ज्योतिषाचार्या अंजना नैयर ने कहा कि टैरो साधना पर निर्भर है। साधना से सिद्धि नहीं होगी। टैरो के लिए आत्मसात होना पड़ता है। ज्योतिषाचार्या किरन जेटली ने कहा कि ज्योतिष को गहराई से पढ़िए, जल्दबाजी न करें। ज्योतिष में समय लगता है। गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है। दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। केवल स्वार्थवश काम नहीं करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्या गार्गी जेटली ने कहा कि वास्तु के हिसाब से चारों दिशाएं अच्छी होती हैं। जिस दिशा में घर लेते हैं, उसी दिशा में प्रवेश होगा तो काफी लाभ होगा। ताजमहल भी वास्तु के हिसाब से अनुकूल है। क्योंकि उसके चारों ओर बने दरवाजे वास्तु के हिसाब से बने हैं। पहले गेट दो दरवाजों से बनते थे। इसलिए लोग रोग मुक्त रहते थे। पहले घरों में आले और झरोखे, चौखट होती थी। इसलिए लोग सेहतमंद और लाभ में रहते थे।
ज्योतिषाचार्या किरन जेटली ने कहा कि इस समय वैवाहिक जीवन में समस्याओं के मामले ज्यादा आ रहे हैं। आज कल युवाओं में धैर्य की कमी है। बच्चे वैवाहिक जीवन को अच्छा बनाने के बारे में सोचते हैं। युवाओं को टिप्स है कि वे धैर्य रखें। घर में सबकुछ खुशी से रखिए। मानसिक शांति के लिए दान करें। घर में सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से करें। रिश्ते टूटने का सबसे बड़ा कारण धैर्य न होना है। हम ग्रहों को पलट नहीं सकते। कुंडली कभी नाम से नहीं मिलानी चाहिए।
वास्तुशास्त्री अंजना नैयर ने कहा कि घर वास्तु के हिसाब से नहीं बना है तो अड़चनें आती हैं। वास्तु के लिए कुंडली देखना जरूरी है। पुराने समय में चीजें वास्तु के हिसाब से होती थीं। घर में अगर बहुत समय से पेंट नहीं हुआ है तो क्लेश होती है। वास्तु न मानने से कुल देवी-देवता रुष्ट होते हैं। वास्तु से परिवार खुशहाल रहते हैं। कुंडली सही है तो वास्तु ठीक होगा।
ज्योतिषाचार्या गार्गी जेटली ने कहा कि अगर हम प्रकृति के हिसाब से रहेंगे तो हम ठीक रहेंगे। अगर हमारे घर का स्लोब उत्तर की ओर झुकी है तो धन आएगा। फ्लैट में अगर उत्तर की ओर का क्षेत्र खुला है तो आपके पास धन आएगा। यहां तांबे के बर्तन में जल भरकर रखें तो धन आएगा। दक्षिण पूर्व में अगर पानी तत्व आ गया तो घर में रहने वाले लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होंगीं। घर का उत्तर भारी नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से समृद्धि नहीं आएगी। दक्षिण पश्चिम की दीवारें मोटी होनी चाहिए। घर के उत्तर में स्विमिंग पूल होना चाहिए।
नए जमाने का ज्योतिष सत्र में ज्योतिषाचार्या किरन जेटली ने कहा कि सभी बीमारियां ज्योतिष से जानी जा सकती है। राहु, शनि और गुरु कैंसर रोग का कारण है। राहु-केतु जिस भाव पर बैठ जाते हैं उसे प्रबल कर देते हैं। ज्योतिष में रोगों के लिए भी योग बताए गए हैं। एक गोत्र में शादी होने का दुष्परिणाम ब्लड कैंसर होता है। कैंसर ज्योतिष से ठीक हो जाता है। इसके लिए उपाय भी हैं। उपाय करने से कैंसर ठीक हो जाता है। ज्योतिष से बताया जा सकता है कि कौन सा रोग कब जातक होगा यह बताया जा सकता है? राशि और नक्षत्र से भी रोग होते हैं। वृश्चिक राशि का चंद्रमा कमजोर है तो उसे बीमारी जड़ से पकड़ लेती है। समय से पहले बीमारी आती है। चंद्रमा बलवान है तो मानसिक रूप से जातक बलवान होता है। राशियों पर राहु, ग्रह और शनि का दुष्प्रभाव हो तो कैंसर होता है।
ज्योतिष और विवाह योग- कब बजेगी शहनाई सत्र में वैदिक ज्योतिषाचार्या कविता चैतन्य ने कहा कि प्रश्न के जन्म की कुंडली जरूरी है। वैदिक ज्योतिषाचार्या नीलम शर्मा ने कहा कि हमारे प्रारब्ध में जिसको हमारी जिंदगी में आना है, वही पार्टनर हमारे पास आता है। चाहे हम कितनी कुंडली मिला लें। खाली गुण मिलान से ही काम नहीं चलता। प्रारब्ध से सब तय होता है। कुंडली का सप्तम भाव पार्टनर का होता है। सप्तम भाव देखकर बताया जा सकता है कि पार्टनर कैसा होगा। वैदिक ज्योतिषाचार्या शुभ्रा शुक्ला ने कहा कि कुंडली गुरु, शुक्र, मंगल, राहु खराब होते हैं तो शादी में समस्या आती है। अगर शादी नहीं हो रही है तो गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करें। मांगलिक दोष से पार्टनर की मौत के सवाल पर वैदिक ज्योतिषाचार्या नीलम शर्मा ने कहा कि कन्या और मिथुन लग्न के मंगल में पार्टनर की जान को खतरा होता है। बाकी मंगल दोष का प्रभाव ज्यादा नहीं होता। वैदिक ज्योतिषाचार्या कविता चैतन्य ने कहा कि प्रश्न कुंडली के समय प्रकृति उसका उत्तर साथ भेजती है। व्यक्ति को प्रश्न कब पूछना है यह प्रकृति निर्धारित करती है। ज्योतिष अपने आप में संपूर्ण है। सारे फैक्टर लगाकर ज्योतिष देखा जाए तो सटीक उत्तर मिलता है। शुभ्रा शुक्ला ने कहा कि तलाक की स्थिति शुक्र के कारण बनती है। मांगलिक दोष का भी इस पर प्रभाव पड़ता है। गुण मिलान के समय यह पता लग जाता है। वैदिक ज्योतिषाचार्या नीलम शर्मा ने कहा कि कोशिश करनी चाहिए कि एक गोत्र में शादी न करें। इससे दंपती का रक्त एक हो जाता है। इससे संतान उत्पति में दिक्कत आती है। एक गोत्र में शादी करने से बीमारियां आती हैं। पहले चार गोत्र छोड़े जाते थे। इसके बाद दो गोत्र छोड़े जाने लगे। अब एक गोत्र में शादी हो जाती है।
