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Amar Ujala Samwad Live: पुलकित सम्राट-शालिनी पांडे और वरुण शर्मा 'संवाद' के मंच पर, मनोरंजन जगत पर चर्चा

Wed, 17 Dec 2025 06:25 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम

खास बातें

Amar Ujala Samwad Haryana 2025 Live News Updates in Hindi: 'हरियाणा स्वर्णिम शताब्दी की ओर' थीम पर आधारित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चर के साथ हुई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीप प्रज्ज्वलन किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी जानी-मानी हस्तियां ने अपने-अपने विचार रखे।
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संवाद में पुलकित सम्राट-शालिनी पांडे और वरुण शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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लाइव अपडेट

06:04 PM, 17-Dec-2025

क्या आप पब्लिक का रिएक्शन देखने के लिए छिपकर हॉल में फिल्म देखने गए हो लोगों के बीच जाकर?

पुलकित: फुकरे आई थी तब हमने ऐसा किया था। मैं अलग शहर में गया था, ये (वरुण शर्मा) अलग शहर में गए थे। मेरे एक सीन पर जो तालियां बजी थीं, वह मैं कभी नहीं भूल सकता।

शालिनी पांडे: हर एक्टर ऐसा करता है। हमने कितने सीन लोगों के बीच जाकर देखे हैं। हर एक्टर उस हाइप के लिए जीता है। मैंने अर्जुन रेड्डी के टाइम यह बहुत किया है। यह बहुत सुंदर फीलिंग है।

वरुण शर्मा: मैं अपनी पहली फिल्म अपनी मम्मी और बहन के साथ देखने गया था। पिक्चर खत्म हुई तो दीदी रोने लगी। मैंने कहा दीदी यार कॉमेडी फिल्म थी। सब हंस रहे हैं और आप रो रहे हो। उन्होंने कहा, वरुण मैं पिछले ढाई घंटे से पिक्चर नहीं देख रही थी। मैं ये देख रही थी कि यहां से पर्दे तक के सफर में क्या हुआ है? मैं अपनी मम्मी के साथ थिएटर में हर फिल्म देखने जाता ही हूं।

06:03 PM, 17-Dec-2025

शादी के बाद भी फुकरे कैसे बने रह सकते हैं?

पुलकित: अपनी वाइफ का बेस्ट फ्रेंड बनकर रहिए। यकीन मानिए आप जिंदगीभर फुकरे ही बने रहेंगे। जब तक आप एक-दूसरे के बेस्ट फ्रेंड हैं तो उससे बेहतर कुछ नहीं। उसमें भी प्यार तो सोने पर सुहागा है। आप अपने बेस्ट फ्रेंड से प्यार कर रहे हैं।

05:52 PM, 17-Dec-2025

फिल्म का नाम क्योंकि 'राहु केतू' है, क्या आप तीनों एस्ट्रोलॉजी में यकीन रखते हैं? क्या आपने कभी ऐसा पढ़ा कि आज मेरी राशि में क्या लिखा है?

पुलकित: मैं ज्योतिष में यकीन रखता हूं या नहीं मुझे नहीं पता। लेकिन, अपनी मां में बहुत यकीन करता हूं। वह जो बोलती हैं, मैं कर लेता हूं। वह जिसके लिए हाथ जोड़ने को बोलती हूं, मैं खड़े होकर चुपचाप कर लेता हूं।

शालिनी पांडेय: जब अच्छी चीजें होती हैं तो मैं भरोसा कर लेती हूं। बाकी मैं पढ़ती नहीं हूं। मेरी मम्मी इतनी स्वीट हैं। जब वो मेरे पास आती हैं और कुछ करने को बोलती हैं तो मैं उनकी खुशी के लिए कर लेती हूं।

वरुण शर्मा: मैं ज्योतिष में यकीन रखता हूं सर। विश्वास ही है, हर चीज में। मेरा जन्मस्थान पंजाब में जालंधर है। शुरू से हम घरवालों को और बड़ों को देखते आ रहे हैं। वहीं से यह सारी चीजें डेवलप हुई हैं। स्कूल में राशि मैं तब जरूर पढ़ता था जब कोई क्रश होता था तो उसके साथ ग्रह नक्षत्र मिलाने के लिए।

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05:49 PM, 17-Dec-2025

वरुण, जब सिनेमा और ओटीटी बात होती है। आप फ्यूचर कहां देखते हैं?

वरुण शर्मा: बहुत सारे नए माध्यम आ गए हैं। हर जगह फ्यूचर है। बहुत सारे ओटीटी प्लेटफॉर्म बहुत सारा कंटेंट बना रहे हैं। टीवी, माइक्रो ड्रामा, मूवीज, कंटेंट क्रिएशन...इतना सारा कंटेंट है कंज्यूम करने के लिए तो उतना ही रोजगार भी है। मुझे याद है कि हम या तो फिल्मों के ऑडिशन देते थे, एड के देते या टेली फिल्म्स और टेलीविजन के। ओटीटी के आने से कितने सारे क्रू, टेक्नीशियन और एक्टर्स, कितने सारे लोगों को काम करने का मौका मिला है। सिनेमा और क्रिकेट दो ऐसी चीजें हैं जो लोगों की रगों में हैं। शनिवार और रविवार की सुबह बच्चों के साथ पार्क जाना होती है, शॉपिंग होती या फिल्म देखने जाना होता है। 

05:48 PM, 17-Dec-2025

क्या फुकरे 4 भी पाइपलाइन में है?

पुलकित: हमारे डायरेक्टर से बात करनी पड़ेगी। 
वरुण शर्मा: जो आपका सवाल है, वही हमारा भी सवाल है। हम उम्मीद करते हैं कि फुकरे 4 जल्दी बने। वह अब फिल्म से ज्यादा इमोशन है।

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05:47 PM, 17-Dec-2025

सवाल- अब लोगों तक पहुंचने तक माध्यम हो गया है रील, आप लोगों पर कितना प्रेशर रहता है कि रील बनाना है और उस पर जनता की प्रतिक्रिया देखने का?

वरुण शर्मा: सोशल मीडिया बहुत विशाल दुनिया है। बहुत जल्दी आपको सारी चीजें पता चल जाती है। प्रेशर फील होता है, हां बिल्कुल होता है। अगर आपको फील नहीं होता है तो आपको कराया जाता है। मैं यह नहीं कह रहा कि आसपास के लोगों के द्वारा कराया जाता है। सोशल मीडिया के जितने फायदे हैं उतने नुकसान भी हैं। मेरे जीवन, परिवार और दोस्तों के साथ एक नियम है कि जब मैं छुट्टी पर जाता हूं तो फोन ही नहीं लेकर जाता हूं। अगर मैं छुट्टियों पर गया हूं तो घर पर केवल सुबह और शाम को फोन करता हूं कि मैं ठीक हूं।

शालिनी पांडे: सोशल मीडिया और मोबाइल के साथ रिलेशनशिप अलग चीज है। मेरा और स्क्रीन का रिलेशन वहीं तक है, जहां तक मेरा काम है। मैं अपने दर्शकों से रूबरू होती हैं सोशल मीडिया से, लेकिन मैंने अपना दायरा बना रखा है। मेरा रिश्ता सोशल मीडिया से बहुत अच्छा है।

05:39 PM, 17-Dec-2025

आपको इस किरदार में किस चीज ने प्रभावित किया?

शालिनी पांडेय" विपुल सर ने जब इसे नैरेट किया तो लगा यह बहुत अलग तरह की कॉमेडी है। यह इंटेलीजेंट कॉमेडी फिल्म है। मुझे लगता है कि मेरे लिए राइटर और डायरेक्टर एक हों तो मैं उन पर भरोसा कर सकूं।

05:33 PM, 17-Dec-2025

शालिनी आप राहु और केतू के बीच फंस गई हैं?

शालिनी पांडेय: मैं फंसी नहीं हूं। मेरा किरदार बहुत अच्छा है।

05:31 PM, 17-Dec-2025

सवाल-  आप दोनों को बहुत पैसे भी मिले, बहुत सारी फिल्मों के लिए? लेकिन आपने मना कर दिया क्योंकि आप दोनों को साथ काम करना था? यह अफवाह है या सच

वरुण शर्मा: यह सच है। पुलकित और मेरी शुरुआत एक साथ हुई थी। 2013-14 में हमने शुरुआत की थी पहली फुकरे के साथ। मेरी पहली फिल्म थी शायद पुलकित की दूसरी फिल्म थी। 10-12 साल से हमें जनता से प्यार मिला। हम अपने किरदार कर रहे थे लेकिन जनता को उनको ग्रुप में अपना हनी मिल गया, चूचा मिला गया, लाली मिल गई। वहां से मेरी और पुलकित की जोड़ी बन गई और फुकरे 2 और फुकरे 3 आई।

05:22 PM, 17-Dec-2025

सवाल- लोग आपको हनी और चूचा के किरदार में देखते हैं। उसे ब्रेक करना कितनी बड़ी बात है?

पुलकित: हम दोनों की बहुत बनती है। हमारी बॉन्डिंग अच्छी लगती है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि इस फॉर ग्रांटेड लें। मुझे इसके बारे में सब पता है। ऐसे में हमे अनलर्निंग सीखना बहुत जरूरी थी। हमें इस फिल्म में यह ध्यान रखना था कि हनी और चूचा की केमिस्ट्री न लाएं।

05:09 PM, 17-Dec-2025

पुलकित सम्राट-शालिनी पांडे और वरुण शर्मा 'संवाद' के मंच पर पहुंचे

अभिनेता पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा और अभिनेत्री शालिनी पांडे अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। तीनों मनोरंजन जगत पर बात करेंगे।

05:01 PM, 17-Dec-2025

आखिरी बार आपने होटल से मॉइश्चराइजर बॉडी लोशन कब अपने बैग में डाला?

अरशद वारसी हंसते हुए बोले कि मैं अब पैसे कमाने लगा हूं। अब स्थिति ये है कि अब होटल वाले खुद मुझे देते हैं कि सर कुछ तो ले जाओ।

05:00 PM, 17-Dec-2025

एक वक्त ऐसा भी था कि आप डोर टू डोर कॉस्मेटिक भी बेचते थे?

अरशद: नहीं डोर टू डोर नहीं, लेकिन होटल में जाकर बेचता था। मैं जो बेचता था, उतना घटिया प्रोडक्ट किसी ने नहीं बनाया होगा। मैंने जो झूठ बोल-बोलकर बेचा है, बता नहीं सकता। मैं बोलता था कि केमिकल नहीं है, बहुत अच्छा है।

04:58 PM, 17-Dec-2025

सर्किट का किरदार आपके लिए एक बड़ा मौका था?

अरशद: वह एक बड़ा मौका था। यह जो रोल था पहले, यह बहुत ही निहायत घटिया रोल था। इसे पहले हर एक्टर ने रिजेक्ट किया था। यह रोल वह था कि जो हीरो के पीछे खड़ा रहा है। मेरी किस्मत थी कि मुझे राजकुमार हिरानी जैसा डायरेक्टर मिला। मैंने उनसे कहा कि इस रोल में कुछ है तो नहीं, ऐसा नहीं है कि मेरा इससे कुछ हो जाएगा। मैं टीवी करूंगा या क्या पता नहीं। लेकिन, इस रोल को मैं एंजॉय करूंगा। वो तैयार हो गए। मुझे फ्रीडम मिल गई। फिर जो किरदार हुआ, सबको पता है।

04:57 PM, 17-Dec-2025

22 साल पहले आपका सर्किट नाम का एक कैरेक्टर आया। आज जब युवा पीढ़ी आपको सर्किट सर कहती है तो आपको लीजेंड जैसा फील होता है या सीनियर सिटिजन?

