पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के संयोजकों को स्टेज पर बुलाकर उनका सम्मान किया। आखिर में पीएम ने कहा कि गुणों के पुजारी बनें। इससे उसे और हमें दोनों को ताकत मिलती है। इर्ष्या भाव को न पनपने दें। इससे हम खुद को छोटा करते हैं और कभी बड़ा नहीं बन सकते। अपने जीवन में सफल बनने के लिए अच्छे, सामर्थ्यवान के लिए सम्मान रखें। पीएम ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा से मेरा भी फायदा होता है। यह मेरे सामर्थ्य को बढ़ा रहा है। इसके बाद पीएम ने सभी को धन्यवाद दिया और उनका अभिवादन किया।
पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है। हमें जो परमात्मा ने दिया हमने उसे बर्बाद कर दिया। आज हमारे लिए पेड़, पानी नदीं हमारे पूर्वजों के कारण हमें मिली हैं। हमे अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी अपना कर्तव्य और दायित्व निभाना है। यह कोई सरकारी नियम से नहीं होगा। अगर सभी बच्चे अपने घरों में सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग बंद करा दें तो यह पर्यावरण के लिए बेहतर योगदान होगा। यूज एंड थ्रो कल्चर के बजाय री-यूज कल्चर को बढ़ावा देना होगा। हम जितने संसाधनों का प्रयोग करेंगे पर्यावरण को नुकसान होगा।
पीएम ने छात्रों के इस सवाल का स्वागत किया और कहा कि यह परीक्षा से जुड़ा विषय नहीं है। लेकिन परीक्षा के लिए जैसे बेहतर पर्यावरण की जरूरत है वेसै ही पृथ्वी कि लिए भी जरूरी है। पीएम मोदी ने देश के बच्चों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की भावना को चार चांद लगाने का काम देश के बालक-बालिकाओं ने किया है। स्वच्छता का सबसे ज्यादा क्रेडिट उन्हें ही जाता है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि एक समय आएगा जब पुरूष जूलूस निकालेंगे की हमें शिक्षक भर्ती में आरक्षण दो। नर्सिंग, पुलिसिंग हर क्षेत्र में आज लड़कियां आगे रही है। समाज से मेरी अपील है कि बेटियों को समान अवसर दिया जाए। समान अवसर से अगर बेटा 19 करेगा तो बेटियां 20 करेंगी।
एक महिला अभिवावक की ओर से ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं के विकास को लेकर सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि पहले से सोच में परिवर्तन आया है। पहले ऐसा बेटे को पढ़ाया जाता था और बेटियों के को ससुराल के भरोसे छोड़ दिया जाता था। अब भी कहीं-कहीं है। लेकिन बिना बेटियों के विकास के समाज का विकास नहीं हो सकता। समाज के भीतर बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं होना चाहिए। रानी अहिल्याबाई, रानी लक्ष्मीबाई और विदूषी ऐसी कई उदाहरण हैं। आज खेलकूद, विज्ञान, बोर्ड परीक्षाओं सभी में देश की लड़कियां कमाल कर रही है। यह समाज के लिए बड़ी शक्ति है।
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि अगर प्रतियोगिता नहीं तो जिंदगी किस बात की। हमें प्रतियोगिता को आमंत्रित करना चाहिए। यह जीवन को आगे बढ़ाने का बेहतर माध्यम है। आप उस भाग्यवान पीढ़ी के हैं जिसे ज्यादा प्रतियोगिता और ज्यादा अवसर मिले हैं। पहले की पीढ़ी के पास में यह अवसर नहीं था।
छात्र मे पूछा कि हम कॉलेज एडमिशन पर ध्यान दें या परीक्षा के नए पैटर्न पर या फिर बोर्ड परीक्षा पर? इस सवाल का जवाब देते हुए पीएम ने कहा कि जो भी हम पढ़ रहे हैं उसे पूरी तरह से आत्मसात करना जरूरी। अगर आपने अपनी शिक्षा पूरी तरह से आत्मसात की है तो परीक्षा का प्रारूप आपके लिए समस्या नहीं बनेगा।
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि कभी-कभी आप खुद का भी एग्जाम लें, अपनी तैयारियों पर मंथन करें, रीप्ले करने की आदत बनाएं, इससे आपको नई दृष्टि मिलेगी। अनुभव को आत्मसात करने वाले रीप्ले बड़ी आसानी से कर लेते हैं, जब आप खुले मन से चीजों से जुड़ेंगे तो कभी भी निराशा आपके दरवाजे पर दस्तक नहीं दे सकती।
सबसे पहले खुद में आदत डाले और पूछे की जितना हमने इनपुट दिया उसका क्या आऊटकम आया। जो कम पसंद है ज्यादा कठिन है उससे हम हमेशा बचने की कोशिश करते हैं। हमारे शरीर की तरह मन भी चीटर है। जो इसे पसंद आता है हम उधर ही चले जाते हैं। पीएम मोदी ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि जो श्रेयस्कर है उसकी तरफ जाना चाहिए। रात को पढूं, सुबह पढ़ूं यह केवल एक प्रवृत्ति है। हम किसमें कंफर्टेबल है, यह मायने रखता है।
पीएम ने कहा कि परीक्षा से डरने की क्या जरूरत। आप परीक्षा से कहे कि मैने इतनी तैयारी की है, इतना पढ़ा हूं, तुम्हारी क्या बिसात। इस दौरान पीएम मोदी ने पुस्तक एग्जाम वॉरियर का भी जिक्र किया।
