विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पास होने के बाद उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना ऐतिहासिक घटना है। NDA की दूसरी पीढ़ी का सत्ता में आना बड़ी घटना है। गठबंधन पर जनता का विश्वास कायम रहना बड़ी बात है। मौका नहीं मिलने पर नेता प्रतिपक्ष का मलाल नेचुरल है। विपक्ष का यही हाल रहा तो आगे मौका मिलना मुश्किल है। 2025 से 2030 नीतीश कुमार की राह पर ही NDA सरकार चलेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने फ्लोर टेस्ट आसानी से पास कर लिया। खास बात यह यही कि विपक्ष ने भी फ्लोर टेस्ट का विरोध नहीं किया। तेजस्वी यादव ने कहा कि हमलोगों के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। इसीलिए हमलोग विरोध नहीं करेंगे। इसके बाद 243 विधायकों के समर्थन से सम्राट चौधरी फ्लोर टेस्ट पास कर गए। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बहुमत के साथ विश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई दी। साथ ही नीतीश कुमार के कामकाज की भी खूब तारीफ की। विजय चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के व्यवहार का निंदा प्रस्ताव लाया। जो कि बहुमत से पास हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकल के लिए स्थगित कर दी गई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की धरती है। लालू प्रसाद बड़े नेता हैं। मैं उनके साथ भी काम किया है। लेकिन, वह अगर अपने बारे नहीं सोचते तो आज सब लोग उनके साथ नहीं होते। लालू प्रसाद ने आरएसएस दफ्तर जाकर घुटना टेका था। 33 विधायकों का समर्थन मिला तब वह मुख्यमंत्री बने। नीतीश कुमार नहीं होते तो लालू प्रसाद नेता नहीं बनते।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सदन में देख लीजिए, दो-तिहाई से अधिक ओबीसी और दलित वर्ग से महिला विधायक हैं। महिलाओं का सम्मान करना होगा। महिलाओं के खिलाफ कोई भी गलत नजर डालेगा, तो उसे पाताल से भी खोजकर निकाल लिया जाएगा। तीन चीजों (ब्लॉक, अंचल और थाना) को अब सीएमओ देखेगा।
सीएम सम्राट चौधरी ने लालू प्रसाद पर हमला बोलते हुए कहा कि वह सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने लेकिन बिहार को लूट लिया। उनके राज में बिहार की क्या दुर्दशा थी? यह जनता जानती है। नीतीश कुमार कोई न राजनीति से हटा सकता है और न ही दिल से हटा सकता है। नीतीश कुमार हमेशा कहते थे कि अब अपलोगों को बिहार संभालना होगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि मेरे पास विकास के अलावा कोई काम नहीं है। सम्राट ने सरकार की विकास योजनाओं की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के कार्यकाल की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश विकसित हो। उसी तरह नीतीश कुमार चाहते हैं कि बिहार समृद्ध हो। उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि पाठशाला किसी की बपौती नहीं है। विरासत से बाहर निकलिए। मुझे बिहार की 14 करोड़ की जनता का आशीर्वाद प्राप्त है। मुझे लालू यादव ने जेल भिजवाया था। मेरे साथ साथ मेरे परिवार के 22 लोग जेल गए थे। अगर लालू यादव ने मुझ पर अत्याचार नहीं किया होता तो आज मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं रहता है। इसीलिए कोई किसी पाठशाला से नहीं निकलता है। पूरा एनडीए एक है। उन्होंने कहा कि मैं 1995 में जेल में रहा। अगर मैं 1995 में नाबालिग रहता तो क्या जेल में रहता। मैं कोर्ट गया। उन्होंने अपनी डिग्री के सवाल पर कहा कि मैंने अपने एफीडेविट में सारी बातें स्पष्ट कर दी है।
