इन मार्गों पर बढ़ेगा ट्रैफिक का दवाब
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के नई दिल्ली जिले के डीसीपी आलाप पटेल की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि इंडिया गेट के सभी 10 मार्ग बंद होने से डब्ल्यू प्वाइंट, मथुरा रोड, अशोक रोड, क्यू प्वाइंट, पृथ्वीराज रोड, अकबर, एसबी मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, राजेश पायलट मार्ग, विंडसर प्लेस गोलचक्कर, क्लेरिज होटल गोलचक्कर, मान सिंह रोड, एमएलएनपी गोल चक्कर, जनपथ, फिरोजशाह रोड, मंडी हाउस गोलचक्कर और सिकंदरा रोड पर ट्रैफिक का दवाब बढ़ेगा। पुलिस ने सभी वाहन चालकों से आग्रह किया है कि वह अपनी यात्रा पहले से ही सुनिश्चित कर लें।
छह बजे के बाद यहां से बसें परिवर्तित की जाएंगी
छह बजे के बाद कई प्वाइंट से बसों को परिवर्तित किया जाएगा। ये बसें रात नौ बजे तक परिवर्तित रहेंगी। ये प्वाइंट हैं- रिंग रोड पर मोती बाग क्रॉसिंग, रिंग रोड पर भीकाजी कॉमा प्लेस, लोधी फ्लाईओवर, आईटीओ-आईपी फ्लाईओवर-विकास मार्ग, रिंग रोड-यमुना बाजार, तीस हजारी-मोरी गेट जंक्शन, पंचकुईया रोड, एम्स फ्लाईओवर, एसबीएम-मथुरा रोड, नीला गुंबद, आश्रम चौक, एन-24 रिंग रोड, रिंग रोड-आईएसबीटी, आईएसबीटी-टी प्वाइंट और धौला कुंआ।
3.90 लाख वर्ग मीटर में फैली हरियाली दर्शनीय है
अपने नए रूप में कर्तव्य पथ के आस-पास लाल ग्रेनाइट से करीब 15.5 किमी का वॉकवे बना है। बगल में करीब 19 एकड़ में नहर भी है। इस पर 16 पुल बनाए गए हैं। फूड स्टॉल के साथ दोनों तरफ बैठने का भी इंतजाम है। पूरे क्षेत्र के करीब 3.90 लाख वर्ग मीटर में फैली हरियाली भी दर्शनीय है।
नेताजी की प्रतिमा भी स्थापित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फुट ऊंची प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे। ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई इस प्रतिमा का वजन 65 मीट्रिक टन है। बुधवार इसे उसी स्थान पर स्थापित की जा रही है, जहां बीते 23 जनवरी पराक्रम दिवस पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था।
राजपथ अतीत से वर्तमान तक
आजादी से पहले राजपथ को किंग्स वे और जनपथ को क्वींस वे के नाम से जाना जाता था। स्वतंत्रता मिलने के बाद क्वींस वे का नाम बदलकर जनपथ कर दिया गया था। जबकि किंग्स वे राजपथ के नाम से जाना जाने लगा। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद अब इसका नाम कर्तव्य पथ कर दिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि राजपथ से राजा के विचार की झलक मिलती है, जो शासितों पर शासन करता है। जबकि लोकतांत्रिक भारत में जनता सर्वोच्च। नाम में बदलाव जन प्रभुत्व और उसके सशक्तिकरण का एक उदाहरण है।
सेंट्रल विस्टा के अंदर क्या-क्या आता है?
इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल और बीकानेर हाउस आते हैं।
सेंट्रल विस्टा एवेन्यू पर कितना खर्च हुआ है?
इस परियोजना पर कुल 608 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 21 जुलाई 2022 को लोकसभा में पूछे एक सवाल के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी थी। इसके मुताबिक अब तक परियोजना पर 477.28 करोड़ रुपये खर्च हो चुका था।
पूरे प्रोजेक्ट की बात करें तो इसके तहत जिन पांच परियोजनाओं पर कार्य होना है उनमें से चार पर काम शुरू हो चुका है। इन चारों पर कितना खर्च आएगा इसकी जानकारी भी सरकार ने लोकसभा में दी थी। सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के अलावा नए संसद भवन पर 971 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, उप राष्ट्रपति भवन पर 208.48 करोड़ रुपये और केंद्रीय सचिवाल पर 3,690 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पूरे प्रोजेक्ट पर 20 हजार करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही जा रही है। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों की ओर से 13,450 करोड़ रुपए का क्लियरेंस मिल चुका है।
मेट्रो की ई-बस सेवा सेंट्रल विस्टा का दीदार करवाने को तैयार
दिल्ली के सैलानियों को इलेक्ट्रिक बसों में सफर करते वक्त सेंट्रल विस्टा की खूबसूरती निहारने का मौका मिलेगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) सेंट्रल विस्टा के उद्घाटन के बाद शुक्रवार से सैलानियों के लिए इंडिया गेट के नजदीक निशुल्क ई-बसें चलाने जा रहा है। ई-बसें नजदीकी चार जगहों से नेशनल स्टेडियम गेट नंबर-1 तक चलेंगी। इससे आगे इंडिया गेट तक लोग पैदल सफर करेंगे। 12 ई-बसों की सुविधा हर दिन शाम पांच से नौ बजे के बीच मिलेगी। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि यह पॉयलेट प्रोजेक्ट है। बेहतर नतीजे मिलने के बाद इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
इंदिरा गांधी ने 1972 में किया था अमर जवान ज्योति का उद्घाटन
अमर जवान ज्योति की स्थापना उन भारतीय सैनिकों की याद में की गई थी जो 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे। इस युद्ध में भारत की विजय हुई थी और बांग्लादेश का गठन हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी 1972 को अमर जवान जोत का उद्घाटन किया था।
यह एक नई शुरुआत है
