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Teachers Day 2022: शिक्षकों से ये 5 बातें सीख सकता है बच्चा, संवर जाएगा भविष्य

Mon, 05 Sep 2022 08:27 AM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीचर सिखाते हैं संस्कार और नैतिकता भी - फोटो : Social media
बच्चे को एक अच्छे इंसान में ढालने वाला, उसे सही राह दिखाने वाला, उसे सही-गलत का भेद बताने वाला और उसे सही दिशा ज्ञान कराने वाला, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व है, शिक्षक का। चाहे स्कूल में हो या किसी विशेष क्लास में, एक अच्छा शिक्षक हमेशा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है। बचपन में और घर में यह भूमिका निभाने की कुछ जिम्मेदारी माता-पिता की भी होती है। इस तरह बच्चा स्कूल और घर दोनों ही जगहों पर अपने इन शिक्षकों से सीखता है। 

अक्सर जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तब हम यह भूल जाते हैं कि सीखने और ग्रहण करने की उनकी क्षमता बहुत तेजी से विकसित हो रही है। इस स्थिति में हम जाने-अनजाने उनके सामने कई बार ऐसी बातें बोल जाते हैं जो गलत भी हो सकती हैं और हमेशा के लिए उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनकर उनके लिए आगे भी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के सामने किसी भी टीचर का व्यवहार और आचरण ऐसा हो जिससे बच्चों को सकारात्मक विचारों की सीख मिले और वे भविष्य के अच्छे इंसानों के रूप में ढल सकें। यही आज की सबसे बड़ी जरूरत भी है। 
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अनुचित व्यवहार बच्चों पर डालता है गलत असर - फोटो : अमर उजाला
व्यवहार का ज्ञान 

आप कक्षा में या दूसरों के सामने जैसा व्यवहार करते हैं, बच्चे भी उसकी कॉपी करने की कोशिश करते हैं। यदि आपका व्यवहार अपने कलीग्स, परिचितों या सेवकों के प्रति अनुचित होगा तो बच्चे भी वैसा ही करने का प्रयास करेंगे। क्योंकि छोटे बच्चों पर यही प्रभाव रहता है कि उनके टीचर्स और पैरेंट्स हमेशा सही होते हैं। यही बात वे हमेशा के लिए ग्रहण कर लेते हैं। इसलिए चाहे आप स्कूल में हों, किसी ट्यूशन क्लास में या कहीं बाहर, आपका व्यवहार संतुलित और सौम्य हो यह जरूरी है। यदि आपका व्यवहार गलत होगा तो सबसे पहले बच्चे आपसे ही वैसा व्यवहार करेंगे। आप यदि क्लास में मेज पर पैर रखकर बैठेंगे तो बच्चे भी उसका अनुसरण कर सकते हैं।  इसी तरह यदि आप किताब या कॉपी के नीचे गिर जाने पर उसे अच्छे से उठाकर सम्मान देते हुए जगह पर रखेंगे तो बच्चे वह भी सीखेंगे। भले ही यह छोटी छोटी बातें हों लेकिन इनका बच्चे के मन और व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ता है।
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पढ़ाते समय भी सावधानी से शब्द चुनें - फोटो : social media
भाषा का ज्ञान

जब बच्चा टूटे-टूटे शब्दों को जोड़कर बोलना शुरू करता है तो उसके लिए यह एक चमत्कार की तरह होता है। यह उसे स्वयं में एक नई शक्ति का एहसास करवाता है।  उसे यह समझ में आ जाता है कि अब वह अपनी बात को सबको समझा सकता है और इसी कोशिश में वह हर उस शब्द को दोहराने और बोलने का प्रयास करता है जो बड़े बोलते हैं। तो क्लास में पढ़ाते समय या बच्चों से बात करते समय अपने शब्द चयन को लेकर बहुत सतर्क रहें। अगर आप किसी गलत शब्द का उपयोग करते हैं तो उसे तुरंत सुधारें। गलती से एक-आध बार ऐसा हो भी जाए तो बच्चों से माफ़ी मांगते हुए उन्हें समझायें कि अनजाने में आपने गलत शब्द का उपयोग कर लिया था जो नहीं करना चाहिए। इससे बच्चों को यह भी समझ में आएगा कि जब वे गलत बोलेंगे तो उन्हें दूसरों से क्षमा मांगना होगी और इस बात को दोहराने से भी बचना होगा।

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आपकी सह्रदयता और विनम्रता बच्चों को प्रेरित करती है - फोटो : अमर उजाला
विनम्रता का पाठ 

