मानव विकास की कहानी से तो आप बखूबी रूबरू होंगे। आदिमानव से इंसान की शक्ल इख्तियार करने तक की कहानी शायद ही किसी व्यक्ति को न पता हो। इस कार्टून में आप जो देख रहे हैं वो मानव विकास की कहानी के एक पहलू को बेहद खूबसूरती से बयां कर रहा है। कार्टून बताता है कि कैसे जिंदगी में आगे निकलने की चाहत ने लोगों को कई घंटे एक ही जगह पर बैठकर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है।
कार्टून मजाक में गंभीर संदेश दे जाते हैं। दरअसल इस के जरिए समझाने की कोशिश की गई है कि कैसे आदिमानव ने मनुष्य बनने तक का सफर वापस मनुष्य से आदिमानव बनने की दिशा में लौट रहा है। । एक बार फिर वह वानर जैसे दिखने वाले आदिमानव की तरह ही झुककर चलने और बैठने लगा है।
आज भले ही लोग पहले के लोगों से इस बात पर बहस करते हो कि वो उनकी पीढ़ी से ज्यादा समझदार हो गए हैं क्योंकि अब उन्हें पहले की तरह बाजार से सब्जी लाने के लिए मार्केट नहीं जाना पड़ता या फिर टीवी और एसी बंद करने के लिए एक जगह से उठना नहीं पड़ता। ये सब काम एक बटन दबाते ही हो जाते हैं। इस बात में कोई संशय नहीं है कि इन सब चीजों का अविष्कार मानव बुद्धि के विकास के साथ ही संभव हो पाया है।
वजूद इसके इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि शरीर और बुद्धि एक दूसरे के पूरक हैं। अगर हम शरीर का इस्तेमाल नहीं करते तो बुद्धि सुस्त हो जाती है और अगर बुद्धि का उपयोग नहीं करते हैं तो शरीर सुस्त हो जाता है। आपने अक्सर अपने बड़े बुर्जगों को सीधा खड़े होने और बैठने की सलाह देते हुए सुना होगा। आज यही सलाह हम खुद से छोटे लोगों को भी देते हैं।
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया द्वारा 10 साल पहले एक रिसर्च की गई । इस रिसर्च में बताया गया कि दुनिया में 25 फीसदी लोग गर्दन के दर्द से पीड़ित हैं। ये आंकड़ा शहरी आबादी में और भी ज्यादा है।
इनमें से करीब 30 से 50 फीसदी लोगों को दर्द की दवा लेने के बाद गर्दन के दर्द से कुछ देर के लिए तो राहत मिल जाती है लेकिन दोबारा एक जगह कई घंटों तक झुककर कंप्यूटर पर काम करने की वजह से ये दर्द फिर से होने लगता है। आजकल लोगों की जरूरतें इतनी बढ़ गई है कि एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में खुद को तनावग्रस्त कर लेते हैं। ऐसे में वे अपने शरीर को मशीन समझने लगते हैं।
लैपटॉप पर लगातार काम करना भी उनकी आदत में शामिल हो जाता है और इसका सीधा असर मांसपेशियों पर पड़ता है। उनकी इसी आदत की वजह से गर्दन की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। लैपटॉप पर काम करते हुए लोगों की गर्दन सामने की ओर झुकने लगती है और गर्दन की हड्डी असामान्य आकार लेने लगती है। इसकी वजह से हमेशा गर्दन में दर्द बना रहता है। ऐसा नहीं है कि ये समस्या किसी एक के साथ है। यह आज आम आदमी की समस्या हो गई है।
तो चलिए आज हम आपको एक ऐसा योगासन बताएंगे जिसे अपनाकर आप गर्दन दर्द की समस्या से जल्द ही छुटकारा पा सकते हैं। इस आसन का नाम Paschima Baddanguliyasana ( पश्चिम बदनगुलिआसन) है।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पैर को एक दूसरे से थोड़ा अलग रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। उसके बाद तलवे को एक साथ जोड़ें, लेकिन अगर बैंलेंस न बन रहा हो तो थोड़ी दूरी पर भी रख सकते हैं। कोहनियों को मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं और हाथों की उंगलियो को इंटरलॉक करें। यानी एक साथ जोड़ लें।
सांस भरते हुए उंगलियों को रीढ़ की हड्डी की ओर मोड़ते हुए ऊपर करें। सांस लेते हुए सिर ऊपर करें और सीधा देखें। कुछ मिनट तक इसी अवस्था में बने रहें। सांस छोड़ते हुए उंगलियों को नीचे की ओर ले आएं। उंगलियों का इंटरलॉक बदलते हुए इस आसन को दोहराएं। कुछ सेकेण्ड तक इसी अवस्था में बने रहें।
नोट
ध्यान रहे कि उंगलियों का इंटरलॉक ढीला न हो। इसके अलावा आप जब भी यह आसन करें तो देखें कि कंधे से नीचे की मांसपेशियां किस तरह बढ़ रही हैं। जब आप कोहनी से अपनी बाहों को सीधा करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके पैर स्थिर बने रहें। अन्यथा, आपके शरीर के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है।
तो इस तरह तरक्की की दौड़ में कंप्यूटर का गुलाम बनने की दौड़ में थोड़ा वक्त अपने लिए अपनी रीढ़ के लिए अवश्य निकालें। यह आसन आपके गर्दन के दर्द का स्थायी समाधान भी बन सकता है।