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि हमें भारत के कल्याण और विकास के लिए प्रतिबद्ध रहना है। वहीं मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि यह एक नई शुरुआत है। औपनिवेशिक मानसिकता को खत्म करना होगा।
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कांग्रेस पर कसा तंज
बीजेपी नेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वर्षों से लोगों का एक वर्ग था जो देश पर शासन कर रहा था और चाहता था कि केवल सीमित संख्या में लोगों को ही याद किया जाए। इससे पहले, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं को हमारे इतिहास के कोने-कोने में धकेल दिया गया था।
पीएम मोदी ने किया सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फुट ऊंची प्रतिमा का भी अनावरण किया। ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई इस प्रतिमा का वजन 65 मीट्रिक टन है।
पीएम मोदी ने देखी प्रदर्शनी
सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण के बाद पीएम मोदी ने श्रमजीवियों (मजदूरों) से मुलाकात की। पीएम मोदी ने 'श्रमजीवी' से कहा कि वह 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड के लिए सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना पर काम करने वाले सभी लोगों को आमंत्रित करेंगे। इसके बाद उन्होंने नए सेंट्रल विस्टा एवेन्यू पर प्रदर्शनी देखी।
पीएम मोदी ने किया सेंट्रल विस्टा एवेन्यू का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल विस्टा एवेन्यू का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति मिली।
नेता जी को पूरा विश्व मानता था अपना नेता
आज का दिन पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। देश में नया रंग भरने का काम हुआ है। नेता जी को पूरा देश अपना नेता मानता था। दुर्भाग्य से इस नेता को भुला दिया गया।
नेता जी में नेतृत्व की थी अद्भूत क्षमता
नेता जी में नेतृत्व की अद्भूत क्षमता थी। आजादी के बाद नेता जी के योगदान को भुला दिया गया। देश अगर नेता जी की नीतियों पर चला होता तो आज तस्वीर कुछ और होती।
नेता जी ने कल्पना की थी लाल किले पर तिरंगा फहराने की
नेता जी ने कल्पना की थी कि लाल किले पर तिरंगा फहराने की क्या अनुभूति होगी। इस अनुभूति का साक्षात्कार मैंने स्वयं किया, जब मुझे आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला।
नेता जी के पास विचार थे, विजन था
सुभाषचंद्र बोस ऐसे महामानव थे, जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे। उनकी स्वीकार्यता ऐसी थी कि पूरा विश्व उन्हें नेता मानता था। उनमें साहस था, स्वाभिमान था। उनके पास विचार थे, विजन था। उनमें नेतृत्व की क्षमता थी, नीतियां थीं।
देश ने अपने लिए 'पंच प्रणों' का विजन रखा
आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश ने अपने लिए 'पंच प्रणों' का विजन रखा है। इन पंच प्राणों में विकास के बड़े लक्ष्यों का संकल्प है, कर्तव्यों की प्रेरणा है। इसमें गुलामी की मानसिकता के त्याग का आहृवान है। अपनी विरासत पर गर्व का बोध है।
आज हमारे अपने पथ, अपने प्रतीक
पीएम मोदी ने संबोधन में कहा कि आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं। आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं। आज हमारे पथ अपने हैं, प्रतीक अपने हैं।
गुलामी की मानसिकता के परित्याग ये पहला उदाहरण नहीं
पीएम मोदी ने कहा, आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्यपथ बना है, आज अगर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ये न शुरुआत है, न अंत है। आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदल चुका है। भारतीय बजट, जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है।
कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता नहीं
पीएम मोदी बोले- कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है। ये भारत के लोकतांत्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। अगर पथ ही राजपथ हो, तो यात्रा लोकमुखी कैसे होगी? राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। आज इसका आर्किटेक्चर भी बदला है, और इसकी आत्मा भी बदली है।
देश अब अपनी श्रम शक्ति पर गर्व कर रहा
पीएम मोदी बोले- आज के इस अवसर पर, मैं अपने उन श्रमिक साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने कर्तव्यपथ को केवल बनाया ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की पराकाष्ठा से देश को कर्तव्य पथ दिखाया भी है। नए भारत में आज श्रम और श्रमजीवियों के सम्मान की एक संस्कृति बन गई है, एक परंपरा पुनर्जीवित हो रही है। जब नीतियों में संवेदनशीलता आती है, तो निर्णय भी उतने ही संवेदनशील होते चले जाते हैं, इसलिए देश अब अपनी श्रम शक्ति पर गर्व कर रहा है।
आइये, इस नवनिर्मित कर्तव्यपथ को आकर देखिए
पीएम मोदी ने कहा कि मैं देश के हर एक नागरिक का आह्वान करता हूं, आप सभी को आमंत्रण देता हूं। आइये, इस नवनिर्मित कर्तव्यपथ को आकर देखिए। इस निर्माण में आपको भविष्य का भारत नज़र आएगा। यहां की ऊर्जा आपको हमारे विराट राष्ट्र के लिए एक नया विजन देगी, एक नया विश्वास देगी।