उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से आरोग्य, संतान प्राप्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस व्रत को पूरे विधि विधान से रखने पर मानसिक समस्याएं दूर होती हैं। इस बार यह व्रत 03 दिसंबर 2018 को पड़ रहा है। भगवान विष्णु के इस व्रत को रखने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस व्रत को रखने वाले लोगों को इस दिन क्या करने से बचना चाहिए।
उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि
नारदपुराण के अनुसार व्रती को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घट स्थापना करके भगवान विष्णु की मूर्ति पर गंगाजल के छींटे देकर धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए।
उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम
इस व्रत को दो तरह से रखा जाता है।पहला निर्जल व्रत और दूसरा फलाहारी व्रत। यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसे यह व्रत नहीं करना चाहिए। इस व्रत में भगवन कृष्ण को केवल फलों का ही भोग लगाएं।
भूल कर भी ना करें ये काम
इस व्रत को विष्णु भगवान को अर्घ्य दिए बिना कभी ना करें।भगवान को अर्घ्य देने से पहले उसमें हल्दी मिलाएं। जल में कभी भी रोली या दूध का प्रयोग ना करें।