अरशद: लीजेंड वाली फीलिंग तो नहीं आती। हां, ये जरूर लगता है कि मैच्योर हो गया हूं। मैं दुबई में घूम रहा था पिछले दिनों, तो ग्रैंड पेरेंट्स ने कहा, 'सर्किट'। वहीं बच्चों ने कहा, 'गफ्फूर'। 

04:48 PM, 17-Dec-2025

सवाल- आपका पसंदीदा किरदार कौन है जो आपने किसी फिल्म में निभाया

मुझे इश्किया का बब्बन किरदार पसंद है। मैं कॉमेडी जो करता हूं वो लोगों के लिए करता हूं अपने लिए नहीं। धमाल, गोलमाल जैसी फिल्में जो की हैं, वह मैं लिख नहीं सकता लेकिन, वह फिल्में की इसीलिए क्योंकि पता था कि लोग इसे जरूर पसंद करेंगे।

04:44 PM, 17-Dec-2025

सवाल- कभी मन में आया कि ये किरदार मैंने क्यों मना कर दिया

अरशद वारसी ने मजाकिया अंदाज में कहा, मेरे पास अक्सर वही किरदार आते हैं जो सभी रिजेक्ट कर चुके होते हैं। जॉली भी सबने रिजेक्ट की थी तब मेरे पास आई थी।

04:42 PM, 17-Dec-2025

सवाल- अरशद वारसी के लिए सफलता का मतलब क्या है?

मेरे लिए अपने परिवार के साथ समय बिताना सफलता है। मैं बहुत ज्यादा काम नहीं करता, मुझे परवाह भी नहीं है। आपको जो चाहिए अगर आपको वह मिल गया है तो कहीं पर आपको रुक जाना चाहिए। इंसान के लालच की कोई सीमा नहीं होती है। मैं बहुत पहले अपना सोचा था कि मुझे एक घर चाहिए मुंबई और एक घर चाहिए गोवा में जाना में अपना वक्त बिता सकूं।   

04:34 PM, 17-Dec-2025

आपको कैसे मिली फिल्म?

मैंने पूरी कोशिश की थी फिल्म नहीं करने की। मेरे घर पर छोटा सा डिनर था। एक दोस्त आया था अपने किसी दोस्त के साथ। मुझे उसने देखा कि मैं लोगों से कैसे मिल रहा हूं। दो दिन बाद उसने फोन किया और कहा मैं एक फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं, मैं चाहता हूं कि तुम ये फिल्म करो। मैंने कहा कि पार्टी दो दिन पहले हुई थी आपकी अभी तक उतरी नहीं है? क्यों मजाक कर रहे हो। उसने कहा कि नहीं सीरियस हूं। अपने फोटो तो भेज दो। मैंने बहुत ही साधारण सी फोटो भेजी। मैंने पोस्टकार्ड फोटो जया जी को भेज दी। मेरे पास फोन आया कि जया जी मिलने वाली हैं। वहां जाने के बाद उन्होंने न मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया न कुछ और मुझे ओके कर दिया। मैं अब फिल्म नहीं करने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपने डायरेक्टर को मैसेज भेज दिया कि सॉरी मेरे से नहीं होगा। किसी और को ले लो। मेरे डायरेक्टर ने कभी अपनी आंसर शीट चेक ही नहीं की। इस तरह फिल्म करनी पड़ी। मेरा दिल कहता है कि आप फाइनली वही करते हैं, जो किस्मत में होता है। आप कितनी भी कोशिश करें। 

04:33 PM, 17-Dec-2025

आपकी फिल्म तेरे मेरे सपने थी, तब वैनिटी नहीं थी। तब 30 साल पहले के सिनेमा में क्या अलग था?

अरशद वारसी: बहुत कुछ अलग था। एक मासूमियत थी उस वक्त। मैं अपनी बात कह सकता हूं कि तब मजा आता था। अब बिजनेस का नजरिया काफी बढ़ गया है।

04:32 PM, 17-Dec-2025

सवाल- अखबार का ऐसा कौन-सा कॉलम है, जिसे बचपन से पढ़ते आ रहे हैं?

अरशद वारसी ने जवाब में कहा, हॉरस्कोप। छोटे थे तो वही पढ़ते थे। अब डिजिटल का जमाना है तो अब ऑनलाइन ही सूचनाएं मिल जाती हैं। 

04:24 PM, 17-Dec-2025

संवाद के मंच पर पहुंचे अभिनेता अरशद वारसी

अभिनेता अरशद वारसी अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं, वह सिनेमा और अपने करियर को लेकर बात कर रहे हैं।

04:11 PM, 17-Dec-2025

आपका कॉपोर्रेट मंत्र क्या है?

बाबा रामदेव: सिंथेटिक उत्पादों को रोकना होगा। बालों में मिनरल आयल लगा रहे हैं। रिफाइंड ऑयल खा रहे हैं। यही दिल में जाकर ब्लॉकेज पैदा करता है। इस सबके बीच आपका मजबूत रहना है, तो योग करना होगा। मैं 15 मिनट में पांच किलोमीटर दौड़ लगाता हूं। दिसंबर हो या जनवरी, पसीना जरूर टपकना चाहिए। नहीं टपकेगा तो आप टपक जाओगे। ...तो स्वदेशी अपनाओ। काम में सौ प्रतिशत प्रामाणिकता रखो। नीयत में खोट न हो। जो काम एक बार शुरू किया, तो पीछे मुड़कर न देखें। लाख बाधाएं हों, लेकिन आप बढ़ते चलो। मेरे माता-पिता अनपढ़ थे। परिवार में पांचवीं-सातवीं से ज्यादा कोई पढ़ा नहीं। आज रामदेव के नीचे पांच हजार डॉक्टर काम कर रहे हैं। पांच लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं। एक लाख करोड़ रुपये का हमने चैरिटी कार्य किया है।

04:08 PM, 17-Dec-2025

लेकिन फिर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप लगते हैं?

बाबा रामदेव: सबके भीतर भगवा है। लोगों ने खूब कोशिश करके देख ली। भारत सनातन परंपरा का देश है। इसे आप नकार नहीं सकते। ढाई सौ साल पहले तो हमारी सौ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था रही होगी। इसे दरिद्र बना दिया गया। हम दोबारा यह पुरुषार्थ कर सकते हैं। इसमें पांच-दस-पच्चीस साल लग सकते हैं, लेकिन हमें करना होगा। हमें अपनी हैसियत समझनी होगी। जिस देश के 140 करोड़ लोग पूरी ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में लग जाएंगे, तब भारत सामरिक महाशक्ति बनेगा। चाहे जनशक्ति हो, धनशक्ति हो, सैन्यशक्ति हो, भारत सबसे आगे था।

04:04 PM, 17-Dec-2025

सवाल- आपका रुझान योग और सनातन की तरफ कब से हुआ?

बाबा रामदेव: मेरे मन में मैकाले की शिक्षा पद्धति से विद्रोह था। मुझे अंग्रेजों की परंपरा से नहीं पढ़ना था। मुझे अंग्रेजों का मानस पुत्र नहीं बनना था। आर्थिक-सांस्कृतिक गुलामी मंजूर नहीं थी। मुझे गुरुकुल परंपरा से पढ़ने का मौका मिला। हम इसी परंपरा से बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। हमारे बच्चे को शास्त्र भी कंठस्थ हो जाते हैं। बच्चों में संस्कार जगाते हैं। मुझे नहीं पता था कि दुनिया मुझे योगी बना देती। ...कोई भी बोर्ड ऐसा नहीं है कि सनातन के बोध के साथ शिक्षा दी जाती हो। हम इतने जड़तावादी हो गए हैं कि हम सोचते नहीं। जिन मुगलों-आक्रांताओं ने देश को लूटा, उन्हें अब भी हम महिमामंडित कर रहे हैं। हर राज्य की शिक्षा प्रणाली बदलनी चाहिए। 

03:58 PM, 17-Dec-2025

योगगुरु बोले- दिल्लीवालों के फेफड़ों का अध्ययन किया जाए तो वे काले मिलेंगे

योगगुरु ने आगे कहा, दिल्लीवालों के फेफड़ों का अध्ययन किया जाए तो वो काले-काले मिलेंगे। जो सिगरेट-बीड़ी नहीं पी रहे, उनके साथ भी ऐसा हो रहा है। उम्र घट रही है। शुद्ध हवा, आहार, पानी हमारा संवैधानिक अधिकार है। फिर भी हम जहर पी रहे हैं। आपके फेफड़े यदि मजबूत हैं, तो वो प्रदूषण को बाहर फेंक देंगे। महंगी-महंगी मशीनें लगाने की जरूरत नहीं है। दिल मजबूत है, तो कॉलेस्ट्रोल को बाहर फेंक देगा। लीवर मजबूत है, तो फैट बाहर फेंक देगा। हमारा शरीर भीतर से योद्धा है। वह हारना नहीं चाहता। शरीर सर्दी-गर्मी से लड़ता है। सभी सरकारों को भी ध्यान देना चाहिए। हमें यह सोचना पड़ेगा कि सिर्फ परिवार ही हमारा नहीं है। पर्यावरण भी हमारा है। इसे गंदा नहीं होने देना चाहिए। ज्यादा पानी प्रयोग करना, हवा को दूषित करना भी पाप है। प्रकृति हमारी मां है। हम उसका दुरुपयोग नहीं कर सकते। उसका रक्तपान नहीं कर सकते।

03:54 PM, 17-Dec-2025

सवाल- दिल्ली-एनसीआर जैसे एक्यूआई में प्राणायाम करना चाहिए या नहीं?

योग गुरु बाबा रामदेव ने योग और सनातन पर बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि प्रदूषण ज्यादा है। लंबी सांस लीजिए। जिसके फेफड़े कमजोर हैं, प्रदूषण उसके भीतर जमा रहता है। सुबह उठते ही जोर से सांस लेनी चाहिए। 365 दिन ऐसा करना चाहिए। जब सकारात्मक मन के साथ श्वास लेते हैं तो सिर्फ ऑक्सीजन नहीं भरती, दिव्यता शरीर में भर जाती है। पांच मिनट का कपालभाति भी करनी चाहिए। इसे शरीर का 'मध्य प्रदेश' अच्छा हो जाता है। सभी का पेट इतना होना चाहिए कि पेट अंदर खींचे तो पसलियां दिखें। बॉडी राउंड इंडेक्स ऐसा ही होना चाहिए। सीधे के साथ-साथ उल्टे चलें। तीन तरह के प्राणायाम करें। ये सब करने से शरीर ऑटो पायलट मोड में आ जाता है। शुद्ध हवा हमारा सांविधानिक अधिकार है। लेकिन हम जहर पीने को मजबूर हैं। एक्यूआई में तीन चीजें हैं। इसमें कार्बन, धूल और अन्य चीजें हैं। आप कमरे बंद करके पर्दे लगाकर प्राणायाम करें। इससे आपको राहत मिलेगी। प्राणायाम शरीर में सभी चीजों को बैलेंस करता है।

03:49 PM, 17-Dec-2025

वायु प्रदूषण और सांस की समस्या से कैसे निपटें?

