उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मंगाई गई उच्च क्षमता की ऑगर मशीन के हिस्सों की आखिरी खेप भी प्रशासन के द्वारा सुरक्षित हवाई जहाज से उतार कर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सिलक्यारा पहुंचाई गई। चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर ऑगर मशीन की अनलोडिंग व रेस्क्यू साइट तक परिवहन के लिए समन्वय की जिम्मेदारी एसडीएम डुंडा बृजेश कुमार तिवारी संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मशीन के कल-पुर्जो की आखिरी खेप भी रेस्क्यू स्थल के लिए भेज दी गई है।
ऑगर मशीन हेतु प्लेटफार्म तैयार कर लिया गया है। ड्रिल के लिए 900 एमएम के पाइप को टनल के अंदर ले जाया जा रहा है। ऑगर मशीन के अधिकतर पार्ट्स पहुंच चुके हैं, शेष पार्ट्स चिन्यालिसौर से पहुंच रहे हैं। खाने की सामग्री जिनमें काजू, मूंगफली, भीगे हुए चने, भूने हुए चने, पॉप कॉर्न, दवाइयां जो की हर दो घंटे में दी जा रही है। सभी मजदूर सुरक्षित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता श्रीकांत प्रसाद ने बुधवार को सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन हादसे का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में लगी कंपनी की लापरवाही के चलते यहां हादसा हुआ है। यहां संवदेनशील हिस्से का सही तरीके से उपचार किया गया होता तो घटना नहीं घटती। कहा कि कंपनी ने पैसा बचाने के लिए टनल में प्रति मीटर ब्लॉकिंग और कंकरीटिंग पर ध्यान दिया। टनल इंजीनियरिंग के सुरक्षा कारकों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने हादसे के कारणों की पड़ताल कर निर्माण कार्य में लगी कंपनी के साथ राज्य सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की बात कही। कहा कि वह जल्द कुछ दिनों के अंदर यह जनहित याचिका दायर कर देंगे।
पिछले चार दिन से सिलक्यारा टनल में भूस्खलन के बाद से फंसे 40 मजदूरों में से कुछ ने गत मंगलवार को सिरदर्द, जुकाम और बुखार की शिकायत की थी। जिस पर उन्हें आवश्यक दवाइयां पाइपलाइन के द्वारा भेजी गई थी। एक-एक घंटे के अंतराल पर खाने के लिए पॉपकॉर्न, काजू, बादाम व मुरमुरे के साथ विटामिन टेबलेट भी दी जा रही है। जिससे उनके अंदर कमजोरी न आए। इसके अलावा पाइपलाइन से मजदूरों से बात कर उनका लगातार हौसला बढ़ाया जा रहा है।
सिलक्यारा टनल में भूस्खलन के बाद अब एनएचआईडीसीएल की ओर से अब वीडियो रिकॉडिंग करवाई जा रही है। जिसमें रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ सुरंग में पल-पल के हालत पर नजर रखी जा रही है। कंपनी से जुड़े एक कर्मी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इस काम के लिए दो लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। टनल में एक वीडीयो कैमरो चौबीसों घंटे पल-पल के हालत और रेस्क्यू ऑपरेशन पर भी नजर रखेगा। वहीं फोटो भी ली जाएंगी।
आलवेदर रोड परियोजना के अंतर्गत यमुनोत्री राजमार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में तीन दिन से फंसे मजदूरों की कुशलता के लिए श्रीनगर व्यापार सभा समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लक्ष्मीनारायण मंदिर में हवन-यज्ञ किया। इस दौरान हवन यज्ञ में शामिल लोगों ने कहा कि शनिवार की रात्रि को सिलक्यारा के समीप सुरंग में मलबा गिरने से 40 मजदूर सुरंग में फंस गए। जिन्हें सकुशल निकालने के लिए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम लगातार रेस्क्यू अभियान चलाए हुए है। लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल, पूर्व मंडल उपाध्यक्ष भाजपा दिनेश रुडेला, जितेंद्र रावत ने कहा कि इस समय सभी लोगों की संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ है। मौके पर भगवती प्रसाद पुरी ने हवन यज्ञ संपन्न करवाया। इस दौरान कुशलानाथ, मयंक बिष्ट, त्रिपुरारी चंद थपलियाल, सोनी प्रसाद भट्ट, मयंक बिष्ट, शैलेन्द्र गैरोला आदि मौजूद रहे। संवाद
दिल्ली से नई मशीन के पार्ट्स की दूसरी खेप लेकर चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर उतरे हरक्यूलिस विमान में मशीन के पार्ट्स फंस गए हैं। जिन्हें दो घंटे से अधिक समय से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। यह विमान दो बजे हवाई अड्डे पर उतरा था।
एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड) के निदेशक अंशू मनीष खलखो का कहना है कि यहां की चट्टान की प्रकृति बहुत नाजुक है। हमने दिल्ली से नवीनतम मशीन को एयरलिफ्ट किया है, और यह कभी भी उतर सकती है। एक घंटे के भीतर यहां के पास चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर मशीन को उतारा जा सकता है। भारतीय वायु सेना हमारी मदद कर रही है।अगले 3-4 घंटों में हम मशीन स्थापित करने में सक्षम होंगे और बचाव कार्य फिर से शुरू होगा।
दिल्ली से मशीनें की एयर लिफ्ट की गई, जो चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर उतारी गई। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर साइट तक मशीनें पहुंचाई जाएंगी।
