जरांगे के गांव में मना जश्न
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंगलवार को कार्यकर्ता मनोज जारंगे की अधिकांश मांगों को स्वीकार करने के तुरंत बाद जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सरकारी प्रतिनिधिमंडल द्वारा जरांगे से मुलाकात करने और उनकी मांगों को स्वीकार करने के बाद जैसे ही जरांगे ने जीत की घोषणा की, प्रदर्शन स्थल पर उनके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। अंतरवाली सराटी में भी स्थानीय निवासी सड़कों पर उतर आए, भगवा झंडे लहराए, ढोल बजाए और जरांगे के समर्थन में नारे लगाए। मराठा आरक्षण आंदोलन का आध्यात्मिक और रणनीतिक केंद्र माने जाने वाले इस गांव में समर्थकों ने ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया और लोगों में भारी उत्साह देखा गया।
मुंबई पुलिस ने खाली कराया आजाद मैदान, सफाई शुरू
मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों से पुलिस ने आजाद मैदान खाली करा लिया है। यहां सफाई का काम चल रहा है।
मनोज जरांगे ने भाजपा मंत्री राधाकृष्ण विके पाटील द्वारा पेश किया गया जूस पीकर उपवास तोड़ा। राधाकृष्ण विखे पाटिल मराठा आरक्षण पर गठित कैबिनेट उपसमिति के अध्यक्ष हैं। उपवास खत्म करने के बाद जरांगे एंबुलेंस से अस्पताल जांच ले जाया गया। जालना जिले के रहने वाले 43 वर्षीय जरांगे अब छत्रपति संभाजीनगर के उल्कानगरी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती होंगे।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनकी हालत सामान्य है और उन्हें आईसीयू में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले भी वह इसी अस्पताल में इलाज करा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जरांगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। वहीं, आंदोलन खत्म होने के बाद मराठा समाज ने इसे बड़ी राहत के रूप में देखा है।
मराठा आरक्षण आंदोलन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार ने ऐसा संवैधानिक समाधान निकाला है, जो न केवल मराठा समाज की मांगों को पूरा करता है बल्कि ओबीसी कोटे पर भी कोई खलल नहीं डालेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण सामूहिक रूप से किसी समुदाय को नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर उस व्यक्ति को दिया जाएगा, जो अपने दावे को प्रमाणित करेगा। इसके लिए हैदराबाद गजट को आधार बनाया गया है।
आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन खत्म करने के बाद कहा कि आज हमारे लिए दिवाली है, हमें जो चाहिए था, वह मिल गया। सरकार की ओर से जारी सरकारी आदेश (जीआर) स्वीकार करते हुए उन्होंने भावुक होकर उपवास तोड़ दिया। इस दौरान वो फूट-फूट कर रोते हुए नजर आए। राज्य सरकार की कैबिनेट उपसमिति के प्रमुख राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे का आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार मराठा समाज को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उपसमिति ने हैदराबाद गजट लागू करने और कुनबी प्रमाणपत्र देने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद आंदोलनकारी खुश नजर आए और माहौल में उत्सव जैसी स्थिति दिखी।
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार की ओर से ज्यादातर मांगें मान लेने के बाद विजय की घोषणा की। जैसे ही उन्होंने समर्थकों से कहा कि हम जीत गए दोस्तों हजारों की भीड़ खुशी से झूम उठी। कैबिनेट उपसमिति के प्रमुख मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से मुलाकात कर ड्राफ्ट सौंपा। समिति ने हैदराबाद गजट लागू करने और जिन मराठाओं के पास कुनबी का रिकॉर्ड है, उन्हें जांच के बाद प्रमाणपत्र देने पर सहमति जताई। इसके तुरंत बाद जीआर जारी करने का आश्वासन दिया गया।
आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटिल ने एलान किया कि राज्य सरकार अब राजपत्र के जरिए मराठाओं को कुनबी मान्यता देने पर सहमत हो गई है। सरकार इस फैसले पर जीआर (सरकारी आदेश) जारी कर दिया है। जरांगे ने कहा कि हम जीत गए। इसके बाद उन्होंने मुंबई छोड़ने का फैसला लिया।
पुणे में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महायुति सरकार ने मराठा समाज को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र निर्माण से अब तक आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण के आधार पर जितना काम होना चाहिए था, उतना हमारी सरकार ने किया है। बावनकुले ने दावा किया कि पिछली किसी भी सरकार ने मराठा समाज के लिए इतना ठोस काम नहीं किया जितना मौजूदा सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से किया है।
