अगले दिन के फ्लाइट के टिकट्स मुझे मिल गए। जब मैं वहां पहुंचा तो उस जगह की चमक से एक सकारात्मक ऊर्जा मुझे मिली। मुझे हर चीज वहां बहुत अच्छी लगी। मैं अपने दोस्ते के साथ उसके घर गया। जहां हमने खूब मस्ती की। जब टैक्सी से हम उसके घर जा रहे थे, तो वहां की साफ सड़कों को देखकर मैं हैरान था। साफ सुथरी सड़कों पर आप बैठ भी जाएं, तो कपड़े गंदे नहीं होंगे। वहां का वातावरण भी बहुत खुशमिजाज था। कुछ समय बाद हम वहां के सेंट्रल मार्केट गए, जहां एक से एक कपड़े मिलते हैं। न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध सोहो बाजार से इसकी तुलना की जाती है। शॉपिंग करने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है।
कुआलालंपुर की नाइटलाइफ भी बेहद अच्छी है। हमने वहां क्लबिंग भी की। वहां का अपटाउन हॉल बहुत लोकप्रिय है। वहां की रातें बहुत मजेदार लगती हैं। लोग सोते होंगे, ऐसा लगता ही नहीं। दिन भर काम करने बाद भी पार्टी के लिए सब तैयार रहते हैं। सबसे खास बात यह है कि वहां कुछ क्लब्स में बॉलीवुड के गाने बजते हैं। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई। वहां भारतीय भी बहुत हैं, तो आपको लगता ही नहीं कि आप किसी अनजान जगह आए हैं। मेरे लिए यह बहुत खास अनुभव था। कुआलालंपुर मलेशिया में सांस्कृतिक गतिविधियों और घटनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
यहां के चमचमाते गगनचुंबी टावर्स तो देखते ही बनते हैं। वहां ब्रिकफील्ड में ‘लिटिल इंडिया’ नाम से एक पूरा क्षेत्र भारतीयों से ही भरा है। आपको यहां सब कुछ भारतीय मिलेगा। मेलशिया में मेरे लिए थोड़ा समय ही बिताना महत्वपूर्ण था। हालांकि एक किस्सा ऐसा भी है, जिसे आज भी सोचता हूं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हम अगले दिन दोस्त के जन्मदिन के लिए लंगकावी जा रहे थे। वह अपनी मंगेतर के साथ एक स्कूटी में था और मैं अलग। जैसे ही हम सड़क पर आए, शायद मॉइश्चर या पता नहीं किस वजह से सड़क स्लिपरी थी। मेरा दोस्त फिसल गया। हालांकि इतनी चोट नहीं आई, बस वह सही सलामत रहा, वही काफी था। फिर थोड़ा आराम करने के बाद उसका जन्मदिन मनाया गया। बस यह एक चीज छोड़कर बाकी सब बहुत अच्छा था। मैं वहां हर पल का आनंद उठा रहा था। फिलहाल अगले साल ‘स्ट्रॉबेरी’ नामक फिल्म में मेरे लिखे गीत 'दिल सिरफिरा' के लिए उत्सुक हूं, लेकिन जल्द ही मलेशिया जाने की योजना बनाऊंगा।
-अंकिता बंगवाल से बातचीत पर आधारित