फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Navratri 2020: प्रसिद्ध हैं देश में स्थित मां के ये मंदिर, आप भी जाएं एक बार दर्शन करने

Sat, 24 Oct 2020 06:02 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
नवरात्रि 2020 - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
देशभर में नवरात्रि की धूम मची हुई है। 17 अक्तूबर, शनिवार से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। 24 अक्तूबर तक शारदीय नवरात्रि की धूम रहेगी। इस बार कोरोना वायरस का असर नवरात्रि के दौरान भी देखने को मिल रहा है, जिस वजह से नवरात्रि के दौरान भी मंदिरों में भक्तों की भीड़ अधिक नहीं है। आज हम आपको देश में स्थित मां के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं। इन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। अगली स्लाइड्स में जानिए देश में स्थित मां के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में...
विज्ञापन

2 of 5
नई दिल्ली में स्थित कालकाजी मंदिर मां के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है - फोटो : ANI
कालकाजी मंदिर, नई दिल्ली
  • नई दिल्ली में स्थित कालकाजी मंदिर मां के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मां के इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। कालकाजी मंदिर मां काली को समर्पित है। कालकाजी मंदिर को मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है।
विज्ञापन

3 of 5
अंबाजी मंदिर गुजरात- राजस्थान की सीमा पर स्थित है - फोटो : social media
अंबाजी मंदिर, गुजरात
  • अंबाजी मंदिर गुजरात- राजस्थान की सीमा पर स्थित है। मां का ये पावन मंदिर बारह सौ साल पुराना है। इस मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से हुआ है। अंबाजी मंदिर का शिखर 103 फिट ऊंचा है। मंदिर के शिखर पर 358 स्वर्ण कलस भी सुसज्जित है। मां अंबाजी मंदिर मां के पावन शक्तिपीठ धामों में से एक है।

4 of 5
Navratri 2020 - फोटो : social media
छतरपुर मंदिर, नई दिल्ली
  • छतरपुर मंदिर मां के पावन शक्तिपीठ धामों में से एक है। छतरपुर मंदिर में मां कात्यायनी के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। मां के इस पावन मंदिर का क्षेत्रफल 70 एकड़ में फैला हुआ है। छतरपुर मंदिर मां दुर्गा अपने छठे रूप माता कात्यायानी के स्वरूप में दिखाई देती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Navratri 2020 - फोटो : social media
दुर्गा मंदिर, वाराणसी
  • मान्यताओं के अनुसार मां के इस पावन मंदिर का निर्माण एक बंगाली महारानी ने 18वीं सदी में करवाया था। इस मंदिर में एक तालाब बना हुआ है जिसे दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार इस मंदिर में मां दुर्गी की जो प्रतिमा है वो स्वंय प्रकट हुई हैं। मां की प्रतिमा को किसी ने स्थापित नहीं किया है।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें