चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बचाए गए एक कर्मचारी ने अपने साथी श्रमिकों का एक वीडियो साझा किया, जिन्हें 17 दिनों के लंबे समय के बाद सिल्क्यारा सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सफल सिल्कयारा सुरंग बचाव मिशन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि यह बचाव अभियान चुनौतियों से भरा था। हिमालय हमें दृढ़ और अचल बने रहने और आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करता है।
सिल्क्यारा सुरंग से सभी 41 श्रमिकों में से बचाए गए झारखंड के मजदूर अनिल बेदिया के पिता कहते हैं कि हां, हमें अच्छी खबर मिली। मैंने उनसे बात की है और उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं, लेकिन चेकअप से गुजर रहे हैं। हमारा सरकार से केवल यही अनुरोध था कि उन्हें सुरक्षित बचाया जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ने मदद की है।
सिल्कयारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के सफल बचाव के उपलक्ष्य में आज शाम देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास पर 'इगास बग्वाल' मनाया जाएगा।
उत्तराखंड की सिल्कयारा सुरंग से बचाए गए अंकित कुमार की पत्नी भूमिका चौधरी कहती हैं कि जैसे ही हमें फोन आया कि मेरे पति को सुरक्षित बचा लिया गया है, हमने दिवाली मनाई। मेरे पिता मेरे पति को वापस लाने के लिए उत्तराखंड गए हैं।
उत्तराखंड के मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल सिल्क्यारा सुरंग से सुरक्षित निकाले गए 41 श्रमिकों से मिलने चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। 41 श्रमिकों से मिलने के बाद उत्तराखंड के मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा, सब एकदम ठीक हैं और बहुत खुश हैं। सभी ने खाना भी खाया है।
उत्तरकाशी सुरंग से सफलतापूर्वक बचाए गए 41 श्रमिकों में से एक चिन्यालीसौड़ के विश्वजीत कुमार वर्मा ने कहा कि जब मलबा गिरा तो हमें पता चल गया कि हम फंस गए हैं। सभी हमें निकालने के प्रयास में लगे रहे। हर तरह की व्यवस्था की गई। ऑक्सीजन की, खाने-पीने की व्यवस्था की गई। पहले 10-15 घंटे हमें दिक्कत का सामना करना पड़ा, बाद में पाइप के द्वारा खाना उपलब्ध कराया गया। बाद में माइक लगाया गया था और परिवार से बात हो रही थी। अब मैं खुश हूं।
उत्तरकाशी सुरंग से सफलतापूर्वक बचाए गए 41 श्रमिकों में से एक श्रमिक सुबोध कुमार वर्मा ने बताया कि हमें वहां (सुरंग) पर 24 घंटों तक खान-पान और हवा से संबंधित परेशानी हुई। इसके बाद पाइप के द्वारा खाने-पीने की चीजें भेजी गईं। मैं स्वस्थ हूं, कोई परेशानी नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार की मेहनत थी जिस वजह से मैं निकल पाया।
उत्तरकाशी सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाए जाने पर अंतर्राष्ट्रीय टनलिंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि हम शांत थे और हम जानते थे कि वास्तव में हमें क्या करना है। हमने एक अद्भुत टीम के रूप में काम किया। भारत के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियर, सेना, सभी एजेंसियां इस सफल मिशन का हिस्सा बनना खुशी की बात है।
PMO के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने कहा कि इन 41 श्रमिकों ने जो हौसला दिखाया, उससे प्रेरणा मिलती है कि विपदा आती हैं लेकिन आदमी को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उनकी हिम्मत ने हमारा हौसला बढ़ाया और हम ये काम कर सके।
उत्तरकाशी सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाए जाने पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुडा ने कहा कि पूरा देश ये ही दुआ कर रहा था कि वे (श्रमिक) सही सलामत बाहर निकल आएं। इस बचाव अभियान में कई प्रयास हुए और ईश्वर की कृपा से सभी श्रमिक जीवित निकल आए हैं। मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देता हूं।
उत्तरकाशी में सफल बचाव अभियान के बाद उत्साहित बचाव दल ने कल सिल्कयारा सुरंग के अंदर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
17 दिन बाद उत्तराखंड की सिल्कयारा सुरंग से सफलतापूर्वक बचाए गए श्रमिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि बाबा केदार की कृपा से आप सभी सुरक्षित बाहर आए हैं। कहा कि 16 दिन सुरंग में रहना बहुत हिम्मत की बात है, लेकिन आप लोगों ने हिम्मत बनाए रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फोन कर शुभकामनाएं दीं। और श्रमिकों के बारे में मुख्यमंत्री से जानकारी ली।
सभी ने एक जुटकर होकर काम किया और रेस्क्यू ऑपरेशन में सफलता पाई। बीते 12 नवंबर को सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन की घटना के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन उतार-चढ़ाव भरा रहा। सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को बचाने के लिए सबसे पहले 13 नवंबर को देशी ऑगर मशीन मंगवाई गई, लेकिन यह क्षमता के मुताबिक काम नहीं कर पाई। जिसके कारण इसे हटाना पड़ा।