ज्योतिषाचार्य संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि अगर एक गोत्र में शादी करनी है तो नक्षत्र देखना चाहिए। गुण मिलान से ही रिश्ते तय नहीं होते। नक्षत्र मिलान भी करना होगा। एक-एक नक्षत्र को देखना होगा। उसके परिणाम के बाद हमें सलाह देनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य आनंद ने कहा कि कोई भी शादी अच्छी हो उसके लिए पारिवारिक स्थिति अच्छी होना जरूरी है। मन की स्थिति अच्छी होनी जरूरी है। मन शांत रखना है। मन शांत रखेंगे तो बृहस्पति और शुक्र शांत होंगे। कुंडली न मिलने पर शादी को लेकर नकारात्मक न हों। हमें एक गोत्र में शादी नहीं करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि शॉर्टकट से कुछ नहीं होता। ग्रह कितने भी अच्छे हों, लेकिन मेहनत नहीं करेंगे तो ग्रह थोड़ा सा देकर चला जाएगा। शॉर्टकट की जगह ज्योतिषी के पास जाकर समस्या का उपाय पूछें और उसे करें। व्यक्ति के कर्म में जो लिखा है, वह होकर रहेगा। ज्योतिष से बस उसका प्रभाव कम किया जा सकता है। समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिषी से मिलें। नाड़ी दोष को लेकर ज्योतिषाचार्य संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हमें शोध में जाना चाहिए। भ्रांतियों में नहीं पड़ना चाहिए। नाड़ी दोष कुछ नहीं होता है।
ज्योतिषाचार्य आनंद ने कहा कि कोई भी चीज रात भर में नहीं मिलती। ज्योतिष से त्वरित जवाब नहीं मिलता। ज्योतिषी हर जीव की काल, परिस्थिति, समय देखकर भविष्य बताते हैं। अगर आपके कर्म अच्छे हैं तो आप सफलता जरूर पाते हैं। ज्योतिष से जवाब के लिए धैर्य की जरूरत है। एआई सूचना दे सकता है, लेकिन ज्योतिषी ज्ञान देता है।
भविष्य का ज्योतिष और ज्योतिष का भविष्य सत्र में ज्योतिषाचार्य संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाले समय में हर ज्योतिष का एक अवतार होगा। एआई से भविष्यवाणी बताई जाएगी। आने वाले 20 साल में अवचेतन मन एआई से नियंत्रित होगा। आने वाले पांच साल में हर ज्योतिषी का अपना एआई प्लेटफार्म होगा। ज्योतिषी के पास बहुत कुछ देवतत्व से मिला है। जिसे सीखने में एआई को समय लगेगा।
वास्तुशास्त्री मान्या ने कहा कि वास्तु में ऊर्जा जरूरी है। हर चीज में ऊर्जा जरूरी है। हर ग्रह की अपनी ऊर्जा है। वास्तु में भी सेंटर होता है। घर के सेंटर में एनर्जी बनती है। इसे ब्रह्म स्थान कहते हैं। वहां से ऊर्जा हर दिशा में जाती है। अगर कोई ऊर्जा अपनी दिशा में नहीं जाती है तो समस्याएं आती हैं। ऐसे वास्तु दोष को हम आसानी से हटा सकते हैं। घर में सभी भारी चीजें सप्ताह में एक बार जरूर हिलाएं। ताकि वहां नकारात्मक ऊर्जा रुक न जाए। घर में सेंधा नमक डालकर पोंछा लगाएं। हर दिशा का ग्रह होता है। दशा ही दिशा निर्धारित करती है। अपनी महादशा जरूर देखें। कुंडली का 10वां भाव कार्यक्षेत्र बताता है। घर में दक्षिण पूर्व में बैठकर काम करें। वास्तु के उपाय दिल से मानकर करें तो परिणाम मिलेंगे। पृथ्वी तत्व सबसे मजबूत है और यह हर दिशा में होता है।
वास्तुशास्त्री संतोष नैना साहनी ने कहा कि हमें जीवन में पंचतत्वों को ध्यान रखना चाहिए। कार्यस्थल पर कौन सा तत्व कहां होना चाहिए इसका हमें ध्यान रखना चाहिए। फैक्टरी में भारी मशीन दक्षिण में रखी जानी चाहिए। ढलान दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए। ऑफिस में अकाउंट वालों का स्थान वास्तु के हिसाब से तय होना चाहिए।
वास्तुशास्त्री सुरभि भटनागर ने कहा कि वास्तु ज्योतिष से अलग नहीं है। यह ज्योतिष की ही शाखा है। पहले हम वास्तु दोष देखें। उसके बाद हम उसे दूर करने का प्रयास करें। कुंडली से भी वास्तु देखा जा सकता है। वास्तुशास्त्री सुनीता जैसवाल ने कहा कि वास्तु का अर्थ जहां तू वास करे वह घर ठीक होना चाहिए। फेंगशुई और वास्तु को साथ लेकर चलने की जरूरत है। स्कूल में उत्तर पूर्व खुला हो। होटल में दक्षिण पूर्व में रसोई होना चाहिए। वास्तु का हर किसी के जीवन में अहम रोल है। हर घर में वास्तुशास्त्री होना चाहिए।
वास्तुशास्त्री शिल्पा सिंह ने कहा कि जमीन खरीदकर घर बना रहे हैं तो हम उसे वास्तु के हिसाब से डिजाइन कर सकते हैं। फ्लैट में हम वास्तु के प्रयोग कर सकते हैं। जिस घर को हम खरीद रहे हैं वहां बीच में कंपास लेकर जाएं और देखें कि घर का प्रवेश द्वार क्या है। क्योंकि वास्तु में घर के 32 प्रवेश है। इसमें 10 प्रवेश पावरफुल है। कई निगेटिव हैं। उत्तर दिशा में कोई टॉयलेट न हो। इसके कई दुष्प्रभाव होते हैं। दक्षिण पूर्व में रसोई होती है तो पैसा रुकता नहीं है। बेडरूम की लोकेशन पूर्व, दक्षिण पूर्व में होनी चाहिए। मास्टर बेडरूम दक्षिण पश्चिम में नहीं होना चाहिए। घर में जब भी पेंट कराएं तो चटक रंग का प्रयोग न करें।
