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Lala Lajpat Rai Death Anniversary: लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि आज, पढ़ें महान स्वतंत्रता सेनानी के अनमोल वचन

Thu, 17 Nov 2022 02:34 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय साइमन कमीशन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। लेकिन इस दौरान हुए लाठीचार्ज में वह घायल हो गए और कुछ दिनों बाद 17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय जिंदगी की जंग हार गए।
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लाला लाजपत राय के अनमोल वचन - फोटो : Self
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विस्तार
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Lala Lajpat Rai Death Anniversary 2022 : भारत को अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। देश की आजादी के लिए हर भारतीय के दिल में एक लौ जलाई। किसी ने अपने कलम से, तो किसी ने भाषणों से भारतीयों को आजादी का मतलब बताया। आंदोलन किए, जेल गए और शहीद तक हो गए और दुनिया के सामने भारत को एक महान देश के तौर पर खड़ा करने में अग्रणी भूमिका निभाई। इन्हीं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में लाला लाजपत राय का नाम प्रमुख है। आज लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि है। उनका जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय साइमन कमीशन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। लेकिन इस दौरान हुए लाठीचार्ज में वह घायल हो गए और कुछ दिनों बाद 17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय जिंदगी की जंग हार गए। उनकी मौत का रोष और शोक देशभर में फैला। देश का पहला स्वदेशी बैंक और आर्य समाज की स्थापना लाला लाजपत राय ने ही की थी। आइए जानते हैं लाला लाजपत राय के अनमोल विचार, जो हर भारतीय के लिए हैं प्रेरणा।

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लाला लाजपत राय के अनमोल वचन
 

  • अतीत को देखते रहना व्यर्थ है, जब तक उस अतीत पर गर्व करने योग्य भविष्य के निर्माण के लिए कार्य न किया जाए।
  • सार्वजनिक जीवन में अनुशासन को बनाए रखना और उसका पालन करना बहुत आवश्यक है, अन्यथा प्रगति के मार्ग में बाधा खड़ी हो जाएगी।
  • दूसरों पर विश्वास न रखकर स्वयं पर विश्वास करो। आप अपने ही प्रयत्नों से सफल हो सकते हैं, क्योंकि राष्ट्र का निर्माण अपने ही बलबूते पर होता है।
  • असफलता और पराजय कभी- कभी विजय की ओर आवश्यक कदम होते हैं।
  • व्यक्ति को सोचने का पूरा अधिकार है, पर उस सोच को भाषा या कार्यरूप में व्यक्त करते समय वह अधिकार, शर्तों और सीमाओं में बंध जाता है।
  • नैतिक पहलू से अधिकारों की अपेक्षा कर्तव्यों पर जोर देना उत्तम है। जो कर्तव्यों से अधिक अधिकारों पर जोर देते हैं, वे स्वार्थी, दम्भी और आत्मकेन्द्रित हो जाता है।
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