किसान शंभू बाॅर्डर से वापस लाैट गए हैं।
किसान नेता सरवण सिंह पंधेर माैके पर पहुंचे। वे किसानों को वापस लेने आए हैं।
हरियाणा पुलिस की तरफ से माहाैल को शांत करने के लिए किसानों पर फूल बरसाए गए।
तीन और किसान घायल हुए हैं।
शंभू बाॅर्डर पर पुलिस की तरफ से आंसू गैस के तीन गोले फेंके गए हैं।
आंसू गैस का गोला लगने से बीकेयू क्रांतिकारी से रेशम सिंह घायल हुए हैं।
शंभू बाॅर्डर पर किसान और पुलिस आमने सामने हैं।
एक किसान ने जाली में कुंडी फंसाकर तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस ने किसानों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
किसानों को पुलिस की तरफ से चाय-बिस्कुट दिए जा रहे हैं।
शंभू बाॅर्डर पर हरियाणा पुलिस की तरफ से किसानों के पहचान पत्र दिखाने को कहा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि हम पहले किसानों की पहचान करेंगे और फिर उन्हें आगे जाने देंगे। हमारे पास 101 किसानों के नामों की सूची है, और वे वे लोग नहीं हैं। वे हमें अपनी पहचान नहीं करने दे रहे हैं। वे भीड़ के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।
किसानों और पुलिस के बीच बहस शुरू हो गई है। हरियाणा पुलिस किसानों से दिल्ली जाने की अनुमति मांग रहे हैं।
किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच शुरू कर दिया है।
कुछ ही देर में 101 किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे।
मीडियाकर्मियों को रोकने से नाराज किसान शंभू बाॅर्डर पर धरने पर बैठ गए हैं।
शंभू बॉर्डर पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार केंद्र सरकार के साथ किसी तरह का गठजोड़ कर रही है। आज जिस तरह से मीडिया को रोका जा रहा है, सीएम और अरविंद केजरीवाल को आगे आकर इस पर सफाई देनी चाहिए। वे कहते हैं कि वे किसानों और मजदूरों के साथ हैं, फिर वे मीडिया को क्यों रोक रहे हैं? भगवंत मान सरकार का चेहरा बेनकाब हो गया है। पहले हम केवल केंद्र सरकार के खिलाफ थे, लेकिन अब हमें राज्य सरकार से निपटना है। पंजाब सरकार केंद्र सरकार के कामों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। वहीं पटियाला के एसएसपी नानक सिंह ने कहा कि मीडिया को नहीं रोका गया है। हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है। लेकिन मीडिया को जानकारी देना ज़रूरी था। पिछली बार हमें पता चला था कि 3-4 मीडियाकर्मी घायल हो गए हैं। उससे बचने के लिए हमने मीडिया को जानकारी दी... हम कोशिश करेंगे कि ऐसा न हो - लेकिन अगर कोई घायल होता है, तो उसे निकालने के लिए हमारे पास मेडिकल टीम है।
सरवण सिंह पंधेर ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान के शुक्रवार को राज्यसभा में एमएसपी को लेकर दिए गए बयान को गुमराहपूर्ण बताया। कहा कि किसान फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं। सरकार अगर देश को परंपरागत फसली चक्र से बाहर निकालना चाहती है, तो इस मांग को पूरा करना जरूरी है। इससे जमीनी पानी के स्तर में भी सुधार होगा।
किसानों ने शंभू पर खुद अपनी बैरिकेडिंग लगा दी है। इससे आगे कोई भी जनता नहीं जाएगी। इससे आगे केवल सुरक्षा वालंटियर, 101 मरजीवड़ा जत्था के सदस्य और मीडिया कर्मी ही जाएंगे।
सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि वह राजपुरा अस्पताल में दाखिल किसानों का हालचाल जानने के लिए गए थे। शुक्रवार को शंभू बॉर्डर पर हरियाणा की तरफ से छोड़े गए आंसू गैस के गोलों के कारण 16 किसान घायल हुए हैं। किसान हरप्रीत सिंह व गुरिंदर सिंह की हालत नाजुक है। इनके सुनने की क्षमता खत्म हो गई है। चार किसानों को छोड़कर बाकी सभी किसानों को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
हरियाणा के डीजीपी ने पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर अपील की है कि हरियाणा बॉर्डर पर जहां बैरीकेडिंग की हुई है, इससे करीब एक किलोमीटर पहले ही मीडिया को रोका जाए। शुक्रवार को जब किसानों का जत्था हरियाणा बॉर्डर की तरफ बढ़ रहा था, तो काफी संख्या में मीडिया के नुमाइंदे उनके साथ थे। इस वजह से उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। मीडिया के नुमाइंदों की सुरक्षा के लिए ही दोबारा अपील की जा रही है।
किसानों के फिर से दिल्ली कूच के एलान के बाद हरियाणा की तरफ से सुरक्षा प्रबंधों को और कड़ा कर दिया गया है। घग्गर दरिया पर पहरेदारी बढ़ा दी गई है। घग्गर दरिया के पुल पर वाटर कैनन, ड्रोन के जरिये आंसू गैस के गोले छोड़ने के प्रबंधों के अलावा काफी गिनती में पुलिस बल भी तैनात है। खनौरी बॉर्डर से किसानों ने कूच का एलान नहीं किया है, इसके बावजूद यहां भी पुलिस बल तैनात किया गया है।
फसलों पर एमएसपी की मांगों को लेकर 101 मरजीवड़े किसानों का जत्था रविवार दोपहर 12 बजे फिर से दिल्ली के लिए कूच करेगा। शंभू बॉर्डर पर शनिवार शाम को पत्रकार वार्ता में किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि शनिवार का दिन उन्होंने केंद्र से बातचीत के लिए रखा था, लेकिन उन्हें कोई न्योता नहीं मिला।
केंद्रीय मंत्री व नेता अलग-अलग मंचों पर किसानों से बातचीत की बात कह रहे हैं लेकिन किसी ने भी आगे आकर इसका प्रयास नहीं किया। इसी वजह से उन्होंने फिर से पैदल दिल्ली मार्च का फैसला किया है। पंधेर ने कहा कि उनका मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासन में ही रहेगा। किसानों के पास न पहले हथियार थे और न अब हैं।