मेरे दापोली जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण वहां मिलने वाली शांति है। इसके अलावा यह बहुत साफ-सुथरा इलाका है, इसलिए वहां रहना अच्छा लगता है। अभी गर्मियां चल रही हैं ऐसे में दापोली जाना एक बहुत अच्छा निर्णय है। यह शहर ‘मिनी महाबलेश्वर’ के नाम से भी मशहूर है, क्योंकि यह पूरे साल भर ठंडा रहता है। दापोली मेरा नेटिव प्लेस भी है, लेकिन अफसोस वहां हमारा कोई घर नहीं है। हम खुद वहां एक सैलानी की तरह जाते हैं। लेकिन मेरा सपना है कि मैं भविष्य में दापोली में हमारे भाखरवाड़ी शो के सेट की तरह एक बड़ा-सा वाड़ा बनवाऊं। दापोली बहुत ही हराभरा एरिया है।
यहां के शांत माहौल ने मुझे बहुत आकर्षित किया
- फोटो : tripoto
सबसे पहले मैं अपने माता-पिता के साथ वहां आया था। वहां के शांत माहौल ने मुझे बहुत आकर्षित किया। मैं तब भी जाता हूं, जब खुद को मायूस व तनाव में पाता हूं। जब वहां बीच पर पहुंचता हूं, समुद्र की लहरों की आवाज सुनता हूं तो धीरे-धीरे तनाव का स्तर कम होने लगता है। वहां आम और नारियल के कई पेड़ हैं। इसके अलावा सुपारी, कटहल और कई अन्य तरह के फलों का आनंद ले सकते हैं। वहां कई सारे लोग बोनसाई खेती भी करते हैं। अपने चारों तरफ छोटे-छोटे हरे पौधे बहुत अच्छे लगते हैं।
अगर आप भी दापोली जाना चाहते हैं, तो वहां रहने की कोई दिक्कत नहीं है। वहां कई होटल हैं, जहां आप ठहर सकते हैं। आने-जाने की भी अच्छी सुविधा है। जब भी हम दापोली में होते हैं, तो बहुत मस्ती करते हैं। मैं शाकाहारी हूं, लेकिन मेरे दोस्त वहां की प्रसिद्ध मछली-भात व रोटी खाते हैं। वे बताते हैं कि मांसाहारी लोगों के लिए मछली-भात एक अच्छा विकल्प है। वहां खाने-पीने की कई छोटी-बड़ी दुकाने हैं। जहां आपको घर जैसा अच्छा, साफ, सादा और स्वादिष्ट खाना खाने को मिलेगा।
वहां के घरों की एक खासयित है। शहरों में जैसे सीमेंट और ईंट के घर होते हैं, वैसे वहां नहीं हैं। वहां का लोकप्रिय पत्थर है चीरा, वहां के अधिकतर घर इसी चीरा पत्थरों से बने हैं। जिसमें छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिससे हवा बहुत अच्छी तरह अंदर आती है। ऐसे घरों में आपको पंखा या एसी की जरूरत नहीं पड़ती। इन मकानों को गोबर से लीपा जाता है। मुझे इसी तरह की प्राकृतिक पुराने स्टाइल की चीजों और जीवनशैली का आकर्षण ज्यादा रहता है, इसलिए मैं बार-बार दापोली आता हूं।
-रेणु खंतवाल से बातचीत पर आधारित
देश - भारत, शहर- दापोली, राज्य- महाराष्ट्र, आधिकारिक भाषा- मराठी, मुद्रा- रुपया