प्रकाश सिंह बादल को उनके पुत्र सुखबीर बादल ने मुखाग्नि दी।
प्रकाश सिंह बादल की अंतिम रस्में शुरू हो गई हैं। पुलिस की स्पेशल टुकड़ी ने बादल को अंतिम सलामी दी।
अंतिम संस्कार से पहले सुखबीर बादल और उनकी बहन अपने पिता के शव से लिपट कर काफी देर तक रोते रहे।
प्रकाश सिंह बादल की शव यात्रा उनके खेत में पहुंच गई है। कुछ ही देर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्रकाश सिंह बादल को श्रद्धांजलि देने के बादा जेपी नड्डा ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि प्रकाश सिंह बादल अब हमारे बीच नहीं हैं। वह नेता नहीं थे, वह एक राजनेता थे। उन्होंने समाज में शांति और भाईचारा स्थापित करने के लिए अपना जीवन योगदान दिया। हमने उनसे बहुत कुछ सीखा।
भाजपा पंजाब प्रधान अश्वनी शर्मा और हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी पूर्व सीएम को श्रद्धांजलि दी। वहीं राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी बादल को नमन करने पहुंचे।
प्रकाश सिंह बादल की पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटा गया है। भाजपा प्रधान जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने गांव पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्रकाश सिंह बादल ने 1947 में राजनीति में पदार्पण किया था। 1957 में पहला विधानसभा चुनाव जीता था। 1969 में प्रकाश सिंह बादल दोबारा विधायक बने थे। वहीं प्रकाश सिंह बादल 1970–71, 1977–80, 1997–2002 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। वहीं 1972, 1980 और 2002 में नेता विपक्ष भी रहे थे। प्रकाश सिंह बादल सांसद और केंद्र में मंत्री भी रह चुके थे। एक मार्च 2007 से 2017 तक उन्होंने दो बार मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला।
अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे बुजुर्ग वरियाम सिंह, उजागर सिंह, जगरूप सिंह ने बताया कि पूर्व सीएम का अपने पैतृक गांव बादल से बेहद लगाव था। वे हर किसी के सुख-दुःख में शरीक होते थे। अनेकों बार तो वे पैदल ही गांव में टहलते-टहलते लोगों के बीच पहुंच जाया करते थे। कितनी सादगी थी उनमें इस बात का पता इससे लगाया जा सकता है। उनका ज्यादातर समय अपने हलके के लोगों के बीच ही बीता है। गांव के लोग तो उनकी सादगी व विनम्रता के कायल थे। लोगों की मुश्किलों का उनके द्वार पर हल करने के उद्देश्य से ही उन्होंने संगत दर्शन कार्यक्रम शुरू किया था, जो सिर्फ उनके कार्यकाल में ही हुआ है। अन्य किसी सरकार को ऐसा कार्यक्रम करने का ख्याल तक नहीं आया। सिर्फ बादल ही थे जो संगत दर्शन के जरिए प्रदेश की संगतों के बीच जाकर उनकी मुश्किलें सुनने व हल करवाने का यत्न करते रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सलाहकार हरचरन सिंह बैंस भी भावुक दिखे। बैंस ने कहा कि बादल हमेशा अपने पारिवारिक सदस्य की तरह उन्हें प्यार व सम्मान देते थे। यहां तक कि अनेकों बार तो उनके साथ ही खाना खाते थे। बादल की एक खासियत थी कि वो हर किसी के सुख-दुःख में शरीक होते थे। अगर किसी कारणवश किसी के सुख में वे शरीक न भी हो पाएं, मगर उनकी ये कोशिश रहती थी कि हर किसी के दुःख में जरूर शरीक हों। इस मामले में वे अपने कट्टर प्रतिद्वंदी कह लो या विपक्षी नेता भी हो तो उसके दुःख में शरीक होने जरूर जाते थे। उनका मानना था कि राजनीति में उनकी विचारों की लड़ाई हो सकता है। इसे निजी लड़ाई नहीं मानना चाहिए। वे हमेशा पंजाब के हितों के बारे में सोचते रहते थे।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी गांव बादल पहुंचे हैं।
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा दोपहर करीब 12 बजे प्रकाश सिंह बादल को अंतिम श्रद्धांजलि देने लंबी पहुंचेंगे।
गांव बादल में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की पुलिस प्रशासन द्वारा सख्ती से जांच की जा रही है। बादल निवास से 100 मीटर पहले ही हर आने-जाने वाले व्यक्तियों की तलाशी ली जा रही है। वहीं बादल निवास के आगे भी डिटेक्टिव मशीन से स्कैन कर हर किसी अंदर भेजा जा रहा है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके। बादल निवास के अंदर भी भारी फोर्स तैनात है।
प्रकाश सिंह बादल की अंतिम यात्रा घर से खेत तक ट्रैक्टर में निकाली जाएगी। ट्रैक्टर को फूलों से सजाया गया है।