अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर गंभीर कोरोना वायरस रोगियों के इलाज के लिए दो ईसीएमओ मशीनों की खरीद करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जबकि ईसीएमओ उपचार की एक आवश्यकता बहुत बढ़ गई है विशेष रूप से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित गंभीर कोविड रोगियों के लिए। ऐसे मामलों में कई बार रोगियों को ओडिशा से हवाई मार्ग के जरिए अन्य स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों को टीकों के शेष स्टॉक के बारे में जानकारी साझा करने रोकने के बजाय उन्हें टीकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर टीकों की उपलब्धता के बारे में इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईवीआईएन) प्रणाली के आंकड़े सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने की सलाह दी थी और कहा था कि यह संवेदनशील जानकारी है और कार्यक्रम में सुधार के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
त्तर प्रदेश के बहराइच जिले में मोतीपुर थाना क्षेत्र के बड़ा दरोगा पुरवा गांव में बुधवार रात कोरोना प्रोटोकॉल तोड़कर नाच-गाने का आयोजन कराने के आरोप में 35 लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम व अन्य कानूनों की संबद्ध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
त्रिपुरा में गुरुवार को कोविड-19 के 625 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 56,794 हो गई। वहीं 14 और मरीजों की मौत के बाद के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 588 हो गई, जो कि एक दिन में सबसे ज्यादा है। राज्य में अभी 5400 मरीजों का उपचार चल रहा है। बीमारी से 363 मरीजों के ठीक होने के बाद कुल स्वस्थ हुए लोगों की संख्या बढ़कर 50,743 हो गई।
केरल और पश्चिम बंगाल में मई माह में कोविड-19 रोधी टीकों की बिल्कुल भी बर्बादी नहीं हुई। इन दोनों राज्यों में टीकों की क्रमश: 1.10 लाख तथा 1.61 लाख खुराकें बचाई गईं। वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोविड रोधी टीकों की सबसे ज्यादा 33.95 फीसदी बर्बादी झारखंड में हुई। केरल में टीकों की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक 6.37 फीसदी रहा जबकि पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा नकारात्मक 5.48 है। टीकों की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक होने का अर्थ है कि प्रत्येक शीशी में मौजूद अतिरिक्त खुराक का भी इस्तेमाल करना। छत्तीसगढ़ में 15.79 फीसदी टीके बेकार गए और मध्य प्रदेश में 7.35 फीसदी टीके बर्बाद हुए। पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में क्रमश: 7.08 फीसदी, 3.95 फीसदी, 3.91 फीसदी, 3.78 फीसदी और 3.63 फीसदी तथा 3.59 फीसदी टीके बेकार गए।