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अयंगर योगः डिप्रेशन के इलाज में बेहद कारगर है अयंगर योग

Thu, 21 Sep 2017 02:11 PM IST
रजवी एच. मेहता
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 पिछले कुछ हफ्तों से लगातार खबरें आ रही हैं कि कैसे ब्लू व्हेल चैलेंज के शिकंजे में फंसकर युवा आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि ब्लू व्हेल चैलेंज की वजह से उस शख्स ने आत्महत्या कि या फिर वो शख्स आत्महत्या करना चाहता था और सहारा ब्लू व्हेल का लिया।
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सच तो ये है कि ऐसे युवा अपने जीवन को व्यर्थ महसूस करते हैं उन्हें लगता है कि उनके जीवन का कोई उपयोग नहीं है, जीना फिजूल है। हालांकि इस सोच की उनके पास कोई वाजिब वजह नहीं होती है। ऐसी सोच पनपने पर ये युवा अपना जीवन खत्म करने का फैसला कर लेते हैं। उनका ये कदम परिवार, दोस्तों और समाज के लिए बेहद परेशान करने वाला साबित होता है।

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ऐसा कदम उठाने वाले ज्यादातर युवा अवसाद यानि डिप्रेशन का शिकार होते हैं। और खुद को खत्म करने का ये अतिवादी कदम वो मन की एक खास अवस्था में उठाते हैं। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इस तरह के जोखिम भरे दायरे या यों कहें मनःस्थिति तक पहुंच चुके हैं ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनमें पनपे डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान जल्द से जल्द करें।  
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डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति के व्यवहार में खास तरह के बदलाव और या यों कहें लक्षण दिखाई देते हैं। जरूरत हैं तो बस इतनी कि उस व्यक्ति के व्यवहार में आए इन बदलावों या कहें लक्षणों को किसी दुर्घटना से पहले पहचानने की। इनमें से कुछ लक्षण साफ दिखाई देते हैं जैसे-व्यक्ति का दिनभर अलसाये रहना, लोगों से घुलने मिलने में रुचि न रखना, एकाग्रता में कमी आना, किसी भी चीज में इंट्रेस्ट न लेना, घंटों बिस्तर पर पड़े रहना, भूख न लगना या फिर ज्यादा खाना, परिवार और दोस्तों से धीरे-धीरे खुद अलग कर लेना।

किसी व्यक्ति में अगर ये लक्षण दिख रहे हैं तो फिर उनके करीबियों को चाहिए कि वो इन्हें अनदेखा न करें। डिप्रेशन के शिकार ऐसे व्यक्ति को जल्द से जल्द उचित सलाह और इलाज की दरकार होती है। इस मामले में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए। 

पढें-अयंगर योग पार्ट 1ः 195 सूत्रों में पिरोया गया है योग को, ध्यान से लेकर वर्कआउट है इसमें शामिल
 

ताड़ासन
ज्यादातर लोग युवाओं में डिप्रेशन की वजहों को बेहद साधारण और महत्वहीन मानते हैं। कई बार वजह बेहद आम लगती भी हैं जैसे - गर्लफ्रेंड या ब्वाय फ्रेंड से ब्रेकअप हो जाना, कक्षा में फर्स्ट न आना या अपमानित किया जाना या फिर टीचर द्वारा फटकार पड़ना। लेकिन मामूली से दिखने वाले ये कारण कुछ युवाओं के मस्तिष्क पर गहरा असर डालते हैं। इतना गहरा कि उन्हें अपनी जिंदगी के मुकाबले ये बातें ज्यादा बड़ी लगने लगती हैं।

ऐसे युवाओं का मस्तिष्क बेहद संवेदनशील होता है। कोई भी छोटी सी घटना उन्हें डिप्रेशन में डाल सकती है। फिर इसके बाद आप उम्र के इस पड़ाव को चाहें हार्मोंस को या फिर किसी भी तरह के दबाव को या अभिभावकों और समाज की अपेक्षाओं को इसके लिए दोषी ठहराते रहें। लेकिन ये सारे आरोप असल समस्या का समाधान नहीं खोज सकते। हमें समस्या की जड़ तक जाना ही पड़ेगा।

हालांकि डिप्रेशन को मन की समस्या या कहें मानसिक बीमारी माना जाता है लेकिन इसके लक्षण शरीर में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं। अयंगर गुरुजी ने कई बार कहा है, 'आप कैसे जानेंगे कि शरीर कहां खत्म होता है और मन कहां से शुरू होता है अथवा मन कहां समाप्त होता है और शरीर की शुरुआत कहां से होती है।' 