घर का वास्तु और वास्तु का घर सत्र में वास्तुशास्त्री डॉ. मधुराज ने कहा कि वास्तु को अब एनर्जी वास्तु में बदला गया है। अब घर फ्लैट में बदल गए हैं। यहां एनर्जी वास्तु काम करती है। अगर किसी फ्लैट में एनर्जी निगेटिव है तो वहां कलर और अन्य थेरेपी का प्रयोग करके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह किया जाता है।
प्रो. परमानंद भारद्वाज ने कहा कि अष्टकूट गुण मिलान के 36 गुण होते हैं। शास्त्र के अनुसार कन्यादान आठ और नौ वर्ष में होता था। पहले कन्या और वर वेदी पर मिलते थे। उनकी समदृष्टि रहती थी। विवाह अच्छा चलता था।
प्रो. परमानंद भारद्वाज ने कहा कि विवाह खराब हो रहे हैं, रिश्ते टूट रहे हैं, यह ज्वलंत मुद्दा है। भारतीय संस्कृति में विवाह धर्म के लिए किया जाता है। धर्म, अर्थ और काम के लिए पत्नी होती है। जिस काल में विवाह हो उसे देखना जरूरी है। अच्छे लग्न में विवाह हो तो कुंडली मिलान वगैरह मायने नहीं रखता। कई बार अनेक दोषों के बाद भी अच्छे लग्न में हुआ विवाह अच्छा चलता है।
प्रो. यशवीर सिंह ने कहा कि धर्म, सत्य और कर्तव्य पर अडिग रहकर व्यक्ति हर कठिनाई से निकल सकता है। सारे कष्ट हमें सुधारने और हमारी परीक्षा लेने आते हैं। आज व्यक्ति में धैर्य नहीं है। आज बंधन मुक्त समाज हो चुका है। हमें सही कर्म और संस्कार पर जाना होगा, तभी विवाह और अन्य काम सही हो सकेंगे।
ग्रह और उसके गणित सत्र में प्रो. यशवीर सिह ने कहा कि हमारे यहां सबसे पहले संस्कारों की बात होती है। गर्भाधान से विवाह तक बच्चे के 12 संस्कार होते हैं। आज का युवा मन की बात कर रहा है। मन में संकल्प और विकल्प दोनों आते हैं। लेकिन मन और बुद्धि को छोड़कर युवा अहंकार पर पहुंच जाते हैं। थोड़ा बहुत जन्म पत्री देखकर लोग अहंकार में आ जाते हैं। जब तक हमें ये नहीं पता कि आचार के रूप में क्या करना है? तो हम बच्चों को क्या संस्कार देंगे? इसलिए आज कल विवाह में अड़चनें आ रही हैं। महाकुंभ के साथ ही कार्यशाला भी होनी चाहिए। ताकि युवा पीढ़ी को ज्योतिष का सही ज्ञान दिया जा सके। युवा ज्योतिषियों की अपरिक्वता का दोष ज्योतिष समाज पर आ रहा है। पंचांग में ग्रह गणना का काम ज्योतिष करता है। इसमें उचित अनुचित धर्मशास्त्र बताता है।
ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि अगर किसी मां का शुक्र ठीक नहीं है, तो बच्चे का भविष्य प्रभावित होगा। दशाओं का भी प्रभाव होता है। मां का चंद्रमा प्रभावित है तो बच्चे से चंद्रमा के उपाय कराएं। अगर बच्चे को बच्चे के उपाय कराएंगे तो लाभ नहीं होगा। अगर पिता का मंगल खराब है तो उसका प्रभाव बच्चे पर आएगा। यह होता है। बच्चा जब गर्भ है तो उस समय पति-पत्नी का बुध राहु से प्रभावित है तो उस बच्चे में तिकड़म से चलने की प्रवृत्ति आएगी। माता-पिता और घर से बच्चे का जुड़ाव संस्कार पर निर्भर है। इसके लिए तंत्र-मंत्र काम नहीं करता। पत्री खोलते ही चंद्रमा न मिलाएं, पूरी कुंडली मिलाएं। इसके बाद हमें पता लगता है कि गुण मिल रहे हैं। दो लोगों के कई बार 20 और 35 गुण मिलकर गृहस्थी चल जाए, यह संभव नहीं है। लोगों में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहा है। ऑटिज्म तेजी से बढ़ रहा है। तरंग से इसे प्रबंधित किया जा सकता है। विश्वास की कमी भी खतरनाक बीमारी है। ऐसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। हमारे यहां मानसिक रोग को विकार माना जाता है। लोग उसे स्वीकार नहीं करते। आज सात प्रतिशत युवा डिप्रेशन के शिकार हैं। हमें इन मानसिक विकारों के बारे में बात करनी चाहिए। बच्चे के माता-पिता को मानसिक विकारों के बारे में बताने की जरूरत है।
ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि परिवार, संस्कार और देश बनाने के लिए जरूरी है एक मजबूत संतान। उसकी कोई चर्चा नहीं करता। लोग कहते हैं कि बच्चे अमेरिका चले गए। इसे ठीक कर दीजिए। मगर मैं कहता हूं कि यह ठीक नहीं होगा। बच्चों को बचपन से ही सही संस्कार दिए जाएंगे। मैंने एक चैनल में बच्चों पर शो किया। वह आठ साल तक चला। लोगों में बच्चों को लेकर बहुत चिंताएं हैं। लोग चिंताओं को मंत्र, तंत्र, उपायों में खोजते हैं। संस्कार में चिंताएं उत्तर देती हैं।
ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि हमें खुद को अपडेट रखने और चिंतन करने की जरूरत है। इसके लिए हमें नई परिभाषाएं गढ़नी पड़ेंगीं। परिभाषाएं गढ़नी पड़े तो केवल यह कहकर कि यह शास्त्र में नहीं है, यह कहकर बचें नहीं।
ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि हमें बदले हुए समय के साथ चलना पड़ता है। पहले ज्योतिष में कई सारी अवधारणाएं थीं, लेकिन स्थितियां बदल रही हैं। 50 साल पहले जब कंप्यूटर नहीं थे तो हम कुंडली के भाव पर गौर नहीं करते थे। मगर अब ज्योतिषी कुंडली का भाव देखने लगे हैं। प्राचीन को आधुनिक रूप से लेना होगा। जैसे-जैसे देश, काल, परिस्थिति और मानस बदलता है, वैसे-वैसे ज्योतिष बदलता है।
ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि हमें ज्योतिष का मान सम्मान बचाने की जरूरत है। हम सर्वज्ञ नहीं हो सकते, हम थोड़ा जान सकते हैं। हम एक विधा के बारे में जानते हैं। लेकिन हममें उसके प्रति घमंड नहीं सरलता होनी चाहिए। युवाओं से मेरी अपील है कि वे अधिक से अधिक अध्ययन और शोध करें। जब तक हम लोगों में जाकर उस अध्ययन का अभ्यास नहीं करेंगे, तब तक ज्योतिष पढ़ने का लाभ नहीं होगा। अध्ययन के बाद अभ्यास करना होगा।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि आधुनिक समय में युवा ज्योतिष के क्षेत्र में आ रहे हैं। तकनीकी क्षेत्र और अन्य प्रोफेशन से जुड़े लोग ज्योतिष में आ रहे हैं। ज्योतिष का मजाक बनाने वाले भी इस क्षेत्र में आ रहे हैं। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन पर मां आती है और वे उसे सोशल मीडिया पर दिखा देते हैं। आश्चर्यजनक है कि मां आने की बात कहने वाले पूछकर भविष्य बताते हैं। मां को पूछकर भविष्य बताने की जरूरत क्या है? कुछ लोग कहते हैं कि ग्रह ठीक करने के लिए शराब पीलो। ऐसा कैसे हो सकता है। ज्योतिषी की बड़ी जिम्मेदारी होती है। कुछ ऐसे उपाय बताए जाते हैं जिनका कोई लॉजिक नहीं होता। कुछ ज्योतिषी समाज को दरकिनार करके पैसे को महत्व दे रहे हैं। इसका नुकसान ज्योतिषी को मान देने वालों को हो रहा है। ज्योतिष को लेकर आधी अधूरी जानकारी देने वाली रील्स बनाई जाती हैं। इससे बचने का संदेश हमको देना है। ऐसा नहीं हुआ तो हम ज्योतिष के मूल स्वरूप को बचा नहीं पाएंगे।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पांडुलिपियां हमारी धरोहर हैं। इनको संजोने वालों को प्रणाम करता हूं। पांडुलिपियों का सरकार डिजिटलाइजेशन करेगी। उनको हम एआई रीडेबल प्रारूप में लाएंगे। जिनका ज्ञान विश्व भर को मिले। इससे भारत के ऋषियों मुनियों के ज्ञान की परिपवक्ता विश्व के पटल पर आएगी और विश्व में भारत का मान बढ़ेगा। आपके पास अगर ऐसी पांडुलिपि है तो सरकार को दें। सरकार उनका संरक्षण करेगी। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि हमें एआई की प्रमाणिकता पर भी बात करनी चाहिए। ताकि यह तकनीक हमारी ज्ञान परंपरा की प्रमाणिकता को प्रभावित न करे।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह सांस्कृतिक उत्कर्ष का कालखंड है। अब भारत के हर क्षेत्र की प्रमाणिकता नए सिरे से परिभाषित होने वाली है। हमारी ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक तथ्यों और अनुसंधान पर आधारित थी। हमारे ऋषियों ने समझाया कि ग्रहों की चाल हमारे जीवन को प्रभावित करती है। ग्रहों की खोज हमारे ऋषियों ने वर्षों पहले कर दी थी। इसलिए आज हम सटीक भविष्यवाणी कर पाते हैं। हमारे वेद, विज्ञान, लोकपरंपरा की स्वीकार्यता अब बढ़ रही है।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि योग को विश्वभर ने अपनाया। योग की वैज्ञानिकता, उपादेयता और उपयोगिता प्रमाणित हुई है। विश्व भर के लोग योग को अपना रहे हैं। भारत की संस्कृत को विश्व की वैज्ञानिक भाषा माना गया है। 100 विवि में संस्कृत विभाग है। संस्कृत में शोध हो रहे हैं। ऐसे ही कृषि पद्धति और गोआधारित खेती की प्रमाणिकता बढ़ रही है। भारत के ज्योतिष, खगोल विद्या, ग्रह परिचालन विधा की स्वीकार्यता अब मिल रही है।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्राचीन समय में भारत में जो लोग आए उन्होंने आक्रांता बनकर भारत के ज्ञान को नष्ट किया गया। लाखों पुस्तकों और पुस्तकालय को जला दिया गया। हमारे ज्ञान विज्ञान के केंद्र नष्ट कर दिए गए। लगातार जब ऐसा हुआ तो भारत में स्मृति की परंपरा स्थापित हुई। मनीषियों ने श्रुति और स्मृति के आधार पर ज्ञान परंपरा को बरकरार रखा। भारत में हमारे धर्म में प्रेम, करुणा को निश्चित महत्ता दी है। ऋषियों ने ज्ञान ने हमारे भारत और विश्व को नई दिशा दी। भारत का उत्कर्ष अवश्यंभावी है। जब ऐसा होगा तो भारत की विधाओं का नए सिरे से सम्मान होगा।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल की शक्ति को प्रभावित करने का साहस मुझमें नहीं है। जल से जुड़े विभागों का समन्वय करके जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया गया था। जलशक्ति मंत्रालय देश के हर घर तक पानी पहुंचाने और 2047 में विकसित भारत की संकल्पता के साथ काम कर रहा है। सभी ज्योतिषाचार्यों का अभिनंदन करता हूं। मुझे यहां आकर आनंद का अनुभव हुआ है। आज हम विरासत पर गर्व करते हुए विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा बढ़ रही है। भारत की चेतना को विश्व भर में पहचान मिल रही है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुर्नजागरण है। यह हमारे अतीत की गहराई, वर्तमान की प्रामाणिकता और भविष्य की दिशा का संगम है। हमारा वैदिक ज्ञान विज्ञान के आधार पर विकसित हुआ।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अमर उजाला माय ज्योतिष एप को लॉन्च किया। उन्होंने ज्योतिषाचार्यों का सम्मान किया।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में पहुंचे मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत।
