संयमित व्यवहार बच्चों को प्रेरणा देता है
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क्रोध से बचने की शिक्षा
गुस्सा, चिढ़, तनाव जैसी स्थितियां किसी के भी साथ हो सकती हैं। हो सकता है कि किसी दिन स्कूल आने के पहले आपके साथ कुछ ऐसा घटा हो जो आपके स्वभाव में रूखापन ला दे लेकिन इसमें बच्चों की या उन लोगों की तो कोई गलती नहीं, जिन्हें इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं। ऐसे में उन सभी से संयम से व्यवहार करें। यदि आप ज्यादा बात करने की स्थिति में न हों तो बच्चों को उनके अनुभव बताने को कहें या उनसे किसी मजेदार घटना के बारे में पूछें। इससे आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी, आप क्लास को अच्छे से अटैंड भी कर पाएंगे और बच्चों पर आपके इस व्यवहार का अच्छा असर भी पड़ेगा। उन्हें यह भी समझाएं कि गुस्सा, जिद या बेवजह अपनी बात पर अड़ जाना किसी के लिए भी अच्छा नहीं है। इसकी बजाय उन्हें शांति से खुद पर कंट्रोल करने की कला आनी चाहिए। क्योंकि कई बार गुस्से और असंयम से उनका खुद का भी नुकसान हो सकता है। बच्चों को अनुशासन में रखना या उनकी गलती के लिए उन्हें टोकना या डांटना गलत नहीं है। लेकिन इस समय आपको संयम से काम लेना भी आना चाहिए। उन्हें सिखाएं कि जब गुस्सा आये तो उसे एक गिलास में डालने की कल्पना करें, उसमें शकर और नीबू भी मिलाएं और गटगट करके पी जाएँ, गुस्सा फुर्र हो जायेगा। यह ट्रिक छोटे बच्चों पर बहुत जल्दी असर करती है।