फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Swami Vivekananda Famous Speech: शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने दिया ऐसा भाषण, तालियों से गूंज उठी धर्म संसद

Sun, 12 Jan 2025 07:47 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर शिकागो धर्म संसद में दिए उनके ऐतिहासिक भाषण सुने और खुद के भारतीय होने पर गर्व महसूस करिए।
विज्ञापन
स्वामी विवेकानंद का भाषण - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Swami Vivekananda Famous Speech in Chicago: भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्म के महानायक स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को है। स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों और कार्यों से न केवल भारत,बल्कि पूरे विश्व में भारतीय धर्म, संस्कृति की पहचान बनाई। उनका जीवन और विचार आज भी मानवता, सहिष्णुता और आत्मविश्वास के प्रेरक स्रोत हैं। स्वामी विवेकानंद के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित हुए विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था। अपने भाषण के जरिए उन्होंने भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया।

विज्ञापन


शिकागो की धर्म संसद में दिए उनके भाषण ने दर्शाया कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि सहिष्णुता और अध्यात्म की भूमि है। स्वामी विवेकानंद का भाषण इतना ओजस्वी था, कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत अमेरिका के लोगों को भाई और बहन कहकर की। स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर शिकागो धर्म संसद में दिए उनके ऐतिहासिक भाषण सुने और खुद के भारतीय होने पर गर्व महसूस करिए।

स्वामी विवेकानंद का भाषण

11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में भाषण देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत "अमेरिका के भाइयों और बहनों" से की। यह संबोधन वहां उपस्थित श्रोताओं के दिलों को छू गया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।  
विज्ञापन


National Youth Day 2025 Quotes: 12 जनवरी को है स्वामी विवेकानंद की जयंती, पढ़ें उनके अनमोल वचन    

भाषण की मुख्य बातें

अमेरिका में मेरे भाइयों और बहनों मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के सताए लोगों को शरण में रखा है।

संबोधन को आगे बढ़ाते हुए कहा

मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से भी धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है।
 

विज्ञापन

Swami Vivekananda Anmol Vichar - फोटो : अमर उजाला
स्वामी विवेकानंद आगे बोले,

"मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया और हम सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं। जिस तरह अलग-अलग जगहों से निकली नदियां, अलग रास्तों से होकर समुद्र में मिलती हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य भी अपनी इच्छा से अलग रास्ते चुनता है। ये रास्ते दिखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं लेकिन ये सभी ईश्वर तक ही जाते हैं।"



स्वामी विवेकानंद का जीवन

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ।  उनका असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। गुरु रामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन में सांसारिक मोह-माया को त्याग कर स्वामी विवेकानंद ने संन्यास ले लिया।  विवेकानंद जी ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में महान योगदान दिया गया।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें