अनचाही प्रेगनेंसी
2012 के सबसे ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में हर साल करीब 8.5 करोड़ महिलाएं अपनी मर्जी के खिलाफ गर्भधारण करती हैं। अमेरिका जैसे देशों में तो ये अनुपात और भी ज्यादा है। गैर इरादतन प्रेग्नेंसी से बचने के लिए दुनिया में करीब 50 करोड़ महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियां खाती हैं और कई परेशानियां मोल ले लेती हैं। इसमें तनाव, माइग्रेन, चिंता, खून के थक्के जमना जैसी परेशानियां आम बात है। बहुत-सी महिलाएं अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए नसबंदी का सहारा लेती हैं, लेकिन ये सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसमें महिला की मौत तक हो सकती है।
कुछ जानकारों का कहना है कि नियंत्रण अपने हाथ में आ जाने के बाद महिलाओं के सेक्स पार्टनर बढ़ जाएंगे और असुरक्षित सेक्स करने से उन्हें तरह-तरह की यौन संक्रमण हो सकते हैं, लेकिन रिसर्च बताती हैं कि ऐसा नहीं है। गर्भनिरोधक तक महिलाओं की पहुंच बन जाने से न सिर्फ अनचाहे गर्भधारण में कमी आई है बल्कि गर्भपात की दर में भी कमी आई है। एक अमेरिकी स्टडी से पता चलता है कि गर्भनिरोधक का सबसे ज्यादा फायदा किशोरियों को हुआ है। उनके गर्भपात में भी भारी गिरावट आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल 2.5 करोड़ महिलाओं का असुरक्षित गर्भपात होता है।
अक्सर गर्भपात करने वाले अनाड़ी होते हैं। साफ सफाई का ख्याल नहीं रखा जाता जिसकी वजह से कई तरह के संक्रमण हो जाते हैं और बहुतों की मौत हो जाती है। अमेरिका में ऐसी महिलाओं के इलाज के लिए 5.5 करोड़ डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। जानकारों का कहना है कि पश्चिमी देशों में गर्भपात कराना बहुत सुरक्षित है। लिहाजा यहां किसी की सेहत को कोई खतरा नहीं होता जबकि लैटिन अमेरिका या सहारा क्षेत्र के अफ्रीकी देशों में गर्भपात का मतलब जान को जोखिम में डालना है।
अगर गर्भधारण पर महिलाओं का नियंत्रण होगा तो उनकी प्रेगनेंसी भी योजनाबद्ध होगी और अगले नौ महीने तक डॉक्टरों की देखरेख में वो अपना ध्यान भी रखेंगी। अगर वो किसी मेडिकल परेशानी या किसी और वजह से गर्भपात कराना चाहें, तो वो सुरक्षित होगा। साथ ही प्लान्ड प्रेगनेंसी से जन्म दर भी कम होगी। इसका मतलब ये नहीं कि रातों रात आबादी पर नियंत्रण हो जाएगा। बहुत सी महिलाएं अभी भी कई बच्चों की ख्वाहिश रखती हैं। कुछ पर ज्यादा बच्चे पैदा करने का सामाजिक दबाव भी होता है। कई बार लड़के की चाहत में भी ज्यादा बच्चे पैदा कर लिए जाते हैं।