छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चरणजीत चन्नी को सीएम बनने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि वे आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले का स्वागत करते हैं। वहीं उन्होंने राजस्थान में किसी गड़बड़ी की बात से इनकार किया।
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रधान सचिव और विशेष प्रधान सचिव को क्रमशः हुसैन लाल और राहुल तिवारी से बदल दिया गया है।
चन्नी ने हड़ताल पर गए सरकारी कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की और कहा कि कर्मचारियों के सभी मसले हल होंगे। कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा।
चन्नी ने साफ किया कि पंजाब में अगर कोई माफिया है तो उसका फैसला जल्दी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी गरीब का कनेक्शन इस लिए नहीं कटेगा कि वो बिल नहीं भरता है। अगर कटा है तो उसके सारे बिल माफ करके उसका कनेक्शन बहाल किया जाएगा।
चन्नी ने प्रेस कांफ्रेंस में पंजाब में किसानों के बिजली-पानी के बकाया बिल माफ करने का एलान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसानों और खेती करने वालों को किसी तरह की आंच आई तो मैं अपनी गर्दन भी उनके आगे कर दूंगा।
चन्नी ने पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को अच्छा आदमी बताया। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।
चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रेस कांफ्रेंस में खुद को आम आदमी बताते हुए पंजाब आलाकमान का आभार जताया। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत पूरी पार्टी का धन्यवाद किया।
पंजाब भाजपा के प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि पंजाब में दलित सीएम बनाकर दलित वोट लूटने की साजिश रची जा रही है। ऐसा लगता है कि यह कांग्रेस की पुरानी आदत है। उन्हें लगता है कि 3-4 महीने के लिए सीएम नियुक्त करने से उन्हें दलितों का पूरा वोट बैंक मिल जाएगा। यह सब दिखावा है।
चरणजीत चन्नी ने सीएम कार्यालय पहुंचकर अपना पदभार संभाल लिया है। उनके साथ इस दौरान नवजोत सिद्धू भी मौजूद थे।
सूत्रों के अनुसार, रविवार देर रात ब्रह्म मोहिंद्रा को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला हुआ था लेकिन नवजोत सिद्धू ने मोहिंद्रा का नाम कटवाया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह चन्नी के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंचे थे। अब कैप्टन ने चन्नी को लंच पर बुलाया है। प्रेस कांफ्रेंस के बाद नए सीएम सिसवां में कैप्टन से मिलने जाएंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा की तर्ज पर पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की थी। भाजपा की ही तरफ कांग्रेस का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला रहा। चन्नी को सीएम बनाने के लिए कांग्रेस को कई दिग्गजों को दरकिनार करना पड़ा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी को बधाई दी। मोदी ने कहा कि पंजाब के लोगों की भलाई के लिए पंजाब सरकार के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
वहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रधान मायावती ने चन्नी को बधाई देते हुए दलित वर्ग को कांग्रेस से सावधान रहने को कहा है। मायावती ने कहा कि दलित सीएम बनाना कांग्रेस का चुनावी हथकंडा है।
इसी बीच सुनील जाखड़ के भतीजे अजयवीर जाखड़ ने पंजाब किसान आयोग के पद से इस्तीफा दे दिया है। जाखड़ ने सुबह ही सिद्धू के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के बयान पर आपत्ति जताई थी।
अब थोड़ी देर में मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात करने के लिए सिसवां स्थित उनके आवास पर जाएंगे। हालांकि उनके साथ और कौन कैप्टन से मिलने जाएगा, ये अभी स्पष्ट नहीं है।
सुखजिंदर रंधावा और ओमप्रकाश सोनी पंजाब के नए उपमुख्यमंत्री के तौर पर काम करेंगे।
राहुल गांधी राजभवन पहुंच चुके हैं। उनके साथ हरीश रावत और अजय माकन भी चन्नी को बधाई देने पहुंचे। राहुल ने चन्नी को शुभकामनाएं दी।
सीएम चरणजीत चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के शपथ लेने के बाद राहुल गांधी राजभवन पहुंचे। वहीं ओमप्रकाश सोनी ने भी शपथ ली।
सीएम चरणजीत चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी शपथ ली।
चरणजीत चन्नी ने पंजाब के 17वें सीएम के तौर पर शपथ ले ली है।
सूत्रों के अनुसार, चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए राहुल गांधी चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। कुछ ही देर में वे राजभवन पहुंच जाएंगे।
पंजाब में दलित दो हिस्सों में बंटा है। यहां रविदासी और वाल्मीकि दो बड़े वर्ग दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला दलितों का बड़ा हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है। चुनाव के समय यह डेरे अहम भूमिका निभाते हैं। नए मुख्यमंत्री के जरिए कांग्रेस पार्टी को ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत आधार मिलेगा। दोआबा क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर दलित परिवारों का एक सदस्य एनआरआई है। इस नाते वह आर्थिक रूप से काफी संपन्न भी हैं।
शपथ ग्रहण समारोह कुछ ही देर में शुरू होने वाला है। हालांकि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के समारोह में हिस्सा लेने पर संशय है। चरणजीत चन्नी, सुनील जाखड़ और नवजोत सिद्धू राजभवन पहुंच चुके हैं।