चाहे उम्र में कोई आपसे बड़ा हो या छोटा, आप कठिन से कठिन परिस्थिति में भी उसके साथ कितने विनम्र रह पाते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। चाहे वह चलती क्लास के दौरान नोटिस लेकर आने वाला कर्मचारी हो, स्कूल की बस का ड्रायवर या कंडक्टर या स्कूल की आया बाई, आपका विनम्र व्यवहार बच्चों के मन में इन सभी के लिए समान और सम्मानित व्यवहार की नींव डालेगा। वे बड़े होने के बाद भी उन सभी लोगों के लिए विनम्र व्यवहार रखेंगे जो उनके लिए या उनके आस-पास रोजमर्रा के काम करते हैं। उदाहरण के लिए यह भी विनम्र व्यवहार का ही एक हिस्सा है कि किसी दिन जरूरत पड़ने पर आप क्लास की सफाई कर डालें या बच्चों को क्लास को साफ़ रखने को प्रेरित करें।आप यदि कम बोलने वालों में से हैं तो भी रोज सबका अभिवादन करना और अभिवादन का जवाब देना भी इसी विनम्र व्यवहार का हिस्सा हो सकता है। बच्चे आपकी हर बात को नोटिस करते हैं और यह धारणा बना सकते हैं कि आपने जो तरीका अपनाया वही सही है, वैसा ही करना चाहिए। 
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संयमित व्यवहार बच्चों को प्रेरणा देता है - फोटो : pixabay
क्रोध से बचने की शिक्षा 

गुस्सा, चिढ़, तनाव जैसी स्थितियां किसी के भी साथ हो सकती हैं। हो सकता है कि किसी दिन स्कूल आने के पहले आपके साथ कुछ ऐसा घटा हो जो आपके स्वभाव में रूखापन ला दे लेकिन इसमें बच्चों की या उन लोगों की तो कोई गलती नहीं, जिन्हें इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं। ऐसे में उन सभी से संयम से व्यवहार करें। यदि आप ज्यादा बात करने की स्थिति में न हों तो बच्चों को उनके अनुभव बताने को कहें या उनसे किसी मजेदार घटना के बारे में पूछें। इससे आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी, आप क्लास को अच्छे से अटैंड भी कर पाएंगे और बच्चों पर आपके इस व्यवहार का अच्छा असर भी पड़ेगा। उन्हें यह भी समझाएं कि गुस्सा, जिद या बेवजह अपनी बात पर अड़ जाना किसी के लिए भी अच्छा नहीं है। इसकी बजाय उन्हें शांति से खुद पर कंट्रोल करने की कला आनी चाहिए। क्योंकि कई बार गुस्से और असंयम से उनका खुद का भी नुकसान हो सकता है। बच्चों को अनुशासन में रखना या उनकी गलती के लिए उन्हें टोकना या डांटना गलत नहीं है। लेकिन इस समय आपको संयम से काम लेना भी आना चाहिए। उन्हें सिखाएं कि जब गुस्सा आये तो उसे एक गिलास में डालने की कल्पना करें, उसमें शकर और नीबू भी मिलाएं और गटगट करके पी जाएँ, गुस्सा फुर्र हो जायेगा। यह ट्रिक छोटे बच्चों पर बहुत जल्दी असर करती है। 
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बच्चों को शिक्षकों से जोड़ता है संवाद - फोटो : file
गलत न सहने की आदत 

यह एक विडंबना है कि भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हम संसाधनों से तो घिर गए लेकिन आपसी संवाद से दूर होते जा रहे हैं। कई बच्चे ऐसे भी हैं जिन्हें घर में कोई बात करने लायक या समय देने लायक व्यक्ति ही नहीं मिलता। ये बच्चे टीचर को अपना समझकर उनसे अपनी बातें शेयर कर सकते हैं। इससे टीचर और बच्चों के बीच एक बहुत मजबूत और भावनात्मक बॉन्डिंग भी होती है। ऐसी ही बातों के दौरान बच्चों को सही और गलत में फर्क करने की बेसिक आदतें भी सिखाई जा सकती हैं। उदाहरण के लिए उन्हें किस तरह के लोगों से सावधान रहना चाहिए, कोई भी अजीब बात बड़ों को तुरंत बतानी चाहिए, कोई अगर उनका फायदा उठाने का प्रयास कर रहा हो तो उनको तुरंत शिकायत करनी चाहिए और गलत बात का साथ कभी भी नहीं देना चाहिए, आदि। 
 
जीवन भर साथ रहते हैं ये सबक 

एक बार बचपन में टीचर्स की सिखाई बातें आगे जाकर बच्चों को सही राह पर ले जाने में भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। यह उन्हें करियर से लेकर निजी जीवन तक में मुश्किलों का सामना करने में, उनके व्यवहार और व्यक्तित्व को अच्छा बनाने में और एक अच्छा इंसान बनने में भी मदद करती हैं। वे इसी तरह के व्यवहार की सीख फिर अपनी अगली पीढ़ी को देते जाते हैं और टीचर्स के सिखाये कुछ संस्कार हर पीढ़ी में पोषित होते रहते हैं। 
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