कुल 86 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग होनी है। अभी तक 24 मीटर ड्रिलिंग हो पाई है। इस हिसाब से सुरंग के अंदर फंसे मजदूर 62 मीटर दूरी पर हैं।
मौसम विभाग ने सोमवार को उत्तरकाशी जिले में गर्जन के साथ हल्की बारिश व ओलावृष्टि की संभावना जताई है। सिलक्यारा में भी रविवार को ही बादल छा गए। बारिश के आसार बन गए। माना जा रहा कि अगर ज्यादा बारिश हुई तो इससे ऑपरेशन सिलक्यारा में भी व्यवधान आ सकता है, क्योंकि टनल के भीतर का काम तो आसानी से चलता रहेगा, लेकिन टनल के ऊपरी हिस्से पर ड्रिल में परेशानी पेश आ सकती है।
सिल्कयारा सुरंग में मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर समूह (मद्रास सैपर्स) की एक इकाई को बुलाया गया है। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं। मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी। एक अधिकारी ने बताया मैन्युअल ड्रिलिंग करने के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर हथौड़े और छेनी जैसे हथियारों से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेगी और फिर पाइप को पाइप के अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाया जाएगा। सुरंग के अंदर 41 लोग सुरक्षित और स्थिर हैं। प्लाज्मा कटर पहुंचा और पाइप लाइन में फंसी मशीन को काटना शुरू किया।
पीएमओ के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने कहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग एक हो रही है। 20 मीटर ड्रिलिंग हो चुकी है। अभी 66 मीटर ड्रिलिंग और बाकी है।
केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह (सेवानिवृत्त) सिल्कयारा सुरंग स्थल पर पहुंचे, जहां फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चल रहा है। अब तक 15 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग का काम पूरा हो चुका है।
एनडीएमए के सदस्य, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कल बरमा मशीन फंस गई थी, ब्लेड टूट गए थे, इसलिए मैन्युअल कटिंग करनी पड़ी और उसके लिए उपकरण बाहर से लाना पड़ा। एयरफोर्स और इंडिगो की चार्टर फ्लाइट के जरिए तीनों उपकरण वहां पहुंच गए हैं। पहले हमें चार से पांच मीटर प्रति घंटे की स्पीड मिल रही थी, लेकिन अब शायद ऐसा नहीं होगा।
अपर सचिव (सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) एवं एम.डी (एनएचआईडीसीएल) महमूद अहमद ने बताया कि ड्रिफ्ट टनल बनाने के विकल्प पर भी कार्य शुरू किया गया है। ड्रिफ्ट टनल का डिजाइन तय कर फ्रेम के फेब्रिकेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। THDC ने भी बड़कोट साइड से टनल का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसमें अब तक चार ब्लास्ट कर 10 मीटर का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। ब्लास्टिंग में विशेष सावधानी बरती जा रही हैं। इस दौरान महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी भी मौजूद रहे।
अपर सचिव (सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) एवं एम.डी (एनएचआईडीसीएल) महमूद अहमद ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कई प्लानिंग पर एक साथ कार्य चल रहा है। जिसके तहत वर्टिकल ड्रिलिंग का कार्य आज शुरू कर लिया गया है। अब तक 15 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग की गई है। RVNL द्वारा भी परपेंडिकुलर होरिजेंटल ड्रिलिंग का कार्य शुरू किया गया है। इसके लिए सभी मशीनें पहुंच चुकी हैं। परपेंडिकुलर होरिजेंटल ड्रिलिंग हेतु कंक्रीट बेड बनाए जाने का कार्य जारी है।
सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि पाइप में फंसे ऑगर बिट को निकाले जाने के बाद आगे की माइनिंग का कार्य मैन्युअल रूप से किया जाएगा। जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया अंदर फंसे सभी श्रमिक सकुशल हैं। सभी श्रमिक हिम्मत बनाए हुए हैं। श्रमिकों से संवाद के लिए बीएसएनएल की मदद से अतिरिक्त कम्युनिकेशन सेटअप तैयार किया गया है। श्रमिकों को पर्याप्त मात्रा में भोजन, एवं अन्य आवश्यक सामग्री मौजूद है। फंसे श्रमिकों का निरंतर डॉक्टरो से संवाद करवाया जा रहा है। साथ ही मनोचिकित्सकों से भी निरंतर परामर्श करवाया जा रहा है।
सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि पाइप में फंसे ऑगर मशीन की ब्लेड एवं साफ्ट को काटने का कार्य जारी है। इसके लिए लेजर कटर एवं प्लाज्मा कटर को भी मंगाया गया हैस जो कि सिलक्यारा पहुंच चुका है। उन्होंने बताया अब 13 मीटर के हिस्से को निकाला जाना बाकी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट् ने कहा कि उत्तरकाशी में सुरंग में फंसे सभी 41 मजदूर सुरक्षित हैं। उनको सुरंग से बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं और वहां फंसे सभी मजदूरों को जल्द सुरंग से बाहर निकाल दिया जाएगा।
सुरंग में फंसे मजदूरों का दर्द केरल के समीर करिम्बा को सिलक्यारा खींच लाया। समीर मजदूरों को बाहर निकालने के लिए चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में हाथ बंटाना चाहते हैं। लेकिन तकनीकी जानकारी और बाध्यताओं के चलते ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि वह यहां तैनात आईटीबीपी व पुलिस के जवानों के लिए अलाव की व्यवस्था करने में सहायता कर रहे हैं।
माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने बताया कि प्लाज्मा मशीन से हम अभी भी बरमा काट रहे हैं। इसे काटने के लिए बरमा से लगभग 16 मीटर अधिक है। यह प्लाज्मा मशीन फायदेमंद है क्योंकि यह स्टील को तेजी से काट देगा।
हकीकत में कब तक निकाला जाएगा, यह पता नहीं है। पिछले तीन दिन से सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान अंतिम चरण बताया जा रहा था, लेकिन अब यह खिंचता जा रहा है। इससे अब अंदर फंसे मजदूरों के परिजनों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। सुरंग में फंसे बिहार के बांका जिले के रहने वाले वीरेंद्र किसकू की भाभी सुनीता ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से सुन रहे कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने वाला है, आज उन्हें निकाल लिया जाएगा, लेकिन रेस्क्यू पूरा ही नहीं हो रहा है। इससे सुरंग के अंदर फंसा उनका देवर भी निराश है। झारखंड के ग्राम केशोडीह निवासी विश्वजीत कुमार के भाई इंद्रजीत भी सुरंग के बाहर अपने भाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर दिन उम्मीद बंधती है कि आज अंदर फंसे सभी लोग बाहर आ जाएंगे, लेकिन फिर शाम होते-होते यह उम्मीद टूट जाती है।
सिलक्यारा सुरंग में 41 मजदूरों को फंसे 14 दिन हो गए हैं। अब परिजनों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। शनिवार को सुरंग के अंदर फंसे अपनों से बात कर निकले परिजनों ने कहा, वह हर दिन इसी उम्मीद में रहते हैं कि आज सभी को सुरंग से बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन रोज उम्मीद टूट जाती है।
इस अड़चन से मशीन का बरमा भी कई मीटर तक अंदर फंस गया है। जिसके चलते ड्रिलिंग मशीन से मजदूरों को बाहर निकालने के लिए एस्केप पैसेज तैयार करने का कार्य बाधित हो गया। इस खबर को सुनकर जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने की आशा में उत्साहित केंद्र व राज्य के अफसरों के चेहरे उतरे गए। मीडियाकर्मियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों से जानकारी मांगी तो किसी ने भी बात नहीं की। हालांकि, टनल एक्सपर्ट परीक्षित मेहरा ने बताया कि ऑगर मशीन के बरमे को बाहर निकालने का काम किया जा रहा है, जिसे बाहर निकालने के बाद दोबारा से ड्रिलिंग चालू करने का प्रयास किया जाएगा।