योग और प्राणायाम पर चर्चा से पहले योगगुरु रामदेव ने अमर उजाला के मंच पर प्राणायाम और योगाभ्यास कर फिटनेस का संदेश भी दिया। उन्होंने बताया कि कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे विकल्पों को अपनाकर हम वायु प्रदूषण की चुनौती से निपट सकते हैं। उन्होंने भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम आदि का जिक्र करते हुए कहा कि इससे हमारे कार्यक्रम का मंगलाचरण बेहतरीन तरीके से हुआ है।

03:43 PM, 17-Dec-2025

स्वामी रामदेव अमर उजाला 'संवाद' के मंच पर

योग गुरु स्वामी रामदेव अमर उजाला 'संवाद' के मंच पर पहुंच गए हैं। वह योग, स्वास्थ्य और सनातन मूल्यों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।

03:40 PM, 17-Dec-2025

सवाल: आपने कलम कैसे थामी?

जनरल नरवणे: मैं फौजी से किस्सागो बना हूं। किसी भी शख्स को एक ही क्षेत्र में अटके नहीं रहना चाहिए। कुछ अलग-अलग करते रहने की कोशिश करना चाहिए। यही सोचकर किताब लिखी। रिटायर होने के बाद मैंने नगालैंड पर अपनी पीएचडी खत्म की। फिर यह किताब 'द कैंटोनमेंट कॉन्ट्रोवर्सी' लिखी। यह मर्डर मिस्ट्री पर लिखी किताब है, जो आर्मी कैंटोनमेंट की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसके नायक और नायिका दोनों सेना में हैं और वे कैसे फौज की इज्जत बरकरार रखते हुए अपना काम करते हैं, इसी बारे में किताब लिखी गई है। इस पर ओटीटी जैसा कुछ बन सकता है, लेकिन अभी यह दूर की बात है।

03:39 PM, 17-Dec-2025

सवाल: युवाओं का रुझान कैसा है?

जनरल नरवणे: ऐसा नहीं है कि सब कॉर्पोरेट की तरफ भाग रहे हैं। युवाओं में देशभक्ति कायम है। जैसे- हरियाणा के युवक हैं, उन्होंने बहुत देश की सेवा की है। हम यही चाहेंगे कि वे देश की ऐसे ही सेवा करते रहें। 
 

03:38 PM, 17-Dec-2025

सवाल: दिल्ली में हाल ही में एक धमाका हुआ था। सफेद आतंकी मॉड्यूल देखा। आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को कैसे देखते हैं?

जनरल नरवणे: दो किस्म के खतरे हैं। एक बाहरी और एक अंदरूनी। बाहरी खतरे से निपटना आसान है। उसे टारगेट करना आसान है। अंदरूनी सुरक्षा की जब बात आती है, तब यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन देश के खिलाफ काम कर रहा है। देश के कानूनों का पालन करते हुए कार्रवाई करनी होती है। फौज के पास जो बड़े-बड़े हथियार हैं, वह अंदरूनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकते। अंदरूनी सुरक्षा में फौज का जितना कम से कम इस्तेमाल हो, वही अच्छा है। पहले हम मानते थे कि आतंकवाद से अनपढ़ लोग जुड़ जाते हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अब डॉक्टर-इंजीनियर ऐसी हरकतें कर रहे हैं। यह सोच का विषय है कि कमी कहां रह गई है, जो लोग बहकावे में आ रहे हैं। आतंकवादी को मारना काफी नहीं है, वह आतंकी क्यों बना, उस पर विमर्श करने की ज्यादा जरूरत है। हम 10 आतंकी को मारेंगे, तो 10 और पैदा होंगे। हमें यह विमर्श करना है कि लोग क्यों बहकावे में आ रहे हैं?

03:34 PM, 17-Dec-2025

सवाल: पाकिस्तान के साथ-साथ चीन से निपटना भी टेढ़ी खीर रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा का परिदृश्य कैसे देखते हैं?

जनरल नरवणे: हमारे दो पड़ोसी हैं, जिनके साथ हमारे सीमा विवाद हैं- पाकिस्तान और चीन। चीन के साथ दिक्कत इसलिए है वहां बाउंड्री है, न कि बॉर्डर। वह अभी वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमा में नहीं बदल पाई है। हर साल अरुणाचल या सिक्किम जैसे 10-12 इलाकों में कहीं न कहीं टकराव की स्थिति बनती है। पिछले कुछ वर्षों में एक बात सरल तरीके से सामने आई है कि बाउंड्री के इस मसले को बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। यह साफ है कि इसका सैन्य समाधान नहीं है। इसे राजनीतिक या कूटनीतिक तरीके से ही सुलझाया जा सकता है। सभी इस बात को समझ चुके हैं।

03:27 PM, 17-Dec-2025

सवाल- अग्निपथ योजना जब लागू हुई तो इसका काफी विरोध हुआ, आपने इसको लागू होते देखा, इसको लेकर आपके क्या विचार हैं?

जनरल नरवणे: लोगों को पहले चार साल के लिए भर्ती किया जाएगा। फिर चार साल कुछ लोगों को रखा जाएगा। वो स्थायी हो जाएंगे। कुछ लोगों को रिलीज कर दिया जाएगा। वे बाद में अपना कुछ व्यवसाय कर सकते हैं। इसका विरोध हुआ, लेकिन लोगों को इतिहास नहीं पता। 1975-76 तक पेंशनेबल सेवा नाम की कोई चीज नहीं थी। सात साल की सेवा के बाद जवान बाहर हो जाते थे। 1971 की लड़ाई के बाद तब की सरकार ने सोचा कि यह नीति ठीक नहीं है। पेंशन सेवा को सात साल में लागू नहीं किया जा सकता था। इसलिए सेवा शर्तों को बदला गया। उसे बढ़ाकर 15 साल किया गया और पेंशन लागू की गई। अग्निवीर योजना बीच का रास्ता है। चार साल में कुछ लोग बाहर होंगे, कुछ बने रहेंगे। जो बने रहेंगे, उन्हें पेंशन भी मिलेगी। कोई भी योजना 100 फीसदी सही नहीं हो सकती। कोई न कोई कमी-पेशी उसमें हो सकती है। सरकार को सेना की तरफ से जमीनी स्तर से जो फीडबैक मिलेगा, उस पर विचार होगा। बुनियादी स्तर पर इस योजना में ऐसा कुछ नहीं है, जो देश या फौज के लिए अच्छा न हो। ऑपरेशन सिंदूर में कौन लड़ा? यही अग्निवीर लड़े हैं। हमें कोई कमी नजर नहीं आई। हम ऐसा क्यों मानते हैं कि चार साल में लोग अच्छा काम नहीं कर सकते। जब 15 साल बात आई थी, तब फौज में इसका विरोध किया था। कहा गया कि हमारी सेना बूढ़ी हो जाएगी। अग्निवीर के जरिए सेना के जवानों की औसत आयु को कम रखने के लिए लाया गया है। बाकी देशों में तो दो साल के लिए ही सेना में रखा जाता है। हमें एक युवा फौज चाहिए, जो हर मैदान में फतह कर सके।

03:16 PM, 17-Dec-2025

सवाल: लोगों के मन में बहुत जिज्ञासा रही कि सीधे ब्रह्मोस को क्यों उतारना पड़ा?

जनरल नरवणे: हमारे कई पास हथियार हैं। हम पहले देखते हैं कि लक्ष्य क्या है, उसे साधने के लिए क्या सही है, वही इस्तेमाल होता है। अगर लगता है कि ब्रह्मोस सही निशाना साधेगी, तो उसका इस्तेमाल होगा। कितनी जल्दी आप रणनीति बदल सकते हैं, वही सही तरीका होता है।

03:16 PM, 17-Dec-2025

सवाल: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का भारत में वापस आना कितना सच और कितना सपना है? 

जनरल नरवणे: फरवरी 1994 का संसदीय प्रस्ताव कहता है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है और भारत का यह प्रण है कि वह हरसंभव तरीके से उसे वापस लाने के प्रयास करेगा। ...इसे सुनकर किसी को भी इस बात पर संदेह नहीं होना चाहिए कि पीओके भारत का हिस्सा है। ...पीओके हमारा था, है और रहेगा।

03:12 PM, 17-Dec-2025

सवाल: जो रूस-यूक्रेन, इस्राइल-हमास में हो रहा था, वह मई 2025 में हमने अपनी सरहदों पर देखा। क्या ऑपरेशन सिंदूर ने बता दिया है कि युद्ध का तरीका बदल गया है? 

जनरल नरवणे: इसके दो पहलू हैं। युद्ध की प्रक्रिया और युद्ध का स्वरूप। युद्ध की प्रक्रिया सदियों से नहीं बदली। वह एक ही है कि मारो या मरो। प्रक्रिया यही है कि खून बहेगा, जानें जाएंगी। नुकसान होगा। बदलाव सिर्फ स्वरूप में आया है। स्वरूप हमेशा बदलता रहा है। पुराने जमाने में लोग धनुष-बाण से लड़ते थे। अब ड्रोन आ गए हैं। जैसा हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा कि एक नया युग आ चुका है। संपर्क रहित युद्ध प्रणालियों पर जोर है। इसके ये मायने नहीं हैं कि सरहद पर आमने-सामने की लड़ाई या मुठभेड़ नहीं होगी। अगली लड़ाई कैसी होगी, वह हम इस वक्त नहीं कह सकते। हर जंग अलग होती है। हम सिर्फ पिछली जंग से सबक सीख सकते हैं और उस पर अमल कर हम ज्यादा तैयार रहें और सफल बनें।

03:02 PM, 17-Dec-2025

'संवाद' के मंच पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे

पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। उनसे नेतृत्व, सुरक्षा और भावी रणनीति पर चर्चा हो रही है।

02:58 PM, 17-Dec-2025

कवि आलोक श्रीवास्तव ने दर्शकों को सुनाया शिव तांडव स्तोत्र

कवि आलोक श्रीवास्तव ने आगे कहा, 'गोस्वामी तुलसीदास जब शिव जी की वंदना कर रहे थे तो उनके सामने नमामि शमीषम आया। मगर जब दशानन ने यह पाठ किया तो उसके सामने जो छंद आया, वह उसकी परिस्थिति के अनुकूल आया। आलोक श्रीवास्तव ने आगे कहा, 'एक दिन मुझसे आशुतोष राणा (अभिनेता) ने कहा कि रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र  काफी जटिल है, इसका सरलीकरण करके हिंदी में अनुवाद किया जाए। इसके बाद आलोक ने संवाद में रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का हिंदी अनुवाद सुनाया'।

02:54 PM, 17-Dec-2025

कवि आलोक श्रीवास्तव ने राष्ट्रवंदना से की शुरुआत

आलोक श्रीवास्तव संवाद के मंच पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने सबसे पहले कविता के साथ शुरुआत की। उन्होंने कहा, 'जो यह कहते हैं कि धर्म पहले, उनसे मैं कहता हूं कि नहीं, राष्ट्र पहले, देश पहले। इसलिए मैंने कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्र वंदना से की। इसके बाद वे ईश वंदना की तरफ दर्शकों को लेकर गए'।  उन्होंने 'राम क्या हैं' कविता की पंक्तियां सुनाईं।

02:52 PM, 17-Dec-2025

संवाद के मंच पर पहुंचे कवि आलोक श्रीवास्तव

कवि आलोक श्रीवास्तव अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। वह कविता की बात पर अपने विचार रख रहे हैं।

01:24 PM, 17-Dec-2025

सवाल - कहते हैं विराट बहुत बदले हैं। पहले एग्रेशन होता था, लेकिन अब देखिए कि अब वो सुनते हैं और समझते हैं। कितना बदलाव देखते हैं आप उस दोस्त में?