पिछले एक घंटे मजदूरों का विरोध प्रदर्शन जारी है। कंपनी से जुड़े कई अधिकारी मजदूरों को समझाने के लिए पहुंचे, लेकिन वार्ता विफल रही।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. सिन्हा ने बताया, केंद्रीय गृह मंत्रालय भी लगातार संपर्क में है। जो भी प्रगति और कार्रवाई है, उससे केंद्र को भी अवगत कराया जा रहा है। गृह मंत्रालय के अधिकारी बराबर पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं।
सुरंग हादसे की खबर दीपावली की सुबह संचार माध्यमों से पता चलते ही यहां काम कर रहे लोगों के परिजन चिंतित हो उठे। तुरंत फोन लगाए गए, जब उनको पता चला कि उनके अपने सुरंग के अंदर फंसे हैं तो विचलित हो गए। किसी अनहोनी की आशंका में भगवान का सुमिरन करते हुए उत्तरकाशी की ओर चल दिए। वह चाहे हिमाचल के मंडी निवासी योगेश हो या मिर्जापुर के अखिलेश के परिजन सभी यहां पहुंचकर घटनास्थल पर दिन-रात डटे हुए हैं।
गत रविवार सुबह साढ़े पांच बजे यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी टनल में भारी भूस्खलन हुआ था। जिससे सुरंग निर्माण में लगे 40 मजदूर फंसे हुए हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए विभिन्न एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय बराबर ले रहा अपडेट
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. सिन्हा ने बताया, केंद्रीय गृह मंत्रालय भी लगातार संपर्क में है। जो भी प्रगति और कार्रवाई है, उससे केंद्र को भी अवगत कराया जा रहा है। गृह मंत्रालय के अधिकारी बराबर पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं।
जिसने जहां सुनी हादसे की खबर, तुरंत दौड़ पड़ा
सुरंग हादसे की खबर दीपावली की सुबह संचार माध्यमों से पता चलते ही यहां काम कर रहे लोगों के परिजन चिंतित हो उठे। तुरंत फोन लगाए गए, जब उनको पता चला कि उनके अपने सुरंग के अंदर फंसे हैं तो विचलित हो गए। किसी अनहोनी की आशंका में भगवान का सुमिरन करते हुए उत्तरकाशी की ओर चल दिए। वह चाहे हिमाचल के मंडी निवासी योगेश हो या मिर्जापुर के अखिलेश के परिजन सभी यहां पहुंचकर घटनास्थल पर दिन-रात डटे हुए हैं।
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मजदूरों की तबीयत बिगड़ी, दवाएं भेजीं गईं
सुरंग में फंसे मजदूरों की हालत अब बिगड़ने लगी है। उधर से कुछ लोगों में बुखार, बदन दर्द व घबराहट की बात बताए जाने पर अधिकारियों ने तुरंत दवाएं पाइप के जरिए भेजीं और एक पर्चे में उन्हें लेने की विधि पर लिखकर भेजी। इसके साथ उन्हें चना, बादाम इत्यादि भी पाइप से भेजा जा रहा है। हालांकि बाहर खड़े उनके साथियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वह हंगामा करने की बात करने लगे हैं।
लगातार मलबा गिरने से नहीं मिली सफलता
गत रविवार सुबह साढ़े पांच बजे यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी सुरंग में भारी भूस्खलन होने से निर्माण में लगे 40 मजदूर फंसे हुए हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए विभिन्न एजेंसियां जुटी हुई हैं। सुरंग में पहले जेसीबी से मलबा हटाने का काम किया गया, लेकिन लगातार मलबा गिरने से सफलता नहीं मिली। तब ऑगर मशीन मंगवाने और आयरन पाइप डालकर रास्ता तैयार करने का निर्णय लिया गया। बचाव कार्य में लगे मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि बचाव अभियान जोरों पर चल रहा है। जल्द सफलता मिलने की उम्मीद है।
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उत्तरकाशी यमुनोत्री हाईवे के पास निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे 40 मजदूरों को बचाने के लिए जारी राहत एवं बचाव कार्य का आज चौथा दिन है। मंगलवार को रात करीब 12 बजे मशीन से ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ। इसके साथ ही श्रमिकों को बचाने की उम्मीद भी बढ़ चलीं।
सुरंग के अंदर मलबे में पहला पाइप डालने के लिए ड्रिलिंग शुरु हुई, लेकिन ऑगर ड्रिलिंग मशीन में तकनीकी खराबी आ गई। जिसके बाद खराब मशीन को हटाकर नई ड्रिलिंग मशीन की स्थापना के लिए प्लेटफॉर्म लेवलिंग का काम शुरू किया गया।
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72 घंटे से सुरंग में फंसे मजदूर
सुरंग में फंसे मजदूरों को आज 72 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। मशीन में खराबी से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आज बुधवार को मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। इसके पूर्व मंगलवार को सुबह से लेकर रात तक कई बार उम्मीदें बंधती और बिगड़ती रहीं। हरिद्वार से आयरन पाइप और देहरादून से ड्रिलिंग के लिए ऑगर मशीन पहुंचने के बाद दोपहर को प्लेटफार्म तैयार करने का काम शुरू हुआ। इस दौरान मलबा गिरने से कुछ समय तक कार्य बाधित रहा। रात करीब नौ बजे जब सुरंग में ड्रिलिंग शुरू हुई तो फिर मलबा गिरने लगा। जिससे उस स्थान को शॉटक्रिटिंग कर सीमेंट का छिड़काव किया गया। उसके सेट होने पर रात करीब 12 बजे फिर ड्रिलिंग शुरू हुई। इसके पूर्व पूजा भी की गई।