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महिलाओं को कम वेतन क्यों? ये रही असली वजह

Thu, 01 Sep 2016 11:28 AM IST
सिमॉन मेबिन
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- फोटो : getty images
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हाल में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है जिसके मुताबिक महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को आज भी औसतन ज्यादा पैसे मिलते हैं। हालांकि कुछ लोगों को इस पर संदेह है और अगर ऐसा है, तो फिर सच क्या है?
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द इंस्टिच्यूट ऑफ फिस्कल स्टडीज(आईएफएस) का अध्ययन तो ऐसा होना का दावा करता है लेकिन इस विषय पर स्पष्ट जवाब दे पाना आसान नहीं है।

बिटेन का इक्वॉलिटी एंड ह्यूमन राइट्स कमीशन ने इस मुद्दे की तह तक जाने की कोशिश की है।

कमीशन की 'एज एंड अर्निंग्स इनइक्वलिटी' शाखा की पूर्व प्रमुख शीला वॉल्ड कहती हैं, "मूल रूप से जेंडर पे गैप का मामला बहुत विशाल है और इसमें कई छोटे-छोटे तथ्य हैं कि कोई भी एक तथ्य को उठाकर उसे अपने मुताबिक पेश कर सकता है।"
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जानिए वो 4 वजहें जिससे लगता है कि महिलाओं को कम पैसे मिलते हैं:

1. यह केवल भेदभाव का मामला नहीं है। कई बार जब लोग लिंग के आधार पर वेतन में अंतर देखते हैं तो सोचते हैं कि महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले एक ही काम के लिए कम पैसे मिल रहे हैं। लेकिन ब्रिटेन में महिलाओं को समान काम के बदले समान वेतन का कानूनी अधिकार मिला हुआ है।

वेतन में अंतर का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं होता है, क्योंकि यह केवल नौकरी देने वालों को पता होता है कि क्या वो ऐसा कर रहे हैं। अगर वो यह मानतें हैं तो इसका मतलब है कि वो यह भी मान रहे हैं कि वो कानून के खिलाफ काम कर रहे हैं।

2. आईएफएस ने लिंग के आधार पर वेतन में जो अंतर पाया है, उसके पीछे सबसे बड़ी वजह पार्ट टाइम काम है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाएं तीन गुना ज्यादा पार्ट टाइम वर्कर हैं। सात में से केवल एक मर्द ही पार्ट टाइम वर्कर है, जबकि 7 में से तीन महिलाएं पार्ट टाइम वर्कर होती हैं। यह काफी अहम है, क्योंकि पार्ट टाइम वर्क में कम पैसे मिलते हैं।

वॉल्ड बताती हैं, " फुल टाइम लेबर मार्केट में लोगों के साथ अलग और पार्ट टाइम लेबर मार्केट में अलग व्यवहार होता है।"

यह केवल कम घंटों तक काम करने के लिए कम पैसे मिलने का मामला नहीं है, बल्कि पार्ट टाइम में लोगों को हर घंटे के काम के लिए कम दर पर पैसे मिलते हैं।

असल में आप केवल महिलाकर्मियों पर गौर करें, तो पार्ट टाइमर्स को फुल टाइमर्स के मुकाबले हर घंटे के लिए 32 फीसद कम दर पर पैसे मिलते हैं।

इसलिए असल में हम जो बात कर रहे हैं, वो पार्ट टाइम काम करने से मिलने वाले पैसे का अंतर है।

इतिहासकार के प्रोफेसर एलिसन वोल्फ कहते हैं, "तुलना एक जैसे लोगों में होनी चाहिए। आप पार्ट टाइम वर्कर्स को बाहर रख कर, उन मर्दों और औरतों की तुलना करें जो फुल टाइम वर्क करते हैं।"

अगर आप ऐसा करेंगे तो जेंडर पे गैप कम हो जाएगा।

- फोटो : getty images
3. पुरुषों को महिलाओं से ज्यादा पैसे मिलने की एक वजह यह भी है कि पुरुष ज्यादा पैसे मिलने वाली नौकरियां करते हैं।

हालांकि यह बहुत घिसा पिटा लगता है कि इन्वेस्टमैंट बैंकर्स ज्यादातर मर्द होते हैं और नर्स ज्यादातर महिलाएं। लेकिन यह केवल एक घिसी पिटी बात नहीं है।

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि सीनियर मैनेजर स्तर की नौकरियों में ज्यादातर मर्द होते हैं और देखभाल या प्रबंधन के वो काम जिनमें कम पैसे मिलते हैं, उनमें महिलाएं ज्यादा होती हैं।

इसलिए अगर आप सभी को एक साथ मिलाकर देखेंगे तो लगेगा कि महिलाओं को कम पैसे मिल रहे हैं।

लेकिन महिलाएं क्यों कम पैसे वाले काम करती हैं?

वॉल्ड कहती हैं, "सबसे पहले तो यह समझना मुश्किल है कि कौन सा काम अपनी पसंद से किया जाता है और कौन सा काम जबरदस्ती किया जा रहा है। ज्यादातर लोगों का काम कई बातों से तय होता है। यह आपके देश में काम के अवसर, स्थानीय श्रम बाजार और आपके परिवार की स्थिति पर निर्भर करता है"।

वो कहती हैं, "यह नौकरी देने वालों की उस जानी मानी वजह पर भी निर्भर करता है कि उनके मन में आपकी क्या छवि हैं और जाहिर तौर पर परंपरा की भी इसमें भूमिका होती है। मतलब कि हमारा समाज महिलाओं और पुरुषों के लिए कौन सा काम बेहतर मानता है"।
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4. जैंडर पे गैप आपकी उम्र पर भी बहुत ज्यादा निर्भर करता है। अगर हम आधिकारिक आंकड़ों को देखें तो 50 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं को, उसी उम्र के पुरुषों के मुकाबले 27 फीसद कम पैसे मिलते हैं। जबकि 20 से 30 साल की उम्र की महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले महज़ 4 फीसद कम पैसे मिलते हैं।

पार्ट टाइम काम करने वालों की बात करें तो 22 से 39 साल की उम्र के बीच की महिलाओं को मिल रहे पैसे का अंतर करीब न के बराबर होता है।

वहीं आज के दौर में काम करने वाली 35 साल की महिला को शायद अपनी उम्र के पुरुष के समान ही पैसे मिल रहे हों।

इसलिए जेंडर पे गैप की बात करने पर आपको जो आंकड़ा मिलेगा वो आपके सवाल पर निर्भर करता है।
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