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ये है भारत का दूसरा खजुराहो, जहां सबसे भव्य वास्तुकला के नमूने मिलेंगे

Sat, 07 Sep 2019 06:02 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
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बहुत सदियों तक भारत ने कई शासनों का उदय और पतन देखा है, ये एक कारण है जो भारत के इतिहास को और रोचक बनता है। अगर आपको भी ऐसे रोचक इतिहास के गवाहों को देखने की उत्सुकता है तो आज हम एक ऐसी जगह के विषय में बताने जा रहे हैं, जहां भारत के सबसे भव्य और जटिल वास्तुकला के नमूने हैं। 
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भोरमदेव मंदिर
भोरमदेव मंदिर परिसर छत्तीसगढ़ राज्य में भगवान शिव को समर्पित चार हिंदू मंदिरों का एक समूह है। पुरातत्व विभाग की खोज के अनुसार ये जगह दूसरी शताब्दी जितनी पुरानी है, जब यहां के शासकों ने यहां की नींव डाली थी। बाद में 10 से 14 शताब्दी में दक्षिण कौशल साम्राज्य के नागवंशी राजाओं ने इस मंदिर का विस्तार करवाया जो नाग की पूजा करते थे और तंत्र विद्या का अभ्यास करते थे। ये मंदिर सन 1100 में खजुराहो के मंदिरों से काफी पहले बन चुका था, इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहते हैं।
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मड़वा महल
सन 1349 में नागवंशी राजा रामचंद्र देव और राजकुमारी अंबिका देवी की शादी की याद में एक विवाह परिसर के रूप में मड़वा महल यानी दुल्हादेव बनवाया गया था। इस परिसर की बाहरी दीवारों पर कामासूत्र में दर्शाई गयी 54 मुद्राएं बनी हुई हैं, जो उस समय नागवंशी राजाओं में प्रचलित तांत्रिक संस्कृति को दर्शाता है।

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चेरकी महल 
परिसर के आखिरी मंदिर में एक अधगढ़ा शिवलिंग स्थित है। मंदिर की छत पर कमल के आकार में शिल्पकारी की हुई है और प्रवेश द्वार पर भी बारीक खुदाई की गई है। 
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ऐसे पहुंचें 
भोरमदेव मंदिर परिसर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कवर्धा शहर से 18 कि.मी. दूर, जंगलों से ढके मैकल पर्वतों की तलहटी में स्थित है। यहां से सबसे करीब हवाई अड्डा 134 कि.मी. दूर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित है। रायपुर से कवर्धा के लिए टैक्सी में 2.5 लगते हैं। छत्तीसगढ़ में रायपुर और मध्यप्रदेश में जबलपुर सबसे करीबी रेलवे स्टेशन है। 
 
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