आखिरी में अमर उजाला के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने धन्यवाद वक्तव्य दिया। अपने वक्तव्य में राजुल माहेश्वरी ने वहां उपस्थित सभी लोगों का आभार जताया। इसके बाद अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी, एमडी तन्मय माहेश्वरी और प्रेसीडेंट वरुण माहेश्वरी ने पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित राकेश चौरसिया और पंडित रामकुमार मिश्र को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
यमन राग में पंडित हरि प्रसाद चौरसिया ने आज खेलो श्याम सखी गीत पर अपनी प्रस्तुति दी।
पंडित हरि प्रसाद चौरसिया दे रहे बांसुरी की संगीतमय प्रस्तुति
अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह के दौरान पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और राकेश चौरसिया ने बांसुरी वादन की शुरुआत की। उन्होंने सबसे पहले राग यमन सुनाया। अपनी विशेष संगीत प्रस्तुति देने से पहले पंडित हरि प्रसाद चौरसिया ने कहा कि इससे पहले आप निकलना शुरू करें मैं बजाना चाहता हूं और अच्छी तरह से बजाना चाहता हूं। ताकि अगली बार भी मैं और आप लोग यहां मिलें। उन्होंने बताया कि मैं आज यमन राग बजाउंगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस राग को दक्षिण भारत में कल्याणी के नाम से जाना जाता है।
कुछ देर में होगा बांसुरी वादन
कुछ ही देर में राकेश चौरसिया और हरिप्रसाद चौरसिया का बांसुरी वादन होने वाला है। इस दौरान तबले पर पंडित छन्नूलाल मिश्र के पुत्र रामकुमार मिश्र अपनी संगत देंगे। पंडित रामकुमार मिश्र का ताल्लुक बनारस घराने से है। उन्होंने तबले की तामील अपनी मां से ली है। वे पहले गाते भी थे।
हरिप्रसाद चौरसिया जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्य के साथ संगीत भी जुड़ जाए तो बहुत बढ़िया बात हो जाती है। बहुत बड़ी बात है कि हमारे कलाकारों, लेखकों, साहित्यकारों को अमर उजाला सम्मान दे रहा है। हर वर्ष यह परंपरा कायम रहे, यही आशा रखता हूं। यह परंपरा पांच साल से कायम है और आगे पचासों वर्ष भी कायम रहेगी। हर बार दिल्ली में आता हूं तो बांसुरी से बात करता हूं, इस बार शब्दों से भी बात करने का मौका मिल रहा है, इस बात की प्रसन्नता है।
अनुवाद की परंपरा में गुजरातिंदलित कविता के लिए मालिनी गौतम को सम्मानित किया गया। अष्टभुजा शुक्ला नरेश सक्सेना, आलोक भल्ला जी सबको स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कविता वर्ग में संग्रह 'उपशीर्षक' के लिए कुमार अंबुज को 'छाप' से सम्मानित किया गया। वहीं, कथा वर्ग में मनोज रूपड़ा के कहानी संग्रह ‘दहन ’ तथा कथेतर वर्ग में दलपत सिंह राजपुरोहित की कृति 'सुन्दर के स्वप्न' को वर्ष की श्रेष्ठ कृति का सम्मान दिया गया। किसी भी रचनाकार की पहली किताब वाला 'थाप' पुरस्कार चिन्मयी त्रिपाठी की कृति 'अपनी कही' को दिया गयाष भारतीय भाषाओं में अनुवाद का भाषा-बंधु सम्मान 'गुजराती दलित कविता' के हिंदी अनुवाद के लिए मालिनी गौतम को प्रदान किया गया।
विनोद कुमार शुक्ल को आकाशदीप सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके पुत्र ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने वीडियो मैसेज के जरिए निर्णायक मंडल का आभार जताया। एमटी वासुदेवन नायर को भी आकाशदीप सम्मान दिया गया। उनके परिवार के सदस्य ने यह ग्रहण किया।
ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित होने के बाद राकेश चौरसिया जी आज पहली बार प्रस्तुति देंगे।
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कहानी को कोई हरा नहीं सकता: एमटी वासुदेवन नायर
मेरे बचपन में साहित्य, लेखन और किताबों की दुनिया का कोई अस्तित्व नहीं था। अखबार तीन दिनों की देरी से डाक द्वारा आते थे। किताब कभी-कभार ही मुझे मिलती थी। जब मैं हाईस्कूल में पहुंचा, मैंने हर चीज को पढ़ना शुरू किया। कहानियां, उपन्यास जो भी स्कूल के पुस्तकालय और नजदीक के घरों में उपलब्ध थे। पढ़ने के बाद मैं कुछ लिखना चाहता था। मैं जानता था कि मैंने जो पढ़ा है, वैसा नहीं लिख पाऊंगा, फिर भी मैंने कई पत्रिकाओं में अपनी कहानियां भेजीं। छपीं भी। मेरे घर की महिलाएं, मेरी मां और कुछ रिश्तेदारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। पढ़ें पूरी खबर
