विश्व बाल दिवस और यूनिसेफ
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भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सिंथिया मेककेफरी का कहना है बाल दिवस हर बच्चे, विशेषकर लड़कियों को लैंगिक रूढ़ियों, असमानताओं और अन्य बाधाओं से मुक्त करने और उनकी पूरी क्षमता तक उभारने के लिए सामूहिक वादों के नवीनीकरण का मौका है। जब बच्चों की अधिकारों की बात आती है, तो केवल एक ही टीम हो सकती है और यूनिसेफ इंडिया को भारत में इस क्रॉस सेक्टोरल आंदोलन का समर्थन करने का सौभाग्य मिला है। भारत एक एक ऐसा देश है, जिसने अपने सबसे कम उम्र के हितधारकों के लिए परिणामों में सुधार के लिए बेहतर प्रगति की है और बच्चों के पीढ़ीगत विकास के लिए कई उपाय किए हैं। सिंधिया मैककैफ्री ने युवा मामले और खेल मंत्रालय की सचिव और शिक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त किया, जो खेल के माध्यम से भेदभाव से लड़ने के इस संदेश को सब तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
सचिन तेंदुलकर ने लड़कियों की भूमिका पर की बात
वहीं सचिन तेंदुलकर ने कहा कि मैं हमेशा मानता हूं कि खेल हमें कई बंधनों से मुक्त कर सकता है और एक बेहतर इंसान बनने में मदद करता है। इस क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि खेल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और पहचान बनाने में अधिक शक्तिशाली माध्यम है। खेल और बाल अधिकारों को जोड़ने में यूनिसेफ के प्रयास की मैं सराहना करता हूं।