ईशांत ने कहा कि लाइफ सर्किल की तरह चलती है। कभी न कभी उस सर्किल में वापस में तो आना पड़ता है। अच्छी चीज है कि आप अपने धर्म से जुड़ रहे हैं, आप अपने भगवान से जुड़ रहे हैं। ये सब चीजें कॉन्फिडेंस बढ़ाती है, आपको लड़ने की शक्ति देती हैं। जब चीजें आपके हिसाब से नहीं चल रही हैं तो क्या करना चाहिए, उनमें ये सब चीजें जरूरी हो जाती हैं। क्रिकेट आप एक समय तक खेल सकते हो। उसके बाद में क्या है वो ज्यादा जरूरी है। सबसे पहले आती है फैमिली। वो फैमिली आपको परिवार आपके डिस्क्राइब करती है कि एक इंसान के तौर पर कैसे हैं। जो समय आप परिवार के साथ बिताते हैं वो बताती है कि इंसान के तौर पर आप कैसे हैं।

01:22 PM, 17-Dec-2025

सवाल - क्या खास है विराट कोहली में और क्या खास नहीं है उनमें?

ईशांत ने कहा कि अगर कुछ खास नहीं होता विराट में तो इतने बड़े रिकॉर्ड तो नहीं बनाता। कुछ न कुछ खास तो है विराट में। जो सबसे बड़ी चीज है वो है सेल्फ बिलीव। कोई भी सिचुएशन आ जाए मैं अपनी टीम को मुश्किल से निकालूंगा और मैच जिताऊंगा। खराब से खराब परिस्थिति में भी मैच जिता के लाऊंगा, यही उसकी सोच है और खासियत है।
 

01:21 PM, 17-Dec-2025

सवाल - क्या हरकतें घर पर ऐसी करनी पड़ती हैं जो सार्वजनिक तौर पर क्रिकेटर नहीं कर पाए?

ईशांत ने कहा कि बेटी के पिता होने में सबसे बड़ी चीज है कि कभी आपको पेशेंट बनना पड़ता है, कभी आपको पार्लर का कस्टमर बनना पड़ता है। आई लैशेश लगती है, नेल पॉलिस लगती है, मैनिक्योर पैडिक्योर करना पड़ता है। मैं अपनी पत्नी को भी मना कर देता हूं कि ये तस्वीरें बाहर नहीं जानी चाहिए।
 

01:19 PM, 17-Dec-2025

सवाल - इतने सारे इंटरव्यू दिए, ऐसी कौन सी बात है जो किसी को नहीं पता? जो राज अब तक आपने छिपा रखा है?

ईशांत ने कहा कि बेटी के साथ कम टाइम स्पेंड कर पाता हूं, शायद ये लोगों को कम पता है।
 

01:17 PM, 17-Dec-2025

सवाल - ऑफ फील्ड आप कई बार रहे। कभी टीम से बाहर तो कभी चोट। ये बताइए आज की जनरेशन कैसे सीखे हाऊ टू कमबैक? और उस वक्त की क्या प्रोसेस होती है? 

ईशांत ने कहा कि बाहर दोष मत निकालो कभी भी। अगर आप गलतियां बाहर ढूंढने लगोगे तो खुद कभी इम्प्रूव नहीं कर पाओगे। मैं हमेशा गलतियां खुद में ढूंढने की कोशिश करता हूं। मैं कोशिश करता हूं कि जब प्रैक्टिस के लिए जाऊं तो उस गलती को न दोहराऊं। जब आप वो गलती नहीं दोहराओगे तो एक अलग आत्मविश्वास जगता है। आप मैच्योरिटी के साथ प्रदर्शन कर पाओगे। बाहर गलतियां मत ढूंढो। खुद में गलती ढूंढोगे तो और बेहतर हो पाओगे।

01:16 PM, 17-Dec-2025

सवाल - आपने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक खिलाड़ी को चिढ़ाया था। बाद में कोहली ने उसका मिमिक किया। वो क्या था? 

ईशांत ने कहा कि वो एक प्लान था। अगर हम उस मैच में स्टीव स्मिथ को आउट नहीं करते तो वो टेस्ट मैच हम हार सकते थे। वो सब चीजें हीट ऑफ द मोमेंट में हो गईं। आप बाहर ये सब चीजें नहीं करते। आप जब खेलते हैं और जब आप बाहर होते हैं तो आपकी पर्सनैलिटी अलग अलग होती है। अगर आप अपना काम पूरी शिद्दत से या ईमानदारी से नहीं करोगे तो रिजल्ट नहीं मिलेगा।

01:09 PM, 17-Dec-2025

सवाल - रील देखते हैं आप?

ईशांत शर्मा ने कहा कि हां अगर जब बेटी देखने देती है। बेटी को हम नौ स्क्रीन टाइम दें। इसके बाद अगर थोड़ी सी एनर्जी बचती है तो रात में थोड़ा सा। 

 

01:07 PM, 17-Dec-2025

'ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना बहुत मुश्किल काम है'

ईशांत शर्मा ने कहा कि मैं जो 100 टेस्ट खेला, उससे भी ज्यादा। ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना बहुत मुश्किल काम है। आप सिर्फ उनके 15 खिलाड़ियों के खिलाफ नहीं खेलते, उनके पूरे देश के खिलाफ खेलते हो। जब आप खाना खाने जाते हो तो भी स्लेजिंग मिलती है, जब कॉफी पीने जाते हो तो भी आपको स्लेजिंग मिलती। वहां की भीड़ आपको फील कराती है कि आप सिर्फ ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ नहीं खेल रहे, बल्कि पूरे ऑस्ट्रेलिया देश के खिलाफ खेल रहे हो।

01:00 PM, 17-Dec-2025

सवाल - 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले। जब करियर को पलट कर देखते हैं तो क्या मोमेंट है जो सबसे ज्यादा याद आता है?

ईशांत शर्मा ने कहा कि मैं हमेशा यकीन करता हूं कि ग्रजेज या पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आगे क्या है उसपर ध्यान देना चाहिए। जैसे जैसे आप कोई भी स्पोर्ट हो लाइफ हो, अगर आप गलती करते हैं और तो उससे सीखते हैं। क्रिकेट में एक चीज है कि आप जो एक बार गलती हैं, उसे कितने समय बाद रिपीट करते हैं, वो कंसिस्टेंसी होती है। तो वही मैं कोशिश करता था कि गलती मैं जितने टाइम तक टाल सकूं। जब हम 2018 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीती वो एक ऐसी याद है कि वो हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगी। 



 

12:52 PM, 17-Dec-2025

सवाल - रिकी पोंटिंग आए और जाए। क्या खास था कि वो इतने परेशान हो गए?

इशांत शर्मा ने कहा कि ऐसा कुछ था नहीं, जितना आपने उसको बना दिया। जो हमारा काम था, वो हमने किया। मैं यंग था रॉ था..जब आता था और सिर्फ बॉलिंग करता था। कुछ ज्यादा पता नहीं था। कभी भी ये ध्यान नहीं दिया कि कौन बैटर है। हमने अपना काम शिद्दत से किया। आप एक चीज भूल गए कि मेलबर्न में ड्रेसिंग रूम की वॉक बहुत लंबी होती है।

12:50 PM, 17-Dec-2025

'जीवन में जो समय हमें मिला है उसमें ऑथेंटिक होना हमारे लिए जरूरी है'

अगम खरे ने कहा कि प्रोटीन डिफिशिएंशी देश होने के कारण लोगों में प्रोटीन खाने की होड़ है। यह सही नहीं है। ऐसा किसी प्रोफेशनल की परामर्श से ही किया जाना चाहिए। जीवन में जो समय हमें मिला है उसमें ऑथेंटिक होना हमारे लिए जरूरी है। जब तक आप ऐसा करेंगे तो आप पैसे के लिए कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे।

12:38 PM, 17-Dec-2025

नेटिव फूड खाने पर आपका शरीर अच्छा रेस्पॉन्ड करता है: खरे

खरे ने आगे कहा कि हर मनुष्य की अपनी खुद की माइक्रोबायोम यानी सूक्ष्मजीवों होती है। इसमें करीब 40 ट्रिलियन जीवाणु होते हैं। ये स्वस्थ रहे तो इंसान भी स्वस्थ रहता है। जब तक आप नेटिव फूड खाते रहते हैं तो आपका शरीर उसे अच्छे से रेस्पॉन्ड करता है। नई चीज खाने पर उसे एडजस्ट करने पर समय लगता है। आपका शरीर क्या चाहता है उसी अनुसार हमें भोजन का चयन करना चाहिए। जरूरी नहीं है रील्स पर दिख रहा हर चीज सही हो। इसे तौलना जरूरी है। हमें तय करना होगा कि हमारे शरीर के लिए सबसे उचित खाना क्या है। जीवन में सबसे जरूरी चीज है कि धरती से जुड़ी हुई चीजों को असल रूप में इस्तेमाल करें। इसे अधिक बनावटी बनाएंगे तो परेशानी होगी।

12:35 PM, 17-Dec-2025

'सरकार ने इस दिशा में अच्छे कदम उठाए हैं'

बायोसाइंस के क्षेत्र में काम करने वाले अगम खरे जी ने कहा कि तीन समस्याएं हैं। पहला सप्लाई चेन, दूसरी अवेयरनेस और तीसरा क्वालिटी अवेयरनेस। उन्होंने कहा कि पहली समस्या है कि आज विश्व में हम इतना खाना उत्पादन करते हैं कि दुनिया को समय पर भोजन मिल सकता है। पर वह समय पर पहुंच नहीं पाता है। ऐसा शहरों से दूर गांवों में उत्पादन के कारण होता है। कुछ दक्षिण में उगता है तो कुछ उत्तर में। यदि हमारी सप्लाई चेन मजबूत नहीं होगी तो हमें परेशानी होगी। इसे मजबूत करना बड़ी चुनौती है। सरकार ने इस दिशा में अच्छे कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खान-पान और पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता भी जरूरी है। 

12:32 PM, 17-Dec-2025

'नई तकनीकों से सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है'

हेल्थकेयर को डिजिटल बनाने पर नीतिन नाग ने कहा कि इस क्षेत्र में नई तकनीकों से सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे कन्टीन्यूटी ऑफ केयर को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसे सुधारने के लिए हम प्राइमरी केयर सेंटर खोल रहे हैं।

टैलेंट सप्लाई गैप पर दिया जोर 
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े मानव संसाधन को सही जगह पर बनाए रखना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि अब सोच बदल रही है। फिलहाल मेट्रो से लेकर छोटे शहरों तक का सफर तय करना जरूरी है। दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना और गुड़गांव में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना काफी बेहतर है। इस वजह से लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है। हमारे हॉस्पिटल नेटवर्क में 5000 लोग काम कर रहे हैं इनमें से 85 प्रतिशत वहीं से हैं। हम लोकल आंत्रप्रन्योरशिप को प्रमोट कर कर रहे हैं। पर टैलेंट सप्लाई गैप अभी भी है। छोटे शहरों में कमी के हिसाब से यह गैप दूर नहीं हुआ है।

