ध्यान के दौरान विचारों से बचने और मन, बुद्धि, चित्त तथा अहंकार को नियंत्रित करने में अंतःकरण मुद्रा उपयोगी है। दोनों हाथों के अंगूठों को छोड़कर, शेष चारों उंगलियों से नमस्कार की मुद्रा इस प्रकार बनाएं कि दोनों हथेलियों के बीच थोड़ा खाली स्थान बना रहे।
दोनों अंगूठों को आपस में जोड़ते हुए, उस खाली स्थान से ले जाकर छोटी उंगलियों के अग्रभाग से मिला दें। हथेलियां नीचे से मिली रहें। अब इस मुद्रा को माथे के सामने ले आएं और इस खाली स्थान में से रोशनी को यथासंभव अपलक देखें। उसके बाद हाथों को इसी मुद्रा में ठोढ़ी के पास ले आएं और गहरी, लंबी श्वास लें और छोड़ें।