जदयू के विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है जहां महिला शक्तिकरण की दिशा में कदम उठाया गया। बिहार ने बेटियों को पढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। सरकारी नौकरी ने बेटियों को आरक्षण दिया। बिहार देश का पहला राज्य बना जिसने महिला रोजगार के लिए एक करोड़ 74 लाख जीविका दीदियों के खाते में 10-10 लाख रुपये की राशि दी। यह सब नीतीश कुमार की देन है। नीतीश कुमार का संकल्प सम्राट चौधरी पूरा करेंगे। हमलोग अपना समर्थन सम्राट चौधरी को देते हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक दल के नेता राजू तिवारी ने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि लालू प्रसाद की पाठशाला से उनके परिवार के लोग ही निकलेंगे। इस पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने पलटवार करते हुए राजू तिवारी पर तंज कसा और कहा, “चोर मचाए शोर।” उन्होंने आगे कहा कि सबसे अधिक तकलीफ चिराग को ही होगी कि इतना बहुमत होने के बावजूद उन्हें कुछ नहीं मिला। इसके बाद राजू तिवारी ने कहा कि इन लोगों का लोकतंत्र में विश्वास नहीं है, इसलिए वे इस तरह की बातें करते हैं।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बिहार देश का सबसे गरीब राज्य है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि लालू प्रसाद यादव के समय में राज्य का वित्तीय प्रबंधन बेहतर था और काम सरप्लस में होता था। उन्होंने कहा कि जब खजाना खाली रहेगा तो विकास कार्य कैसे होंगे। अंत में उन्होंने सरकार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भले ही विपक्ष की संख्या कम है, लेकिन सरकार को एक बार विपक्ष से भी संवाद करना चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण में ओबीसी वर्ग को भी शामिल करने की मांग की और सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि वे सभी दलों के नेताओं को प्रधानमंत्री से मिलवाएं, ताकि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाया जा सके।
बिहार विधानसभा में बहुमत प्रस्ताव पर चर्चा के वक्त नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट चौधरी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। साथ ही तंज कसते हुए कहा कि “सम्राट चौधरी अपनी पगड़ी संभालकर रखें, क्योंकि उस पर विजय सिन्हा की नजर है।” उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी लालू प्रसाद यादव की पाठशाला से निकले हैं, जबकि विजेंद्र जी समता पार्टी से आए हैं, फिर भी ये लोग भाजपा की सरकार में हैं, जबकि इसमें भाजपा के लोग ही नजर नहीं आते। उन्होंने बिहार में मुख्यमंत्री की उम्र को लेकर भी सवाल उठाया। कहा कि सम्राट चौधरी ने अब तक अपनी सही उम्र की जानकारी जनता को नहीं दी है। बताईनेता प्रतिपक्ष ने शकुनी चौधरी के भागलपुर में दिए गए उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मोदी को भागलपुर की जमीन में गाड़ देंगे।”
सदन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बहुमत प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा ने कहा कि आप सबों का स्वागत है। आज का यह उपवेशन लोकतांत्रिक परंपराओं की गरिमा और उत्तरदायित्व का प्रतीक है, जहां हम सभी एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी द्वारा सदन का विश्वास प्राप्त करने के निर्वहन के लिए एकत्रित हुए हैं। माननीय सदस्यगण, विधान सभा केवल बहुमत का मंच नहीं, बल्कि विचार, मर्यादा और जन-आस्था का केंद्र भी है; यह दिन हमें स्मरण कराता है कि सत्ता का वास्तविक आधार जनता का विश्वास है और उसी की अभिव्यक्ति इस सदन के माध्यम से होती है। यह प्रक्रिया न केवल सरकार की वैधता को सुदृढ़ करती है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को भी सजीव बनाए रखती है। मतभेद लोकतंत्र की शक्ति हैं, किन्तु मर्यादा उसकी पहचान है, इसलिए मैं सभी माननीय सदस्यों से अपेक्षा करता हूँ कि वे शालीनता के साथ इस विचार-विमर्श में भाग लें और चर्चा सार्थक व संयमित हो, यही इस सदन की परंपरा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह संसदीय प्रक्रिया पारदर्शिता, शुचिता और संविधान के प्रति हमारी निष्ठा को और अधिक दृढ़ करेगी, और हम सभी मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर को लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुरूप सफल बनाएँगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के साथ विधानसभा पहुंच चुके हैं। यहां पर एनडीए के विधायकों ने उनका स्वागत किया। भाजपा विधायकों ने नारेबाजी भी की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जीत का चिह्न दिखाते हुए कहा कि हमलोग आसानी से बहुमत साबित कर देंगे।