ज्योतिषाचार्य डॉ. खुशी ने कहा कि टैरो कार्ड हर प्रश्न का जवाब देता है। टैरो कार्ड बिना सवाल के जवाब देता है। टैरो कार्ड रीडिंग में ऊर्जा का बैलेंस करना जरूरी है। युवा टैरो कार्ड को मान रहे हैं। टैरो प्रकृति के साथ चलता है।
ज्योतिषाचार्य समायरा जय सिंघानी ने कहा कि टैरों में प्रश्न करने का तरीका अलग होता है। अगर आप अपने प्रश्न को ठीक से पूछेंगे तो ठीक जवाब मिलेगा। टैरो एक साधना है। अगर आप इसे साधना के तौर पर लेंगे तभी आप इस विद्या से न्याय कर पाएंगे।
ज्योतिषाचार्य नीता भेदा ने कहा कि हमारा जीवन चार स्तंभों पर निर्भर है। जीवन में सब कुछ ग्रह से होता है। बचपन के संस्कारों का भी इसमें अहम प्रभाव होता है। हम हर तरह के लोगों को अलग-अलग उपाय बताते हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. जासमी दोषी ने कहा कि कोई भी विद्या सीखने के लिए गुरु ठीक होना चाहिए। टैरो सीखने के लिए शुद्ध आत्मा होना जरूरी है। प्रशिक्षक आपको 78 कार्ड की रीडिंग सिखा सकता है। लेकिन भविष्यवाणी खुद से करनी होती है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. खुशी ने कहा कि टैरो पंचतत्व से जुड़ा है। यह प्रकृति से जुड़ा है। टैरो इसलिए प्रचलित हो रहा है।
ज्योतिषाचार्य समायरा जय सिंघानी ने कहा कि टैरो एक तरह की थेरेपी है। टैरो किया जाता है तो एक हीलिंग होती है। यह जीवन के रहस्य बताता है। टैरो रीडर जीवन के रहस्य बताता है। हर रीडर की अलग-अलग एडवाइज होती है। टैरो का हर सेशन थेरेपी की तरह होता है। यह पारंपरिक थेरेपी से अलग है। इसे और विकसित करने की जरूरत है। यह ज्योतिष से अलग तरह की हीलिंग है।
ज्योतिषाचार्य नीता भेदा ने कहा कि जन्म और मृत्यु से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। हर किसी को अपने महत्व के काम करने चाहिए। कार्मिक जिंदगी का अंत धर्म होना चाहिए। हमारी आत्मा की यात्रा चलती रहती है। जीव के साथ दो चीजें ज्ञान और कर्म हमेशा साथ रहते हैं। टैरो ज्योतिष की विंग है।
टैरो की दुनिया क्या कहते हैं कागज के पत्ते सत्र में टैरो कार्ड रीडर डॉ. जासमी दोषी ने कहा कि टैरो कला और विज्ञान दोनों हैं। टैरो कार्ड दुनिया में कही भी खुले फल हमेशा एक होता है। टैरो कार्ड की विश्वसनीयता कला में आती है। टैरो कार्ड हमेशा सही होते हैं।
ज्योतिषाचार्य शुभेश सरमन ने कहा कि ज्योतिष विश्वास पर काम करता है। आधुनिक व्यवस्था के साथ विज्ञान को नकारा नहीं जा सकता। ज्योतिष में हमें विवेक से फैसला लेना होगा। संसार में जो भी है वह ईश्वर की शक्ति है। कंप्यूटर और एआई मनुष्य ने बनाया है। जब तक जीवन में अध्यात्म, साधना और मंत्र को नहीं अपनाएंगे। तब तक हम निर्णय लेने की शक्ति विकसित नहीं कर पाएंगे। एआई हमें ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए मजबूर कर देगा। संसार में सब पूर्वलिखित है। हमने बस उसे नए रूप में स्वीकार कर लिया है।
ज्योतिषाचार्य अरुण बंसल ने कहा कि ज्योतिषियों को पहचान इसलिए नहीं मिलती है कि हमारा ज्ञान कहीं न कहीं अधूरा होता है। कंप्यूटर युग में ज्योतिष का बड़ा योगदान है। एआई का युग ज्योतिषियों को बड़ी पहचान देगा। ज्योतिषियों के पास जो नियम हैं, उनमें से कई अधूरे हैं। ज्योतिष में केवल एक नियम काम नहीं करता। हमने एक शोध में पाया कि ज्योतिष के फार्मूले अलग है। एआई युग में ज्योतिष बेहद काम करेगा। एआई से हमें जो संभावना मिलती है वह बेहद सटीक होती है। अगले 10 साल में हमारी भविष्यवाणियां बदल जाएंगीं। यह सब एआई से होगा।
ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स ने कहा कि ज्योतिष वेद का निर्मल चक्षु है। दृश्य और दृष्टा को यह अच्छे से समझाता है। श्रेयस और प्रेयस सब चाहते हैं। मनुष्य अपने को जानना चाहता है। अपने पिछले जन्म के कर्म भी जानने हैं। मनुष्य पिछला साथ नहीं ले जा सकता। श्रेयस मार्ग पिछला साथ ले जाने की विधि बताता है। विज्ञान का अर्थ विशिष्ट रूप से किसी प्रक्रिया को जानना है। अपने को जान लिया तो सब कुछ जाना जा सकता है। हर व्यक्ति किसी खास तिथि को जन्म लेता है। हर तिथि के देवता होते हैं। यह सभी को ध्यान रखना चाहिए। तिथि के बाद दूसरी पूंजी वार है। होरा शास्त्र और होरा काल को ध्यान रखना जरूरी है। अगर आपको जन्म होरा का ज्ञान है तो आपके सारे काम शुभ होंगे। ज्योतिष में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के बारे में बताया गया है। अगर आपकी मेष राशि है, अश्विनी, भरणी, कृतिका नक्षत्र आपका मार्ग बदलते हैं। पोषक ग्रह विष्णु की तरह जीव की रक्षा करता है। मेष राशि के पोषक ग्रह केतु, शुक्र, सूर्य है। इसी तरह अन्य राशियों के पोषक ग्रह जीवन की दिशा और दशा तय करते हैं।
ज्योतिषाचार्य जेपी शर्मा ने कहा कि ज्योतिषियों को केवल 10 मिनट में भविष्य बताने के लिए कहा जाता है। बार-बार हमें जताना पड़ता है कि ज्योतिष एक विज्ञान है। अंग्रेजों ने इस देश में संस्कृति को खत्म कर दिया। हम भाषा के नाम पर लड़ रहे हैं। ज्योतिष का निष्कर्ष निकालना जरूरी है। जीव के गर्भ में आते ही ग्रहों का प्रभाव शुरू हो जाता है। ज्योतिष को पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत है। भटकाने वाले लोगों पर मत जाइए। ज्योतिष से बड़ा कोई विज्ञान नहीं है। ज्योतिष जीव का भविष्य बताता है। ज्योतिष में जीव भाग्य की बड़ी भूमिका है।
