पिछले कुछ हफ्तों से लगातार खबरें आ रही हैं कि कैसे ब्लू व्हेल चैलेंज के शिकंजे में फंसकर युवा आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि ब्लू व्हेल चैलेंज की वजह से उस शख्स ने आत्महत्या कि या फिर वो शख्स आत्महत्या करना चाहता था और सहारा ब्लू व्हेल का लिया।
सच तो ये है कि ऐसे युवा अपने जीवन को व्यर्थ महसूस करते हैं उन्हें लगता है कि उनके जीवन का कोई उपयोग नहीं है, जीना फिजूल है। हालांकि इस सोच की उनके पास कोई वाजिब वजह नहीं होती है। ऐसी सोच पनपने पर ये युवा अपना जीवन खत्म करने का फैसला कर लेते हैं। उनका ये कदम परिवार, दोस्तों और समाज के लिए बेहद परेशान करने वाला साबित होता है।
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ऐसा कदम उठाने वाले ज्यादातर युवा अवसाद यानि डिप्रेशन का शिकार होते हैं। और खुद को खत्म करने का ये अतिवादी कदम वो मन की एक खास अवस्था में उठाते हैं। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इस तरह के जोखिम भरे दायरे या यों कहें मनःस्थिति तक पहुंच चुके हैं ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनमें पनपे डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान जल्द से जल्द करें।
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डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति के व्यवहार में खास तरह के बदलाव और या यों कहें लक्षण दिखाई देते हैं। जरूरत हैं तो बस इतनी कि उस व्यक्ति के व्यवहार में आए इन बदलावों या कहें लक्षणों को किसी दुर्घटना से पहले पहचानने की। इनमें से कुछ लक्षण साफ दिखाई देते हैं जैसे-व्यक्ति का दिनभर अलसाये रहना, लोगों से घुलने मिलने में रुचि न रखना, एकाग्रता में कमी आना, किसी भी चीज में इंट्रेस्ट न लेना, घंटों बिस्तर पर पड़े रहना, भूख न लगना या फिर ज्यादा खाना, परिवार और दोस्तों से धीरे-धीरे खुद अलग कर लेना।
किसी व्यक्ति में अगर ये लक्षण दिख रहे हैं तो फिर उनके करीबियों को चाहिए कि वो इन्हें अनदेखा न करें। डिप्रेशन के शिकार ऐसे व्यक्ति को जल्द से जल्द उचित सलाह और इलाज की दरकार होती है। इस मामले में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
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