अष्टादश बिहार विधान सभा के द्वितीय सत्र के आगामी उपवेशन के सफल संचालन के लिए विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में एक दिन पहले यानी 23 अप्रैल को विधान सभा के दलीय नेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस एकदिवसीय सत्र के सफल और शांतिपूर्ण संचालन हेतु यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। साथ ही, पक्ष एवम् विपक्ष के सभी नेताओं ने सदन चलाने में अध्यक्ष महोदय को सकारात्मक सहयोग देने पर अपनी सहमति दी।
16 मार्च को बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। एनडीए को चार सीटों के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ी। पांचवी सीट पर महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह के आने से मुकाबला कड़ा हो गया था। महागठबंधन के चार विधायक मतदान प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। इसलिए एनडीए को आसानी से जीत मिल गई। एनडीए से नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए।
18वीं बिहार विधानसभा (2025 चुनाव के बाद गठित) में कुल 243 सीटों में से सत्तारूढ़ एनडीए के पास 201 विधायक हैं, जिसमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम (सेक्युलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक शामिल हैं। वहीं महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जिसमें राजद के 25, कांग्रेस के 6, वामदल के तीन और एक आईआईपी का एक विधायक है। अन्य दलों में AIMIM के पांच और बसपा का एक विधायक शामिल है। बांकीपुर सीट फिलहाल खाली है। यहां के विधायक नितिन नवीन इस्तीफा देकर राज्यसभा चले गए।
राज्यसभा सांसद बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बिहार विधानसभा से इस्तीफा दिया था। इस कारण एनडीए के पास विधायकों की संख्या 202 से घटकर 201 हो गई है। बिहार विधानसभा के 243 सदस्यों में से 122 का आंकड़ा बहुमत का होता है। इस लिहाज से एनडीए के पास अभी 79 विधायक ज्यादा हैं। दूसरी तरफ, महागठबंधन के विधायकों की संख्या 35 है। इनमें से राज्यसभा चुनाव के समय गायब रहने वाले तीन कांग्रेसी और एक राजद विधायक का रुख आज क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी। ओवैसी और मायावती की पार्टी के विधायक एनडीए के खिलाफ राज्यसभा चुनाव में भी थे और आज भी रहेंगे, हालांकि इससे बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने भले ही बिहार विधानसभा में शक्ति परीक्षण का सामना नहीं किया, लेकिन राज्यसभा चुनाव के मतदान ने एनडीए सरकार की ताकत और विपक्ष के बिखराव का एहसास करा दिया था। तब 243 में से 202 विधायकों वाले एनडीए के सभी सदस्यों ने मतदान किया था, जबकि 35 विधायकों वाले महागठबंधन में से चार विधायक गायब रहे थे। महागठबंधन को तब असद्दुदीन ओवैसी के विधायकों का साथ भले मिला, लेकिन राज्यसभा की एक सीट जीतने की उसकी तमन्ना धरी की धरी रह गई थी।
14 अप्रैल को तत्कालीन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नीतीश कुमार ने अंतिम बार 12 फरवरी 2024 को सदन में बहुमत साबित किया था। नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जब सत्र बुलाया गया तो 243 में से 202 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इसकी दरकार नहीं पड़ी। दरकार अभी भी नहीं है, लेकिन चूंकि कार्यकाल के बीच में नई सरकार का गठन हुआ है और मुख्यमंत्री भी नए बने हैं तो वह खुद ही सदन में बहुमत प्रस्ताव पेश करेंगे।