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अंग तंत्र: क्या होता है DNA, इस खबर को पढ़ें और जानें DNA का A to Z

Tue, 09 Jan 2018 05:57 PM IST
ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला
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DNA
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जिस डीएनए से मां-पिता का जन्म हुआ, उसी डीएनए से संतति का जन्म होता है। संतति अपने डीएनए की पुनरावृत्ति है। डॉ. गोपाल काबरा  के मुताबिक, क्रोमोजोमल DNA शाश्वत है, अजर-अमर है। आत्मा के समकक्ष अगर कुछ है, तो DNA। आत्मा की शाश्वतता का अगर कोई भौतिक आधार है, तो वह है गुणसूत्रों का DNA।
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DNA शरीर में सर्वत्र है, सर्वव्यापी है, हर कोशिका में है। पूर्वजन्म, पुरखों का लेखा-जोखा सब DNA में है। हजारों-लाखों साल पुराने आदि मानव के नरकंकालों और जीवाश्मियों का DNA वही है, जो आज के मानव का है।

 

हर जीव फिर से जन्मता है- प्रजनन उसी का नाम है। प्रजनन प्रक्रिया अलग-अलग जीवों में अलग हो सकती है, पर प्रयोजन हर जीव में एक ही है और वह है प्रजनन द्वारा स्वयं की पुनरावृत्ति कर अपनी प्रजाति को बनाए रखना। प्राणियों में प्रजनन प्रक्रिया में शुक्राणु और स्त्री बीज के मिलने पर दोनों के शरीर की पुनरावृत्ति होती है, ठीक वैसे ही जैसे उनके माता-पिता के बीजों से उनकी हुई थी।

 माता-पिता के शरीर में स्थित हर एक कोशिका (अरबों-खरबों कोशिकाएं) हर कोशिका की स्मृति, उसकी पूरी जीवनचर्या के लेखा-जोखा की स्मृति, हर कोशिका को जो अपने माता-पिता से मिली, जींस पर घनीभूत होकर, प्राणी बीजों के गुणसूत्रों के माध्यम से पुनरावृत्ति कर संतान के रूप पुर्नजन्म लेती है। प्रजनन स्वयं का पुर्नजन्म ही है। जन्म प्राणी बीजों से ही होता है और बीज प्राणी विशेष के ही होते हैं।

     
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मानव जन्म लाखों योनियां पार करने पर ही होता है। अगर आप पुरुष और स्त्री बीज के मिलन से बनी एक कोशिका से पूरे मानव शरीर के निर्माण की प्रक्रिया को देखें, तो इसकी सत्यता समझ में आएगी। गर्भ में भ्रूण के विकास की प्रक्रिया में हर जीव की पुनरावृत्ति होती है और इन योनियों को पार करके मानव शरीर को पहुंचता है।

जहां तक पूर्व जन्म की समृतियों का सवाल है, वहां सभी आदिम प्रवृत्तियों में निहित स्मृतियां यथा प्रजनन और स्वसुरक्षा संबंधी स्मृतियां, जींस के माध्यम से यथावत प्राप्त होती हैं और स्वतः ही अभिव्यक्त होती हैं। आदम प्रवृत्तियों और प्रकृति की स्मृति गुणसूत्रीय होती है, शेष सभी को सीखकर अर्जित करना होता है। वे जन्मजात नहीं होती, अर्जित करने की क्षमता जन्मजात और गुणसूत्रीय हो सकती है। 
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