जो कुछ लिखा अपने अनुभव से लिखा: विनोद कुमार शुक्ल
मेरा लिखा हुआ मेरी आत्मकथा ही है। सब कुछ मेरा जाना-पहचाना रहा है। मैंने जो अनुभव किया, आस-पास के लोगों, मिलने-जुलने वालों से, जो किताबें मैंने पढ़ी थीं, उन किताबों के अनुभव से मैंने जो पाया और जो अनुभव बनाया, वही मेरा अनुभव रहा है। वही मेरे लेखन में भी है। जब मैं बड़ों के लिए लिखता हूं, तब बिल्कुल नहीं सोचता हूं कि कितने बड़ों के लिए लिख रहा हूं। अपना अनुभव बनाने की उम्र तो कभी भी हासिल हो सकती है। आदमी जब 18, 19 या 20 साल का हुआ तो वह किताबों की समझ को अपने में, चाहे वह किसी के लिए लिख रहा हो, एक पाठक के रूप में अपनी समझ में एक स्थिति तो बना ही लेता है। पढ़ें पूरी खबर
कुमार अम्बुज, मनोज रूपड़ा, दलपत सिंह राजपुरोहित, चिन्मयी त्रिपाठी और मालिनी गौतम को श्रेष्ठ कृति सम्मान
अमर उजाला शब्द सम्मान-23 तहत वर्ष 2022 में प्रकाशित श्रेष्ठ हिंदी कृतियों के लिए शब्द सम्मान की भी घोषणा कर दी गई है। 'छाप' श्रेणी में कविता वर्ग में कुमार अम्बुज के संग्रह 'उपशीर्षक' को श्रेष्ठ कृति के रूप में चुना गया है। कथा वर्ग में मनोज रूपड़ा के कहानी संग्रह ‘दहन ’ तथा कथेतर वर्ग में दलपत सिंह राजपुरोहित की कृति 'सुन्दर के स्वप्न' को वर्ष की श्रेष्ठ कृति का सम्मान दिया जाएगा। किसी भी रचनाकार की पहली किताब वाला 'थाप' चिन्मयी त्रिपाठी की कृति 'अपनी कही' को मिलेगा। भारतीय भाषाओं में अनुवाद का भाषा-बंधु सम्मान 'गुजराती दलित कविता' के हिंदी अनुवाद के लिए मालिनी गौतम को प्रदान किया जाएगा। इन सम्मानों में एक-एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक के रूप में गंगा प्रतिमा सम्मिलित हैं।
2018 में शब्द सम्मान की स्थापना की गई
अमर उजाला के समूह सलाहकार और शब्द सम्मान के संयोजक यशवंत व्यास ने बताया कि भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न की पृष्ठभूमि में अमर उजाला फाउंडेशन ने 2018 में शब्द सम्मान की स्थापना की थी। सर्वोच्च 'आकाशदीप' अलंकरण हिंदी और अन्य भारतीय भाषा के एक-एक साहित्य मनीषी को अर्पित किया जाता है। अलंकरण में पांच-पांच लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक के रूप में गंगा प्रतिमा सम्मिलित हैं। इसके साथ ही वर्ष की श्रेष्ठ कृतियों को भी सम्मानित किया जाता है, जिसमें भाषाओं के बीच सहभागिता को रेखांकित करने के लिए अनुवाद का भाषाबंधु सम्मान भी सम्मिलित है।
हिंदी के साथ अब तक कन्नड़, मराठी, बांग्ला तथा उड़िया को लिया जा चुका
'आकाशदीप' के अंतर्गत हिंदी के साथ अब तक कन्नड़, मराठी, बांग्ला तथा उड़िया को लिया जा चुका है। इस वर्ष मलयालम को चुना गया है। हिंदीतर भारतीय भाषाओं में गिरीश कर्नाड, भालचंद्र नेमाड़े, शंख घोष और प्रतिभा राय के साथ हिंदी में नामवर सिंह, ज्ञानरंजन, विश्वनाथ त्रिपाठी और शेखर जोशी आकाशदीप से अलंकृत हो चुके हैं।
एमटी वासुदेवन नायर और विनोद कुमार शुक्ल को जानिए
9 अगस्त 1933 को केरल में जन्मे एमटी वासुदेवन नायर को मलयालम के आधुनिक कला-साहित्य में अप्रतिम योगदान के लिए चुना गया है और 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी लेखन क्षेत्र में अद्वितीय अवदान के लिए यह सम्मान अर्पित होगा।
इन्हें किया जाएगा सम्मानित
शब्दों की महान परंपरा के सतत सम्मान और श्रेष्ठतम सृजन को रेखांकित करते हुए इस बार शब्द सम्मान का सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' हिंदी में विनोद कुमार शुक्ल और मलयालम में एम.टी. वासुदेवन नायर को दिया जा रहा है। साथ ही श्रेष्ठ कृति सम्मान कुमार अम्बुज (कविता), मनोज रूपड़ा (कथा), दलपत सिंह राजपुरोहित (कथेतर), मालिनी गौतम (भाषाबंधु) और श्रेष्ठ पहली कृति के लिए चिन्मयी त्रिपाठी को दिए जाएंगे।