परीक्षा पे चर्चा के दौरान छात्राओं ने पीएम मोदी से सवाल किया की क्या परीक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। घरवालों और शिक्षकों से डरें या फिर इसे त्योहार की तरह मनाना चाहिए? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक और परिजन जो अपने बाल काल में नहीं कर पाए वह चाहते हैं उसे बच्चा पूरा करे। हम बच्चों की सीमा अपेक्षा और खूबी को बिना पहचाने धक्का मारते हैं। अपने आशाओं के कारण बच्चों पर बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक और परिजन की बात भी सुननी है और हमें उन चीजों पर भी ध्यान देना है कि हम किसमें सामर्थ्य हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि 20वीं सदी की नीति और सोच को लेकर 21वीं सदी का निर्माण असंभव है। नई शिक्षा नीति के लागू होने की देरी से देश का नुकसान हुआ। इस नीति में छात्रो को कहीं अधिक मौके मिले हैं। अगर कोई छात्र किसी कोर्स में प्रवेश ले चुका है और उसे आगे लगे की वह कुछ और करना चाहता है तो उसके लिए नई शिक्षा नीति में मौका है।
पीएम ने कहा कि न्यू नहीं नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहना चाहिए। दुनियाभर में शिक्षा के नीति के निर्धारण में इतने लोगों को शामिल करना एक रिकॉर्ड है। ग्रामीण, शहरी, छात्र और छात्राओं सभी स्तर पर चर्चा और शोध कर के ड्राफ्ट तैयार किया गया। इसके बाद इसे लोगों के पास भेज कर लाखों इनपुट्स लिए गए उसके बाद इसे लाया गया। खेल-कूद को इसमें अनिवार्य किया गया। देश के हर तबके ने इसका पुरजोर स्वागत किया है।
ऑनलाइन शिक्षा को समस्या नहीं बल्कि अवसर मानना चाहिए। माध्यम नहीं बल्कि मन समस्या है। ऑनलाइन पाने के लिए है और ऑफलाइन अवसर के लिए हैं। जीवन में खुद से जुड़ना जरूरी। दिन में कुछ समय ऑफलाइन-ऑनलाइन के बजाय इनर लाइन भी रहें।
पीएम मोदी से ऑनलाइन एजुकेशन पर छात्रों और शिक्षकों दोनों ने सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा चुनौतिपूर्ण है। इसमें कैसे सुधार लाया जाए। पीएम ने कहा कि जब आप ऑनलाइन होते हैं तो पढ़ाई करते हैं या रील देखते हैं? पीएम ने कहा कि दोष ऑनलाइन या ऑफलाइन का नहीं हैं। जब आपका दिमाग कहीं और हो तो सुनना ही बंद हो जाता है। जो चीजें ऑफलाइन हैं वही चीजें ऑफलाइन भी हैं।
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में पीएम मोदी से पहला सवाल दिल्ली की छात्रा खुशी ने पूछा। खुशी ने सवाल किया कि परीक्षा के समय घबराहट और तनाव से कैसे निपटे?
पीएम ने बच्चो से कहा की वह इस साल नया साहस करने वाले हैं। समय-सीमा के समाप्त होने के बाद भी वह छात्रों के सवालों के जवाब देंगे। इसके लिए टेक्स्ट, नमो एप आदि की मदद ली जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा धर्मेंद्र प्रधान ने कार्यक्रम को संबोधित किया और पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने पीएम मोदी को कोरोना वैक्सीनेशन से लेकर कई अन्य उपलब्धियों पर बधाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के लिए दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम पहुंच गए हैं। उन्होंने बच्चों का अभिवावदन स्वीकार किया। जल्द ही वह कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। छात्र दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में उपस्थित हैं। संगीत कार्यक्रम चल रहा है। जल्द ही पीएम मोदी कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं।
परीक्षा पे चर्चा के दौरान बच्चे, उनके अभिभावक और अध्यापक अपनी तमाम शंकाओं से जुड़े सवाल पीएम मोदी से कर सकेंगे। इसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन, आकाशवाणी के चैनलों, टीवी चैनलों, यूट्यूब के विभिन्न चैनलों पर प्रसारित होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, इस साल परीक्षा पे चर्चा के प्रति विद्यार्थियों का उत्साह अभूतपूर्व है। लाखों बच्चों ने अपने बहुमूल्य सुझाव और अनुभव साझा किए हैं। मैं उन सभी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने इसमें अपना योगदान दिया है। एक अप्रैल को इस कार्यक्रम में आप सभी का इंतजार रहेगा।
कोरोना महामारी के बाद स्कूल खुलने और ऑफलाइन मोड में परीक्षाओं के मध्य इस बार की परीक्षा पे चर्चा बेहद महत्वपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा का उत्साह अभूतपूर्व रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार 1 अप्रैल, 2022 को कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों, उनके शिक्षक-शिक्षिकाओं और अभिभावकों के साथ परीक्षा पे चर्चा करेंगे। परीक्षा पे चर्चा का पांचवां संस्करण टाउन हॉल संवादात्मक प्रारूप में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सुबह 11 बजे से शुरू होगा।