यदि आप परदेस में हैं, तो जाहिर सी बात है कि आपसे बातें करने वाला कोई नहीं होगा। ऐसे में खुद को अकेला समझने से अच्छा है कि आप अपने परिवार के सदस्यों या किसी करीबी दोस्त से फोन पर बात कर लें। विशेषज्ञ कहते हैं सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी बताती हैं कि ट्रैवल एंग्जाइटी एक सामान्य समस्या है, जिनमें लोगों के मन में यह ख्याल आता है कि यात्रा के दौरान कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए।
घर में कहीं चोरी न हो जाए। कहीं कोई सामान तो छूट नहीं गया? ऐसे लोग यात्रा पर नहीं जाने के बहाने ढूंढने लगते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं। साल में एक-दो बार यात्रा करना न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से फिट रहने के लिए भी जरूरी है। ऐसे में ट्रैवल एंग्जाइटी को जड़ से मिटाने की कोशिश करें। डर और चिंता में रहने से आपको अवसाद भी हो सकता है। उन कारणों को पहचानें, जिसके कारण आपको यात्रा करने से डर लगता है। रोजमर्रा की चीजों को लेकर यदि आप चिंतित रहते हैं, तो उसे दूर करने की कोशिश करें।