फर्ज कीजिए आपके पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है तो क्या आपका मन ठीक प्रकार से काम कर सकता है? क्या आप ये कह सकते हैं, ‘मेरे पेट में दर्द हो रहा है लेकिन मेरा मन बिल्कुल ठीक है।‘ क्या गंभीर रूप से पेट दर्द से पीड़ित विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में मन लगा सकेगा? क्या टीचर ये कह सकता है कि आपका पेट दर्द हो रहा है - दिमाग नहीं, तुम्हारी पढ़ाई पर इसका असर क्यों होना चाहिए ? इससे साफ है कि शरीर की बीमारी मन पर असर डालती है और मन की समस्या शरीर पर दिखाई देती है।

 

त्रिकोणासन
डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति की भाव-भंगिमा या हाव-भाव कुछ अलग तरह के होते हैं। ऐसे व्यक्ति का सीना थोड़ा धंसा हुआ सा लगेगा, झुके हुए कंधे, ऊर्जाहीन या फिर कहें नीरस आंखें जिनसे अरुचि ही झलकेगी। काउंसलर्स और क्लिनकल साइकोलोजिस्ट डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति का मानसकि इलाज करते हैं जबकि योगासन शरीर को जरिया बनाकर मन को स्वस्थ करने का काम करते हैं।

ज्यों-ज्यों आसन बदलते हैं मन की दशा भी बदलती है। जैसे जो सीना अभी तक सिकुड़ा या कहें डूबा-डूबा महसूस होता था वो खुला सा लगता है, मन तरोताजा महसूस होता है। अलग-अलग आसन, भिन्न-भिन्न इमोशन्स पर काम करते हैं। जो व्यक्ति योगासनों का नियमित अभ्यास करता है उसके मन की अवस्था का रुपांतरण हो जाता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि आसन शरीर के लिए और ध्यान मन के लिए होता है। अयंगर गुरुजी हमेशा कहते थे शरीर और मन को कभी अलग नहीं किया जा सकता है। जो शरीर पर कारगर होता है वो मन पर भी असर डालता है। ये प्रमाणित है कि योगासनों का असर शरीर, मन और इमोशन्स तीनों पर पड़ता है।  

अयंगर गुरु जी जो सालों से कह रहे थे उसे अगस्त में वाशिंगटन डीसी में अमेरिकन साइकोलोजिस्ट एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत की गई रिसर्च ने भी प्रमाणित कर दिया। इस रिसर्च में साफ तौर से कहा गया कि योग डिप्रेशन के मामले को खत्म करने में बेहद मददगार साबित होता है। इस साल की शुरुआत में हावर्ड और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रकाशित हुई रिसर्च में भी साफ कहा गया है कि गंभीर रूप से डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति के लिए ‘अयंगर योगा’ बेहद मददगार साबित होता है।

रिसर्च में दावा किया गया कि 12 हफ्तों तक ‘अयंगर योगा’ की प्रैक्टिस करने वाले व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण सार्थक कमी पाई गई। इस रिसर्च ने डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों को एक उम्मीद बंधाई है। योगासनों की नियमित प्रैक्टिस करना डिप्रेशन के लिए एक रामबाण औषधि है।

मौजूदा समय में डिप्रेशन के शिकार कई लोग इलाज करवा रहे हैं लेकिन चिंता वाली बात ये है कि इस तरह की दवाओं के साइड इफेक्ट बहुत ज्यादा होते हैं। योगासन इन दवाओं की मात्रा को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि पाठक को सलाह दी जाती है कि वो एकदम से दवाईयों को लेना न छोड़े बल्कि विशेषज्ञ की सलाह पर ही ऐसा करे।

 
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ताड़ासन
योगा करते वक्त कुछ सावधानियां जरूरी तौर पर बरतनी चाहिए। आजकल हर गली और चौराहे पर योग के टीचर आपको बड़ी आसानी से मिल जाएंगे। एक तरह से ये अच्छा भी है कि योग के टीचर आसानी से उपलब्ध हैं। लेकिन योग के नाम पर कई चीजें हो रही हैं। ये बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि अगर योग ठीक ढंग से नहीं सिखाया गया तो ये असरदायक नहीं होगा उलटा ये नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसलिए अनुभवी योग टीचर के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।

तरह की दवाओं के साइड इफेक्ट बहुत ज्यादा होते हैं। योगासन इन दवाओं की मात्रा को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि पाठक को सलाह दी जाती है कि वो एकदम से दवाओं को लेना न छोड़े बल्कि विशेषज्ञ की सलाह पर ही ऐसा करे।

योग करते वक्त कुछ सावधानियां जरूरी तौर पर बरतनी चाहिए। आजकल हर गली और चौराहे पर योग के टीचर आपको बड़ी आसानी से मिल जाएंगे। एक तरह से ये अच्छा भी है कि योग के टीचर आसानी से उपलब्ध हैं। लेकिन योग के नाम पर कई चीजें हो रही हैं। ये बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि अगर योग ठीक ढंग से नहीं सिखाया गया तो ये असरदायक नहीं होगा उलटा ये नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसलिए अनुभवी योग टीचर के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।

                                                                                                                                                                      लेखक मुंबई में अयंगर योग के टीचर हैं 
 
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