विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच अनुपूरक बजट समेत सभी 10 विधेयक पारित कर दिए गए। विरोध जताते हुए विपक्षी विधायकों ने सदन के वेल में कागज फेंके। सदन में शोर-शराबे के बीच विधायी कार्यवाही पूरी की गई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इसके साथ ही विधानसभा सत्र की कार्यवाही समाप्त हो गई।
सदन में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित होने के साथ ही विनियोग विधेयक भी पारित कर दिया गया। सदन में विपक्ष के शोर-शराबे के बीच बजट और विनियोग विधेयक पारित करने की प्रक्रिया पूरी हुई।
उत्तराखंड विधानसभा में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। सदन में विपक्ष के शोर-शराबे और विरोध के बीच बजट पारित करने की प्रक्रिया पूरी हुई। सरकार ने अनुपूरक बजट में विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए धनराशि का प्रावधान किया है।
विधानसभा में विपक्ष के शोर-शराबे के बीच अनुपूरक बजट पारित किया जा रहा है। सदन में विपक्षी विधायकों का विरोध जारी रहने के दौरान बजट पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अनुपूरक बजट में विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है।
कांग्रेस विधायक मोहम्मद शहजाद ने नियम-58 के तहत बाढ़ सुरक्षा का मामला उठाया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने जवाब दिया। वहीं, लैंसडौन वन प्रभाग के तहत कोटद्वार में मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के लिए दीवार बनाने का मामला भी सामने आया। स्थानीय लोगों की ओर से इस कार्य के लिए लगाए गए पैसे का मुद्दा उठाया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को निर्देश दिए कि स्थानीय लोगों का पैसा लौटाया जाए। सदन में विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस विधायक धरने पर बैठ गए।
विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने एक बार फिर चर्चा की मांग को लेकर विरोध जताया। विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी की। इस दौरान अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर भी नारे लगाए गए। सदन में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री रेखा आर्या जवाब दे रही थीं। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग को लेकर विपक्षी विधायक सदन में नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही।
उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग उठाई। विपक्षी विधायक नियम 310 के तहत 210 करोड़ रुपये के मामले पर चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर विपक्षी विधायक एक बार फिर सदन के वेल में पहुंच गए। इस दौरान सदन में हंगामा हुआ। विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग पर अड़ा रहा। विधायकों के वेल में पहुंचने और विरोध के चलते सदन की कार्यवाही के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
विधानसभा सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध जारी रहा। विपक्षी विधायक एक बार फिर सदन के वेल में पहुंच गए और काले झंडे दिखाते हुए नारेबाजी की। विपक्ष चर्चा कराने की मांग पर अड़ा रहा, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान भाजपा विधायकों ने चकराता की दो बेटियों को धमकी दिए जाने का मामला भी उठाया। इस मामले में कांग्रेस में शामिल करने की मांग किए जाने की बात कही गई। सदन में हंगामे के बीच कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों ने सदन में चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस विधायक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंचे और वहां काले झंडे लहराए। विपक्ष विधानसभा अध्यक्ष से सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग कर रहा था। हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही को सुबह 11:20 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष के विरोध के चलते विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही। कांग्रेस विधायक अपनी मांगों पर चर्चा कराने के लिए लगातार आवाज उठाते रहे।
उत्तराखंड विधानसभा में फोटो सेशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद हो गया। विधायक अरविंद पांडेय ने फोटो सेशन से विपक्ष के किनारा करने की निंदा की। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस मामले में निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की। वहीं, विपक्ष का कहना है कि विधायकों के साथ जिस तरह की दुर्दशा हुई, ऐसे में फोटो सेशन का क्या मतलब है। इस मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने नजर आए। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि नए विधायकों के फोटो सेशन का मौका निकल गया।
उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू हो गई। कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस के सभी विधायक विधानसभा भवन के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। सदन के भीतर कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष का यह प्रदर्शन देखने को मिला। विधानसभा भवन के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए अपना विरोध जताया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल विपक्षी नेताओं को मनाने पहुंचे।
सत्र के दूसरे दिन खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे की घोषणा भी अहम घटनाक्रम है। उन्होंने बुधवार को सदन से इस्तीफा देने की बात कही है। उमेश कुमार का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के साथ मिलकर मुद्दे उठाए, लेकिन भ्रष्टाचार और हरिद्वार में किसानों की समस्याओं जैसे मामलों में विपक्ष का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने अगली बार दो-चार अन्य लोगों के साथ सदन में पहुंचने की इच्छा भी जताई है।
उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच संपन्न हो गया। सदन में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और विनियोग विधेयक समेत सभी 10 विधेयक पारित किए गए। विरोध के दौरान विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंचे और काले झंडे दिखाने के साथ कागज भी फेंके। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा भवन के बाहर धरने पर बैठे। इसके बाद सदन में भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। विधायक नियम 310 के तहत 210 करोड़ रुपये के मामले पर चर्चा कराने की मांग करते हुए वेल में पहुंच गए। विपक्ष ने काले झंडे दिखाकर नारेबाजी की। इस दौरान अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर भी नारे लगाए गए।
विपक्ष की मांगों और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। कार्यवाही पहले सुबह 11:20 बजे और फिर दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। शोर-शराबे के बीच सरकार ने अनुपूरक बजट और विधेयकों को पारित कराया। अंत में सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
बाढ़ सुरक्षा और वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा भी उठा
सदन में कांग्रेस विधायक मोहम्मद शहजाद ने नियम 58 के तहत बाढ़ सुरक्षा का मामला उठाया। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस पर जवाब दिया। वहीं, कोटद्वार में मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के लिए दीवार बनाने और इस काम में स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए पैसे का मुद्दा भी उठा। विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को स्थानीय लोगों का पैसा लौटाने के निर्देश दिए।
विधानसभा में फोटो सेशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए। विधायक अरविंद पांडेय ने विपक्ष के फोटो सेशन से अलग रहने की निंदा की और सत्ता पक्ष के विधायकों ने निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि विधायकों के साथ हुए व्यवहार के बाद फोटो सेशन का कोई औचित्य नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि नए विधायकों के फोटो सेशन का मौका निकल गया।