मराठा आरक्षण आंदोलन को बड़ी सफलता मिली। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अगुवाई में बने मंत्रियों के पैनल ने मनोज जरांगे पाटिल को भरोसा दिलाया कि हैदराबाद गजट लागू करने के लिए सरकार जीआर जारी करेगी। जरांगे ने ड्राफ्ट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और कहा कि विशेषतज्ञों ने भी इस पर मंजूरी दे दी है। सरकार ने बताया कि हैदराबाद गजट तुरंत लागू होगा, जबकि सतारा, बॉम्बे और औंध गजट में कम से कम एक माह का समय लगेगा। आठ में से छह मांगें मान ली गई हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को दो महीने का समय दिया है कि वह जीआर जारी कर स्पष्ट करे कि मराठा और कुनबी एक ही समुदाय हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने वादा किया है कि मराठा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिजनों को एक सप्ताह में मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी केस भी वापस लिए जाएंगे। जरांगे ने कहा कि अब सरकार पर वादों को निभाने की जिम्मेदारी है।
मुंबई के आजाद मैदान में पांच दिन के अनशन के बाद मनोज जरांगे ने समर्थकों के बीच जीत का एलान किया। उन्होंने कहा कि मराठा समाज की लड़ाई रंग लाई है और सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को मान लिया है। जरांगे ने साफ कहा कि यदि सरकार आज रात नौ बजे तक आरक्षण पर जीआर जारी करती है तो वह मुंबई छोड़ देंगे। आंदोलनकारियों ने इस घोषणा पर जश्न मनाया और जीत के नारे लगाए।
महाराष्ट्र में हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने इलाके को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। डीसीपी जोन-1 प्रवीण मुंडे ने कहा कि हम अदालत के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं और क्षेत्र खाली करवाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई इस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई अब बुधवार तक के लिए टाल दी गई है। यह फैसला आंदोलन से जुड़ी पूर्व आदेशों के अनुपालन के आधार पर लिया गया। सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल बीरेंद्र साराफ ने अदालत को बताया कि पुलिस ने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है और आंदोलनकारियों द्वारा की गई उल्लंघनों की सूची भी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जरांगे पाटिल और उनके समर्थकों को मुंबई छोड़ने का आश्वासन देना चाहिए ताकि कानून-व्यवस्था पर असर न पड़े, खासकर गणेशोत्सव के दौरान।
हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि सरकार को शुरुआत में ही अदालत को सूचित करना चाहिए था कि भीड़ 5,000 से अधिक है। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों के उल्लंघन पर सरकार के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, जरांगे पाटिल के वकील सतीश मानेशिंदे ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने, यातायात बाधित न करने और भीड़ 5,000 से अधिक न होने की अपील की है। अदालत ने कहा कि वह उम्मीद करती है कि कल तक कुछ ठोस नतीजा सामने आएगा।
मुंबई पुलिस और जीआरपी ने मंगलवार को मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों को सीएसएमटी परिसर से हटा दिया, जहां वे पिछले चार दिनों से जमे हुए थे। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें आरक्षण आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे और उनके समर्थकों को दोपहर 3 बजे तक पास के आजाद मैदान को खाली करने का निर्देश दिया गया था। एक वरिष्ठ जीआरपी अधिकारी ने बताया कि दक्षिण मुंबई के सबसे व्यस्त सीएसएमटी स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ के 60 जवान, दंगा नियंत्रण बल के जवान तैनात किए गए हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों को शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस ने मुंबई के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए हैं। पुलिस ने बताया कि दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण आंदोलन के पहले ही 60,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी और 7,000 वाहनों ने शहर में प्रवेश कर चुके हैं। पुलिस के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण मुंबई में प्रदर्शनकारियों के लगभग 5,000 वाहन खड़े थे। उन्होंने बताया कि स्थिति का संज्ञान लेते हुए, वाशी, ऐरोली, ठाणे और दहिसर सहित मुंबई की ओर जाने वाले सभी प्रवेश द्वारों को मराठा प्रदर्शनकारियों के वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। देश की आर्थिक राजधानी के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।
मुंबई में आजाद मैदान और आरक्षण कार्यकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई है। दरअसल पुलिस आजाद मैदान खाली कराने पहुंची है। इससे आजाद मैदान में तनाव का माहौल है।
मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने शहर की सड़कों पर कुछ समर्थकों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और आम लोगों को हुई परेशानी के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से माफी मांगी।