ज्योतिषाचार्य रमेश सेनवाल ने कहा कि ज्योतिष विद्या बहुत महान है। ज्योतिष में सारा विज्ञान है। इसके मूल में विज्ञान है। यह सब हमारे आचार्यों ने पहले ही इसे विज्ञान को बता दिया है। आज ज्योतिष की सबसे ज्यादा जरूरत है। ज्योतिषी साधक होता है। हमारे इष्ट सूर्य हैं। आधुनिक विज्ञान और पुरातन का समन्वय करके हम आगे बढ़ते हैं। ज्योतिष यह तक बताता है कि किस नक्षत्र के कौन से चरण में आपका जन्म हुआ? जन्म को तिथि के हिसाब से मनाना चाहिए। ज्योतिष ज्ञान और विज्ञान का समन्वय है। भविष्यवाणी मेदिनी ज्योतिष का भाग है। ज्योतिष किसी का विरोधी नहीं है।
ग्रहों का प्रभाव, भाग्य का खेल या विज्ञान की चाल सत्र में ज्योतिषाचार्य शुभेश सरमन ने कहा कि मनुष्य का भाग्य कोई नहीं बांच सकता। अगर किस्मत में लिखा है तो चलकर आएगा, इसमें ज्योतिष की बड़ी भूमिका है। ज्योतिषी की विशेषता है कि वह ग्रहों की गणना, चाल और गति, लाभ हानि को तय कर सकता है। ज्योतिष को ठीक से कहने की शक्ति ज्ञानी के पास होती है।
दिल्ली सरकार के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि ज्योतिष कभी लुप्त नहीं होगा। क्योंकि बड़े-बड़े विद्वानों ने इसकी पताका अपने हाथ में ले रखी है। मेरा भी ज्योतिष से गहरा नाता रहा है। मुझे एक ज्योतिषी ने बताया था कि तुम पार्टी बदलकर मंत्री बनोगे। ऐसा ही हुआ। मैं ज्योतिष को दैनिक चर्या में भी मानता हूं। ज्योतिष विज्ञान है। इसके लिए भगवती की कृपा होना भी जरूरी है। ज्योतिषाचार्यों का काम भी कठिन है।
मंत्री कपिल मिश्रा ने किया अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में आए ज्योतिषाचार्यों का सम्मान।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में पहुंचे दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा।
ज्योतिषाचार्य अनुपम वी कपिल ने कहा कि लोग हाथों पर नंबर का टैटू बनवाते हैं। इसका जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता। हमारा हर नंबर कुछ न कुछ कहता है। मोबाइल अंक शास्त्र में भी दो डिजिट का नंबर महत्व रखता है। आधार कार्ड नंबर भी हमारे भाग्य को तय कर सकता है।
ज्योतिषाचार्य अनुपम वी कपिल ने कहा कि बिना भाग्य के जीवन में कुछ नहीं मिलता। नाम बदलना कोई मायने नहीं रखता। कितना भी पावरफुल नाम रखने से जिंदगी नहीं बदलती। राजयोग भी मायने रखता है। ज्योतिष को शामिल किए बिना अंक विद्या काम नहीं करती। इसमें तिथि और नक्षत्र का बहुत महत्व है। अंक ज्योतिष से पूरी तरह भविष्य नहीं देखा जा सकता। अंक ज्योतिष के वार्षिक अंक से भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है। हाथ में जितनी क्रॉस लाइन होती हैं, वे खराब होती हैं। जन्मांक लकी नंबर नहीं होता। जो नंबर छह, आठ, 12 से संबंध नहीं रखता, वह अंक अच्छा होता है। चार नंबर राहु का नंबर है।
दूसरे सत्र में अंकशास्त्र के पहलुओं पर विस्तार से बात
दूसरे सत्र में ज्योतिषाचार्य अनुपम वी कपिल ने ज्योतिष विद्या के कई और पहलुओं को विस्तार से समझाया। पेशेवर जीवन में पत्रकार रह चुके अनुपम 1995 के बाद ज्योतिष की दुनिया में सक्रिय हैं। इन्हें न्यूमरोलॉजी की चर्चित किताब के लिए भी जाना जाता है। मुंबई में हुए बम धमाकों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों को लेकर की गई इनकी टिप्पणियां काफी चर्चित रही हैं। अंकशास्त्र के विद्वान के रूप में उन्होंने ज्योतिष के विवध पहलुओं पर विस्तार से बात की।
ग्रहों की चाल के अलावा वफादारी और ईमानदारी भी अहम है
वैदिक ज्योतिषाचार्य पं. लेखराज शर्मा ने ज्योतिष और ग्रहों से इतर मानवीय स्वभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, आप कितना भी प्रयत्न करें। हमारा मस्तिष्क काम नहीं करेगा तो सभी कम्प्यूटर फेल हो जाएंगे। जिस पत्थर को हम ऊपर उछालते हैं वो कभी न कभी नीचे जरूर गिरता है। आने वाला भविष्य में जब धर्म की हानि होगी तो इस पृथ्वी की हानि होगी। आप झूठी बातों से पैसा कमा सकते हैं, लेकिन जो शांति है, परम शांति है वो आप अपने काम को वफादारी से करें, ईमानदारी से करें तभी सफलता मिलेगी।
जीवन में अत्याधुनिक उपकरणों का कितना असर, ग्रहों से क्या नाता?
एक अन्य ज्योतिषाचार्य ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हो रहे बदलावों के पीछे भी ग्रहों की चाल का उल्लेख किया। जीवन में अत्याधुनिक उपकरणों के प्रभाव का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर शास्त्री ने बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर और टैबलेट जैसे उपकरण राहु ग्रह की गतिविधियों से जुड़ा है। आज का युवा परिवार में संवाद करने के बदले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से सवाल कर रहा है। यही कारण है कि परिवार में बदलाव आ रहे हैं
क्या अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ नीति के पीछे भी ग्रहों की चाल?