रामगढ़िया सिख बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले ज्ञानी जैल सिंह को छोड़ दें तो 1967 के बाद पंजाब में गैर जट कभी मुख्यमंत्री नहीं बना। दरअसल, पंजाब में 34 आरक्षित सीटें हैं, जिनमें रविदासिया समाज, भगत बिरादरी, वाल्मीकि भाईचारा, मजहबी सिख का खासा वोट बैंक है।
चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का चेहरा बना विपक्षी दलों को फिर से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। ऐसा पहली बार है जब एससी वर्ग पंजाब की सियासत के केंद्र में है। अब तक यहां दोनों प्रमुख सियासी दल शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस 18 फीसदी जट सिखों पर ही दांव लगाते रहे हैं। मगर इस बार सबकी नजर 32 फीसदी दलित वोट बैंक पर है।
चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा औपचारिक तौर पर शाम को करीब छह बजे हुई लेकिन उनके घर पर सुबह से ही खुशी का माहौल था और पूरा घर फूलों से एक दिन पहले ही सजाया जा चुका था। क्योंकि चरणजीत सिंह चन्नी के बड़े बेटे नवदीप सिंह का विवाह अगले महीने 10 अक्तूबर को है।
चरणजीत चन्नी शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजभवन जाने से पहले हरीश रावत से मिलने जा रहे हैं। विधायक कुलदीप सिंह वैद्य ने बताया कि दोपहर में चन्नी कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात करेंगे।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले चरणजीत सिंह चन्नी सोमवार को फतेहगढ़ साहिब के डेरा संत बाबा राम सिंह गंडुआ वाले के यहां पूरे परिवार के साथ आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस अवसर पर उनके साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने रूपनगर के एक गुरुद्वारे में माथा टेका।
कैप्टन के खिलाफ बगावत में चन्नी ने अहम भूमिका निभाई थी। कांग्रेस प्रधान बनने के बाद चमकौर साहिब के दौरे के वक्त चन्नी ने सिद्धू को घर बुला लिया था और कांग्रेस प्रधान का पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया था। पार्टी के सूत्रों के अनुसार यदि सुखजिंदर रंधावा सीएम बन जाते तो 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों का नेतृत्व करने में भी सिद्धू को परेशानी होनी थी, जिसको देखते हुए सिद्धू ने रंधावा के नाम का विरोध किया।
चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राहुल गांधी शामिल होंगे। वहीं ब्रह्म मोहिंद्रा और सुखजिंदर रंधावा डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे।
पंजाब कांग्रेस में चल रही सियासी उठापटक के बीच पार्टी नवजोत सिंह सिद्धू को पूरी तरह साधकर चलेगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद से हटाने से लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने तक सिद्धू की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने भी साफ कर दिया है कि 2022 विधानसभा चुनाव में सिद्धृ ही पार्टी का चेहरा होंगे।
कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने सोमवार को हरीश रावत के पंजाब में अगला चुनाव नवजोत सिद्धू के नेतृत्व में लड़ने के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण के दिन ही यह बयान चौंकाने वाला है। यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने की संभावना है, साथ ही उनके चयन को भी नकारता है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पंजाब विधायक दल का नया नेता चुनने की दो दिन तक जारी रही कवायद का नतीजा विचित्र रहा। कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए महीनों तक लामबंद रहे नवजोत सिंह सिद्धू और सुखजिंदर सिंह रंधावा रविवार को खुद ही सीएम पद हासिल करने की दौड़ में एक-दूसरे को मात देने में जुट गए। मुकाबला शाम तक जारी रहा, सिद्धू के समर्थकों ने इसे लेकर रविवार को अभियान भी छेड़ा लेकिन पार्टी हाईकमान ने सिद्धू और रंधावा के दावों को साइड करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश की कमान सौंप दी। शनिवार शाम विधायक दल की बैठक के बाद जहां सुनील जाखड़ का नाम सामने आया था तो वहीं रविवार सुबह सुखजिंदर सिंह रंधावा की मुहिम ने पीछे छोड़ दिया।
अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे चरणजीत चन्नी कैप्टन के धुर राजनीतिक विरोधी माने जाते हैं। चन्नी के नेतृत्व में ही विधायकों ने अगस्त में अमरिंदर के खिलाफ बगावत की थी। तब उन्होंने साफ कहा था कि हमें कैप्टन पर भरोसा नहीं है। रविदासिया समुदाय के चन्नी दलित-सिख हैं और राहुल के नजदीकी हैं। बतौर पार्षद राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत करने के बाद वे दो बार खरड़ नगरपालिका के प्रधान रहे। 2015-16 में विधानसभा में नेता-प्रतिपक्ष भी रहे। नवजोत सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में चन्नी ने अहम भूमिका निभाई।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में मची सियासी उठापटक के बीच पंजाब की सरदारी चरणजीत सिंह चन्नी के हाथ आई है। सूबे के 17वें मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी कुछ ही देर में शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी भी शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं। कांग्रेस ने पहली बार दलित चेहरे पर दांव खेलकर विरोधी दलों की रणनीति की न केवल काट ढूंढ निकाली है बल्कि सूबे की दलित आबादी को साधने का काम किया है।