सिलक्यारा सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को शनिवार को सातवें दिन भी बाहर नहीं निकाला जा सका। रेस्क्यू के दौरान सुरंग में कंपन और मलबा गिरने के खतरे पर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग बंद कर दी गई है। अब सुरंग के ऊपर और साइड से ड्रिलिंग की तैयारी है। वहीं बैकअप के तौर पर इंदौर से मंगवाई गई एक और ऑगर मशीन शुक्रवार देर रात जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंची। शनिवार दोपहर तीन ट्रकों के जरिये इन मशीनों को सिलक्यारा साइट पर पहुंचाया गया।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सुरंग निर्माण में सुरक्षा प्रबंधन, कानून व्यवस्था और निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। कहा, उत्तरकाशी के सिलक्यारा में सुरंग के अंदर 40 मजदूर पिछले छह दिन से फंसे हैं। सुरक्षा के जो इंतजाम पहले किए जाने थे, वे नहीं थे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रदेश में सभी सुरंगों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
सीएम के चुनावी दौरे और मंत्रियों के ग्राउंड जीरो पर न जाने के कांग्रेस के आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, जिनकी वहां सबसे अधिक जरूरत है, वे सभी विशेषज्ञ और आपदा प्रबंधन टीम वहां प्रयासों में जुटी है। जहां तक सवाल है सरकार का तो सीएम, केंद्रीय मंत्री, स्थानीय सांसद विधायक सभी वहां बचाव कार्यों का जायजा लेने गए। स्वयं पीएम भी दो बार सीएम से हालात की जानकारी ले चुके हैं। भट्ट ने कहा, सरकार की प्राथमिकता फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकलने की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर टनल हादसे पर गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करने का आरोप लगाया है। भट्ट ने घटना स्थल पर मंत्रियों के नहीं पहुंचने के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, जिन विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन टीम की वहां सबसे अधिक जरूरत है, वो वहां मौजूद हैं। ग्राउंड जीरो पर जुटी विशेषज्ञों की टीम अनुभव के आधार पर बचाव के प्रयास में जुटी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग आपदा से निपटने के लिए देश और दुनिया में चले पुराने सुरंग रेस्क्यू के अनुभवों के आधार पर कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए अधिकारी पड़ोसी राज्य हिमचाल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत दुनिया के कई देशों में सुरंग निर्माण और आपदा के बाद हुए रेस्क्यू की तकनीकी को अपना रहे हैं। पीर पंजाल, अटल सुरंग, भंवर टोंक, सँगलदान जैसी बड़ी सुरंग निर्माण और लूज गिरने के बाद रेस्क्यू की जानकारी जुटाई जा रही है। इसी के अनुसार रेस्क्यू टीम श्रमिकों को बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुसीबत में फंसे श्रमिकों के परिजनों के साथ सरकार खड़ी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वह सभी परिजनों को रेस्क्यू की हर पल की जानकारी देते रहें। इसके अलावा सिलक्यारा पहुंचे परिजनों के लिए भी सहायता केंद्र खोलने और उनके रहने-खाने की जरूरत के हिसाब से मदद की जाए। उन्होंने कहा कि विपदा की इस घड़ी में परिजनों को धैर्य बनाये रखने की जरूरत है।
12 नवंबर को सुरंग में भूस्खलन के बाद एनएचआइडीसीएल और नवयुग कंस्ट्रक्शन की ओर से 40 श्रमिकों के नाम और पते प्रशासन को उपलब्ध कराए गए थे। अब सात दिन बाद यह लापरवाही सामने आई है।