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संविधान पर टिप्पणी को लेकर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बर्खास्त करने की मांग की।
भाजपा ने लोकसभा में भी कर्नाटक के आरक्षण का मुद्दा उठाया। मामले में सदन में जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद कार्यवाही को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर शुरू हो गई है।
विपक्षी दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
लोकसभा में सोमवार को कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद कुछ विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। ये सदस्य पोस्टर लेकर आए थे, जिस पर स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी आपत्ति जताई। दरअसल, जब कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में कुछ अपराधों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी सपा सांसद कुछ पोस्टर लेकर आए थे। स्पीकर ने पोस्टरों के प्रदर्शन को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह नियमों के विरुद्ध है और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा, 'आप सदन में पोस्टर नहीं ला सकते। कृपया सहयोग करें। यदि आप सदन में पोस्टर दिखाते हैं, तो मैं आपके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा।' स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री से इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने को कहा। उन्होंने कहा, 'नहीं तो मैं कार्रवाई करूंगा।'
भारी हंगामे के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कोई भी संविधान नहीं बदल सकता। हम हर हाल में संविधान की रक्षा करेंगे। हालांकि, कर्नाटक में मुस्लिमों को आरक्षण देने पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने खरगे से कांग्रेस का रुख साफ करने को कहा। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान का अपमान किया है। कांग्रेस ने बाबासाहब का अपमान किया है। उनके उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि मुस्लिम आरक्षण के लिए अगर संविधान बदलना पड़े तो हम पीछे नहीं हटेंगे। राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर और रेणुका चौधरी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा विवाद पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।