तमाम अनिश्चित्ताओ और महीनों के लम्बे अंतराल के बाद देश के प्रमुख बाघ अभयारण्य एक अक्तूबर को पर्यटन के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। और, जैसे ही इन अभयारण्यों के खुलने की खबर प्रकृति प्रेमियों को मिली, वे देशाटन के लिए निकल पड़े हैं। देश के मशहूर वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर ब्रजेश सिंह ने तो पूरा कोरोना काल ही कान्हा नेशनल पार्क के पास गुजारा है, और पहले दिन जब वह कान्हा नेशनल पार्क के भीतर घुसे तो उन्हें बाघ के दर्शन भी हो गए। कान्हा नेशनल पार्क के इस फर्स्ट डे फर्स्ट शो की तस्वीर उन्होंने अमर उजाला के पाठकों के लिए साझा की है।
मानसून समाप्ति के बाद, अधिकतर टाइगर रिजर्व अक्तूबर के पहले दिन से खोल दिए जाते हैं और वन विभाग इस बात को निश्चित करता है कि वर्षा के कारण खराब हुए रास्तों का पुनर्निर्माण, जानवरों की और पर्यटकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए लेकिन कोरोना के कारण इस बार समस्या कहीं और अधिक बड़ी थी। कांटैक्ट लेस एंट्री, वाहनों का सेनिटाइजेशन, पार्क में व्यवहार और इस सब की विशेष निगरानी, इस पूरी व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम प्रशंसनीय लगे।
ऐसी स्थिति में जब विदेश यात्राएं उतनी आसान नहीं हैं, विदेशी पर्यटकों के आने की उम्मीदें काफी धूमिल हैं और यही बात विदेश यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए भी है। ऐसा अनुमान है भारतीय पर्यटक जो पिछले कई महीनों से अपने घरों -शहरों से बाहर नहीं निकले, वो संभवतः अब पर्यटन स्थलों का रूख करें।
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर ब्रजेश सिंह कहते हैं, ‘मेरे व्यक्तिगत अनुभव में तो अन्यत्र कहीं जाने से तो बाघ अभयारण्य आना अधिक सुरक्षित भी है और बेहतर भी क्योंकि इस से ना सिर्फ शहरों की भाग-दौड़, भीड़-भाड़ से हट कर, प्रदूषण-मुक्त हवा में कुछ दिन गुजार लेने का सुख मिलता हैं बल्कि पार्क से लगे हुए क्षेत्रों, वहाँ के निवासियों और किसानों, जिप्सी ड्राइवर, गाइड आदि के रोज़ी-रोटी के सहायता भी हो जाती है।’
वह कहते हैं, ‘एक वन्यप्रेमी, फोटोग्राफर के लिए इस से बड़ी खुशी और क्या होगी जिसे पहले दिन की पहली सफारी के पहले घंटे में ही एक शानदार, रौबीले टाइगर का आमना-सामना हो जाए और दिलकश फ़ोटोग्राफ़ लेना का मौक़ा मिले। कान्हा टाइगर रिसर्व की मुक्की जोन में एक अक्टूबर की सुबह की सफारी में मेरी मुलाक़ात टाइगर T-50 से हुई।