12:14 PM, 17-Dec-2025

पोषण, सेहत और स्वास्थ्य भारत सत्र में चर्चा

पोषण, सेहत और स्वस्थ्य भारत सत्र में बायोसाइंस और कृषि प्रौद्योगिको क्षेत्र से एब्सोल्यूट के  संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अगम खरे और उजाला सिग्नस प्रमुख नितिन नाग अमर उजाला संवाद के मच पर अपनी बात रख रहे हैं। नीतिन नाग ने कहा कि अगर हम देखें तो विकास अधिकतर मेट्रो शहरों में हुआ है। विकास मेट्रो फोकस्ड है। ज्यादातर सुविधाएं मेट्रो में स्टेबल है। इस कारण से टीयर 2 और टीयर 3 शहरों में नुकसान हुआ है। हेल्थ इंफ्रा यानी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा शहरों से गांवों तक नहीं पहुंच पाया है। इंफ्रा का कॉस्ट भी बढ़ता ही जा रहा है। इससे लोगों को दिक्कत होती है। मेट्रो में दिक्कत उतना दिखता नहीं है। यहां लोग अफोर्ड कर सकते हैं। पर मेट्रो से बाहर जाने पर समस्याएं ज्यादा दिखती है। 

12:12 PM, 17-Dec-2025

'हमारे आसपास के बहुत से खिलाड़ी इंजर्ड हुए'

जैस्मिन ने कहा कि मुझे कभी इंजरी हुई नहीं। हम देखते हैं कि हमारे आसपास के बहुत से खिलाड़ी इंजर्ड हुए। इससे उनके छह सात महीने निकल जाते हैं। हमने तो देखा है। उस टाइम पर निगेटिव विचार भी आते हैं। वो अकेले अकेले सोच के खुद भी परेशान होते हैं। लेकिन वो फिर भी करते रहते हैं। मैं ठीक होऊंगा।

12:12 PM, 17-Dec-2025

सवाल - चोटों से रिकवर होने में काफी मेहनत लगती है, शरीर के साथ दिमाग का भी खेल है। आपने खुद फेस किया है। इस बारे में बताइए...

योगेश्वर ने कहा कि खिलाड़ी के लिए सबसे बुरी चीज इंजरी होती है। किसी प्रतियोगिता के समय लग जाए तो प्रतियोगिता से दूर कर देती है। मेरे पांच ऑपरेशन हुए पैरों के। डिश स्लिप भी हुई थी। इंजरी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत होती है। आपको नहीं पता कि कल आपको ओलंपिक में हिस्सा लेना है और आज इंजरी हो जाए तो आप उससे दूर हो जाते हैं। एक ऑपरेशन ठीक होने में लगभग एक साल लेता है। तो मेरे इतने लंबे करियर में कई ऑपरेशन हुए। चार ओलंपिक मैं खेला। खिलाड़ी का गहना है इंजरी, लेकिन यह गहना सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। परेशानी रुकावटें आपको रोक नहीं सकतीं।

12:10 PM, 17-Dec-2025

सवाल - योगेश्वर जब 2012 में मेडल जीता। उस मोमेंट के लिए क्या प्लान किया था?

योगेश्वर ने कहा कि 2012 मेरा तीसरा ओलंपिक था। 2004 और 2008 में मैं बिना पदक के आया था। एक टीस थी एक आग थी कि मेडल जीतना है। लिएंडर पेस ने जब 1996 में मेडल जीता था तो एक आग थी कि अब तो पदक जीतना है। उसके बाद लंबा सफर तय किया है। दो ओलंपिक में जब नजदीक आकर मेडल नहीं आए तो ज्यादा तकलीफ हुई। 2012 में जब मेडल जीता तो एक ये था कि सपना पूरा हुआ। उससे पहले मेरा ऑपरेशन भी हुआ था। जब सपना पूरा करने में लगते हो तो न नींद सुख चैन सब छिन जाता है। एक सपने के पीछे भागना बड़ा अजीब होता है। रुकावटें भी आईं, लेकिन जिंदगी इसी का नाम है। एक खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता। हार न मानने की जिद ने मुझे पदक दिलाया, नहीं तो मुझे काफी चोटों लगी थीं। एक खिलाड़ी जब पदक जीतता है तो उसके पीछे काफी योगदान होता है उन चेहरों का जो दिखाई नहीं पड़ते। मेरे घर वाले, कोच सबका बहुत योगदान था।

12:05 PM, 17-Dec-2025

सवाल - बहुत सी बच्चियां आपको आइडल मानती हैं। तो जो बच्चियां तैयारी कर रही हैं, उन्हें बताइए कि क्या चैलेंजेज आते हैं?

जैस्मिन ने कहा कि कुछ भी हम करते हैं, उसमें स्ट्रगल रहता है अपने अपने लेवल का। किसी को फाइनेंसियल रहती हैं, या किसी का स्पोर्ट का रहता है। कभी अच्छे पार्टनर नहीं मिलते हैं। सपने बड़े हों और सपोर्ट मिल रहा हो तो ये सब कवर होता जाता है। स्ट्रगल रहता है तो लेकिन जब बात सपनों की आती है तो ट्रेनिंग सामने आता है कि नहीं बस करते जाओ जाओ।

12:01 PM, 17-Dec-2025

सवाल - हरियाणा की बेटियां इतने मुश्किल कैसे चुन लेती हैं? कुश्ती मुक्केबाजी जैसे खेल? 

जैस्मिन ने कहा कि मेरा तो ये था कि मैंने तो अपने घर में ही देखा है। भिवानी बॉक्सिंग का हब बोला जाता है। हमारे आसपास सभी खेलते थे। मैंने खुद अपने दोनों चाचा को खेलते हुए देखा। तो हम उनकी फाइट्स देखते थे, मेडल्स देखते थे। इक्विपमेंट्स देखते थे। तो वो सब हम चीजें देख रहे थे तो हमें प्रेरणा मिली कि हम भी खेलेंगे। तो मुझे तो वहीं से प्रेरणा मिली। हरियाणा के लोगों में अलग तरह का जोश रहता है कि नहीं ये तो करना है। हमें ये चीजें पहले से मिलीं। इसी वजह से हम फाइटिंग गेम्स चुन पा रहे हैं।
 

11:59 AM, 17-Dec-2025

सवाल - जो मां बाप की सोच है खेल को लेकर,उसमें अभी हम पीछे हैं क्या?

योगेश्वर ने कहा कि नहीं नहीं उससे हम आगे निकल चुके हैं। लड़के हो या लड़कियां हों। अब एक सोच तो हट चुकी है कि हमें लड़कों को ही खेल में डालना है, लड़कियों को नहीं डालना है। अब दोनों एक जैसे हैं। माता पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा कोई न कोई खेले। माइंडसेट अब मजबूत है। माता पिता का माइंडसेट बदला है। वो चाहते हैं कि बच्चा खेल में आगे बढ़े। वो खुद मैदान में ले जाते हैं। हम कुश्ती अकेले करते थे। अब बच्चों के माता पिता अखाड़े भी जाते हैं।

11:56 AM, 17-Dec-2025

सवाल - कुश्ती में जो भारत ने धाक जमाई, उनमें से आप एक चेहरा हैं। आपके लिए काफी मुश्किलें भी आई होंगी। जो बच्चा अब कोशिश करना चाहता है उसे क्या करना चाहिए? क्या रास्ता है?

योगेश्वर ने कहा कि सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। मैंने 1988-89 में कुश्ती शुरू किया था। तब मेरी उम्र सात साल थी। उस समय में गर्मियों में या बरसात में दिक्कत का सामना करना पड़ता था। हमारे पास गांव में मैट नहीं होता था, किट नहीं होती थी। पर उस टाइम और अब बहुत सुविधाएं हैं, लेकिन ग्रास रूट पर बहुत काम करने की जरूरत है। हमें हमेशा सुधार करते रहना चाहिए। हम अगर चाहते हैं कि 2036 ओलंपिक भारत में हो तो उसमें हर खेल पर फोकस करना होगा। सभी खिलाड़ियों का इतिहास गांव से और मध्य वर्ग परिवार से हैं। हमें ग्रासरूट पर तैयारी करनी चाहिए। जो बच्चा अभी 10 साल का है वो 2036 में हमें कितने पदक दिला सकता है। वो चीजें हमें सोचनी हैं। और हर खेल की अलग कैटेगरी बनानी होगी। तो हम ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। हमारे खिलाड़ियों में पूरा जोश है। मेहनत के मामले में हमसे ज्यादा कोई नहीं है पूरी दुनिया में। खेलों में हम तभी आगे बढ़ेंगे जब एक साथ आगे बढ़ेंगे।

11:54 AM, 17-Dec-2025

सवाल - जब आप चैंपियनशिप या मेडल जीतती हैं तो अपने ईर्द गिर्द बदलाव देखती हैं, जो लड़कियां आपसे मिलने आती हैं?

जैस्मिन ने कहा कि जो यूथ लड़कियां हैं, वो भी हमसे ही सीख रही हैं। इसलिए हमारा दायित्व है कि हम अच्छा करें। हमारी वजह से अगर 10 लड़कियां और अच्छा करना चाह रही हैं तो हम और अच्छा करें ताकि आने वाला जनरेशन मोटिवेशन ले। काफी अच्छा लगता है जब बच्चे हमसे पूछते हैं और सीखते हैं। आगे भी मेरा यही प्रयास रहेगा कि मैं देश के लिए कुछ कर पाऊं।

11:49 AM, 17-Dec-2025

सवाल - कैसा है ये जोश?

जैस्मिन ने कहा कि अभी जो लड़कियां हैं वो बहुत अच्छा कर रही हैं। सिर्फ बॉक्सिंग नहीं, बहुत से खेल है, चाहे वो बैडमिंटन हो रेसलिंग हो। हम जो समर्थन मिल रहा परिवार का, क्योंकि हमारे सीनियर ने एक मंच तैयार किया है। हमें एक पहचान दिखाई है कि हरियाणा खेलों में कितना अच्छा है। मतलब भारत का एक छाप छोड़ा है, वो हमारे लिए लाभदायक हो रहा है। परिवार वाले भी समझ रहे हैं, कि लड़कियां कर रही हैं और उन्हें भी समर्थन देना चाहिए। काफी अच्छा लगता है जब हम बाहर निकलते हैं और हरियाणा को अपनी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

11:45 AM, 17-Dec-2025

सवाल - आखिर कैसे हरियाणा खिलाड़ियों के अंदर जोश की वजह क्या है?