आने वाले वर्षों में देश-दुनिया में क्या बदलाव होंगे? वैदिक ज्योतिषाचार्य अजय भांबी ने इस पहलू पर बताया कि 2050 में दुनिया कैसी होगी, एआई कैसे काम करेगा, जियो पॉलिटिक्स कैसी होगी, धर्म और इकोनॉमी कैसी होगी? इन सब पर बृहस्पति का असर पड़ेगा। अभी बृहस्पति अतिचारी है। इस समय इसका अटैक धन पर होगा । बहुत सारे युद्ध जो चल रहे हैं उन सब का अटैक धन पर है। ट्रंप जो अलग-अलग टैरिफ लगा रहे हैं उसका भी असर धन पर ही है।
जीवन पर चंद्रमा का कितना असर होता है
वैदिक ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने बताया कि इंसान के जीवन में चंद्रमा मन का कारक होता है। इस संसार में मनुष्य का जन्म केवल मन के कारण होता है। आत्मा अजर-अमर है। आत्मा का न जन्म होता है, न ही मृत्यु होती है। मन की सक्रियता में मनुष्य कर्म करता है, वो अच्छे भी होते हैं और बुरे भी होते हैं।
पहले सत्र का आगाज, एक ही मंच पर चार दिग्गज ज्योतिषाचार्य
अमर उजाला-माय ज्योतिष ज्योतिष महाकुंभ के मंच पर संवाद के पहले सत्र में वैदिक ज्योतिषाचार्य केए दुबे पद्मेश के अलावा तीन और दिग्गज- अजय भांबी, चंद्रशेखर शास्त्री और पंडित लेखराज शर्मा जैसे विद्वान आचार्य शामिल हुए। वैदिक ज्योतिष के रहस्य: जीवन को दिशा देने वाले अद्भुत मंत्र शीर्षक वाले इस पहले सत्र में ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि बृहस्पति ग्रह 2050 में देश का भाग्य कैसे बदल सकता है।
विवाह के बाद महिलाओं का गोत्र कैसे बदलता है?
दांपत्य जीवन के इस पहलू पर वैदिक ज्योतिष से सटीक प्रमाणों का उल्लेख करते हुए पद्मेश जी ने बताया, विवाह के बाद सिंदूर दान से नहीं, जब ससुराल पहुंचने के बाद जल में खेलने की क्रीड़ा होती है उसके बाद ही नववधू का पति के गोत्र में प्रवेश होता है। उन्होंने बताया कि एत्रेय ब्राह्मण में इसका उल्लेख है विवाह के बाद जब पत्नी घर आती है। मार्कण्डेय ऋषि की रचना मार्कण्डेय पुराण का उल्लेख कर उन्होंने कहा, इसके बाद ही दुनिया में देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। इससे पहले उनका जिक्र नहीं। उन्होंने घाघरा नदी में आने वाली बाढ़ का उल्लेख कर बताया कि इस पवित्र नदी में हर साल 9, 10 और 11 तारीख को बीते 100 साल से बाढ़ आती है। इस प्रसंग का जिक्र कर पद्मेश जी ने कहा कि ऋषियों के ग्रंथों का अध्ययन करने से वैदिक ज्योतिष से जुड़े सटीक प्रमाण मिलते हैं।
श्रीराम की कुंडली का विश्लेषण, विवाह के 14 साल बाद वनवास
भगवान राम के जन्म के बाद उनकी कुंडली के विश्लेषण का जिक्र करते हुए ज्योतिषाचार्य केए दुबे पद्मेश ने बताया कि वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करने वाले लोग इसे जानते हैं। कर्क लग्न में जन्म मंगल कारक होता है। इसके बाद 28 साल की आयु में उनका विवाह हुआ। विवाह के बाद सीधा वनवास हो गया, ऐसा नहीं है। 14वें साल वनवास होता है। कहते हैं कि 41 वर्ष में परिवर्तन होगा, उसके बाद लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, राम की कुंडली में 41 वर्ष की आयु से पहले राजयोग था ही नहीं। इसलिए वे करीब 56 साल की आयु होने पर ही राजा बने। राम का राजा होना महत्वपूर्ण नहीं था। अगर से समय से पहले राजा बनते तो आज मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श हमारे सामने नहीं होता।
वाल्मीकि रामायण के आधार पर राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने की बात
देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र करते हुए ज्योतिषाचार्य केए दुबे पद्मेश ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोगों ने सवाल किया कि आगे क्या होगा? इस पर उन्होंने कुंडली का विश्लेषण कर राजीव गांधी के लिए कहा कि को 41 साल की आयु में उन्हें ऐसा पद मिलेगा, जो उससे पहले कभी नहीं मिला। बाद में वे पीएम बने। ये वाल्मिकी रामायण की ही देन थी। इसलिए वैदिक ज्योतिष का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि किस लग्न में कौन से ग्रह महत्वपूर्ण हैं, ग्रहों का आपस में क्या रिश्ता है, क्या कारक है इन पहलुओं का अध्ययन जरूर करें। देश-काल और परिस्थियों के आधार पर परिवर्तन होते हैं, जिसकी गणना से सटीक परिणाम मिलते हैं।
ज्योतिष में आस्था, बच्चों की पढ़ाई जैसे सवालों के जवाब
एक टीवी चैनल के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए केए दुबे पद्मेश ने कहा, एक मैनेजमेंट के आदमी ने कहा कि उनकी ज्योतिषशास्त्र में आस्था नहीं थी। ज्योतिष की प्रतिष्ठा की घटना का उल्लेख कर उन्होंने बताया, बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता, इस सवाल हुआ तो मैंने कुंडली देखकर कहा, 'ये मरी हुई कुंडली है आपको बच्चे को ऊपर जाकर पढ़ाना पड़ेगा। यहां पढ़ नहीं सकता।' ये सुनने के बाद भी उन्हें संतोष नहीं हुआ। लाइव टीवी शो पर उन्होंने एक और सवाल किया। उत्तर प्रदेश में हो रहे तत्कालीन चुनाव को लेकर उन्होंने पूछा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन बनेगा? जवाब में मायावती सुनने के बाद सवाल हुआ कि ये सबको पता है, इसमें ज्योतिष की क्या खासियत है। इस पर कुछ पल की गणना करने के बाद मायावती 13 तारीख को ठीक 13 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। अगले दिन नतीजों की घोषणा हुई और 11 तारीख को शपथ ग्रहण की खबर आई। फिर देश के लोगों ने पूछा, क्या गणना गलत है? केए दुबे पद्मेश ने कहा, ज्योतिषाचार्य को पलायनवादी नहीं आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। गणना करने वाले ने फिर दोहराया कि शपथ ग्रहण 13 तारीख को ही होगा और ऐसा ही हुआ।
अमर उजाला बधाई का पात्र है
