तीनों ही तीज का महत्व अलग है और मनाने का तरीका भी थोड़ा अलग होता है। आइए तीनों तीजों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
हरियाली तीज (Hariyali Teej 2025)
इस साल हरियाली तीज 3 अगस्त 2025, रविवार को मनाई जाएगी। हरियाली तीज सावन के महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह तीज हरे-भरे मौसम, खुशहाली और नवविवाहित महिलाओं के पहले तीज के रूप में खास मानी जाती है।
हरियाली तीज पर महिलाएं हरे रंग का परिधान, चूड़ियां और मेहंदी लगाकर तैयार होती हैं। तीज में घर या बागों में झूले डाले जाते है, जहां लड़कियां झूला झूलते हुए लोकगीत गाती हैं। इस पर्व पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है। साथ ही सुहाग की लंबी उम्र के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं।
Hariyali Teej 2025: तीज पर सिर्फ हरा रंग क्यों? लाल साड़ी में पाएं रॉयल लुक और खींचे सबका ध्यान
कजरी तीज (Kajari Teej 2025)
इस वर्ष कजरी तीज 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। हर वर्ष कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह तीज मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार में लोकप्रिय है। इसे कजली तीज भी कहते हैं, जिसमें महिलाएं कजरी गीत गाती हैं। पूजा के दौरान नीमड़ी माता, चंद्रमा और पेड़-पौधों की पूजा होती है।इस दिन भी सुहागनें व्रत रखती हैं।
हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2025)
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस वर्ष हरितालिका तीज 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। यह तीज विशेष रूप से शिव-पार्वती विवाह की कथा से जुड़ी है। इस दिन कुंवारी लड़कियां और सुहागिनें उपवास रखती हैं।
यह तीज निर्जला व्रत के लिए प्रसिद्ध है और हिंदू धर्म में सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस दिन माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने की कथा सुनाई जाती है और पूजा के लिए मिट्टी के शिव-पार्वती की मूर्तियां बनाई जाती हैं।
तीनों तीज मे अंतर
हरियाली तीज, हरतालिका तीज और कजरी तीज को मनाने के समय, महत्व और परंपरा में अंतर है।
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हरियाली तीज सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसमें झूला डाला जाता है और मेहंदी लगाने की परंपरा है। यह पति की लंबी आयु और हरियाली के प्रतीक के तौर पर मनाया जाने वाला पर्व है।
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हरतालिका तीज भादो मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाते हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं और मिट्टी की शिव-पार्वती परिवार की मूर्ति बनाकर पूजा करती है। यह हिंदू धर्म में सबसे कठिन व्रत में से है।
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कजरी तीज भादो के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसमें नीम की पूजा होती है। महिलाएं कजरी गीत गाती हैं।