अमर उजाला संवाद के मंच पर ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त और विश्व चैंपियन मुक्केबाज महिला जैस्मिन लंबोरिया अपनी बात रख रही हैं। योगेश्वर ने कहा कि सभी को राम राम पहले तो मैं धन्यवाद देता हूं अमर उजाला को, कि आपने खेल सेशन को रखा। जब बात हरियाणा की आती है तो सबसे पहले हमारे ग्रामीण खेल हैं, कुश्ती है, कबड्डी है, बॉक्सिंग है, हॉकी है, इसकी आती है। हरियाणा के लोगों में जुनून है। ये आती है हमारी संस्कृति से। हमें पुरखों से मिली है संस्कृति। वो चाहे खेल में हो, किसानी हो, समाज सेवा में हो, सेना में हो। आगे बढ़ना का जज्बा विरासत में मिला है। बड़ों से सीखा है। हमने ओलंपिक में अगर छह पदक जीते तो तीन हरियाणा से हैं। एशियन गेम्स में भी आधे पदक हरियाणा लाता है। जो खिलाड़ी के कोच का बड़ा योगदान रहता है। सरकार का भी रोल रहता है। हरियाणा की मिट्टी में जो जोश है और संघर्ष है, उससे हमें पदक मिलते हैं।

11:44 AM, 17-Dec-2025

सवाल: अगला लक्ष्य क्या है? 

देवव्रत रेखे: अगला लक्ष्य अभी कुछ सोचा नहीं है। जैसे पिताजी बोलेंगे, हम करते जाएंगे। अभी और अध्ययन करना बाकी है। और भी कई ऐसे ग्रंथ हैं, जिनका पारायण हुआ नहीं है, जिनका कोई अध्ययन नहीं करता। पिताजी ने आज्ञा की है कि उनका भी अध्ययन करना है।
 

11:43 AM, 17-Dec-2025

'वेदवाणी वास्तव में भगवान की वाणी है'

महेश रेखे: हमें पूरा विश्वास था कि वेद हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ हैं तो वेदों का महत्व और प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ेगा। जितने लोग वहां श्रवण के लिए आए थे, उन सभी का कथन था कि इस पारायण से उत्पन्न होने वाली आभा और ऊर्जा बहुत अलग है। वहां आने के बाद जो मन में संतुष्टि और शांति मिली, वो बहुत ही अलग थी। इन वेदों का कोई लेखनकर्ता नहीं है। वेदवाणी वास्तव में भगवान की वाणी है। वेद मंत्रों का साक्षात्कार भगवान के श्वास और उच्छवास से होता है। 
 

11:43 AM, 17-Dec-2025

सवाल: पारायण के दौरान कैसी अनुभूति हुई?

देवव्रत रेखे: जब पारायण चल रहा था, तब ऐसा लग नहीं रहा था कि मैं खुद बोल रहा हूं। भगवान ही मुझसे बुलवा रहे थे। भगवान का आशीर्वाद रहा और उन्हीं की कृपा रही, इसलिए पारायण पूरा हो सका। 
 

11:40 AM, 17-Dec-2025

योगी जी ने भी बधाई दी। प्रमुख हस्तियों ने आपको शुभकानाएं दीं। क्या सभी को जवाब दे पाए?

महेश रेखे: हम सभी को जवाब तो ज्यादा नहीं दे पाए। जैसे ही 30 तारीख को पारायण का समापन हुआ, उसके बाद समय ही नहीं मिल सका। पहली बार ऐसा हुआ कि वैदिक शास्त्र और वैदिक अभ्यास से जुड़ी सनातन की मूल परंपरा के बारे में देश के प्रधानमंत्री जी ने कुछ कहा। जब मूल का सिंचन करते हैं, तभी उस वृक्ष पर पत्र और पुष्प आते हैं। हमारे धर्म का मूल वेद हैं। इसी वजह से आज हमारे सनातन धर्म में उत्साह का वातावरण निर्माण हुआ है। जो युवा पीढ़ी इस परंपरा में है, उनके मन में भी विचार उत्पन्न हुआ है कि हमें भी अपनी संस्कृति से जुड़ना चाहिए।

11:38 AM, 17-Dec-2025

'मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि यह मेरा पुत्र भी है और शिष्य भी है'

देवव्रत के पिता महेश रेखे ने कहा कि व्यक्ति ने हर मुकाम, हर स्थान पर अपनी विजय की कामना करनी चाहिए। यह पुरुषार्थ भी है, लेकिन दो जगह पर अपनी पराजय होनी चाहिए। यह दो स्थान हैं- एक शिष्य और दूसरा पुत्र। भगवान की कृपा से मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि यह मेरा पुत्र भी है और शिष्य भी है। कोई भी व्यक्ति किसी को मार्गदर्शन करे तो वह अपने से अच्छा काम करे तो सबसे ज्यादा आनंद उसी को होता है, जो उसे पढ़ाता है। इसका आनंद अवर्णनीय है। अमर उजाला परिवार ने इस प्रकार हमें मंच पर बुलाकर हमारा सम्मान किया है, वह अद्भुत है।

11:31 AM, 17-Dec-2025

मंच पर 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे और वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे

अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच पर 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे और वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे अपनी बात रख रहे हैं। 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे ने कहा कि अमर उजाला को धन्यवाद कि आपने मुझे यह आमंत्रण दिया। वास्तव में यह आमंत्रण मुझे नहीं, हमारी गुरु परंपरा को मिला है। इसी परंपरा के कारण मैं यहा हूं। जब आठ साल की आयु में पिताजी ने जनेऊ कराया, तो पिताजी ने ही आज्ञा की कि वेद कार्य में आगे चलते रहो। उन्हीं के पास अध्ययन करके यह सब साध्य हुआ है। दंडक्रम चुनने का सोचा नहीं था। पिताजी ने 2002 में काशी में घनपारण किया था, तब वे ही बोले कि मैंने घनपारण किया है, तुम उससे आगे कुछ किया। उन्हीं की कृपा से यह सब साध्य हुआ।

11:25 AM, 17-Dec-2025

'हम किसी की मुस्कुराहट छीनने की इच्छा न करें। यही हमारा अध्यात्म है'

सुधांशु जी महाराज ने कहा, "जिब्रान ने अपनी कहानी में लिखा था कि मेरे पास सात मुखौटे थे, उन्हें लेकर मैं जी रहा था। जब कोई मेरे सातों मुखौटे चुराकर ले गया, उस दिन मैं जैसा था, वैसा दिखाई दिया। जैसे अंदर हो, वैसे बाहर हो जाओ, इससे बड़ी सुंदरता कोई नहीं हो सकती। हमारी संस्कृति भी कहती है कि असतो मा सद्गमय। जब चारों ओर से अशांति की बौछार हो रही तो, उदासी का वातावरण हो, तब भी इतनी कृपा कर देना कि मुस्कुराहट बरकरार रहे। हम किसी की मुस्कुराहट छीनने की इच्छा न करें। यही हमारा अध्यात्म है।"
 

11:23 AM, 17-Dec-2025

'हम अंदर से जैसे हैं हमें वैसे ही बाहर से हमें आचरण करना चाहिए'

सुधांशु जी महाराज ने कहा कि वैदिक ज्ञान के अनुसार मनुष्य को मनुष्य बने रहने के लिए प्रयास करना चाहिए। हम अंदर से जैसे हैं हमें वैसे ही बाहर से हमें आचरण करना चाहिए। इससे बड़ी सुंदरता दुनिया में नहीं हो सकती। वैदिक संदेश में है कि मनुष्य तू है तो मनुष्य बना रहे। सांप नहीं बनना, बिच्छू नहीं बनना। तुम्हारा एनिमल ब्रेन तुम्हारे पास है उसे सुला देना और देवता वाले ज्ञान को जगा देना।
 

11:23 AM, 17-Dec-2025

'झोपड़ी में रहने वाले एक बाबा ने कोई मंत्र नहीं बोला'

सुधांशु जी महाराज ने कहा कि अमर उजाला हरियाणा के मंच पर सुधांशु जी महाराज ने कहा कि हमारा बोलना, हमारा व्यवहार शांति देने वाला हो, प्रेम करने वाला हो। उद्वेगकारी वाणी न हो। प्रत्येक कर्म में आनंद दिखाई दे, इसलिए कहा गया है कि मन: प्रसाद: सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रह:। इस बारे में उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा, "35 वर्ष पहले हरियाणा के एक गांव में साधुओं का सम्मेलन था। गांव के अंदर झोपड़ी डालकर रहने वाले बाबा बोलने के लिए आगे आए। उन्होंने कोई मंत्र नहीं बोले। गांव की भाषा बोली, जो अद्भुत थी। उन्होंने कहा कि खाओ पीओ छको मत। देखो भालो, तको मत। चलो फिरो, लेकिन थको मत। बोलो चालो, बको मत। इसी के लिए कहा गया है- ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते। हर दिन इस तरह बिताओ कि रात को चैन की नींद सो सको और जागो तो चेहरे पर प्रसन्नता हो। जवानी को इस तरह बिताओ कि बुढ़ापे में पछताना न पड़े। बुढ़ापे को इस तरह बिताओ कि किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। फूल खिले पर उसके सड़ने की नौबत न आए।"

 

11:22 AM, 17-Dec-2025

'उद्वेवकारी वाणी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए'

विश्व जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज ने कहा कि उद्वेवकारी वाणी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कोई ऐसा प्रयोग नहीं होना चाहिए जिसमें सच बोलने में परेशानी हो। योग काफी महत्वपूर्ण है। कुछ भी करना पड़े कर्म को इतनी कुशलता से करो जो तुम्हारा हर कर्म तुम्हारा हस्ताक्षर बन जाए। मन की प्रसन्नता जरूरी है। अपने ऊपर नियंत्रण जरूरी है। गति के साथ नियंत्रण जरूरी है, नहीं तो एक्सीडेंट का खतरा रहता है। प्रगति के साथ नियंत्रण की शक्ति होनी चाहिए। बोलते समय भी ध्यान रखना जरूरी है कि आपकी वाणी मर्यादित हो।

11:15 AM, 17-Dec-2025

'पृथ्वी पर बसने वाले वाले लोगों को शांति की प्राप्ति हो सके'

विश्व जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज ने कहा कि देवलोक से होकर शांति हमारी इस पृथ्वी उतरे, अंतरिक्ष से पृथ्वी पर शांति आए। पृथ्वी पर बसने वाले वाले लोगों को शांति की प्राप्ति हो सके। जलों से शांति मिले, औषधियों से शांति मिले। इतनी बड़ी शांति की कामना हम लोग करते हैं और ये बात जानते हैं कि पूरे संस्कारभर में कोई संदेशवाहक हो सकता है तो वो भारत है भारत की संस्कृति है। भारत की संस्कृति के बारे में हमारे वैदिक संदेशों में कहा जाता है कि सा प्रथमा संस्कृति विश्ववारा। हम हरियाणा में हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण के माध्यम से हमें भगवत गीता मिली। इसमें आदेश, उपदेश, संदेश हैं। आज के युग के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने तप के संबंध में कहा था कि जिसका मन शांत है और जिसके चेहरे पर प्रसन्नता है, जो स्वयं को नियंत्रित करना चाहता है, जिसकी भावनाएं शुद्ध हैं, वो व्यक्ति तपस्वी है।"

 

11:00 AM, 17-Dec-2025

'जिस देश में शांति होती है, वो देश प्रगति की ओर जाता है'

अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच पर विश्व जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज अपनी बात रख रहे हैं। महाराज ने कहा कि जिस देश में शांति होती है, वो देश प्रगति की ओर जाता है, यदि किसी की व्यक्ति के मन में शांति है तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट भी होगी। यदि किसी घर में शांति है तो उस घर का विकास, उसकी प्रगति निरंतर आगे बढ़ेगी। यदि किसी समाज में अशांति है तो वो समाज विकासशील नहीं हो पाएगा। किसी भी सुख के लिए आवश्यक है कि सुख टिकने की आधारशिला है शांति। शांति तब स्थापित होती है, जब आशांति उत्पन्न करने वाले कारण दूर किए जाएं। यदि आशांति उत्पन्न करने वाले कारण हैं और हम शांति-शांति बोलते रहें तो कल्याण नहीं होता। हमारे अध्यात्म में शांति पाठ को बहुत महत्व दिया जाता है। 

10:54 AM, 17-Dec-2025

'सरकार एक प्रक्रिया से बच्चों को विदेश भेजती है'

रोजगार और डंकी रूट पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हम यूथ को इस बात को लेकर प्रेरित करते हैं। हम यूथ और उनके परिजन को भी बोलते हैं कि डंकी रूट का इस्तेमाल न कीजिए। क्योंकि आप अपनी जान को जोखिम में डालकर जाते हैं। इतना पैसा भी खर्च करते हैं, जो आप सोच लेकर जाते हैं, वो भी पूरी नहीं होती। बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हमने उसी बात को ध्यान में रखते हुए विदेश सहयोग विभाग बनाया है। विदेश सहयोग विभाग के जरिए हम बाहर से डिमांड मंगवाते हैं। सरकार एक प्रक्रिया से बच्चों को विदेश भेजती है। जिसको भेजा है उसका सिर्फ टिकट का पैसा लगा है। एजेंसी से हमारे संपर्क हैं। विदेश सहयोग विभाग में हमारे अधिकारी लगे हैं। वो एजेंसी से संपर्क करके एक ठीक रास्ते से भेजना का काम हमारी सरकार कर रही है। युवाओं और उनके मां-बाप से कहना चाहूंगा कि डंकी रूट का रास्ता न अपनाएं। जिससे हम भी जोखिम में डलें और परिवार भी जोखिम में डलें। इससे बचना चाहिए। 

10:51 AM, 17-Dec-2025

'दिल्ली का कभी कोई हस्तक्षेप नहीं होता'

मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने कहा कि दिल्ली का कभी कोई हस्तक्षेप नहीं होता। कांग्रेस के समय तो प्रधानमंत्री भी सोनिया गांधी के इशारे पर काम करते थे, जबकि हमारे यहां दिल्ली में बैठे लोग बोलते हैं कि राज्य तो आपको चलाना है। हम सलाह जरूर लेते हैं। यह हमारे लिए भी अच्छा होता है। सरकार इससे पारदर्शिता के साथ काम कर पाती है।

10:50 AM, 17-Dec-2025

'पंजाब और हरियाणा का दरवाजा आज भी एक ही है'

सीएम सैनी ने कहा कि पंजाब और हरियाणा का दरवाजा आज भी एक ही है। हम एक ही हैं। पंजाब हमारा घर है। पंजाब गुरुओं की धरती है। गुरुओं को सम्मान देना हमारा दायित्व है। जिन गुरुओं ने हमारे राष्ट्र और हमारे धर्म की रक्षा की है, उनके इतिहास को हमें आगे आने वाली पीढ़ियों तक ले जाना चाहिए। यह कोई राजनीतिक विषय नहीं है।

10:45 AM, 17-Dec-2025

'अपराध और अपराधी का कोई स्थान नहीं'

सीएम सैनी ने कहा कि प्रदेश में अपराध और अपराधी का कोई स्थान नहीं है। अपराधी या तो सुधर जाएं, नहीं तो हम सुधार देंगे। हमारी पुलिस मुस्तैदी से लगी है। पुलिस ने अलग-अलग ऑपरेशन चलाए हैं। बहुत सारे अपराधियों को जेल के अंदर पहुंचाया है। विदेश में बैठे गैंगस्टरों को भी यहां लाकर कार्रवाई की जा रही है।

सीएम ने कहा सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी सराकर की है। प्रदेश के लोगों को इस बात से आश्वसत करते हैं कि आपको कोई दिक्कत नहीं आने देंगे। अगर कोई व्यक्ति गलत करेगा तो भुगतेगा भी। बड़ा सुधार इसमें हुआ है। 

10:38 AM, 17-Dec-2025

'साइक्लोथॉन में 7.5 लाख से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया'

नशे के सवाल पर मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हम मैराथन के जरिए युवाओं को एकजुट करते हैं। नशे के खिलाफ उन्हें जागरुक करते हैं। हर महीने मैराथन का कार्यक्रम होता है। मैराथन में 25 से 30 हजार यूथ जमा होता है। मैं हर जिले में मैराथन के कार्यक्रम करता हूं। साइक्लोथॉन में 7.5 लाख से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया। संतों, खाप पंचायतों और महिलाओं ने मंच पर आकर युवाओं को नशे से बचाने की बात कही। संतों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। बच्चा नशे में चला जाता है तो महिलाओं को पीड़ा अधिक होती है। सबसे ज्यादा नशे का दंश महिलाओं को झेलना पड़ता है। नशा हमारे लिए चैलेंजिंग विषय है। हम इसके ऊपर लगे हैं, पुलिस अधिकारियों से कहा है, पूरे प्रदेश की पंचायतों को बुलाया, पांच टास्क दिए हैं। एनवायरमेंट के साथ नशा का चैलेंजिंग विषय है। 

10:32 AM, 17-Dec-2025

'हांसी को नया जिला बनाया गया है'

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हांसी को नया जिला बनाया गया है। हांसी को हिंदुस्तान का दरवाजा कहा जाता था। उसकी ऐतिहासिक पहचान है। इस जमीन से क्रांतिकारी अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करते थे। इसी ऐतिहासिक नगरी को हमने जिला बनाया है। हांसी के लोगों के मांग को स्वीकार किया है उसे मांग को पूरा किया है। कमेटी की रिकमंड को हम पूरा करते हैं। 

10:29 AM, 17-Dec-2025

लाडो लक्ष्मी योजना को लागू करना हमारे लिए बड़ी चुनौती था: सैनी

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि लाडो लक्ष्मी योजना को लागू करना हमारे लिए बड़ी चुनौती था। पूरे मंत्रिमंडल ने कहा कि इसे लागू करेंगे। हमने योजना बनाकर अधिकारियों को दी। हमने चुनौती को स्वीकार किया। पहले ही वर्ष में हमने इसे लागू कर दिया। हम किसानों को भावांतर भरपाई भी देते हैं। बाजरे की फसल के लिए 380 करोड़ रुपये भावांतर में दिए गए हैं।

10:24 AM, 17-Dec-2025

'मोदी सरकार बिना भेदभाव के काम कर रही है'

सीएम सैनी ने कहा कि मोदी जी काम कर रहे हैं, गरीब के लिए काम कर रहे हैं। उनकी सोच है, वो बोलते भी हैं कि हम किसी विशेष के लिए काम नहीं करते हैं। मेरी सरकार एक लाख 40 करोड़ लोगों के लिए काम करती है। गरीब को अगर उज्ज्वला का सिलिंडर पहुंचाना है तो भेदभाव नहीं है। मोदी सरकार बिना भेदभाव के काम कर रही है।

10:12 AM, 17-Dec-2025

'किसानों के खाते में 15,500 करोड़ पहुंचाने काम किया'

सीएम सैनी ने कहा कि पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सालभर में छह हजार रुपये किसानों के खाते में पहुंचाया है। मेरे हरियाणा के 20 लाख किसानों के साढ़े सात हजार करोड़ रुपये पहुंचाने का काम नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया है। मेरे 12 लाख किसानों को फसल मंडी में पहुंचाने के 48 घंटे के अंदर उसके खाते के अंदर पैसा पहुंचाने का काम हमारी सरकार कर रही है। कांग्रेस दस साल तक हरियाणा के अंदर रही है, किसान की अगर फसल का खराबा हुआ है, कांग्रेस सरकार 269 करोड़ रुपया छोड़कर गई थी। हरियाणा की मनोहर लाल सरकार ने इस पैसे को दिया है।

उन्होंने कहा कि अगर मेरे हरियाणा के किसान का फसल खराबा  हुआ है तो हमने इन 11 साल में किसान के खाते में 15,500 करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंचाने काम किया है। किसान को भी ये लगता है कि ये सरकार मेरी है। महिलाओं को भी लगता है ये सरकार मेरी है। युवाओं को ये लगता है कि ये सरकार मेरी है। गरीब को भी लगता है ये सरकार मेरी है। 

10:08 AM, 17-Dec-2025

'गरीब परिवार के बच्चों को बिना पर्ची, बिना खर्चे के सरकारी नौकरी मिली'

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दो महीने पहले फिर आचार संहिता लग गई थी। बच्चों के मन में था कि भर्ती का परिणाम तो तैयार है। मुझसे डेढ़ हजार बच्चे मिलने आए थे। मैंने बच्चों से कहा कि हम परिणाम घोषित नहीं कर सकते क्योंकि कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग ने हमें हिदायत दी है। हालांकि, मैं आपको भरोसा दे रहा हूं कि जब नतीजे आएंगे और जब भाजपा की तीसरी बार सरकार बनेगी, तब मैं शपथ तो बाद में लूंगा और आपको नियुक्ति पत्र पहले दूंगा। गरीब परिवार के बच्चों को बिना पर्ची, बिना खर्चे के सरकारी नौकरी मिली।



10:01 AM, 17-Dec-2025

'हर रोज 14-15 हजार बच्चों को नियुक्ति पत्र हमने सौंपे'

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि मेरे कार्यभार संभालने के बाद ही लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई। एक ही दिन का समय मिला, उसमें नौकरियों की घोषणा की गई। आचार संहिता के दौरान हमने सौ दिन का एजेंडा तैयार किया था। हर दिन का एजेंडा तैयार किया था। कई दिन दो-दो कार्यक्रम थे। इसी बीच, हर रोज 14-15 हजार बच्चों को नियुक्ति पत्र हमने सौंपे।

09:56 AM, 17-Dec-2025

'हर प्रधानमंत्री ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार काम किया'

सीएम सैनी ने कहा कि कांग्रेस ने 55 साल तक शासन किया है। हर प्रधानमंत्री ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार काम किया है। हर पीएम ने सामर्थ्य के अनुसार देश को आगे बढ़ाने का काम किया है। हम बोलते हैं जो भी प्रधानमंत्री रहा है, उसने अपनी सामर्थ्य के अनुसार काम किया है। वोट चोरी जैसे मुद्दे दुर्भाग्यपूर्ण हैं, कांग्रेस को ऐसे मुद्दे धरातल पर उतारने के मुद्दे हैं। 

 

09:53 AM, 17-Dec-2025

कांग्रेस को कौन व्यक्ति स्क्रिप्ट लिखकर देता है?: सैनी

सीएम सैनी ने कांग्रेस पर हमला बोलेते हुए कहा कि कांग्रेस को कौन व्यक्ति स्क्रिप्ट लिखकर देता है? इस प्रकार की स्क्रिप्ट लिखने वाला कांग्रेस की ही नहीं, राहुल गांधी और गांधी परिवार की भी मिट्टी पलीद कर रहा है। जो देश की सत्ता में 55 साल बैठे रहे, वे अब यह मुद्दा उठाते हैं कि प्रधानमंत्री फिर चुने गए तो संविधान खत्म हो जाएगा? यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