उन्होंने अपने उद्बोधन के समापन पर कहा, अमर उजाला बधाई का पात्र है। संपादक जी ने अभी कहा था कि ज्योतिष को यथार्थ की धरातल पर लेकर जाएंगे। विकृतियां जब आती हैं तो सभी वर्गों में आती हैं। नेता-मंत्री पत्रकार भी जेल जाते हैं। हमारे यहां भी विकृतियां आई हैं, लेकिन कालजयी तब होता है, जब बाढ़ आती है। जिनकी जड़ें मजबूत नहीं होती हैं, वे स्वत: ही बह जाते हैं। ऐसे तत्वों की चिंता न करें। आप अपने प्रयास करें, ये प्रयास अमरत्व को प्राप्त होने वाले हैं।
वैदिक ज्योतिषाचार्य ने बताई इस शास्त्र की अहमियत
ज्योतिष भारत रत्न से सम्मानित ज्योतिषाचार्य केए दुबे पद्मेश ने इस आयोजन पर खुशी जताते हुए इस विषय की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, साहित्यकार के रूप में मशहूर हुए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में ज्योतिष पढ़ाने के लिए हुई थी। देश में ज्योतिष के खिलाफ गंभीर वातावरण था, ऐसे में उनकी पहचान खो गई। देश ने उन्हें ज्योतिषाचार्य नहीं, साहित्यकार के रूप में जाना। उन्होंने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय भी मूलत: ज्योतिष परिवार से जुड़े थे। उन्होंने ही भारतीय ज्योतिष परिषद की स्थापना की थी। महाराष्ट्र का भी एक बड़ा नाम- बाल गंगाधर तिलक भी ज्योतिष का काम करते थे। आज भी कालगणना का पंचांग देश ही नहीं दुनिया की किसी भी विधा से अधिक बिक्री वाला होता है। ज्योतिष दुनिया की रगों-रगों में है।उन्होंने कई पौराणिक और शास्त्रीय उद्धरण देते हुए कहा कि दशकों से देश में इस विद्या का अभ्यास हो रहा है, लेकिन लोगों के बीच नकारात्मक धारणा भी पनपी। उन्होंने कहा कि ज्योतिषशास्त्र का अभ्यास करने वाले लोगों ने लंबा संघर्ष किया है।
सनातन जीवनशैली में ज्योतिषशास्त्र की अहमियत
इसी साल प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अमर उजाला-माय ज्योतिष ज्योतिष महाकुंभ के आयोजन का उल्लेख करते हुए मेजबान संस्थान की तरफ से संपादक जयदीप कर्णिक ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में ये आयोजन 14 जून को होना था, लेकिन अहमदाबाद में 12 जून को हुए एअर इंडिया विमान हादसे के बाद इसे टालना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मकसद भारत के शास्त्रीय ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाना है। उन्होंने इस आयोजन में सहयोग करने के लिए ज्योतिषाचार्यों का आभार भी प्रकट किया। उन्होंने खबरों की भीड़ में ज्योतिषशास्त्र की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि इस विद्या की अहमियत को पहचानते हुए अमर उजाला ने माय ज्योतिष और जीवांजलि जैसे प्रकल्पों की शुरुआत की। इन दोनों वेबसाइट्स और मोबाइल एप का मकसद दर्शकों-पाठकों को व्यावसायिकता और विकारों से परे ज्योतिष और धर्मशास्त्र से जुड़ी प्रामाणिक और तथ्यात्मक सूचनाएं मुहैया कराना है।
भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक... स्वस्तिवाचन के बाद सरस्वती वंदना
अमर उजाला-माय ज्योतिष ज्योतिष महाकुंभ के मंच पर स्वस्तिवाचन के बाद सनातन संस्कृति की झलक भी दिखी। संवाद का सिलसिला शुरू होने से पहले ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की वंदना- 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना' कर लोकमंगल की कामना की गई। इसके बाद अमर उजाला डिजिटल के प्रमुख और संपादक जयदीप कर्णिक ने आगंतुकों का स्वागत किया।
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एक मंच पर 100 से अधिक ज्योतिषाचार्य
ज्योतिष महाकुंभ में 100 से अधिक ज्योतिषाचार्य हिस्सा लेने आ रहे हैं। इनमें पंडित आर्यन द्विवेदी, बृजेन्द्र मिश्रा, प्रणय दास, धनंजय दुबे, मधुराज, मुकुल कौशिक, स्वाति सक्सेना, दामोदर बंसल, नीलम शर्मा, सुनिता जायसवाल, जय गोविंद शास्त्री, संदीप भार्गव, डॉ. खुशी, सत्येन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. अक्षय केवी, अंकिता के., मुकुल रस्तोगी, मीनल रस्तोगी, दीपक कुमार, ऋतु सिंह, नितीश कुमार वशिष्ठ, संजीव गुप्ता, राजीव तिवारी, नीता भेदा, किरण जेटली, गार्गी जेटली, सुरभि भटनागर, शुभ्रा शुक्ला, नीरज, वंदना शर्मा, जास्मी दोशी, प्रभाकर सिन्हा, शिल्पा सिंह, अदिति भटनागर, कविता चैतन्य, साईं टंडन दास, अरुण बंसल, सर्वेष एफ गुप्ता, अंजना नैय्यर, समायरा जयसिंघानी, विभा शर्मा, अंशु मल्होत्रा, राज सिन्हा, स्वामी नित्यानंद, प्रवीण नांगिया, युवराज राजोरिया, सानवी गुप्ता आदि शामिल हैं। इसके अलावा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से डॉ. गोपालकृष्ण मिश्र, डॉ. मीनाक्षी मिश्र, डॉ. हिमांशु शेखर त्रिपाठी, डॉ. बृजमोहन, डॉ. खेमराज रेग्मी, डॉ. प्रदीप मैखुरी, डॉ. होमेश दत्त और डॉ. रतन लाल भी इस कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगे।
इन विषयों पर होगी चर्चा
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर संवाद होगा। ज्योतिषाचार्यों की ओर से ज्योतिष और विज्ञान के बीच संबंध, इतिहास में छिपे ज्योतिष के राज, भाग्य, ग्रहों की दशा, कुंडली, टैरो कार्ड, अंक ज्योतिष व वैदिक ज्योतिष जैसे कई विषयों पर विमर्श होगा। यह महाकुंभ न केवल ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक अद्वितीय अवसर होगा बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त मंच प्रदान करेगा। श्रोता भी ज्योतिषाचार्यों से इन विषयों पर अपने प्रश्न पूछ सकेंगे।
अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ के दौरान वैदिक ज्योतिष के रहस्य, अंक ज्योतिष : अंकों में छिपी किस्मत की कहानी, कुंडली के रहस्यमयी भाव, घर का वास्तु या वास्तु का घर, ज्योतिष और विवाह योग-कब बजेगी शहनाई, ग्रहों की चाल में कर्मों की आवाज जैसे विषयों पर जाने-माने ज्योतिषाचार्य अपनी बात रखेंगे।