सिलक्यारा सुरंग में मजदूरों को बाहर निकालने के लिए ऑगर मशीन से ड्रिलिंग का काम रुक गया है। जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के चेहरे उतर गए हैं। इससे सुरंग के बाहर से लेकर भीतर तक निराशा का माहौल है। सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए पिछले 13 दिनों से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन शुक्रवार को अंतिम चरण में पहुंच गया था। यहां अमेरिकी ऑगर मशीन से 800 एमएम पाइप की ड्रिलिंग का काम किया जा रहा था। इस दौरान 1.5 मीटर ड्रिलिंग के बाद मशीन के सामने सरिया और पाइप की अड़चन सामने आ गई और ड्रिलिंग का काम रोकना पड़ा।
ऑगर मशीन के फंसे बरमे को काटने के लिए आज तड़के पांच बजे हैदराबाद से प्लाज्मा कटर पहुंच गया है। जिससे अभी तक 27 मीटर बरमे को काटकर निकाला जा चुका है। अभी 18 मीटर तक और काटकर निकाला जाना है। सूत्रों के अनुसार इस काम में अभी एक से डेढ़ दिन का समय और लग सकता है।
सुरंग के अंदर बचाव दल के लोग काम कर रहे हैं। अब सुरंग के अंदर सुरक्षा छतरी लगाने की तैयारी चल रही है। फंसे हुए श्रमिकों को अपने परिवार के सदस्यों से बात करने में सक्षम बनाने के लिए बीएसएनएल की ओर से एक लैंडलाइन सुविधा स्थापित की गई है।
इससे सुरंग के अंदर फंसा उनका देवर भी निराश है। झारखंड के ग्राम केशोडीह निवासी विश्वजीत कुमार के भाई इंद्रजीत भी सुरंग के बाहर अपने भाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर दिन उम्मीद बंधती है कि आज अंदर फंसे सभी लोग बाहर आ जाएंगे, लेकिन फिर शाम होते-होते यह उम्मीद टूट जाती है।
हकीकत में कब तक निकाला जाएगा, यह पता नहीं है। पिछले तीन दिन से सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान अंतिम चरण बताया जा रहा था, लेकिन अब यह खिंचता जा रहा है। इससे अब अंदर फंसे मजदूरों के परिजनों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। सुरंग में फंसे बिहार के बांका जिले के रहने वाले वीरेंद्र किसकू की भाभी सुनीता ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से सुन रहे कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने वाला है, आज उन्हें निकाल लिया जाएगा, लेकिन रेस्क्यू पूरा ही नहीं हो रहा है।
सिलक्यारा सुरंग में 41 मजदूरों को फंसे 14 दिन हो गए हैं। अब परिजनों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। शनिवार को सुरंग के अंदर फंसे अपनों से बात कर निकले परिजनों ने कहा, वह हर दिन इसी उम्मीद में रहते हैं कि आज सभी को सुरंग से बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन रोज उम्मीद टूट जाती है।
सिलक्यारा में अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स की देखरेख में चल रहे ऑपरेशन में विशेषज्ञ वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ ने कहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग भी एक विकल्प है, लेकिन संभव है कि वह अंतिम विकल्प हो।
सुरंग के अंदर सुरक्षा छतरी की तैयारी चल रही है जहां बचाव दल के लोग काम कर रहे हैं।
सिलक्यारा की जिस सुरंग में 14 दिन से मजदूर फंसे हैं, उसके प्रवेश द्वार पर रिस रहे पानी ने सबकी चिंताएं बढ़ा दीं। शनिवार को पानी टपकने लगा। हालांकि, अधिकारी इसे सामान्य घटना मान रहे हैं।
योजना एक : ऑगर मशीन के फंसे हिस्से को काटकर निकाला जाएगा। इसके बाद मैन्युअली यानि मजदूर हाथों से खोदाई कर मलबा निकालेंगे।
योजना दो: इसमें निर्माणाधीन सुरंग के ऊपरी क्षेत्र में 82 मीटर दूरी पर खोदाई होगी। इसके लिए मशीन का प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया गया है। मशीन के एक हिस्से को भी वहां पहुंचा दिया गया है।
योजना तीन : सुरंग के दूसरे छोर पाल गांव बड़कोट की तरफ से खोदाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। यह करीब पांच सौ मीटर हिस्सा है। इस अभियान में भी 12 से 13 दिन लगने का अनुमान है।
योजना चार: इसमें सुरंग के दोनों किनारों पर समानांतर (हॉरिजेंटल) ड्रिलिंग की जानी है। इसका सर्वे हो चुका है। रविवार को इस योजना पर भी काम शुरू किया जा सकता है।