09:51 AM, 17-Dec-2025

धीरे-धीरे बादल छंट रहे हैं: सैनी

सीएम सैनी ने कहा कि 2024 में कांग्रेस ने दुष्प्रचार किया था, लेकिन 2029 में आप देखेंगे कि हरियाणा के नतीजे किस तरह आते हैं। धीरे-धीरे बादल छंट रहे हैं। लोगों के सामने तस्वीर साफ हो रही है। संविधान खत्म हो जाने और वोट चोरी होने जैसे कांग्रेस के सारे भ्रम 2029 आते-आते खत्म हो जाएंगे।

09:47 AM, 17-Dec-2025

पिछले 11 साल में तेज गति से काम हुआ है: सैनी

संवाद में चर्चा के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब मैं पिछली बार आपके सम्मुख इस मंच पर आया था और आपने सवाल किया था कि क्या आप सत्ता में आ रहे हैं? तब हमने दावे से कहा था कि भाजपा ही बड़े जनादेश के साथ जीतेगी। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आजादी के बाद पिछले 11 साल में तेज गति से काम हुआ है। हरियाणा में मनोहर लाल जी ने सुधारों की शुरुआत की। सुधार इस तरह हुए कि दूर-दराज बैठे व्यक्ति तक भी योजनाएं पहुंचीं। लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़े। महिला, किसान, युवा, गरीब... सभी को लाभ मिला। पहले हम यह देखते थे कि सरकारें बोलती थीं, लेकिन नीचे कुछ नहीं होता था। पांच साल बाद जनता सोचती थी कि ये सब बोलते हैं, लेकिन काम धरातल पर नहीं उतरते थे। इस शासन तंत्र को बदलने का काम मोदी जी ने किया है। इसका परिणाम है कि गरीब, किसान, महिला, युवा को गर्व से लगने लगा कि ये सरकार हमारी है। पहली बार ऐसा महसूस हुआ है। हमने देखा है कि युवा जब नौकरी पर जाता था तो सबसे ज्यादा संघर्ष युवाओं के माता-पिता को करना पड़ता था।


 

09:42 AM, 17-Dec-2025

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्वागत किया

अमर उजाला के सहायक संपादक विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला परिवार की ओर से संवाद की ये श्रृंखला लंबे समय से चली आ रही है। हर राज्य में जहां-जहां हमारी उपस्थिति है। वहां अमर उजाला इस तरह के संवाद आयोजित करके उस राज्य के विकास और आर्थिक गतिविधियों पर चर्चा करते हैं। 

09:38 AM, 17-Dec-2025

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत

गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में सुबह नौ बजे हाॅल मंत्रोच्चारण से गूंज उठा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीप प्रज्वलन कर किया तो वहीं 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे ने अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच से शांति पाठ और मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे एक प्रमुख आचार्य और ज्ञानी व्यक्ति हैं, जो अपने आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के प्रति गहरी समझ के लिए प्रसिद्ध हैं। 

09:28 AM, 17-Dec-2025

जेस्मिन लंबोरिया: विरासत से विश्व स्वर्ण तक

हरियाणा की जेस्मिन लंबोरिया ने भारतीय महिला मुक्केबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। महान बॉक्सर हवा सिंह की परंपरा से निकली जेस्मिन ने पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और इसके बाद 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने खुद को विश्व चैंपियन बनाया। जेस्मिन आज देश की युवा खिलाड़ियों के लिए यह संदेश हैं कि संघर्ष से ही स्वर्णिम सफलता निकलती है।

09:19 AM, 17-Dec-2025

योगेश्वर दत्त: मिट्टी के अखाड़े से ओलंपिक पोडियम तक

हरियाणा के भैंसवाल कलां गांव से निकले योगेश्वर दत्त ने भारतीय कुश्ती को नई पहचान दी। 14 साल की उम्र में घर छोड़कर छत्रसाल स्टेडियम पहुंचे योगेश्वर ने संघर्ष, चोट और निजी दुखों के बावजूद हार नहीं मानी। 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रचा और देशभर में प्रेरणा बने। एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीतने वाले योगेश्वर के लिए कुश्ती जीवन का आधार रही। संन्यास के बाद भी वे मेंटर के रूप में भारतीय कुश्ती की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

09:14 AM, 17-Dec-2025

इशांत शर्मा: लंबी दौड़ का तेज गेंदबाज

दिल्ली में जन्मे इशांत शर्मा ने महज 18 साल की उम्र में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर क्रिकेट जगत को चौंका दिया था। लंबे कद, तेज रफ्तार और जुझारूपन ने उन्हें भारत के भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल किया। 100 से ज्यादा टेस्ट खेलने वाले इशांत ने टेस्ट क्रिकेट में 300 से अधिक विकेट झटके और विदेशी पिचों पर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। लंबे बाल और 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार उनकी पहचान बने। करियर में उतार-चढ़ाव के बावजूद इशांत ने खुद को साबित किया और आज भी युवा गेंदबाजों के लिए प्रेरणा हैं।
 

08:54 AM, 17-Dec-2025

अभिनेता अरशद वारसी रखेंगे अपनी बात

फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस के सर्किट, गोलमाल के माधव और जॉली एलएलबी के जगदीश त्यागी उर्फ जॉली जैसे यादगार किरदारों से पहचान बनाने वाले अभिनेता अरशद वारसी कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर तीनों विधाओं की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में सितंबर में रिलीज हुई जॉली एलएलबी-3 में निभाए गए किरदार के चलते वह चर्चा में हैं। संवाद में वह सिनेमा और अभिनय यात्रा पर अपने विचार साझा करेंगे।

08:39 AM, 17-Dec-2025

अभिनेता वरुण शर्मा होंगे शामिल

'चूचा' के नाम से मशहूर वरुण शर्मा भी संवाद में पहुंचेंगे। वरुण शर्मा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 2013 की कॉमेडी 'फुकरे' से की थी। फिल्म 'फुकरे' के लिए वरुण को बेस्ट मेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। इसी फिल्म के जरिए दर्शकों के बीच वे 'चूचा' के नाम से पहचाने जाते हैं। वरुण शर्मा को 'फुकरे' के अलावा,  'फुकरे रिटर्न्स'  ‘फुकरे 3’, 'डॉली की डोली', 'छिछोरे', 'दिलवाले', 'राबता', ‘रूहि’, 'फ्राइडे', 'फोन भूत', 'तेरा क्या होगा लवली' और 'खानदानी शफाखाना' जैसी फिल्मों में देखा जा चुका है। वरुण की आगामी फिल्म 'राहु केतू' है, जो 16 जनवरी 2026 को रिलीज होगी। संवाद में वरुण फिल्म जगत की बात करेंगे।
 

08:36 AM, 17-Dec-2025

शालिनी पांडे, अभिनेत्री

वर्ष 2017 में रिलीज ब्लॉकबस्टर फिल्म अर्जुन रेड्डी से शालिनी पांडे रातोंरात स्टार बनीं। इसके बाद उन्होंने तमिल और हिंदी सिनेमा में लगभग 15 फिल्मों और वेब सीरीज में काम किया। इन दिनों वह अपनी आगामी फिल्म राहु-केतु को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में वैनिटी वैन से जुड़ी एक घटना को लेकर भी वह सुर्खियों में रहीं। संवाद में वह फिल्मी दुनिया और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा करेंगी।

08:35 AM, 17-Dec-2025

सितारों से रोशन होगा अमर उजाला हरियाणा संवाद, अरशद से पुलकित सम्राट तक ये सेलेब होंगे शामिल

‘अमर उजाला संवाद’ इस बार हरियाणा पहुंचा है। आज 17 दिसंबर 2015 को गुरुग्राम में आयोजित इस खास आयोजन में मनोरंजन, खेल और राजनीति सहित अलग-अलग क्षेत्रों की तमाम दिग्गज हस्तियां हिस्सा लेंगी। इस आयोजन में फिल्म जगत की एक या दो नहीं, बल्कि पांच दिग्गज हस्तियां शिरकत करेंगी और सिनेमा एवं फिल्मों पर चर्चा होगी। 

पुलकित सम्राट
संवाद में पुलकित सम्राट भी मंच की शोभा बढ़ाने वाले हैं। टेलीविजन से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाले पुलकित सम्राट को फिल्म फुकरे के 'हनी' और सनम रे के आकाश किरदार से खास पहचान मिली। अब तक वह जय हो, ओ तेरी, बैंगिस्तान, पागलपंती और तैश सहित एक दर्जन से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। फिल्मों के अलावा अपने निजी जीवन को लेकर सुर्खियों में रहने वाले पुलकित इन दिनों फिल्म राहु केतु को लेकर चर्चा में हैं। संवाद में वह फिल्म जगत पर अपने विचार साझा करेंगे।
 

07:44 AM, 17-Dec-2025

संवाद के सहयोगी

लाइटिंग पार्टनर : ओरिएंट बाई जयंता 
नॉलेज पार्टनर : चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेस 
ड्रिवन बाय : किआ 
एसोसिएट पार्टनर : इलेंटा मार्ट और सोलर स्क्वायर

06:52 AM, 17-Dec-2025

इनकी रहेगी भागीदारी

‘संवाद’ अमर उजाला का राष्ट्रीय विचार मंच है जहां देश की जानी-मानी हस्तियां, नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और प्रभावशाली व्यक्तित्व अलग-अलग सत्रों में दर्शकों से सीधे संवाद करते हैं। इस आयोजन में 50 दिनों में दंडक्रम पारायण संपन्न करने वाले वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे, ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त, लोकप्रिय अभिनेता अरशद वारसी, पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, आरजे प्रवीण, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ईशांत शर्मा, अभिनेत्री शालिनी पांडेय, प्रख्यात कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के एमडी नितिन नाग और एब्सोल्यूट के सीईओ व संस्थापक अगम खरे अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे।

06:36 AM, 17-Dec-2025

ये है कार्यक्रम का एजेंडा

एक दिन के आयोजन में अलग-अलग पैनल सत्रों के माध्यम से विकसित हरियाणा, सनातन एवं जीवन मूल्य, पोषण और स्वस्थ भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा, फिल्मी दुनिया, उद्यमिता तथा आलोकनामा जैसे विषयों पर गहन विमर्श होगा। इसके साथ ही अचीवर्स अवाॅर्ड भी प्रदान किए जाएंगे।

06:09 AM, 17-Dec-2025

Amar Ujala Samwad Live: पुलकित सम्राट-शालिनी पांडे और वरुण शर्मा 'संवाद' के मंच पर, मनोरंजन जगत पर चर्चा

देश और हरियाणा के बहुआयामी विकास पर महामंथन के लिए बुधवार को अमर उजाला संवाद का आयोजन होगा। इसमें राजनीति, सुरक्षा, स्वास्थ्य, अध्यात्म, मनोरंजन, खेल नामचीन हस्तियों के साथ चर्चा होगी। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में सुबह नौ बजे होगी।

'हरियाणा स्वर्णिम शताब्दी की ओर' थीम पर आधारित इस संवाद में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी होंगे। सीएम सैनी सरकार की एक साल की उपलब्धियों पर बात करने के साथ विजन रखेंगे और चुनौतियों पर भी बात करेंगे। आयोजन में पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और योग गुरु व पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

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