आपदा सचिव डॉ रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में अब रोबोट की मदद ली जाएगी। सुरंग में मशीनों के इस्तेमाल से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मलबा लगातार गिरने से रेस्क्यू में बाधा आ रही है।
सिलक्यारा पहुंचे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राहत एवं बचाव कार्य से जुड़े अधिकारियों की बैठक ले रहे हैं। इस समीक्षा बैठक के बाद वह सुरंग में हुए भूस्खलन व सुरंग के ऊपर ड्रिलिंग के लिए की जा रही कार्यवाही का जायजा लेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी व मुख्यमंत्री धामी सिलक्यारा पहुंच गए हैं। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हेलिकॉप्टर से उत्तरकाशी पहुंचे।
सिलक्यारा सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग के लिए अस्थायी मार्ग तैयार कर लिया गया है। जिसके बाद ऊपर एक पोकलैंड मशीन पहुंची है।
सुरंग में काम करने वाले लोडर ऑपरेटर मृत्युंजय कुमार ने बताया कि सुरंग के अंदर की स्थिति अच्छी नहीं है। बताया कि एक सप्ताह का समय हो गया है। लेकिन अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए खास काम नहीं हुआ है। बताया कि वह झूठ बोल बोलकर उन्हें यह कहते हैं कि मशीन लगी हुई है, तुम्हें जल्द बाहर निकाल दिया जाएगा। लेकिन उनका हौसला टूट रहा है। वह कहते हैं कि सूखा खाने पर वह कब तक जीयेंगे। तुम काम कर भी रहे हो या झूठ बोल रहे हो। बताया कि उन्हें भी स्थिति का अंदाजा है, इसलिए वह कितना झूठ बोल सकते हैंं। कहा कि मेट मशीन आए तो कुछ हो सकता है।
सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए तकनीक के साथ आस्था का भी सहारा लिया जा रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों के दबाव पर अब कंपनी प्रबंधन ने सुरंग के बाहर बौखनाग देवता का मंदिर स्थापित किया है। पहले इस मंदिर को हटाकर सुरंग के अंदर कोने में स्थापित किया गया था। शनिवार को यहां पुजारी को बुलाकर विशेष पूजा3-पाठ भी करवाया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लि. के निदेशक अंशु मनीष खलखो ने बताया कि ऊपर से ड्रिलिंग के लिए हुए वैज्ञानिक सर्वे के तहत करीब 103 मीटर चौड़ाई वाले क्षेत्र में ड्रिलिंग की जाएगी।
वहीं, निगम के अधिशासी निदेशक संदीप सुगेरा ने बताया कि सुरंग के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग के साथ साइड से भी ड्रिलिंग की योजना है। इसमें ऊपर 103 मीटर की चौड़ाई और साइड से ड्रिलिंग के लिए 177 मीटर की दूरी मिली है। ऊपर से ड्रिल कर मजदूरों तक खाना व पानी पहुंचाया जाएगा। जबकि साइड से उन्हें बाहर निकाल लिया जाएगा।
सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए अब पहाड़ के ऊपर और साइड से ड्रिलिंग होगी। वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए चार स्थानों की पहचान की गई है, वहां तक पहुंचने के लिए ट्रैक बनाने का काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंपा गया है। विदेशी विशेषज्ञों की मदद से पांच विकल्पों पर केंद्र और राज्य की छह टीमें रविवार से काम शुरू करेंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ सिलक्यारा पहुंचेंगे।
मजदूरों को बचाने के लिए हम सभी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। हमारे पास संसाधनों, विकल्पों और तौरतरीके की कमी नहीं है। वर्टिकल ड्रिलिंग का विकल्प भी खुला है। हम विदेशी सलाहकारों की मदद ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश है इस अभियान को जितना जल्दी हो सके पूरा करना है। -भास्कर खुल्बे, पीएमओ के पूर्व सलाहकार
श्रमिकों को निकालने के लिए दुनिया में खोजी गई आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। हम जल्द उन्हें निकाल लेंगे। मैं खुद मौके पर जा रहा हूं। - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
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एक ओर जहां वर्टिकल सुरंग बनाकर मजदूरों को बाहर निकालने के विकल्प पर विचार चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पुरानी ऑगर मशीन को भी चलाने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार को मशीन में कंपन आने के कारण उसे बंद कर दिया गया था। लेकिन शनिवार को मशीन पर दबाव बनाने के लिए बड़े-बड़े बोल्डर मंगाए हैं। रविवार को इस पर भी ड्रिलिंग शुरू हो सकती है।
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सिलक्यारा सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को शनिवार को सातवें दिन भी बाहर नहीं निकाला जा सका। रेस्क्यू का आज आठवां दिन है। सुरंग में फंसे मजदूरों का हौसला अब टूटता जा रहा है। वह सुरंग में काम करने वाले साथियों से पूछ रहे है कि हमें बाहर निकालने के लिए तुम काम कर भी रहे हो या झूठ बोल रहो हो। यह सुरंग में काम करने वाले लोडर ऑपरेटर मृत्युंजय कुमार ने दी है। रेस्क्यू के दौरान सुरंग में कंपन और मलबा गिरने के खतरे पर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग बंद कर दी गई है।
41 जान बचाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद से आज उत्तरकाशी में 'सिक्सर'
सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए अब विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। शनिवार को इंजीनियरिंग विशेषज्ञ अरमांडो कैपेलन और माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर भी बचाव कार्य में मदद के लिए मौके पर पहुंच गए हैं। पांच योजनाओं पर आज केंद्र और राज्य की छह टीम शुरू करेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में उपसचिव मंगेश घिल्डियाल, पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद और भूविज्ञानी वरुण अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मैराथन बैठक की। भास्कर खुल्बे ने मीडिया को बताया कि अब पांच प्लान पर एक साथ काम शुरू होगा। इसमें राज्य व केंद्र की छह एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इन पांच प्लान में सुरंग के सिलक्यारा छोर, बड़कोट छोर और सुरंग के ऊपर तथा दाएं और बाएं से ड्रिलिंग कर रास्ता तैयार किया जाएगा। जिससे अंदर फंसे सभी मजदूरों को बचाया जा सके।