मुंबई पुलिस ने मंगलवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे और उनकी टीम को एक नोटिस जारी कर उन्हें जल्द से जल्द आजाद मैदान खाली करने को कहा है। पुलिस ने नोटिस में कहा कि दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में 5,000 प्रदर्शनकारियों के जमावड़े की अनुमति थी, लेकिन महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 40,000 से ज़्यादा आंदोलनकारी आजाद मैदान पहुंच गए। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर दक्षिण मुंबई में सड़कें जाम कर दीं और आजाद मैदान और आसपास के इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों पर 5,000 से ज़्यादा वाहन भी खड़े कर दिए, जिससे भारी यातायात जाम हो गया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर खाना पकाया, नहाए, सार्वजनिक जगहों पर नृत्य किया और क्रिकेट खेला, जिससे आरक्षण आंदोलन के लिए पहले से तय शर्तों का उल्लंघन हुआ। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सोमवार को उनके समर्थकों से मंगलवार दोपहर तक शहर की सभी सड़कों को खाली करने और साफ-सफाई करने और सामान्य स्थिति बहाल करने को कहा। पुलिस ने बताया कि नोटिस अमरन पोषण और उसकी कोर टीम के आठ सदस्यों के नाम पर जारी किया गया था।
मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच अब महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने चेतावनी दी है कि अगर मराठों को आरक्षण देने के लिए ओबीसी के मौजूदा आरक्षण में कोई भी बदलाव करने की कोशिश की गई, तो ओबीसी समुदाय सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा। भुजबल ने सोमवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की। वहीं मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा प्रदर्शनकारी 29 अगस्त से अपनी आरक्षण की मांग को लेकर दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में डटे हुए हैं।
मराठों को ओबीसी वर्ग से आरक्षण दिए जाने का विरोध करते हुए वरिष्ठ राकांपा नेता छगन भुजबल ने दावा किया कि महाराष्ट्र में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण में से 6 प्रतिशत खानाबदोश जनजातियों के लिए, 2 प्रतिशत गोवारी समुदाय के लिए, जबकि अन्य छोटे हिस्से विभिन्न समूहों के लिए निर्धारित हैं, जिससे 374 समुदायों के लिए केवल 17 प्रतिशत कोटा बचता है। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए, भुजबल ने दावा किया कि ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के आठ प्रतिशत लाभार्थी मराठा समुदाय के सदस्य हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। अगर उन्हें ओबीसी कोटे में बदलाव किए बिना आरक्षण मिलता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है।'
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने सीएम को चेतावनी देते हुए कहा, 'मैं सरकार और सीएम फडणवीस से कहना चाहता हूं कि जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम मुंबई नहीं छोड़ेंगे। राज्य के सभी मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लें, हम पर हमला करने वाले पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करें और उनके खिलाफ मामला दर्ज करें। देवेंद्र फडणवीस को पुलिस के जरिए लड़कों पर लाठीचार्ज करवाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। वरना हम देवेंद्र फडणवीस को दिखा देंगे कि मराठा क्या होते हैं।'
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई के आजाद मैदान को मराठा आरक्षण प्रदर्शनकारियों से मंगलवार दोपहर तक खाली कराने का आदेश दिया था। हालांकि मराठा आरक्षण के नेतृत्वकर्ता मनोज जरांगे ने बगावती तेवर दिखाते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे मुंबई नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अपना आंदोलन पांचवें दिन जारी रखने वाले जारंगे ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है और कहा कि मराठों को राज्य की राजधानी में प्रवेश करने से कोई नहीं रोक सकता।
कार्यकर्ता ने मराठा प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की भी अपील की और कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकार उनकी आरक्षण की मांग स्वीकार करे और मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता देने वाला एक सरकारी आदेश जारी करे, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे। मुंबई पुलिस ने मंगलवार को जारंगे और उनकी टीम को एक नोटिस जारी कर उन्हें जल्द से जल्द आजाद मैदान खाली करने को कहा। उनका कहना था कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन की शर्तों का उल्लंघन किया है।
जरांगे की सरकार को चेतावनी
विरोध प्रदर्शन के पांचवें दिन जरांगे ने कहा, 'मैं सरकार से बातचीत के लिए तैयार हूं।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'अगर आप भी ऐसा करेंगे तो मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं। जब तक मेरी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। अगर आप हमें गिरफ्तार करने या मुंबई से बेदखल करने की कोशिश करेंगे, तो यह आपके लिए ख़तरनाक होगा।' हाईकोर्ट के आदेश पर जरांगे ने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि हाईकोर्ट गरीब मराठों को न्याय देगा। हम हाईकोर्ट के सभी निर्देशों का पालन कर रहे हैं। 4,000 से 5,000 प्रदर्शनकारी हैं।' जारंगे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस हाईकोर्ट को गलत जानकारी दे रहे हैं और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।